Vikalp

विकल्प

दंप्रसंकीधारा१९७ के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय ने अभियोग चलाने के लिए अनुमति देने के लिए ३ महीने की अधिकतम सीमा निर्धारित की है| आर्यावर्त सरकार का मामना है कि भ्रष्टाचार मिटेगा संविधानके अनुच्छेद ३९(ग) व दंप्रसं कीधारा १९७ केउन्मूलनसे| संविधान की शपथ लेनेवाले भ्रष्टाचारी हैं|

भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) की शर्त है,

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग).

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेता है, मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|

नागरिक के पास तो सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं है! आम नागरिक और यहाँ तक कि पुलिस और जज तक दंप्रसं की धारा १९७ के आगे विवश हैं.

राज्यपालों ने संविधान के अ० १५९ के अधीन नागरिकों से सम्पत्ति व पूँजी छीनने की शपथ ली है व न्यायपालिका ने संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है. लोकसेवकों को राज्य नागरिकों की सम्पत्ति व पूँजी लूटने के लिए नियुक्त करते हैं.

इंडिया में कोई लोकतंत्र नहीं है. सोनिया के मनोनीत राज्यपाल दंप्रसं की धारा १९७ से भयादोहित लोकसेवकों के माध्यम से नागरिकों को लूट रहे हैं. अभियोग उन लोकसेवकों पर चलते हैं, जो नागरिकों को लूटते नहीं अथवा लूट कर सोनिया को हिस्सा नहीं देते.

क्या मै जान सकता हूँ कि क्यों मधु कोड़ा, नरेंद्र मोदी और येदियुरप्पा को सोनिया के सरकार ने अपराधी माना है लेकिन मुलायम और मायावती को अपराधी नहीं मान रही है? क्या आप को नहीं लगता कि स्वयं भारतीय संविधान ही निकृष्टतम भ्रष्टाचारी है? और दंप्रसं की धारा १९७ सोनिया को एकाधिकार देती है कि वह जिसे चाहे उसे जेल में ठूस दे?

प्रेसिडेंट व राज्यपाल ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने के लिए विवश हैं| लोकसेवक ईसाइयत और इस्लाम का पोषण करने के लिए न्यायपालिका ईसाइयत और इस्लाम को बनाये रखने के लिए विवश हैं! (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) और (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). ऐसा है आत्मघाती भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१),

संविधानकेअनुच्छेद ३९(ग) के अनुसार नागरिक की स्थिति किसान के बैल की रह गई है| एफडीआई तो देश के हित में है, लेकिन नागरिक के पास सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देश हित में नहीं! दंप्रसं की धारा १९७ के अनुसार नागरिक की सम्पत्ति और पूँजी लूटना तब तक अपराध नहीं है, जब तक सोनिया को उसका हिस्सा मिले. अपराध वह तभी माना जा रहा है, जब सोनिया चाहती है| यह कैसा लोकतंत्र है? क्या मीडिया बताएगी? मेरा आरोप है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाले योगगुरू, अन्ना, पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी और श्री श्री रविशंकर सभी सोनिया द्वारा पोषित अथवा भयादोहित अपराधी हैं| जिन्हें लोकसेवकों के भ्रष्टाचार तो दिखाई देते हैं, लेकिन संविधानकेअनुच्छेद ३९(ग) दंप्रसंकीधारा१९७ के भ्रष्टाचार दिखाई ही नहीं देते!

चिदम्बरम सहित दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है. वर्तमान परिस्थितियों में सोनिया द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोक सेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. भारतीय संविधान ने इनकी पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक नागरिक ईसा की भेंड़ है. अगर हम जीवित रहना चाहते हैं, तो हमारे पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. 

कोंग्रेस प्रेसिडेंट राहुल की माँ सोनिया मायावती व मुलायम को दंप्रसं की धारा १९७ के अधीन संरक्षण दिला कर लूट में हिस्सा खा रही है और बेटा उप्र को स्वर्ग बनाने की बात कर रहा है| सोनिया का मनोनीत राज्यपाल बनवारी मायावती व मुलायम को दंप्रसं की धारा १९७ में दिया गया संरक्षण आज ही वापस ले लें तो दोनों जेल में सड़ जायेंगे| तीन किले तो यूं ही धरासाई हो जायेंगे| बाकी बची भाजपा, तो स्वयं अपनों से ही डरी सहमी है| मायावती वैसे भी भाजपाइयों की बहन है| फिर मायावती को जेल भेजने के लिए भाजपा आंदोलन तो कर नहीं सकती|

मनुष्य निर्मित मजहबों को अपराधों के साथ घालमेल कर और स्वयं को शैतानों जेहोवा और अल्लाह का मध्यस्थ बताने वाले धूर्त पैगम्बरों को जजों ने पूज्य बना रखा है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). सदाबहार झूठे, देश हत्यारे पाकपिता गाँधी को बाप बना रखा है. हजारों निरपराध नागरिकों की प्रतिदिन हत्याएं, लूट व नारियों का बलात्कार ईमाम, पुरोहित व शासक से धन ऐंठ कर मीडिया के इस उद्घोषणा के साथ जारी है कि ईसाइयत और इस्लाम शांति और प्रेम के मजहब हैं. कुरान गैर-मुसलमान को अपराधी मानता है और बाइबल गैर-ईसाई को. किसी को इस बात की लज्जा नहीं है कि उसका शासक व पैगम्बर खूनी, शांति का शत्रु, लुटेरा व नारियों के बलात्कार का समर्थक है. आर्थिक ठगिनी प्रतिभा और जेसुइट सोनिया उर्फ एंटोनिया माइनो सत्ता के शिखर पर बैठी हैं. हद तो यहाँ तक आ पहुंची है कि किसी को भी कुरान व बाइबल के सम्बन्ध में प्रश्न पूछने का अधिकार न इस्लाम (कुरान ५:१०१-१०२) व ईसाइयत देते हैं, न लोकतंत्र (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६) और न न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५,  प१०४). जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) यानी अजान प्रायोजित व संरक्षित है. मै आप लोगों की आत्मघाती विवशता में मानव जाति का विनाश देख रहा हूँ.

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं कीधाराओं १९६ व १९७ केसंरक्षण में|

मायावती का संरक्षण वापस कराने में मेरी मदद करें|

यह आश्चर्य है कि मुफ्ती और जज को कुरान के आदेश आपत्तिजनक नहीं लगते. ऐसा नहीं है कि जजों को उपरोक्त लेखों का ज्ञान नहीं है| मुझको आत्मघाती व हत्यारे जजों ने थाना नरेला के दो प्राथमिकियों १०/२००१ व ११०/२००१ में न्यायिक अभिरक्षा में तिहाड़ जेल भेजा था| लेकिन हर जज विवश है, यदि मुफ्ती की बात नहीं मानेगा तो दिल्ली उच्च न्यायालय के जज शमित मुखर्जी की भांति जेल चला जायेगा|

सन १९५० से कोई जज अजान और मस्जिदों के खुतबों पर प्रतिबन्ध नही लगा सका| जिन खूनी जजों ने खूनी संविधान को बनाये रखने की शपथ ली है| वे यदि वैदिक सनातन धर्म को नहीं मिटायेंगे, तो स्वयं मिट जायेंगे| अल्लाह (कुरान २:१९१) व जेहोवा (बाइबल, याशयाह १३:१६) दोनों खूनी हैं| सोनियाको वैदिकसनातनधर्म कोमिटानाहै| जज दंप्रसंकीधारा१९७ सेअसहायहैं| क्या जजखूनी ईसाकाविरोधकरेंगे? (बाइबल, लूका १९:२७)

संघ परिवार हमारे राम राज्य को अतिवादी और आतंकवादी मानता है और मुस्लिम परस्त है. संघ परिवार ने हमारे असीमानंद का खून पीकर, उनको सोनिया के जल्लादों के हाथों सौँप दिया है. अतएव मानव जाति का शत्रु है. सोनिया को ईसा का राज्य स्थापित करना है. हमसे पाकपिता गाँधी ने स्व(अपना)तन्त्रता और रामराज्य का वादा किया है. अमेरिकीभारतीय और संयुक्त राष्ट्र संघ का सार्वभौमिक मानवाधिकार का घोषणापत्र हमे उपासना की आजादी का वचन देते है. हमें आतंक के बल पर अल्लाह के उपासना की दासता/अधीनता और ईसा का रोम राज्य स्वीकार करने के लिए विवश किया जा रहा है| लेकिन हमें ईसा के रोम राज्य में रहने और अल्लाह की उपासना करने के लिए विवश नहीं किया जा सकता. मस्जिद गिराना गैर-मुसलमान का कानूनी अधिकार है. जो भी ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षक है, मानव जाति का शत्रु है.

सोनिया मुलायम को दंप्रसंकीधारा१९७ के अधीन बचा रही है और मुलायम रोम राज्य को समर्थन देने के लिए विवश हैं|

ईसाइयत और इस्लाम भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के संरक्षण में मानव मात्र को दासता के लिए विवश करते हैं. जिन पर अडवाणी का कोई जोर नहीं.

आजादी चाहिए तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग) के उन्मूलन में हमारा सहयोग कीजिए.

 

 

 

Comments