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जाने.. विमुद्रीकरण के फैसले पर कौन सा देश हुआ फेल और कौन पास

पीएम मोदी के नोट बैन की घोषणा के बाद पूरे देश में अफरा-तफरी मच गई। देश के करोड़ो लोग इस फैसले के बाद इस सोच में पड़ गए की उनके पास मौजूद 500-1000 के नोट को वो अब क्या करेंगे। वैसे भारत पहला देश नहीं है जहां विमुद्रीकरण की प्रक्रिया से पूरे देश में कोहराम मचा है। हालांकि कुछ विकसित देशों को करेंसी बैन के बाद आसानी से सुधार कार्यक्रम लागू करने के बाद सफलता मिली।

इंग्लैंड को मिली सफलता

इंग्लैंड ने 1971 में अपनी करेंसी के साथ छेड़छाड़ करते हुए वहां चल रहे रोमन काल से चले आ रहे सिक्कों को हटाने के लिए पाउंड में दश्मलव पद्धति लागू की थी। इस प्रक्रिया को बैंकिंग में डेसिमलाइजेशन कहा जाता है। इसके लिए इंग्लैंड के पूरे बैंकों को चार दिन का समय दिया गया। इस दौरान इंग्लैंड के सभी बैंक बंद रहे। माना जाता है कि इंग्लैंड ने अपनी अर्थव्यवस्था से पुराने सिक्कों को सफलता से बाहर कर दिया और उसे किसी बड़े नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा।

यरोपियन यूनियन को भी मिली सफलता

साल 2002 में यूरोप के 11 यूरोपियन यूनियन देशों में नई यूरो करेंसी लागू की गई। जबकि यूरो का जन्म 1999 में हो चुका था और ये सभी देश तीन साल तक नई करेंसी को लीगल टेंडर घोषित करने के लिए तैयारी में थे। यह एक बड़ी रणनीति थी और लंबी तैयारी का नतीजा था कि 12 देशों में नई करेंसी को लान्च करने में सफल रहा।

इन देशों को मिली विफलता

सोवियत यूनियन ने जनवरी 1991 में विमुद्रीकरण की प्रक्रिया शुरू की। सोवियत यूनियन के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाचोव का मकसद था कि ब्लैकमनी बन चुके रूबल को बाहर निकालना जिसके लिहाज से 50 और 100 रूबल की करेंसी को प्रतिबंधित कर दिया गया लेकिन सुधार कार्यक्रम द्रुस्त नहीं होने की वजह से मंहगाई पर लगाम नहीं लगाया जा सका। इसके साथ ही गोर्वाचोव सरकार की पॉपुलरटी तेजी से घटी और देखते ही देखते सोवियत यूनियन का अगस्त में विघटन हो गया।

उत्तर कोरिया ने भी 2010 में विमुद्रीकरण की प्रक्रिया को लागू किया था। जिसमें तानाशाह किम जॉन्ग द्वितीय ने काला बाजारी पर लगाम लगाने के लिए देश के सभी करेंसी की वैल्यू से दो शून्य हटा दिया यानी की 1000 के नोट की वैल्यू 10 रूपये हो गई और 5000 के नोट की वैल्यू 50 रूपये हो गई। जिससे महंगाई आसमान छुने लगी। पूरे देश में गंभीर खाद्य संकट पैदा हो गया। जिसके बाद तानाशाह को इस गलती के लिए मांफी मांगनी पड़ी।

ऑस्ट्रेलिया

भारत ही नहीं इन देशों ने भी किया था विमुद्रीकरण (demonetization) 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट को बंद करके अर्थात बड़ी मुद्रा का विमुद्रीकरण (demonetization) की निति अपना कर भारत सरकार ने काले धन पर ज़ोरदार सर्जिकल स्ट्राइक की है। हलाकि विश्व मै यह पहली घटना नहीं जब की किसी देश ने विमुद्रीकरण की निति लागु की हो। यहाँ ऐसे आठ देशों कि सूची है जिनमे से कुछ इस नीति मै सफल हुए एवं कुछ को विफलता हाँथ लगी। ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलिया देश में बड़े पैमाने पर जालसाजी रोकने के लिए प्लास्टिक (plastic) के नोट जारी करने वाला प्रथम देश बना। चूँकि मात्र पेप्पर के नोटों की ज़गह प्लास्टिक के नोटों को बदला जाना था, अतः इसमे कोई मुश्किल नहीं हुई।

घाना

1982 में, घाना ने कर चोरी और खाली अतिरिक्त तरलता से निपटने के लिए 50 केडिस (Cedis) के नोट का विमुद्रीकरण कर दिया। इस के प्रभाव ये हुआ की देश के लोग काला बाजार का समर्थन करना शुरू दिया है और वे भौतिक संपत्ति जो स्पष्ट रूप से अर्थव्यवस्था कमजोर बनाती है, में निवेश शुरू कर दिया।

म्यांमार

1987 में, म्यांमार की सैना ने काले बाजार पर अंकुश लगाने के लिए लगभग 80% मूल्य की मुद्रा को अवैध घोषित क्रकर दिया था। यह निर्णय आर्थिक व्यवधान पैदा करने वाला साबित हुआ जिसका बहुत बड़े पैमाने पर विरोध हुआ जिसमे कई लोगो की जाने गई।

नाईजीरिया

1984 में मुहम्मदु बुहारी की सरकार के दौरान, नाइज़ीरिया ने नई मुद्रा शुरू की है और पुराने नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि, कर्ज में डूबे और मुद्रास्फीति से पीड़ित देश मै इस परिवर्तन का नकारात्मक प्रभाव हुआ और अर्थव्यवस्था ढह गई।

पाकिस्तान

दिसंबर 2016 से पाकिस्तान पुराने नोटों बाहर कर रहा है क्योकि उसे यह नए डिजाइन में लाना होगा। पाकिस्तान कानूनी तौर पर निविदा डेढ़ साल जारी कर चूका है, और इसलिए, नागरिकों के पास पुराने नोटों का आदान-प्रदान और नए डिजाइन नोटों पाने के लिए समय था।

जिम्बाब्वे

क्या आप विश्वास करेंगे की जिम्बाब्वे मै $ 100.000.000.000.000 के नोट थे। जी हाँ, एक एक सौ खरब डॉलर के नोट! जिम्बाब्वे की अर्थव्यवस्था उस समय उलट पुलट हो गई जब राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने एक सौ खरब डॉलर के हास्यास्पद मूल्य के नोट्स के माध्यम से मुद्रास्फीति पर प्रतिबंध लगाने के की कोशिश की। विमुद्रीकरण (demonetization) के बाद, खरब डॉलर के नोट का मूल्य $ 0.5 डॉलर तक गिरा और लोग इसे पर भी ईबे पर डाल रहे थे।

 

 

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