Withdraw Sanction Hindi

Grievance No: PRSEC/E/2013/13281

 

अभियोग प्राथमिकी संख्या ४०६/२००३ व १६६/२००६ थाना नरेला, बाहरी दिल्ली| विद्वान् श्री संदीप गुप्ता एमएम, रोहिणी के न्यायालय में लंबित|

क्या महामहिम प्रणब दा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ को भारतीय संविधान पोषित खूनी और लुटेरे ईसाइयों व मुसलमानों पर लागू कर सकते हैं?

महामहिम प्रणब दादा को सादर प्रणाम!

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है शत्रु की रणनीति जानो और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है|  दादा! आप व आप के राज्यपाल बिना लड़े ही सोनिया से पराजित व दास हो कर अपने ही सर्वनाश के उपकरण बन गये हैं| आप लोग अपनी सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए नियुक्त किया गए हैं|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हत्यारी व लुटेरी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को अपनी - अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार दिया है| भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है| मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा के प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षाओं को राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानते| लेकिन भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है|

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन पूर्व संस्तुति की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति और राज्यपाल के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं-अज़ान का प्रसारण करने वाले और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले किसी इमाम के विरुद्ध अभियोग नहीं चला सकता| लेकिन भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ व १०५ के अधिकार का प्रयोग करने वाले व्यक्ति पर अभियोग चलाने के लिए संस्तुति देने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों ही विवश हैं| ईसाइयत और इस्लाम को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए ही राष्ट्रपति और राज्यपाल को क्रमशः भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेनी पड़ती है|

स्पष्टतः अंग्रेजों की कांग्रेस द्वारा संकलित भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की असाधारण सामरिक योजना ने वैदिक सनातन संस्कृति के समूल नाश में अभूतपूर्व बड़ी सफलता प्राप्त की है| जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाइत और इस्लाम के सभी मिशन और जिहाद को और वैदिक सनातन संस्कृति के विरुद्ध आक्रमण को, संरक्षणपोषण व संवर्धन देता है, वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षणपोषण व संवर्धन के शपथ लेने के बाद होती है| राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास कोई विकल्प नहीं है| या तो वे अपने ही सर्वनाश की शपथ लें, अन्यथा पद न लें| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास सुरक्षित है, वैदिक सनातन संस्कृति के रक्षार्थ किये गये किसी भी विरोध को बड़ी चतुराई से निष्क्रिय कर देती है| ईसाई और मुसलमान को तो उनके मजहब ही वीर्यहीन कर शासक के वश में कर चुके हैं, वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को शासक एन केन प्रकारेण वीर्यहीन कर वश में कर रहे हैं|

http://www.aryavrt.com/veerya-1

देश की सत्ता के शिखर पर कैथोलिक ईसाई सोनिया भी है और मुसलमान हामिद भी! दोनों के भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से रक्षित, पोषित और प्रोत्साहित हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल :३९). वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो अर्मगेद्दन के लिए ईसा इस्लाम को भी मिटा देगा|

Http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

राज्यपालों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अनुमति देकर भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ २९५ के अधीन मेरे विरुद्ध अब तक ५० अभियोग चलवाए हैं| ५ आज भी लम्बित हैं| अतएव दादा जी! अपनी खैर मनाइए-प्राकृतिक व मानवीय न्याय के लिए निज हित में मेरे उपरोक्त मात्र २ (दो) अभियोग वापस लीजिये, अजान बंद कराइए और मस्जिद पर प्रतिबंध लगाइए|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

दिनांक; रविवार, १८ अगस्त २०१३य

 

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AyodhyaP Tripathi,
Aug 20, 2013, 5:10 AM
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