yediyurppa bail

येद्दयुरप्पा की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित

न्यायपालिका, राज्यपाल व सोनिया ने हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल की और मेरी भूमि लूटी हुई है| क्या मैं जान सकता हूँ कि क्यों इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य जज रफात, पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम, मायावती, राज्यपाल टीवी राजेश्वर, बनवारी और सोनिया के विरुद्ध कार्यवाही नहीं हो रही है और येदियुरप्पा के विरुद्ध कार्यवाही हो रही है?

http://www.aryavrt.com/muj11w15c-jan-lokpal

भारतीय संविधान नागरिकों को लूटने के लिए संकलित किया गया है| देखें भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग). लोकसेवक की नियुक्ति ही नागरिक को लूटने के लिए की जाती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ इसलिए संकलित की गई है कि लोकसेवक जनता को लूटे लेकिन लूट का धन लोकसेवक अपने पास न रख पाए|

दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है. वर्तमान परिस्थितियों में सोनिया द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोक सेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. भारतीय संविधान ने इनकी पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक नागरिक ईसा की भेंड़ है. अगर हम जीवित रहना चाहते हैं, तो हमारे पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. 

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अनुसार लोकसेवक की नियुक्ति नागरिकों की सम्पत्ति और पूँजी लूटने के लिए हुई है| अपराधी तो सोनिया, राज्यपाल टी वी राजेश्वर, बनवारी, मुलायम और मायावती हैं, लेकिन वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है, अतएव सोनिया मुलायम और मायावती को तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ में संरक्षण दिलवा रही है और हिंदुओं का हिंदुओं से सफाया करा रही है|


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