UPNIVESH Muj14W22Y



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 22, May 23- May 29, 2014. This issue is UPNIVESH Muj14W22Y


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



UPNIVESH Muj14W22Y

 

||श्री गणेशाय नमः||

 

उपनिवेश

 

इंडिया भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ के साथ पठित बाइबल के नियम (बाइबल, लूका १९:२७) के अनुसार उपनिवेश है और शासक सहित नागरिक एलिजाबेथ के उपनिवेश का दास और तब तक रहेगा जब तक इंडिया उपनिवेश रहेगा| यथास्थिति बनी रहे इसीलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन किया गया है| यह अनुच्छेद, जो व्यक्ति ईसा को राजा स्वीकार न करे, उसे कत्ल करने का एलिजाबेथ को असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| यह अंतिम निर्णय है| इसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| इसे बदला नहीं जा सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

 

इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकते| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान - अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है| भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी जेलों में बंद हैं|

 

अब्रह्मी संस्कृतियों द्वारा अपमानित होकर भी कोई विरोध न कर सके और मुसलमानों को मस्जिदों से अविश्वासियों के ईष्टदेवों की ईशनिंदा और कत्ल करने की और विश्व में सरियत लागू करने यानी वैदिक सनातन संस्कृति को निर्मूल करने की शिक्षा मिलती रहे यह सुनिश्चित करने के लिए इंडिया में ई०स० १८६० में भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ को लागू किया गया था| गहन अध्ययन से पता चलता है कि इन धाराओं का संकलन बलबा रोकने के लिए या किसी की धार्मिक भावना को आहत होने से रोकने के लिए नहीं, जैसा कि बनावटी तौर पर धाराओं में बताया गया है, बल्कि वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को लगातार अपमानित कराने, नारियों का बलात्कार कराने, दास बनवाने अन्यथा नरसंहार कराने के लिए किया गया है| नागरिक की भावनाओं से इन धाराओं का कोई सरोकार नहीं है| क्यों कि इन धाराओं के अंतर्गत किये गये अपराध राज्य के विरुद्ध अपराध हैं और इन धाराओं के अपराध में अभियोग चलाने का अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश में से किसी एक को दिया गया है| नागरिक क्या राष्ट्रपति, राज्यपाल, पुलिस और जज भी असहाय हैं| मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा अविश्वासियों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ उपरोक्त धाराओं के अंतर्गत अपराध ही है, जो मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं किया गयाराष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है| क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है| उपरोक्त धाराओं का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी नागरिक का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ और जेल में सन २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों ने किया है, तो उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये| यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है| सन १९५० में भारतीय संविधान को थोपे जाने के बाद स्थिति और भयावह हो गई है| जिनके पास वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के जान-माल की रक्षा का दायित्व है, उनको पद, प्रभुता और पेट के लोभ में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए विवश कर दिया गया है| ईमाम मुसलमानों को काफिरों के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है| बदले में सर्वोच्च न्यायालय, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर, काफिरों के कर के पैसे से मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/ ) और ईमामों को वेतन दिलवाने के लिए विवश है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६).

 

नागरिकों को उपरोक्त सच्चाईयां बताने के कारण साध्वी प्रज्ञा अपने अन्य ८ सहयोगियों के साथ सन २००८ से बिना किसी आरोप के बंद हैं| उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है| वे बारम्बार नार्को टेस्ट और जहरीली दवाएं खिलाये जाने के कारण अब कैंसर से पीड़ित हैं|

 

हमारा अपराध यह है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है| हम एलिजाबेथ के उपनिवेश को चुनौती देते हैं| हम जानना चाहते हैं कि मस्जिद, जहां से काफिरों के आराध्य देवों की ईशनिंदा की जाती है और जहां से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना अपराध कैसे है?

 

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

 

मैं स्वयं इस्लाम और ईसाइयत का विरोध करने के कारण ४२ बार जेल गया हूँ| मुझे भी जेल में जहर दिया गया है| ५० अभियोग चले, जिनमे से ५ आज भी लम्बित हैं| मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है|

 

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

 

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

 

 

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