Upnivesh Kyon Muj14W10By



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 10By, Feb 28-Mar 06, 2014. This issue is Upnivesh Kyon Muj14W10By


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Upnivesh Kyon Muj14W10By

उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्ध

अब्रह्मी संस्कृतियां अपने अनुयायियों सहित मानवमात्र को वीर्यहीन करके, किसान द्वारा सांड़ को दास बनाने के लिए वीर्यहीन करने की भांति, दास बना चुकी हैं|

वीर्य महिमा

पश्चिम के प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात से एक जिज्ञासु ने पूछा - मनुष्य को स्त्री प्रसंग कितनी बार करना चाहिए? जवाब में सुकरात ने कहा जीवन में एक बार। जिज्ञासु व्यक्ति ने असंतोष व्यक्त करते हुए पूछा कि इतने से संतोष न हो तो? सुकरात ने कहा - वर्ष में एक बार। इससे भी उस व्यक्ति को सन्तुष्टि नहीं हुई तो कहा - माह में एक बार। इस पर भी असन्तोष जाहिर करने पर सुकरात ने कहा - ‘‘जाओ पहले सिर पर कफन बाँध लो और अपने लिए कब्र खुदवालो फिर चाहे जो भी करो|

मनुष्य को दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, उसको वीर्यहीन करना| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक, कौटुम्बिक व्यभिचार, यौनशिक्षा, सहजीवन, वेश्यावृत्ति और समलैंगिक विवाह सम्बन्ध को संरक्षण देना है| संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२). विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. अब्रह्मी संस्कृतियां वीर्यहीन कर दास बना चुकी हैं|

इंडिया में साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. हम मानवमात्र को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों की दासता से मुक्ति दिलाने के लिए लड़ रहे हैं और उपनिवेशों के शासक अब्रह्मी संस्कृतियों को बनाये रखने के लिए विवश कर दिए गए हैं| पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| यानी उपनिवेश का हर शासक अपनी प्रजा का विनाश सुनिश्चित करने के लिए विवश हैं|

वैदिक सनातन संस्कृति प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं महिमावान व संप्रभु मानती है। इसलिए हे मानवों! आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्ति को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो, जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा। यही वेदों की शिक्षा है|

वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है|

वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| उसको जन्म के साथ ही प्राप्त, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वेद में मनुष्य को ईश्वर बनाने के लिए तप और संस्कार का विधान है| इसकी निःशुल्क शिक्षा के लिए हमारे ऋषियों ने गुरुकुल चलाये हैं| वीर्यरक्षा और ब्रह्मज्ञान की शिक्षा गुरुकुलों में ही मिलती है| वीर्य का जितना अधिक संचय होगा – मनुष्य उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा|

दास बनानेवाले भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के, १९४७ से आज तक, एक भी विरोधी का किसी को ज्ञान नहीं है! जानते हैं क्यों? क्यों कि अब्रह्मी संस्कृतियों का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान या संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर अथवा साध्वी प्रज्ञा - सबके विरोध को दबा दिया गया|

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

अमेरिका आज भी है, लेकिन लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई| हर मुसलमान व ईसाई खूनी है| एलिजाबेथ कैथोलिक ईसाई है| धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले को कत्ल करने की बाइबल की आज्ञा है| (व्यवस्था विवरण, १३:६-११) (बाइबल, लूका २४:४४) के साथ पठनीय व धर्मपरिवर्तन करने वाले को कत्ल करने की कुरान की आज्ञा है| (कुरान ४:८९). २०१४ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे| न १४३५ वर्ष पूर्व मुसलमान ही थे| बाइबल, लूका १९:२७ के ईसा के आदेश से एलिजाबेथ हमे कत्ल करेगी और कुरान २१:९८ के आदेश से हामिद अंसारी कत्ल करेगा| इनसे अपनी रक्षा का हमारे पास और कोई मार्ग नहीं है| जो हत्या के योग्य हैं, उन्हें सत्ता सौंप कर संघ सरकार जनता को क्या सन्देश दे रही है? अब्रह्मी संस्कृतियां रहीं तो डायनासोर की भांति मानवजाति मिट जायेगी| चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| बचना हो तो अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिये| यह युद्ध मात्र हम लड़ सकते हैं| चर्चों व मस्जिदों से ईसाई व मुसलमान को मजहब के आधार पर मानवजाति के नरसंहार की शिक्षा दी जाती है| अतएव चर्च व मस्जिद नष्ट करना भारतीय दंड संहिता के धारा १०२ के अधीन सबका कानूनी अधिकार है| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट के अभियुक्त हैं| हमारे ९ अधिकारी २००८ से जेलों में बंद हैं| जिन लोगों को अपना जीवन, अपनी आजादी और अपनी नारियों का और अपना सम्मान चाहिए, वे हमे सहयोग दें तो हम अब्रह्मी संस्कृतियों को नहीं रहने देंगे| ये संस्कृतियां स्वयं एक दूसरे की शत्रु हैं| ईसाई मुसलमान की हत्या करता है और मुसलमान ईसाई की|

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मूसा ने वीर्यक्ष्ररण को बाइबल में महिमामंडित किया, “और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगा, और यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.बाइबल, उत्पत्ति १७:११. अनैतिक पुत्र ईसा को जन्म देने वाली मरियम पूज्य व महान है और सती अपराधिनी व सती का महिमा मंडन दंडनीय अपराध| (सती प्रथा निवारण कानून, १९८७,)

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

खतना वीर्यहीन करने की विधि है| इस्लाम में, खतना एक सुन्नाह (रिवाज) है, जिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य विचार यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त भी नहीं है. अतः मुसलमानों को नेक सलाह है कि वे खतना का विरोध करें| अपने अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति के जनक वीर्य को नष्ट न करें| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है| वीर्यवान बन कर ही मुसलमान अपनी रक्षा कर पाएंगे| अन्यथा ईसाई मुसलमानों को नष्ट कर देंगे|

वैदिक सनातन धर्म किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

वैदिक सनातन संस्कृति आप को अपना हठधर्म अपनाने के लिए कत्ल न करेगी| इसकी शिक्षा प्रणाली में आप को सम्प्रभु व वीर्यवान बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुल शिक्षा केंद्र है और मैकाले के स्कूलों में यौनशिक्षा| निर्णय मानव करे कि वह सम्प्रभु बनना चाहता है या दास?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन +९१ ९१५२५७९०४१




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AyodhyaP Tripathi,
Mar 3, 2014, 5:33 PM
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AyodhyaP Tripathi,
Mar 3, 2014, 5:35 PM
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