Upniveshke ViruddhYuddh Muj14W23A



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 23A, May 30-Jun 05, 2014. This issue is Upniveshke ViruddhYuddh Muj14W23A


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



उपनिवेश की जंजीरों से मुक्ति हेतु अंतरराष्ट्रीय संगठन|

उपनिवेश किसे कहते हैं?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की जनता निवास करती है। यानी उपनिवेश के निवासी एलिजाबेथ के दास हैं|

ब्रह्मचर्य और वीर्य की महिमा

प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| उसको जन्म के साथ ही प्राप्त वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। मानव यानी प्रत्येक व्यक्ति स्वयं संप्रभु है। उसका व्यक्तित्व अत्यन्त महिमावान है - इसलिए हे मानवों! आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्ति को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो, जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा।

उपनिवेश में वीर्यवान बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुल नष्ट कर दिए गए हैं| ईश्वर की खोज का स्थान विश्वास ने ले लिया है| बिना प्रमाण जज निर्णय नहीं करता| आप आतताई जेहोवा और अल्लाह पर विश्वास क्यों करते हैं?

आर्यावर्त सरकार अज़ान को अपराध और मस्जिद को अपराध स्थल घोषित करेगी|

केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने| (बाइबल, लूका १९:२७). एलिजाबेथ के साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी ईसा को अर्मगेद्दन द्वारा धरती पर केवल अपनी पूजा करानी है| चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी खूनी इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है| इनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

कौन है एलिजाबेथ?

५३ उपनिवेश देशों की मल्लिका जेसुइट एलिजाबेथ को जानने के लिए निम्नलिखित लिंक को क्लिक करें:-

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), ६० व १५९ और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं|

क्या आप की सरकार महंगे यौनशिक्षा प्रणाली को बदल कर भावी पीढ़ी को सम्प्रभु बनाने वाले ब्रह्मचर्य के निःशुल्क शिक्षाकेंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में रूचि लेगी? निर्णय आप स्वयं करें|

ईस्ट इंडिया कम्पनी मात्र संतानहीन की सम्पत्ति राजगामी किया करती थी| भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) एलिजाबेथ को सबकी सम्पत्ति राजगामी करने का पूरा अधिकार देता है| एलिजाबेथ जिसकी चाहती है, उसकी सम्पत्ति व भूमि राजस्व अभिलेखों में हेरा फेरी करा कर राजगामी करती है| धरती का हर नागरिक जेहोवा या अल्लाह का दास तो है ही|

आर्यावर्त सरकार लुप्त अनुच्छेद ३१ (संपत्ति का मौलिक अधिकार} का पुनर्जीवन और भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) का उन्मूलन चाहती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ का भी उन्मूलन चाहती है| जिस समाजवाद की आड़ में जनता को लूटा गया था, वह चीन में भी दफन हो चुका है|

यदि आप मानवमात्र की रक्षा चाहें तो आर्यावर्त सरकार को सहायता दें|

http://www.aryavrt.com/

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

२९.०५.१४य

 

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AyodhyaP Tripathi,
May 29, 2014, 7:06 AM
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