Upnivesh se Mukti

प्रस्तावना

1.      रोनाल्ड रीगन ने कहा था, “स्वतंत्रता के अस्तित्व को मिटने में एक पीढ़ी से अधिक का समय नहीं लगता| इसे हम अपने संतानों के रक्त में प्रवाहित नहीं करते| स्वतंत्रता के लिए लड़ना और इसे सुरक्षित कर भावी पीढ़ी को लड़ने के लिए देना पड़ता है|”

2.      मैं लड़ रहा हूँ| लड़ने के लिए अपनी भावी पीढ़ी को सौंप रहा हूँ| मर्जी उनकी, अब उनको अपने व अपनी भावी पीढ़ी के भविष्य के लिए लड़ना है|

3.      जब कला जवान होती है तो कलाकार बूढ़ा हो जाता है| मैं भी ८१ वर्ष का बूढ़ा हो चुका हूँ| छटपटा तो सकता हूँ, कर कुछ नहीं सकता - जो युवक कर सकते हैं - उनको यौन शिक्षा देकर अभिभावकों ने स्वेच्छा से नपुंसक बना दिया है| टीवी और मोबाइल से आगे वे सोच ही नहीं पाते|

4.      डाकुओं ने हमारे घर, धरती और नारियां लूट लीं और लन्दन के संसद में बैठ कर फैसला कर दिया कि इंडिया के तीन टुकड़े होंगे| तीनो ही विक्टोरिया के उपनिवेश होंगे| लूटने और लूट कर विक्टोरिया को हिस्सा देने का जिम्मा मुसलमानों जवाहर और जिन्ना को सौंपा गया| अब यह कार्य सोनिया के पास है| १९४७ से आज तक किसी ने उपनिवेश का विरोध नहीं किया|

5.      एक ओर वीर्यवान ब्रह्मचारी बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुल हैं और दूसरी ओर वीर्यहीन बनाने वाले मैकाले के महंगे यौनशिक्षा स्कूल और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले मकतब| मनुष्य किसे चाहेगा?

6.      मुसलमान यहूदी सहित हर व्यक्ति यह याद रखे कि उसको दास बनाया गया है| मूसा और मुहम्मद ने उसको लूट और हत्या करने वाला दैत्य बना दिया| वस्तुतः उसके मूसा और मुहम्मद नामक पैगम्बरों ने लूट और वासना का लोभ देकर उसको दास बनाने के लिए उसका खतना करा कर उसके ब्रह्म को उससे छीनने का घृणित और अक्षम्य अपराध किया है| वे तो मर गए लेकिन अपनी वरासत शासकों और पुरोहितों को सौंप गए हैं| अगर उन्होंने अब भी पैगम्बरों द्वारा गढे गए जेहोवा और अल्लाह का परित्याग नहीं किया तो मानव जाति बचेगी नहीं|

7.      एक ओर अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायी अमेरिकी स्वतंत्रता के घोषणापत्र के लेखक जेफरसन का सिद्धांत है,

8.      "हम इन सिद्धांतों को स्वयंसिद्ध मानते हैं कि सभी मनुष्य समान पैदा हुए हैं और उन्हें अपने स्रष्टा द्वारा कुछ अविच्छिन्न अधिकार मिले हैं। जीवन, स्वतंत्रता और सुख की खोज इन्हीं अधिकारों में है।

9.      और दूसरी ओर ब्रह्मचारी यानी अहम् ब्रह्मास्मियानी संप्रभु मनुष्य बनाने वाली वैदिक सनातन संस्कृति जिसके वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| मनुष्य को जन्म के साथ ही प्राप्त, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। इसका जितना अधिक संचय होगा मनुष्य उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा| वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है|

10.      अब्रह्मी संस्कृतियां जो खतनाकामुक सुखसमलैंगिक सम्बन्धसहजीवनकौटुम्बिक व्यभिचार आदि को संरक्षण देकर संप्रभु मनुष्य को वीर्यहीन कर दास बनाती हैं| आप चाहे मुसलमान हो या ईसाईअपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वरपंडितमौलवीपादरी और इस तरह के किसी व्यक्ति को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - इश्वर बनो, उठोजागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा होउसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा। यह अहम् ब्रह्मास्मि’ का अन्यतम तात्पर्य है।

11.  निर्णय ईसाई व मुसलमान सहित मानवमात्र को करना है कि वह ईश्वर बनना चाहता है अथवा शासकों व पुरोहितों का दास? किसान सांड़ को वीर्यहीन कर दास बना लेता है और (अ)ब्राह्मी संस्कृतियां खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं के प्रयोग द्वारा वीर्यहीन कर मनुष्य को दास बनाती हैं| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक, कौटुम्बिक व्यभिचार, यौनशिक्षा, सहजीवन, वेश्यावृत्ति और समलैंगिक विवाह सम्बन्ध को संरक्षण देना है| संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२). विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. अब्रह्मी संस्कृतियां वीर्यहीन कर मानवमात्र को दास बना चुकी हैं

12.  मुसलमान यहूदी सहित हर व्यक्ति यह याद रखे कि उसको दास बनाया गया है| मूसा और मुहम्मद ने उसको लूट और हत्या करने वाला दैत्य बना दिया| वस्तुतः उसके मूसा और मुहम्मद नामक पैगम्बरों ने लूट और वासना का लोभ देकर उसको दास बनाने के लिए उसका खतना करा कर उसके ब्रह्म को उससे छीनने का घृणित और अक्षम्य अपराध किया है| वे तो मर गए लेकिन अपनी वरासत शासकों और पुरोहितों को सौंप गए हैं| अगर उन्होंने अब भी पैगम्बरों द्वारा गढे गए जेहोवा और अल्लाह का परित्याग नहीं किया - तो मानव जाति बचेगी नहीं|

13.  बैल की भांति खतना करा कर मुसलमानों को शासकों (एलिजाबेथ) और पुरोहितों की दासता करने में लज्जा क्यों नहीं आती?

14.  आप को कौन सी सरकार चाहिए? वैदिक राजतन्त्र जिस में १८३५ तक मैकाले को पूरे भारत में एक भी चोर या भिखारी नहीं मिला| या एलिजाबेथ के उपनिवेश का गणतन्त्र जिसमे सभी चोर और भिखारी हैं| क्या आप ब्रह्मचर्य की शिक्षा के केंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में आर्यावर्त सरकार को सहयोग देंगे?

दासता केलिए अधिनियम

15.  इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| आप तो जानते ही हैं कि सन १९४७ से आज तक किसी ने एलिजाबेथ के उपनिवेश का विरोध नहीं किया| हमने विरोध किया, जिसके फलस्वरूप हमारे ९ अधिकारी २००८ से जेलों में बंद हैं| लेकिन हमारे विरुद्ध उपनिवेश के विरोध का अभियोग नहीं है| जानते हैं क्यों? क्यों कि एलिजाबेथ नहीं चाहती कि उसकी प्रजा सच जाने| हम पर आरोप है कि हमने समझौता एक्सप्रेस और मस्जिदों में बम विष्फोट कराए हैं! हम संसार से जानना चाहते हैं कि मस्जिदों को नष्ट करना अपराध कैसे है?

http://www.aryavrt.com/azaan-aur-snvidhan

16.  क्या आप को नहीं लगता कि हमारी ही नहीं – आप की भी विवशता है कि हमें मस्जिदों से अज़ान द्वारा अपने ईश्वर की निंदा सुननी ही पड़ेगी और मस्जिदों के खुत्बों के अनुसार अंततः हमें कत्ल कर दिया जायेगा| क्यों कि हम काफ़िर हैं|

17.  भारतीय संविधान ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है| जिसमे अक्षरशः लिखा है, “अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भाग ३ मौलिक अधिकार| भारतीय संविधान की आलोचना दंडनीय अपराध है|

18.  क्या आप बताएंगे कि विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम के लोगों को अल्पसंख्यक घोषित करने का आधार क्या है?

19.  पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है|

20.  इन खूनियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन अपनी संस्कृति को बनाये रखने का यानी मानवमात्र की हत्या का अधिकार क्यों दिया गया है? विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

 

21.  राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षणपोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है| क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है|

22.  जजों ने भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ).

23.  अब्रह्मी संस्कृतियों द्वारा अपमानित होकर भी कोई विरोध न कर सके और मुसलमानों को अविश्वासियों को कत्ल करने की और विश्व में सरियत लागू करने यानी वैदिक सनातन संस्कृति को निर्मूल करने की शिक्षा मिलती रहे यह सुनिश्चित करने के लिए इंडिया में ई०स० १८६० में भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ को लागू किया गया था| गहन अध्ययन से पता चलता है कि इन धाराओं का संकलन बलबा रोकने के लिए या किसी की धार्मिक भावना को आहत होने से रोकने के लिए नहीं, जैसा कि बनावटी तौर पर धाराओं में बताया गया है, बल्कि वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को लगातार अपमानित कराने, नारियों का बलात्कार कराने, दास बनवाने अन्यथा नरसंहार कराने के लिए किया गया है| नागरिक की भावनाओं से इन धाराओं का कोई सरोकार नहीं है| क्यों कि इन धाराओं के अंतर्गत किये गये अपराध राज्य के विरुद्ध अपराध हैं और इन धाराओं के अपराध में अभियोग चलाने का अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश में से किसी एक को दिया गया है| नागरिक क्या राष्ट्रपति, राज्यपाल, पुलिस और जज भी असहाय हैं| मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा अविश्वासियों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ उपरोक्त भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं किया गया| उपरोक्त धाराओं का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी नागरिक का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ और जेल में सन २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों ने किया है, तो उसको दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधिकार से एलिजाबेथ द्वारा कुचलवा दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये| यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय - जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है| सन १९५० में भारतीय संविधान को थोपे जाने के बाद स्थिति और भयावह हो गई है| जिनके पास वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के जान-माल की रक्षा का दायित्व है, उनको पद, प्रभुता और पेट के लोभ में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए विवश कर दिया गया है|

24.  आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों और लुटेरे लोकसेवकों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं - वह भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन| अनुच्छेदों और धाराओं को नीचे उद्धृत कर रहा हूँ:-

25.  'मैं प्रणब मुखर्जी, ईश्वर की शपथ लेता/ सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ कि मैं श्रद्धापूर्वक राष्ट्रपति पद के कर्तव्यों का निर्वहन सत्यनिष्ठा से करूंगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूंगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूंगा।'

26.  भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेता है, मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६

धारा १९६- राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – () कोई न्यायालय, - 

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय के अधीन या धारा १५३(), धारा २९५() या धारा ५०५ की उपधारा () के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; अथवा

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८(क) में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं| (सरकार का मतलब एलिजाबेथ का उपनिवेश समझें|)

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७

१९७- न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- “(१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...” (सरकार का मतलब एलिजाबेथ का उपनिवेश समझें|)

27.  संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| ईमाम मुसलमानों को काफिरों के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है| बदले में सर्वोच्च न्यायालय, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर, काफिरों के कर के पैसे से मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/ ) और ईमामों को वेतन दिलवाने के लिए विवश हैं| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६).

28.  हमने मौत के फंदे और परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्रायोजित मस्जिद और अज़ान का विरोध किया| भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के, सन १९५० से आज तक, एक भी विरोधी का किसी को ज्ञान नहीं है! जानते हैं क्यों? क्यों कि अब्रह्मी संस्कृतियों का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान या संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर अथवा साध्वी प्रज्ञा - सबके विरोध को दबा दिया गया| मैं क्यों जीवित हूँ और जेल के बाहर भी – मुझे स्वयं नहीं मालूम| यद्यपि मैं स्वयं साध्वी प्रज्ञा मामले में सहअभियुक्त हूँ|

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

29.  जिस प्रकार इस्लाम की विरोधी आसमा बिन्त मरवान को वीभत्स विधि से मुहम्मद के अनुयायियों ने उसके ५ अबोध बच्चो सहित कत्ल किया था, उसी प्रकार कैंसर से पीड़ित साध्वी प्रज्ञा को एलिजाबेथ के मातहतों ने जीवित ही मार डाला है| उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है और कर्नल पुरोहित का पैर तोड़ डाला गया है| हमारे जगतगुरु के मुहं में गोमांस ठूसा गया| शिकायत करने के बाद भी बंधुआ जज कुछ न कर पाए| हमारे ९ अन्य अब्रह्मी संस्कृति विरोधियों को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि हम वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई संस्कृतियों अब्रह्मी संस्कृतियों से बचाना चाहते हैं| साध्वी प्रज्ञा अब्रह्मी संस्कृतियों से वैदिक सनातन संस्कृति को बचाने के प्रयत्न के कारण ही जेल में हैं| राज्यपालों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अनुमति देकर भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन मेरे विरुद्ध अब तक ५० अभियोग चलवाए हैं|

30.  मैने बाबरी मस्जिद गिरवाई| इसीलिए मेरी २ अरब से अधिक मूल्य की सारी सम्पत्ति एलिजाबेथ ने लूट ली है| मैं लोकसेवक भी हूँ, लेकिन मुझे पेंशन नहीं मिलती| मैं ऋषिकेश में भिक्षा माँगता हूँ|

31.  संविधान के अनु० ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न लूट पाए, उसे सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है| इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मान सकता! (एआईआर, १९५१, एससी ४५८). जब १९९१ से ही बाजारी व्यवस्था लागू हो गई, तो अनुच्छेद ३९() को हटाने में और ३१ को पुनर्जीवित करने में क्या कठिनाई है? आर्यावर्त सरकार यह जानना चाहती है|

http://www.aryavrt.com/ahc-rg-12806y

 

32.  मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँहमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाशयदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही. ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगीजिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है.

http://www.aryavrt.com/Home/chunav-dhokha-hai

33.  चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| जो धन उद्योगपति भावी चुनाव में खर्च करेंगे, उसे गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने और उपनिवेश से मुक्ति के लिए हमें दें| याद रखें एफडीआई लागू हो गई है| यदि हमें सहयोग नहीं देंगे तो उनका सभी कुछ लुट जायेगा|

दिनांक; अप्रैल १४, २०१४ तदनुसार मेष संक्रांति| विक्रमी सम्वत २०७१.य

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी(सू० स०)


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