SubramanianSwami se Savdhan

http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/Sonia-takes-36000-Cr-as-bribe-2G-scam-Swamy_5_2_9353756.html

हम ३६ हजार करोड़ रूपयों के लिए रोयें या देश की सकल सम्पदा के लिए

इंडिया में गणतंत्र नहीं जेसुइट सोनिया केलिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है. हम सब सोनिया की भेंड़े हैं| हमारे पास जीने का अधिकार है और पूँजी सम्पत्ति रखने का| सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. अब नए प्रेसिडेंट भी सोनिया द्वारा मनोनीत होंगे! फिर चुनाव की नौटंकी किसलिए? यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

भिखारियों और चोरों का जनक मैकाले!

http://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=323173214391682&id=323155717726765

(२ फरवरी १८३५ को ब्रिटिश संसद में दिया लार्ड मैकाले का भाषण)-
"मैंने भारत की ओर-छोर की यात्रा की है पर मैंने एक भी आदमी ऐसा नहीं देखा जो भीख मांगता हो या चोर हो। मैंने इस मुल्क में अपार संपदा देखी है। उच्च उदात्त मूल्यों को देखा है। इन योग्यता मूल्यों वाले भारतीयों को कोई कभी जीत नहीं सकता यह मैं मानता हूं, तब तक; जब तक कि हम इस मुल्क की रीढ़ ही ना तोड़ दें, और भारत की रीढ़ है उसकी आध्यात्मिक और सांस्क्रतिक विरासत।
इसलिए मैं यह प्रस्ताव करता हूं कि भारत की पुरानी शिक्षा व्यवस्था को हम बदल दें। उसकी संस्क्रति को बदलें ताकि हर भारतीय यह सोचे कि जो भी विदेशी है, वह बेहतर है। वे यह सोचने लगें कि अंग्रेजी भाषा महान है अन्य देशी भाषाओं से। इससे वे अपना सम्मान खो बैठेंगे। अपनी देशज जातीय परंपराओं को भूलने लगेंगे और फिर वे वैसे ही हो जाएंगे जैसा हम चाहते हैं, सचमुच एक आक्रांत एवं पराजित राष्ट्र।
-लार्ड मैकाले

http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%83%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE

मैकाले की शिक्षा नीति : मातृभाषाओं पर आघात

2 फरवरी, 1835 . को मैकाले ने बहुमत के अभाव में अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर अपनी शिक्षा नीति की घोषणा की थी। इसका चारों ओर तीव्र विरोध हुआ था। फरवरी मास में ही दस हजार व्यक्तियों ने इस प्रस्ताव के विरुद्ध एक ज्ञापन भी दिया। पर भारत के तत्कालीन गर्वनर जनरल लार्ड विलियम बैंटिक ने इसे बलपूर्वक लागू कर दिया। यह घोषणा भारतीय शिक्षा के इतिहास में एक परिवर्तनकारी मोड़ थी। इस घोषणा ने केवल अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाया बल्कि इसमें धार्मिक विघटन, सांस्कृतिक ह्मास, आर्थिक शोषण तथा साम्राज्यवादी विस्तार के तत्व भी मौजूद थे। इसका उद्देश्य भारतीयों की देशभक्ति की भावना पर चोट करना तथा अपने इतिहास के प्रति आत्मविस्मृति पैदा करना था, ताकि वे अतीत के गौरव को भूल जाएं। मैकाले ने अपनी घोषणा में स्पष्ट रूप से लिखा था, "हमें व्यक्तियों का एक ऐसा वर्ग बनाना चाहिए जो रक्त तथा रंग से भारतीय हो परन्तु स्वभाव, नैतिकता एवं बुद्धि से अंग्रेज हो।" इस माध्यम से उसका भारत के ईसाईकरण का भी उद्देश्य था। मैकाले के बहनोई जी.एम. ट्रेविलियन ने उसके विचारों को व्यक्त करते लिखा, "मेरा विश्वास है कि यदि हमारी शिक्षा की यह नीति सफल हो जाती है तो 30 वर्षों के अन्दर बंगाल के उच्च घरानों में एक भी मूर्तिपूजक नहीं रहेगा।" मैकाले की इस घोषणा के पीछे सामाजिक मनमुटाव विभेद पैदा करना था। उसका उद्देश्य हिन्दू समाज-व्यवस्था को विखण्डित करना भी था।

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

वैदिक पंथी ईसाइयत के विरुद्ध हैं. देश की छाती पर सवार जेसुइट सोनिया ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

“… मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै उनकी आयु का विचार करूंगी, लिंग का, परिस्थिति का. मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|”

हम ३६ हजार करोड़ रूपयों के लिए रोयें या देश की सकल सम्पदा के लिए? मैं भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(), ३९() और १५९ को नीचे उद्धृत कर रहा हूँ|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() वैदिक सनातन धर्म का विनाशक, मूर्ती भंजक, जाति हिंसक, बलात्कारी दासता पोषक है. देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९()- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा." भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() भाग मौलिक अधिकार.

भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९() है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९() की शर्त है,

"३९()- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९().

भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेता है, मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|

अपराधी लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए नीचे उद्धृत दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ का संकलन किया गया है|

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- “() जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

नागरिक के पास तो सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं है! आम नागरिक और यहाँ तक कि पुलिस और जज तक दंप्रसं की धारा १९७ के आगे विवश हैं.

राज्यपालों ने संविधान के अ० १५९ के अधीन नागरिकों से सम्पत्ति पूँजी छीनने की शपथ ली है न्यायपालिका ने संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है. लोकसेवकों को राज्य नागरिकों की सम्पत्ति पूँजी लूटने के लिए नियुक्त करते हैं. इंडिया में कोई लोकतंत्र नहीं है. सोनिया के मनोनीत राज्यपाल दंप्रसं की धारा १९७ से भयादोहित लोकसेवकों के माध्यम से नागरिकों को लूट रहे हैं. अभियोग उन लोकसेवकों पर चलते हैं, जो वैदिक सनातन धर्म को नहीं मिटाते, नागरिकों को नहीं लूटते अथवा लूट कर सोनिया को हिस्सा नहीं देते.

क्या मै जान सकता हूँ कि क्यों मधु कोड़ा, नरेंद्र मोदी और येदियुरप्पा को सोनिया के सरकार ने अपराधी माना है लेकिन मुलायम और मायावती को अपराधी नहीं मान रही है? क्या आप को नहीं लगता स्वयं भारतीय संविधान ही निकृष्टतम भ्रष्टाचारी है? और दंप्रसं की धारा १९७ सोनिया को एकाधिकार देती है कि वह जिसे चाहे उसे जेल में ठूस दे?

प्रेसिडेंट राज्यपाल ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने के लिए विवश हैं| लोकसेवक ईसाइयत और इस्लाम का पोषण करने के लिए विवश हैं और न्यायपालिका ईसाइयत और इस्लाम को बनाये रखने के लिए विवश हैं! (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) और (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). ऐसा है आत्मघाती भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(),

संविधानकेअनुच्छेद ३९() के अनुसार नागरिक की स्थिति किसान के बैल की रह गई है| एफडीआई तो देश के हित में है, लेकिन नागरिक के पास सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देश हित में नहीं! दंप्रसं की धारा १९७ के अनुसार नागरिक की सम्पत्ति और पूँजी लूटना तब तक अपराध नहीं है, जब तक वैदिक सनातन धर्म मिटे सोनिया को उसका हिस्सा मिले. अपराध वह तभी माना जा रहा है, जब सोनिया चाहती है| यह कैसा लोकतंत्र है? क्या मीडिया बताएगी? मेरा आरोप है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाले योगगुरू, अन्ना, पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी और श्री श्री रविशंकर सभी सोनिया द्वारा पोषित अथवा भयादोहित अपराधी हैं| जिन्हें लोकसेवकों के भ्रष्टाचार तो दिखाई देते हैं, लेकिन संविधानकेअनुच्छेद ३९() दंप्रसंकीधारा१९७ के भ्रष्टाचार दिखाई ही नहीं देते!

कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन ईसाइयत और इस्लाम को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है, {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९()}, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए. भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है.

सुब्रमण्यम स्वामी केन्द्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं| वैदिक सनातन धर्म के शत्रु भारतीय संविधान में निष्ठा की शपथ ले चुके हैं| इतना ही नहीं! सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी कन्या सुहासिनी हैदर का निकाह मुसलमान से किया है और सुहासिनी वैदिक सनातन धर्म के शत्रुओं को जन्म दे रही है|

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है.

दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही आप ईसा की भेंड़ हैं.

नेताओं, सुधारकों, संतों, मीडिया, इस्लामी मौलवियों, मिशनरी और लोकसेवकों द्वारा जानबूझ कर मानवता को धोखा दिया जा रहा हैं. सच छुपा नहीं है, ही इसे जानना मुश्किल है. मानव उन्मूलन की कीमत पर आतंकित और असहाय मीडिया जानबूझकर अनभिज्ञ  बनी हुई है. मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा तब तक जिहाद और मिशन जारी रहेगा, जब तक हम उनके साधन और प्रेरणा स्रोत को नष्ट कर दें. उनके साधन पेट्रो डालर और मिशनरी फंड और प्रेरणा स्रोत कुरान (कुरान :३९) और बाइबल (बाइबल, लूका १९:२७) हैक्या अपने बचाव हेतु नवयुवक आर्यावर्त सरकार की सहायता करेंगे?

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. हमें इसी अपराध के लिए १९४७ से ही दंडित किया जा रहा है. भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है. अनुच्छेद २९().का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है.

दासता को पुष्ट करने के लिए नागरिक के सम्पत्ति को छीना जाना आवश्यक है. अतएव संविधान के अनुच्छेद २९() का संकलन कर ईसाइयत और इस्लाम को अपने लूट, हत्या, बलात्कार और धर्मान्तरण की संस्कृति को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दिया गया है. इसके अतिरिक्त राज्यपालों और प्रेसिडेंट को भारतीय संविधान के संरक्षण, संवर्धन पोषण का अनुच्छेदों १५९ ६० के अंतर्गत भार सौंपा गया है. लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ बनाई गई है. जो भी लूट का विरोध करे उसे उत्पीड़ित करने की भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत व्यवस्था की गई है. अतएव जो भी भारतीय संविधान की शपथ लेता है, आत्मघाती मानवता का शत्रु है. निर्णय करें! सोनिया के हाथों मौत चाहते हैं या सम्माननीय जीवन?

प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत उपकरण है. परभक्षी संविधान का अनुच्छेद २९() किसी को जीने का अधिकार नहीं देता और ३९() व्यक्ति को सम्पत्ति या पूँजी का अधिकार ही नहीं देता. भारतीय संविधान को कोई भ्रष्टाचारी नहीं मानता. जज नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ १९७ के अधीन, सोनिया के मनोनीत, राज्यपालों द्वारा शासित हैं. अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत इस्लाम मिशन जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरान, सूरह  अल अनफाल :३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है.

नागरिक को लूटना संविधान सम्मत है. ऐसे आतताई ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९() ३९() की भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० १५९ के अधीन शपथ लेकर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ १९७ के अधीन आतताई ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण के लिए विवश सोनिया की चाकरी करने वाली प्रतिभा और प्रदेशों के राज्यपाल वैदिक सनातन धर्म और मानव जाति के शत्रु हैं. जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९() को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है? इस संविधान को बनाये रखने की शपथ लेने वाले जज न्याय कैसे करेंगे?

अतएव भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए संविधान के अनुच्छेद ३९() दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को हटाने अनुच्छेद ३१ को पुनर्जीवित करने में हमारी सहायता करें.

जज संविधानके अ०२९()वदप्रसंकीधारा १९६+१९७ केदास हैं| जजों सहित किसीको जीनेका अधिकार नहींहै| कोईनारी सुरक्षितनहींहै|

जज न्याय करने का अधिकार उसी क्षण खो देते हैं, जिस क्षण वे भारतीय संविधान विधियों की मर्यादा बनाये रखने की शपथ लेते हैं. {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप }. क्यों कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() हर मुसलमान और ईसाई को जजों सहित जनसेवकों मानव मात्र के नारियों के बलात्कार, लूट, हत्या और वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश का असीमित मौलिक अधिकार देता है. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ १९७ के अधीन जज, जनसेवक और जनता राज्यपालों के आज्ञाकारी नौकर हैं. जजों को डूब मरना चाहिए.

ईसाइयत और इस्लाम अपराधी दास बनाने वाली संस्कृतियाँ हैं| चरित्र के लिए इनमे कोई स्थान नहीं है| ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) (कुरान २३:)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) (कुरान :, ४१ ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए. बने तो कत्ल कर दीजिए. मूर्खों और दासों के वैश्यालय मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति :१७) (कुरान :३५)}. वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९() ३९() और दंप्रसं कीधाराओं १९६ १९७ केसंरक्षण में|

केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने. (बाइबल, लूका १९:२७) और अल्लाह उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान :३९) काफ़िर को कत्ल करना दार उल हर्ब भारत को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं.

लोकसेवकों ने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ ३९(). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान :१९१ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() के साथ पठित| अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:). आप के पास बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस :३६) से विवाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार है| जहां ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार है, वहीँ आप को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है|

अर्मगेद्दन के पश्चात ईसा जेरूसलम को अपनी अंतर्राष्ट्रीय राजधानी बनाएगा| सभी मजहबों और संस्कृतियों को निषिद्ध कर देगा| केवल ईसा और उसके चित्र की पूजा हो सकेगी| बाइबल के अनुसार ईसा यहूदियों के मंदिर में ईश्वर बन कर बैठेगा और मात्र अपनी पूजा कराएगा| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति और केवल उसी की पूजा तो हो सकी, अब ईसा की बारी है| विशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

मुहम्मद के कार्टून बनाने पर ईशनिंदा के लिए मौत का  देने वाले मूर्ख मुसलमान (कुरान :३५), वैदिक सनातन धर्म का और ईश्वर का, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन सरकार द्वारा दिए गए संरक्षण में हमारे कर के वेतन से अजान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों करें? पाकपिता गाँधी और भारतीय संविधान ने हमसे उपासना की स्वतंत्रता का वादा किया गया है, ईमाम मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैं? हम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें? ईश्वर का अपमान कराने वाली सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं.

जब मानव के विश्वास को ठेस लगती है तो वह प्रतिवाद पर उतर आता है| मुसलमान और ईसाई प्रतिवाद की आड़ में जीते हैं. बाइबल के अनुसार ईसाईयत कुरान के अनुसार इस्लाम हत्यारे, लुटेरे बलात्कारी इस्लाम मुसलमान दासों का अंधकार पूर्ण स्वर्ग है| लेकिन वे ऐसा मानने को तैयार नहीं| एक बार इनको प्रकाश मिल जाये तो ये लोग दुबारा उस अंधकार के स्वर्ग में नहीं जा सकते| मीडिया, पुरोहित, ईमाम, शिक्षक और शासक यही स्थिति आने नहीं दे रहे हैं|

व्यभिचार से उत्पन्न ईसा अपने अनुयायियों को स्वयं पापी व्यभिचारी बनाता है. बाप की कुदृष्टि पुत्रवधुओं और बेटियों पर रहती है, जो माँ-बेटी, सास-बहुओं और बाप-बेटों में कलह कुंवारी माताओं के उत्पत्ति का कारण बनती है.

आर्य अपनी बेटी या पुत्रवधू से विवाह नहीं करते| जब कि हर ईसाई को सोनिया के ईसा ने अपनी बेटियों से विवाह का अधिकार दिया है. (बाइबल, , कोरिन्थिंस :३६) और अल्लाह ने पुत्रवधू से निकाह का अधिकार. (कुरान, ३३:३७-३८). मुसलमान ईसाई के पास किसी भी नारी के बलात्कार का भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() से अधिकार प्राप्त है. [(कुरान २३:) (बाइबल, याशयाह १३:१६)]. आर्य ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते| (बाइबल, लूका १९:२७). आर्य संसार को पापस्थल और सबको पापी स्वीकार नहीं करते. आर्य यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा नहीं लेते तो उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा और वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे| आर्य यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा ले लेंगे तो स्वर्ग जायेंगे और ईसा के साथ सदा रहेंगे| उनके सारे अपराध क्षमा कर दिए जायेंगे, चाहे उन्होंने कितने भी कत्ल, बलात्कार और लूट-मार किये हों! आर्य विवेक में विश्वास करते हैं, जिसे ईसाइयों से जेहोवा छीन लेता है| (बाइबल, उत्पत्ति :१७). ईसाई अकाट्य प्रमाणों के बाद भी विश्वास कर रहे हैं कि जारज प्रेत ईसा जेहोवा का इकलौता पुत्र है, जो तलवार चलवाने (बाइबल, मत्ती १०:३४) मानवता को कत्ल कराने नहीं (बाइबल, लूका १९:२७) आया, बल्कि मूर्ख (बाइबल, उत्पत्ति :१७) ईसाइयों को मुक्ति दिलाने आया है| परिवार में शत्रुता पैदा कराने नहीं, अपितु प्रेम, सदाचार, सम्मान मर्यादा स्थापित कराने आया है| (बाइबल, मत्ती १०:३५-३६) (बाइबल, लूका १२:५१-५३).

ईसाई इसी ईसा की पापी भेंड़े बनने के लिए अपने ज्ञान (बाइबल, उत्पत्ति :१७) को तिलांजलि दे, स्वेच्छा से शासकों पुरोहितों के दास बन चुके हैं| यही हाल लोकसेवकों का है| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() संविधानकाअनुच्छेद ३९(). अतएव गो-नरभक्षी सोनिया आर्यों का मांस खायेगी और लहू पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना :५३). ऐसे ईसाइयत और इस्लाम के संरक्षक भारतीय संविधान की शपथ लेने वालों को सत्ता से निकाल दिया जाना चाहिए.

मीडिया कर्मियों! सोनिया आप लोगों का मांस खायेगी और रक्त पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना :५३). आप के नारियों का आप की आँखों के सामने बलात्कार कराएगी (बाइबल, याशयाह १३:१६) और आप लोग कुछ कर पाओगे! आप लोगों के पास सोनिया को मार डालने का कानूनी अधिकार है| (भारतीय दंड संहिता की धाराएँ १०२ १०५). लेकिन हिंसा का एकाधिकार राज्य के पास होता है| इसीलिए आर्यावर्त सरकार की स्थापना की गई है| क्या आप लोग मानव जाति की रक्षा के लिए आर्यावर्त सरकार की सहायता करेंगे?

सोनिया को हर उस व्यक्ति को कत्ल करने की ईसा की आज्ञा (बाइबल, लूका १९:२७) संवैधानिक असीमित मौलिक अधिकार है, {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९()}, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता. हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. हमें इसी अपराध के लिए ई० सन १८५७ से ही दंडित किया जा रहा है. भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है. इस का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है. ईसाइयत और इस्लाम को हमारी हत्या का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() ने दिया है और जजों ने अपनी स्वीकृति दी है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा आप भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९() ३९() को नहीं बदल सकते.

मनुष्य सच्चितानंद परमपिता परमात्मा का अंश है. परमात्मा प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक और देवस्वरूप है. इसके विपरीत जेहोवा और अल्लाह मनुष्य को विवेकहीन, अपराधी और पापी बनाते हैं. (बाइबल, उत्पत्ति :१७), (कुरान :३५). इस्लाम ने ईश्वर को अपूज्य घोषित कर दिया है| (अजान). (कुरान :१९). इस्लाम के रहते वैदिक सनातन धर्म बच ही नहीं सकता. (कुरान :३९). {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९()} और न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) इनकी संरक्षक एवं पोषक है.

नागरिक को ज्ञान रखने का अधिकार नहीं. [(बाइबल, उत्पत्ति :१७) (कुरान :३५)]. जीने का अधिकार नहीं. [(बाइबल, लूका १९:२७) (कुरान :१९)]. नारी का बलात्कार या तो मुसलमान करेगा या ईसाई. [(कुरान २३:) (बाइबल, याशयाह १३:१६)]. सम्पत्ति रखने का अधिकार नहीं. [(भारतीय संविधान ३९(), (कुरान :, ४१ ६९) (बाइबल, याशयाह १३:१६)]. इसे आप स्वतंत्रता मानते हैं.इराक के सद्दाम रहे हों या ओसामा अथवा उनका इस्लाम, ईसा उनका दोहन कर रहा है. ओबामा मुसलमान भी हैं और ईसाई भी.

पाकपिता गाँधी ने हमसे राम राज्य का वादा किया था, भारतीय संविधान ने हमे उपासना की स्वतंत्रता दी है. हम सोनिया का रोम राज्य क्यों स्वीकार करें? भारतीय संविधान हमें उपासना की स्वतंत्रता और गणतन्त्र का वचन देता है, हम ईसा का रोम राज्य क्यों स्वीकार करें? हम मनुष्य के पुत्र का मांस खाने और लहू पीने (बाइबल, यूहन्ना :५३) वाली सोनिया को सत्ता में क्यों रहने दें

मै एक सनातनी ब्राह्मण हूँ. अल्लाह की पूजा नहीं करता और ईसा को अपना राजा स्वीकार करता हूँ. अतः सोनिया ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९() के अधिकार से मेरी सारी सम्पत्ति लूट ली है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन कोई जज, पुलिस या अधिकारी तब तक कोई दंड नहीं दे सकता, जब तक सोनिया इसकी अनुमति दे|

मुसलमान इतिहासकार सगर्व लिखते हैं कि मुहम्मद ने कितने शांतिप्रिय नागरिकों को कत्ल किया. कितने मंदिर तोड़े. कितनी अबला नारियों के गहने लूटे, उनके सगे-सम्बन्धियों को कत्ल किया और उसी रात उनका बलात्कार किया. लेकिन जब सर्बो ने मुसलमान नारियों का बलात्कार किया और जब लेबनान के नागरिक ठिकानों पर इजराएल ने बमबारी की तो मुसलमानों को मानवाधिकार याद गया. अफगानिस्तान और इराक पर अमेरिकी आधिपत्य से मुसलमान आतंकित हैं. लेकिन मुसलमान भूल गए हैं कि अल्लाह ने मुसलमानों को सृष्टि सौँप रखी है (कुरान :२५५) और ईसा ने ईसाइयों को हर उस व्यक्ति को कत्ल करने का अधिकार दे रखा है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता. (बाइबल, लूका १९:२७). मुसलमान विचार करें कि तब क्या होगा, जब ईसाई मुसलमानों को कत्ल कर विश्व के सभी इस्लामी राज्यों पर आधिपत्य जमा लेंगे? अकेले इजराएल से तो मुसलमान निपट नहीं पाए, सभी ईसाई राज्यों से मुसलमान कैसे निपटेंगे?

मात्र हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी ही ईसाइयत और इस्लाम को मिटा सकते हैं. सोनिया इसे जानती है, इसीलिए आतंकित है. हम आर्यावर्त सरकार और अभिनव भारत के लोग आमने सामने की लड़ाई लड़ रहे हैं. हमारे अधिकारी मक्का, मालेगांव आदि के विष्फोट में विभिन्न जेलों में बंद हैं. हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. हमें इसी अपराध के लिए १९४७ से ही दंडित किया जा रहा है. भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है. अनुच्छेद २९() का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है. जब तक सोनिया का रोम राज्य स्थापित नहीं हो जाता, सभी को मिटाया जायेगा. चाहे हिंदू मरे या मुसलमान अन्ततः ईसा का शत्रु मारा जायेगा.

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