Yogguru pr aakrman

मीडिया से...

मानसिकता है आधिपत्य की.

योगगुरू बाबा रामदेव की लड़ाई भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के विरुद्ध नहीं है. जिन्हें भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ना हो हमसे जुड़ें.

भारत में मुसलमानों और ईसाइयों को इसलिए रोका गया है और उनके सभी अपराध माफ़ हैं कि दोनों ने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है. सोनिया वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए ईसाइयत और इस्लाम का दोहन कर रही है. जिसने भी भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ है, वह चोर, हत्यारों का पोषक और मानवता का शत्रु है. देंखे भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग), भारतीय संविधान ने आप को किसान के पशु से भी गया बीता बना किया है. इसके विपरीत वैदिक सनातन धर्म किसी को चोर व भिखारी नहीं बनाता. मानव मात्र को सम्पत्ति के अधिकार (मनुस्मृति ८:३०८) और उपासना की स्वतंत्रता (गीता ७:२१) देता है. देखें:

न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

छान्दोग्योपनिषद, पंचम प्रपाठक, एकादश खंड, पांचवां श्लोक

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?

वैदिक राज्य में चोर, भिखारी और व्यभिचारी नहीं होते थे. स्वयं मैकाले ने २ फरवरी १८३५ को इस बात की पुष्टि की है. लेकिन भारत का संविधान ही चोर है. भारतीय संविधान को चोर कहना सोनिया के रोम राज्य के विरद्ध भारतीय दंड संहिता के धारा १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध है और संसद व विधानसभाओं के विशेषाधिकार का हनन भी. जो भी इस सच्चाई को कहे या लिखेगा, उसे सोनिया दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ में जेल भेजवा देंगी. मुसलमान ईश निंदा में कत्ल करेगा. मै ४२ बार हवालात और जेल गया हूँ| और हमारे १२ अधिकारी जेलों में बंद हैं..

गरीबी, चोरी और व्यभिचार भारतीय संविधान की देन हैं.

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}.

यदि ईसाइयत और इस्लाम रहेगा तो वैदिक सनातन धर्म मिट जायेगा.

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९() के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ले कर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है?

दया के पात्र विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है.

वस्तुतः हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार से जुड़े बागियों ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है. हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है. {(बाइबलउत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. हमें ज्ञात हो गया है कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म सहित मानव जाति को मिटाने के लिए संकलित किया गया है. हमारा कथन है कि यदि आप अपनी, अपने देश व अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ ईसाइयत और इस्लाम के पोषक भारतीय संविधान कोनिजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए.

मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँहमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही. ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है.

हमसे आजादी और रामराज्य का वादा किया गया था. हम सोनिया का रोम राज्य क्यों सहन कर रहें हैं? मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से ईमाम बांग लगाते हैं और हमारे ईश्वर व वेदिक संस्कृति का अपमान करते हैं. 

२६ नवम्बर, १९४९ को भारतीय संविधान का संकलन कर हमसे हमारा देश छीन लिया गया. उसी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ सांसदों ने ली है. हम दोष किसे दें?

अपत्रि

===

 

Comments