SubramanianSwamy se Savdhan1

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आर्य
 बड़े भोले हैंदो हजार से अधिक वर्षों से वे ईसाइयत/इस्लाम को समझ नहीं पाए हैंउन्हें चाहिए कि वे अपनी आस्था वैदिक सनातन धर्म में व्यक्त करेंईश्वर का अपमान करने वालों को कठोर दंड देने के लिए आर्यावर्त सरकार को मात्र १७कर देंआर्थिक ठगिनी प्रतिभा सरकार को कोई कर  देंमानव मात्र को ध्यान रखना चाहिए कि धोखाधड़ी से असावधान रहना सहिष्णुता नहीं हैअसावधानी अपराधियों को बम धमाकोंलूटहत्या  नारी बलात्कार को प्रोत्साहित ही करती हैअपराध सहन करना अनुकम्पा नहीं हैसमझौतों से शांति नहीं स्थापित होने वालीसमझौतों ने विश्व का सामंन्जस्य चौपट कर रखा हैसभ्य राज्य अपराधियों से समझौते नहीं करतेमानव जाति टैक्स यानी कर अपराधियों को दंडित करने के लिए देती हैआज लगभग . अरब लोग इस्लाम के दास हैं और दो अरब से अधिक प्रेत ईसा की विवेकहीन भेंड़े हैंजिन्हें ईसा के नाम पर हत्या करने में तनिक भी हिचक नहींइस्लाम का मतलब शांति नहींबल्कि समर्पण हैअल्लाह का कुरान और ईसा का बाइबल मुसलमान और ईसाई से अन्य धर्मावलम्बियों की हत्या करने आज्ञा मानने की अपेक्षा करते हैंमुसलमान  अपना मजहब त्याग सकता है और  कुरान के विरुद्ध एक शब्द बोल ही सकता हैमुसलमान इस्लाम से पीड़ित हैं  ईसाई ईसा सेवे प्रेत ईसा की विवेकहीन भेंड़े हैंजहां इस्लाम मुसलमानों को असहिष्णुता की शिक्षा देता हैवहीं प्रेत – जारज ईसा हर उस व्यक्ति को कत्ल कराता हैजो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करतातथाकथित पैगम्बर मूसाईसा और मुहम्मद तो रहे नहींअपनी वरासत सुल्तानोंराजाओं और शासकों को दे गए हैंजो पुरोहितोंईमामों  मीडिया कर्मियों का शोषण कर रहे हैंजिसके कारण सत्य पर पर्दा पड़ा हैदूसरे की सम्पत्ति की चोरी और नारियों के यौन शोषण के लोभ ने हजारों वर्षों से मानव जाति को तबाह कर रखा है.

ईसाइयत और इस्लाम वैदिक सनातन धर्म और वैदिक राजतंत्र को स्वीकार नहीं कर सकतेअहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत  इस्लाम मिशन  जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैंवे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७और "और तुम उनसे (काफिरों सेलड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी  रहे और दीन (मजहबपूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां मेंअल्लाह के लिए हो जाये." (कुरानसूरह  अल अनफाल :३९). वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है.

प्रेसिडेंटप्रधानमंत्री और राज्यपाल सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत  उपकरण हैजब संविधान ही लुटेरा हो तो कोई भी क्या कर लेगासंविधान का अनुच्छेद ३९(व्यक्ति को सम्पत्ति का अधिकार ही नहीं देताइस अनुच्छेद को कोई भ्रष्टाचारी नहीं मानताजज  नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६  १९७ के अधीन राज्यपालों द्वारा शासित हैं.

मात्र ईसा मुक्तिदाता है और मात्र अल्लाह पूज्यइनमें साम्प्रदायिक सद्भाव कहाँ है? (अजान  कुरान १७:८१). यदि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती हैतो भारतीय संविधान की उद्देशिका में वर्णित उपासना की आजादी कहाँ हैयदि जो ईसा को राजा  माने उसे कत्ल कर दिया जाये (बाइबललूका १९:२७तो भारत में लोकतंत्र कहाँ है?

अफजल हो या कसाबसभी सोनिया के सहयोगी हैंअनुच्छेद २९().का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया हैजब तक सोनिया का रोम राज्य स्थापित नहीं हो जातासभी को मिटाया जायेगाचाहे हिंदू मरे या मुसलमान अन्ततः ईसा का शत्रु मारा जायेगा. यदि मीडिया देश और मीडिया का भला चाहे तो भारतीय संविधान को मिटाने में आर्यावर्त सरकार की मदद करे.

सोनिया और उसकी कांग्रेस अपनी औकात में रहेहमारे पूर्वजों ने आजादी के लिए बलिदान दिए हैंहम अल्लाह और ईसा की दासता स्वीकार नहीं करेंगे. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ ने हमे किसी सम्प्रदाय के हित के लिए कर देने के लिए बाध्य नहीं किया हैं.

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतंकवादीआतताईसाम्राज्यवादी  और विस्तारवादी ईसाइयत और इस्लाम को धरती पर नहीं रहने देंगेयह देश हमारा हैहमसे पाकपिता गाँधी ने रामराज्य का वादा किया हैअपनी आजादी और अपना वैदिक सनातन धर्म हमें प्रिय हैईमाम मस्जिदों से अजान देते हैंयहां पूरी अज़ान के बोल उल्लिखित कर देना उचित महसूस होता है :

  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (दो बार)अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

  अश्हदुअल्ला इलाह इल्ल्अल्लाह (दो बार)अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्यउपास्य नहीं।

  अश्हदुअन्न मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (दो बार)अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि (हज़रतमुहम्मद (सल्ल॰अल्लाह के रसूल (दूतप्रेषितसंदेष्टानबी, Prophet) हैं।

  हय्या अ़लस्-सलात (दो बार)अर्थात् ‘(लोगोआओ नमाज़ के लिए।

  हय्या अ़लल-फ़लाह (दो बार)अर्थात् ‘(लोगोआओ भलाई और सुफलता के लिए।

  अस्सलातु ख़ैरूम्-मिनन्नौम (दो बारसिर्फ़ सूर्योदय से पहले वाली नमाज़ की अज़ान में)अर्थात् नमाज़ नींद से बेहतर है।

  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (एक बार)अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

  ला-इलाह-इल्ल्अल्लाह (एक बार)अर्थात् कोई पूज्यउपास्य नहींसिवाय अल्लाह के।

अज़ान यद्यपि सामूहिक नमाज़ के लिए बुलावा’ हैफिर भी इसमें एक बड़ी हिकमत यह भी निहित है कि विशुद्ध एकेश्वरवाद’ की निरंतर याद दिहानी होती रहेइसका सार्वजनिक एलान होता रहे। हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰के ईशदूतत्व केलगातारदिन प्रतिदिनएलान के साथ यह संकल्प ताज़ा होता रहे कि कोई भी मुसलमान (और पूरा मुस्लिम समाजमनमानी जीवनशैली अपनाने के लिए आज़ाद नहीं है बल्कि हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰के आदर्श के अनुसार एक सत्यनिष्ठनेकईशपरायण जीवन बिताना उसके लिए अनिवार्य है|

और वह सत्यनिष्ठता क्या हैस्वयं हत्यारेलुटेरे पुत्रवधू से मुहम्मद का निकाह करने वालेधरती की गैर-मुसलमान नारियों का बलात्कार कराने और धरती पर आतंक मचाने वाले अल्लाह का दास बनो और गैर-मुसलमान को मुसलमान बनाओलेकिन मुसलमान गैर-मुसलमान  बनने पाए|

जैसा कि मैं ऊपर लिख चुका हूँ, आर्यावर्त सरकार की स्थापना जेल में निरुद्ध जगतगुरु स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ ने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा के लिए की है| सोनिया वैदिक सनातन धर्म ही नहींजैसा कि ऊपर दिए गए उद्धरण से स्पष्ट है, ईसाइयों  मुसलमानों को भी मिटाने की प्रतिज्ञा कर चुकी है| अब मैं नीचे प्राइवेट प्रतिरक्षा के कानूनों को उद्धृत कर रहा हूँ| जिसके आधार पर सोनिया की हत्या आप का कानूनी अधिकार है| लेकिन हिंसा का अधिकार राज्य के पास होता है| आर्यावर्त सरकार ही सोनिया को फांसी दे सकती है| निर्णय आप के हाथों में है कि आप अपनी संस्कृतिधरती, नारियां और वैदिक सनातन धर्म बचाना चाहते हैं या अपना सर्वनाश चाहते हैं, जिसके लिए सोनिया इंडिया में अपनी तानाशाही चला रही है और जिसकी गुप्त रूप से योगगुरु, अन्ना, शांति भूषण, श्री श्री रवि शंकर आदि सहायता कर रहे हैं|

यह भी याद रखिये कि उपरोक्त सत्य लिखने का किसी में साहस नहीं है|

प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के वि में

 

९६प्राइवेट प्रतिरक्षा में की गई बातें--कोई बात अपराध नहीं हैजो प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के प्रयोग में की जाती है 

९९कार्यजिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है--यदि कोई कार्यजिससे मॄत्यु या घोर उपहति की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित नहीं होतीसद््भावपूर्वक अपने पदाभास में कार्य करते हुए लोक सेवक द्वारा किया जाता है या किए जाने का प्रयत्न किया जाता है तो उस कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं हैचाहे वह कार्य विधि-अनुसार सर्वथा न्यायानुमत  भी हो 

यदि कोई कार्यजिससे मॄत्यु या घोर उपहति की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित नहीं होतीसद््भावपूर्वक अपने पदाभास में कार्य करते हुए लोक सेवक के निदेश से किया जाता हैया किए जाने का प्रयत्न किया जाता हैतो उस कार्य विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं हैचाहे वह निदेश विधि-अनुसार सर्वथा न्यायानुमत न भी हो ।

उन दशाओं मेंजिनमें संरक्षा के लिए लोक प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त करने के लिए समय हैप्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है 

इस अधिकार के प्रयोग का विस्तार--किसी दशा में भी प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार उतनी अपहानि से अधिक अपहानि करने पर नहीं हैंजितनी प्रतिरक्षा के प्रयोजन से करनी आवश्यक है 

स्पष्टीकरण --कोई व्यक्ति किसी लोक सेवा द्वारा ऐसे लोक सेवक के नाते किए गए या किए जाने के लिए प्रयतितकार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के वंचित नहीं होताजब तक कि वह यह  जानता होया विश्वास करने का कारण  रखता होकि उस कार्य को करने वाला व्यक्ति ऐसा लोक सेवक है 

स्पष्टीकरण --ोई व्यक्ति किसी लोक सेवक के निदेश से किए गएया किए जाने के लिए प्रयतितकिसी कार्य के वरिद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार से वंचित नहीं होताजब तक कि वह यह  जानता होया विश्वास करने का कारण  रखता होकि उस कार्य को करने वाला व्यक्ति ऐसे निदेश से कार्य कर रहा हैजब तक कि वह व्यक्ति उस प्राधिकार का कथन  कर देजिसके अधीन वह कार्य कर रहा हैया यदि उसके पास लिखित प्राधिकार हैतो जब तक कि वह ऐसे प्राधिकार को मांगे जाने पर पेश  कर दे 

१०२शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना--शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार उसी क्षण प्रारंभ हो जाता हैजब अपराध करने के प्रयत्न या धमकी से शरीर के संकट की युक्तियुक्त आशंका पैदा होती हैचाहे वह अपराध  किया गया होऔर वह तब तक बना रहता है जब तक शरीर के संकट की ऐसी आशंका बनी रहती है 

१०५सम्पत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना--सम्पत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार तब प्रारंभ होता हैजब सम्पत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका प्रारंभ होती है 

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकारचोरी के विरुद्ध अपराधी के संपत्ति सहित पहुंच से बाहर हो जाने तक अथवा या तो लोक प्राधिकारियों की सहायता अभिप्राप्त कर लेने या संपत्ति प्रत्युद्धॄत हो जाने तक बना रहता है 

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार लूट के विरुद्ध तब तक बना रहता हैजब तक अपराधी किसी व्यक्ति की मॄत्यु या उपहातिया सदो अवरोध कारित करता रहता या कारित करने का प्रयत्न करता रहता हैअथवा जब तक तत्काल मॄत्यु काया तत्काल उपहति काया तत्काल वैयक्तिक अवरोध काभय बना रहता है 

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार आपराधिक अतिचार या रिष्टि के विरुद्ध तब तक बना रहता हैजब तक अपराधी आपराधिक अतिचार या रिष्टि करता रहता है 

संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार रात्रौ गॄह-भेदन के विरुद्ध तब तक बना रहता हैजब तक ऐसे गॄहभेदन से आरंभ हुआ गॄह-अतिचार होता रहता है 

जब तक भारतीय संविधानकुरान और बाइबल है, मानव जाति के मृत्यु की युक्तियुक्त आशंका है| जिन्हें जीवित रहना हो, वेदिक पंथी बनें और आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें| अन्यथा मिटने के लिए तैयार रहें|

 

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