Viklp Matr SnatanDharm

अपने असली शत्रु को पहचानें मुसलमान

केवल वे ही संस्कृतियां जीवित बचीं, जिन्होंने भारत में शरण लिया| इसीलिए परभक्षी अब्रह्मी संस्कृतियां वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाना चाहती हैं, ताकि सबको अपना दास बना कर निर्ममता पूर्वक लूटा जा सके|

एक ओर पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है और दूसरी ओर वैदिक सनातन धर्म जो किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

अब्रह्मी संस्कृतियाँ मानवजाति की शत्रु हैं. लेकिन उनके विरुद्ध कोई नहीं बोल सकता.

ईराक के सद्दाम रहे हों या ओसामा अथवा उनका इस्लाम, ईसा उनका दोहन कर रहा है| दोनों भष्मासुर ईसाइयों ने ही तैयार किये| काम लेकर ठिकाने लगा दिया| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो जैसे इस्लाम के खलीफा मिटे, वैसे ही ईसाई इस्लाम को भी मिटा देंगे| मुसलमान और उनका इस्लाम इस लिए जीवित हैं कि वैदिक सनातन संस्कृति मिटी नहीं है|

इंडिया और पाकिस्तान सहित ५३ ईसाई व मुसलमान देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं| {भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. इंडिया को समाप्त करने के बाद भी ईसाई व मुसलमान एलिजाबेथ के दास ही रहेंगे|

इंडिया के भूभाग पाकिस्तान और बंगलादेश पर मुसलमानों ने इस्लामी राज्य तो बना लिए, लेकिन दोनों भूभागों पर शासन एलिजाबेथ का है. क्या मुसलमान एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध जिहाद करेंगे? उन्हें जीवित बचना हो तो उपनिवेश से मुक्ति हेतु आर्यावर्त सरकार से मिलें.

सत्ता के हस्तानान्तरण की पहली शर्त ही इस्लाम का दोहन है. इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकते| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान - अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है|

इसीलिए २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी का भयादोहन कर मुसलमानों को इंडिया में रखवाया गया है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर मुसलमानों का संरक्षणपोषण व संवर्धन किया जा रहा है|

क्या ईसाई व मुसलमान जानते हैं कि एलिजाबेथ उनका का दोहन कर रही है? वे तभी तक जीवित हैं जब तक वैदिक सनातन संस्कृति जीवित है|

जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति मिटी, तुर्की के खलीफा, सद्दाम के ईराक और अफगानिस्तान के भांति इस्लाम मिट जायेगा और अल्लाह कुछ नहीं कर पायेगा| लड़ाई यहीं समाप्त नहीं होगी| तब मानवजाति को मिटाने के लिए कथोलिक और प्रोटेस्टेन्ट आदि के बीच युद्ध होगा| हिम्मत हो तो वे उपनिवेश से मुक्ति हेतु आर्यावर्त सरकार का सहयोग करें|

वस्तुतः इंडिया को मिटा कर मुसलमान अपना ही अहित करेंगे| उनका हज अनुदान, मुअज्जिनों, इमामों व मौलवियों का वेतन बंद हो जायेगा| स्कूलों के उर्दू शिक्षकों का पद समाप्त हो जायेगा. मकतबों का अनुदान समाप्त हो जायेगा. उनका वक्फ बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग और मुस्लिम निजी कानून भी बेमानी हो जायेगा| उनको फिरभी एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति नहीं मिलेगी| जब मुसलमानों की कवच वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी तब ईसाई व मुसलमान भी मिटा दिए जायेंगे. न अल्लाह मिलेगा और न विशाले सनम| बेचारे मुसलमान (कुरान २:३५).

येहोवा और अल्लाह मूसा, ईसा और मुहम्मद की छलरचनायें हैं| इनका अस्तित्व नहीं है. येहोवा और अल्लाह कीं रचना मनुष्य को खतना अथवा यौनाचार की छूट द्वारा वीर्यहीन कर दास बनाने के लिए की गई है. जहाँ वैदिक सनातन संस्कृति के गुरुकुलों में निःशुल्क वीर्यरक्षा की शिक्षा दी जाती है, वहीं मैकाले के स्कूल महंगी यौनशिक्षा देते हैं और मकतब कत्ल करने और नारी बलात्कार की| जीवन, धन और सुख के मृग मरीचिका में मनुष्य विरोध नहीं करते. मनुष्य की मुक्ति का मार्ग, गुरुकुलों का पुनर्जीवन है|

जहाँ वैदिक सनातन संस्कृति के गुरुकुलों में निःशुल्क वीर्यरक्षा की शिक्षा दी जाती है, वहीं मैकाले के स्कूल महंगी यौनशिक्षा देते हैं और मकतब कत्ल करने और नारी बलात्कार की| मानवजाति के मुक्ति का मार्ग गुरुकुलों का पुनर्जीवन है|

अब्रह्मी संस्कृतियों और शासकों की मानसिकता वर्चस्व स्थापित करने की है, जिसकी पूर्ति वे मानवमात्र को वीर्यहीन कर कर रही हैं| क्योंकि दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, वीर्यहीन करना|

तीन तलाक पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन सती का महिमामंडन अपराध है. (सती प्रथा निवारण कानून, १९८७). दास बनाने के लिए अब्रह्मी संस्कृतियों के तथाकथित पैगम्बरों मूसा और मोहम्मद ने जेहोवा और अल्लाह के आड़ में मनुष्य के ईश्वरीय शक्ति पुंज वीर्य को खतना करा कर नष्ट करने का घृणित अपराध किया और उनके उत्तराधिकारी शासक और पुरोहित कर रहे हैं. ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो जेहोवा व अल्लाह की छलरचना करने वाले पैगम्बर और उनके उत्तराधिकारी शासक और पुरोहित हैं. आप विचार कीजिए पैगम्बर और उनके उत्तराधिकारी मानवमात्र की ईश्वरीय शक्ति को छीन कर दास बनाते हैं अथवा स्वर्ग देते हैं?

परब्रह्म हिंदूयहूदीईसाई और मुसलमान में भेद नहीं करता. वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| प्रत्येक व्यक्ति को परब्रह्म द्वाराउसके जन्म के साथ ही दिया गया वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्मसर्वशक्तिमानसर्वज्ञसर्व-व्याप्तवह शक्ति है जिससे सब कुछयहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वीर्य ईश्वरीय उर्जा का अनंत स्रोतस्वतंत्रतापरमानंदआरोग्यओजतेज और स्मृति का जनक हैवीर्यवान को पराजित या अधीन नहीं किया जा सकता हैमनुष्य की छोड़ियेवीर्यवान सांड़ को भी अधीन नहीं किया जा सकता और न बांधा ही जा सकता है|

जिस प्रकार मनुष्य निर्मित (कम्प्युटर computer) गणक के अंदर ही उसके प्रयोग की सारी विधि होती है, उसी प्रकार परमात्मा ने मनुष्य को शरीर के उपयोग और प्रकृति पर नियंत्रण की सारी विधि अष्टचक्रों में जन्म दे साथ दे रखी है. वीर्यरक्षा योग्य गुरु के संरक्षण में, गौ दुग्ध सेवन करने और ब्रह्मचर्य के पालन से ही हो सकती है. वीर्यरक्षा ही एकमात्र अष्टचक्रों तक पहुंचने का मार्ग है. इन दैवी शक्तियों का दुरूपयोग न हो पाए, इसीलिए परमात्मा ने इसका नियंत्रण माया के आवरण में कर दिया है. समय समय पर दैवी शक्ति का जिसने भी दुरूपयोग किया, वह नष्ट हो गया, चाहे वह सहस्रबाहु, या हिरण्यकश्यप या रावण अथवा कंस ही क्यों न रहा हो.

वीर्यरक्षा द्वारा ही मनुष्य प्रकृति, अपनी इन्द्रियों और संसार पर नियन्त्रण कर सकता है. बिना युद्ध मनुष्य को अधीन करने का सबसे सरल उपाय है, उसे वीर्यहीन करना. विश्वामित्र के प्रचंड शक्ति को नियंत्रित करने के लिए इंद्र ने एक भी सैनिक नहीं भेजा, मात्र मेनका को भेज दिया. पैगम्बरों ने तो धरती की समस्त नारियां अपने अनुयायियों को सौंप दी हैं.

यद्यपि बाइबल में खतना करने की स्पष्ट आज्ञा है(बाइबल, उत्पत्ति १७:११), तथापि इस्लाम में खतना वीर्यहीन करने की विधि है| इस्लाम में, खतना एक सुन्नाह (रिवाज) है, जिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य विचार यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त भी नहीं है. फिर भी मुसलमान गाजे बाजे के साथ स्वेच्छा से खतना कराते हैं.

यह मुसलमानों के हित में है कि वे खतना का बहिष्कार करें, अन्यथा मुसलमानों का अंत निश्चित है.


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