Sonia aur Nazeeb

Sonia aur Nazeeb

कौन है इस देश की सुपर प्रधानमंत्री सोनिया गाँधी और उप राष्ट्रपति हामिद?

एक ईसाई और दूसरा मुसलमान.

सोनिया का ईसा कहता है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबललूका १९:२७)

ईसा ने दस करोड से अधिक अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल लिया और अब विश्व के सभी धर्मों को नष्ट कर केवल अपनी पूजा कराएगा!

Http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

इसके अतिरिक्त देश की छाती पर सवार जेसुइट सोनिया ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

… मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों सेफिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादीपोप के आदेश के अनुसारयुद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगीऔर इस मामले में मै  उनकी आयु का विचार करूंगी लिंग का परिस्थिति का| मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगीउन्हें बर्बाद करूंगीउबालूंगीतलूंगी और (उनकागला घोटूंगीइन दुष्ट पंथद्रोहियों को जिन्दा गाडून्गीउनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगीजिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जायेऔर जब खुले रूपसे ऐसा करना सम्भव  हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्यालेगला घोटने की रस्सीकटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगीऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति याव्यक्तियों के पदप्रतिष्ठाअधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगीपोपउसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भीजैसा भीनिर्देश होगाउसका मै पालन करूंगी|”

http://www|reformation|org/jesuit_oath_in_action|html

सोनिया, उसके बेटा, बेटी और दामाद सभी कैथोलिक ईसाई हैं| इंडिया के उन नागरिकों, जिन्होंने वोट देकर सोनिया व राहुल को संसद में भेजा है, को सोनिया और राहुल इंडिया के मुसलमानों सहित अपने मतदाताओं के आँखों के सामने मतदाताओं के घर लूट कर, उनके बच्चों को पटक कर मरवा कर और उनकी नारियों का बलात्कार करा कर धन्यवाद देंगे| (बाइबलयाशयाह १३:१६)

इंडिया के उपराष्ट्रपति हामिद का अल्लाह कहता है, "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९). (कुरानबनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८). 

३:१९ दीन तो अल्लाह की दृष्टि में केवल इस्लाम ही है| ... (कुरान ३:१९)

३:८५ जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ... (कुरान ३:८५)

मस्जिदों से ईमाम और मौलवी मुसलमानों को शिक्षा देते हैं कि गैर-मुसलमानों को कत्ल कर दोइतना ही नहींमस्जिद से इस्लामी सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तानी मौलिक धर्मतंत्रीसैयद अबुल आला मौदूदी घोषित करता है कि इस्लाम विश्व की पूरी धरती चाहता है – उसका कोई भूभाग नहींबल्कि पूरा ग्रह – इसलिए नहीं कि ग्रह पर इस्लाम की सार्वभौमिकता के लिए तमामदेशों को आक्रमण कर छीन लिया जाये बल्कि इसलिए कि मानव जाति को इस्लाम सेजो कि मानव मात्र के सुख-समृद्धि(?) का कार्यक्रम हैलाभ हो|

मौदूदी जोर दे कर कहता है कि यद्यपि गैर-मुसलमान झूठे मानव निर्मित मजहबों को मानने के लिए स्वतन्त्र हैंतथापि उनके पास अल्लाह के  धरती के किसी भाग पर अपनी मनुष्य निर्मितगलत धारणा की हुकूमत चलाने का कोई अधिकार नहींयदि वे (काफ़िरऐसा करते हैंतो मुसलमानों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे काफिरों की राजनैतिक शक्ति छीन लें और उनको(काफिरों कोइस्लामी तौर तरीके से जीने के लिए विवश करें|

मैं, अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, आर्यावर्त सरकार का सूचना सचिव हूँ और आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को इसलिए मिटाना चाहता हूँ कि ए संस्कृतियां मानव मात्र को वीर्यहीन यानी ईश्वर विहीन करके अपने अनुयायियों सहित दास बनाकर सबको उपासना की आजादी का परित्याग करने के लिए विवश करती हैं| हमारे ९ अधिकारी मक्का, मालेगांव आदि के विष्फोट में सन २००८ से बंद हैं| मनुष्य के पुत्र का मांस खाने वाली और लहू पीने वाली सोनिया (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) द्वारा हम इसलिए सताए जा रहे हैं कि:-

हम जानना चाहते हैं कि पूजा स्थल तोड़वाने वाला, (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३), लूट व दूसरे के नारी के अपहरण की शिक्षा देने वाला (बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), दुधमुहों की हत्या कराने वाला और नारियों का उनके पुरूषों के आँखों के सामने बलात्कार कराने वाला जेहोवा का एकलौता पुत्र ईसा ईश्वर कैसे है? (बाइबल, याशयाह १३:१६)

हम जानना चाहते हैं कि सबको अपने अधीन कराने वाला, (बाइबल, लूका १९:२७), मनुष्य के पुत्र का मांस खाने व लहू पीने की शिक्षा देने वाला (बाइबल, यूहन्ना ६:५३), तलवार चलवाने वाला (बाइबल, मत्ती १०:३४), धरती पर आग लगवाने वाला (बाइबल, लूका १२:४९), परिवार में शत्रुता पैदा कराने वाला {(बाइबल, मत्ती १०:३५-३६) व (बाइबल, लूका १२:५१-५३)}, बेटी से विवाह कराने वाला (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) व मनुष्य को भेंड़ बनाने वाला जारज और प्रेत ईशा ईश्वर का पुत्र कैसे है?

हम जानना चाहते हैं कि नारियों की लूट व उनके बलात्कार को निंदनीय न मानने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान ४:२४; २३:६; ३३:५० व ७०:३०). मुहम्मद की अपनी ही पुत्रवधू जैनब के साथ मुहम्मद का निकाह कराने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान, ३३:३७-३८). लुटेरा (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व हत्यारा (कुरआन ८:१७) अल्लाह ईश्वर कैसे है? मूर्ति भंजन कराने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). हत्या, लूट, बलात्कार, धर्मान्तरण और राष्ट्रांतरण की संहिता कुरान धर्मपुस्तक कैसे है?

चरित्र की नई परिभाषाएं

हमारी मान्यता है कि यदि आप का धन गया तो कुछ नहीं गया| यदि आप का स्वास्थ्य गया तो आधा चला गया| लेकिन यदि आप का चरित्र गया तो सब कुछ चला गया|

ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देते हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है। जले पर नमक छिड़कने के लिए इन्हीं पुस्तकों को ईसाई व मुसलमान धर्म पुस्तक कहते हैं। यदि ये धर्म पुस्तकें हैं तो फिर अधर्म व अपराध क्या है? यदि सम्पत्ति समाज की है तो समाज लुटेरा क्यों नहीं?

भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं है (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६) न किसी का जीवन सुरक्षित है। (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०.६.१९७९ से लुप्त व ३९ग)]. किसी का उपासना गृह सुरक्षित नहीं। [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) (अजान व कुरआन १७:८१)]. आजादी नहीं भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व {भारतीय संविधान, अनुच्छेद ६ (ब)(।।)} आस्था की आजादी नहीं। (व्यवस्था विवरण, १३:६-११) व (कुरान ४:८९)]. यहाँ तक कि मानव की आस्थाएं और उनके देवता भी अपमान की सीमा में आ गए हैं। मूसा ने बताया कि जेहोवा ज्वलनशील देवता है (बाइबल, निर्गमन २०:३)। जेहोवा के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा नहीं हो सकती। ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबल, लूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, असीमित मौलिक अधिकार है। तकिय्या व कितमान के अधीन यही गंगा-यमुनी संस्कृति कही जा रही है। इसी प्रकार प्रत्येक ईमाम भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के प्रावधानों का उल्लंधन करते हुए, अजान व नमाज द्वारा गैर मुसलमानों की आस्था का अपमान करता है, कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता है-फिर भी पुलिस व प्रशासन अजान व नमाज को बंद कराने की कोई कार्यवाही नहीं कर सकती, क्यों कि ईसाई व मुसलमान को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति, राज्यपाल व जिलाधीश आत्मघात के मूल्य पर संरक्षण देने को विवश हैं। क्यों कि राष्ट्रपति व उसके राज्यपालों ने भारतीय संविधान व कानूनों को बनाए रखने की शपथ ली है। राज्यपालों की एक विशेषता और है। यह लोग जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं होते हैं। आज कल यह लोग सुपर प्रधानमंत्री एंटोनिया माइनो उर्फ सोनिया गांधी द्वारा मनोनीत किए जा रहे हैं, जो जेसूइट है। जिसे ईसा ने भारत को अर्मगेद्दन द्वारा ईसाई राज्य बनाने का आदेश दिया हुआ है।

ऐसे समाज के पास सदाचार कहां है? जिस समाज के पास सदाचार नहीँ है वह भ्रष्टाचार कैसे मिटाएगा? अल्लाह व जेहोवा महान इसलिए हैं कि उन्होंने लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरे की मातृभूमि पर बलपूर्वक अधिकार और धर्मान्तरण और राष्ट्रन्तरण के बदले अपने अनुयायियों को जीविका, जन्नत और गाजी की उपाधि दे दिया है।

हर मुसलमान व ईसाई खूनी है| सोनिया कैथोलिक ईसाई है| धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले को कत्ल करने की बाइबल की आज्ञा है| (व्यवस्था विवरण, १३:६-११) (बाइबल, लूका २४:४४) के साथ पठनीय व धर्मपरिवर्तन करने वाले को कत्ल करने की कुरान की आज्ञा है| (कुरान ४:८९). २०१४ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे| न १४३५ वर्ष पूर्व मुसलमान ही थे| अतएव धर्मत्यागी सोनिया व हामिद को उनके ही मजहब के अनुसार कत्ल करने का हमे भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से कानूनी प्राप्त अधिकार है| क्यों कि बाइबल, लूका १९:२७ के ईसा के आदेश से सोनिया हमे कत्ल करेगी और कुरान २१:९८ के आदेश से हामिद अंसारी कत्ल करेगा| इनसे अपनी रक्षा का हमारे पास और कोई मार्ग नहीं है|

तथाकथित जनसेवकोँ (सर्वहारा तानाशाहोँ) की बुद्धि पर तरस आता है। वे लुटने के लिए लूट रहे है । इतना ही नहीँ, वे स्वेच्छा से अपनी कब्र खोद रहे है । स्वयम् सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठा अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा भी सुरक्षित नहीँ है। अपनी जीविका के लिए वे स्वेच्छा से अपनी स्वतंत्रता, अपना जीवन, अपनी नारियां और अपना धन दांव पर लगा रहे है। उन्हेँ चाहिए कि वे ईश्वर की शरण मे  आएं। मात्र ईश्वर ही उनको दासता से मुक्ति, (गीता ७:२१) सम्पत्ति का अधिकार, (मनुस्मृति ८:३०८) और नारियो को सम्मान दे सकता है।

दया के पात्र किसी जज ने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ व ३९(ग). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान २:१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:६). इसके बदले में जज के पास बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार है| जहां ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार है, वहीँ जज को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मुसलमानों व ईसाइयों' को आप की हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है, इसका विकल्प चुन कर हमे भी बताइयेगा|

दया के पात्र जज के पास कोई विकल्प भी नहीं है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ| जज के अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही जज ही नहीं, सारी मानव जाति ईसा की भेंड़ हैं||

हम स्वेच्छा से सोनिया के भेंड़ बन चुके हैं| भेंड़ शादी नहीं करते| अतएव सोनिया ने समलैंगिक मैथुन, सह जीवन और भाई बहन के विवाह को कानूनी मान्यता दिला दी है| बार बालाओं और काल बालाओं को सोनिया पूरी सुरक्षा दे रही है| आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं| यह अंतिम नहीं है| हम सोनिया के नेतृत्व में धीरे धीरे उन्नति कर रहे हैं| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”] जज शीघ्र ही कुमारी माताओं को इनाम देने का आदेश पारित करेंगे|

लोकसेवक, समाजवादी, ईसाई व मुसलमान समझें कि वे अज्ञान के स्वर्ग मेँ जी रहे हैँ. विश्वास की दुनियाँ मेँ चाहे जो भी खूबियाँ हों, वे ईश्वर प्रदत्त अपने ज्ञान का प्रयोग नहीँ कर सकते। तर्क का उपयोग व ज्ञान का फल खाना ईसाइयत व इस्लाम मेँ निषिद्ध है। (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरआन ५:१०१-१०२). तर्क व विश्वास एक दूसरे के विरोधी हैँ। जहाँ आप ने तार्किक विचार करना प्रारम्भ कर दिया, ईसाइयत व इस्लाम की बालू की दीवाल ढह जाएगी।

मानव को प्रकृति से प्राप्त संदेह ईश्वर प्रदत्त अनमोल निधि है। जिनके पास यह अनमोल निधि है, वे ही स्वतंत्र चिंतन करते हैँ। संदेह मानव को अन्वेषण की ओर आकर्षित करती है। स्वतंत्र चिंतन इसकी मौलिक आवश्यकता है। इसी के बल पर तमाम वैज्ञानिक आविष्कार हुए हैँ। इसके विरुद्ध विश्वास मानव को अज्ञानी बनाए रखता है। लेकिन ईसाइयत व इस्लाम मेँ तर्क व संदेह के लिए कोई स्थान नहीँ। संदेह व तर्क मात्र वैदिक संस्कृति मेँ स्वीकार्य है।

वर्तमान सभ्यता, ज्ञान व विज्ञान उन लोगोँ की देन है जिन्होंने संदेह किया, न कि उन लोगोँ की, जिन्होंने विश्वास किया। विश्वासी तो पैदा हुए और दासता मेँ जीवन बिता कर नर्क मेँ गए। संसार के विकास मेँ उनका कोई योगदान नहीँ। जब कि मानवता के विनाश के लिए विश्वास ही उत्तरदायी है।

समाजवादी, ईसाई व मुसलमान विचार करें। वे शासकों, मिशनरियों, पादरियों, मौलवियों व इमामों द्वारा ठगे जा रहे हैँ। मानव समाज भूल वश आज भी विश्वास को सम्मान दे रहा है और संदेह से अकारण घृणा कर रहा है। संदेह से घृणा की यह महामारी मजहब के आड़ मेँ तमाम निर्दोषों की हत्या, संस्कृतियों के विनाश, नारियों के बलात्कार व नारियों व बच्चों को दास बना कर बेचे जाने का कारण बन रही है। मानव अपने मिथ्या मूल्यों से चिपका हुआ है। विश्वास का सीधा मतलब है बिना प्रमाण के श्रद्धा। जब कि भोलापन का मतलब भी बिना प्रमाण के श्रद्धा है, जो मानव के ठगे जाने का कारण है। ऐसे विश्वास पर मानव गर्व कैसे कर सकता है?

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है – शत्रु की रणनीति जानो और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है|  ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया, जो भारत है, का हर लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित दास हो कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बन गया है| लोकसेवक अपनी सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए नियुक्त किये गए हैं| पराधीन लोकसेवक बेबस हैं|

वैदिक सनातन धर्म यानी सनातन धर्म किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित दुश्मनी के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सिपाही बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

सिंह जीवन में मात्र एक बार सम्भोग करता है, इसीलिए वन का सर्वाधिक शक्तिशाली जीव है| ईशा के ३३० वर्ष पूर्व यूनानियों की सत्ता को निर्मूल करने वाले चाणक्य ने विवाह नहीं किया था|

खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो लिखते हैं कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (अधीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है|

पूरा विवरण देखें:- http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

ईश्वर ने मनुष्य को वीर्य के रुप में सारी शक्ति दी है। जेहोवा और अल्लाह मनुष्य को दास बना कर लूटने के लिए मुखौटे हैं| इनका अस्तित्व ही नहीं है| सैतानों मूसा और मुहम्मद ने खतना को मजहब से जोड़ दिया है| किसान के सांड की भांति दास बनने के लिए यहूदी और मुसलमान गाजे बाजे के साथ स्वेच्छा से अपने ब्रह्मतेज को गवां देते हैं और जीवन भर रोगी, अशक्त और दास बन कर जीते हैं| धृतराष्ट्र के न्यायपालिका ने जुए में हारने के बाद पांडवों को निर्णय दिया था कि दास के अधिकार नहीं होते|

इतना ही नहीँ, मुसलमान स्वेच्छा से अपनी कब्र खोद रहे है। इस्लाम अपने अनुयायियों का ही शत्रु है। मुसलमानों को खतना द्वारा वीर्यहीन कर बैल की भांति दास बनाता है| इस्लाम का अल्लाह अपने अनुयायी मुसलमानों से वादे जन्नत की करता है, लेकिन १४०० से अधिक वर्षो से मुसलमानों को कब्र में सड़ा रहा है और आगे कयामत तक सड़ाएगा। मुसलमानों को पहले मुहम्मद ने मूर्ख बनाया| अब शासक और मौलवी मूर्ख बना रहे हैं| मुसलमान यह न भूलें कि ईसाई भी वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए उनका दोहन कर रहे हैं|

हर मुसलमान व यहूदी यह याद रखे कि उसको दास बनाया गया है| वस्तुतः मूसा और मुहम्मद नामक पैगम्बरों ने उसको दास बनाने के लिए उसका खतना करा कर उसके ब्रह्म को उससे छीनने का घृणित और अक्षम्य अपराध किया है| वे तो मर गए लेकिन अपनी वरासत शासकों और पुरोहितों को सौंप गए हैं| अगर उन्होंने अब भी पैगम्बरों द्वारा गढे गए जेहोवा और अल्लाह का परित्याग नहीं किया तो मानव जाति बचेगी नहीं|

यहाँ विश्वामित्र और मेनका का प्रसंग प्रासंगिक है| वीर्यवान को पराजित नहीं किया जा सकता और न अधीन ही किया जा सकता है| मनुष्य की छोड़िये, वीर्यवान सांड़ को भी अधीन नहीं किया जा सकता| इंद्र ने वीर्यवान विश्वामित्र को पराजित करने के लिए मेनका का उपयोग किया| मूसा और मुहम्मद ने तो इंद्र की भांति धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं ईसा ने बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह की छूट दी है मुहम्मद ने पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह किया| किसान को सांड़ को दास बना कर खेती के योग्य बैल बनाने के लिए सांड़ का बंध्याकरण करना पड़ता है, लेकिन लूट और यौनाचार के लोभ में यहूदी और मुसलमान धर्म की आड़ में स्वेच्छा से गाजे बाजे के साथ वीर्यहीन बनने के लिए खतना कराते हैं| ईसाइयों का ईसा स्वयं जारज(जार्ज) है और उस ने प्रत्येक ईसाई परिवार को वैश्यालय बना दिया है| कुमारी माताएं प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| इंद्र की भांति सोनिया दास बनाने के लिए व्यभिचार को राज्यपालों व जजों द्वारा संरक्षण दिला रही है|

आज सत्ता के शिखर पर उन्हीं संस्कृतियों के लोग हैं, जिन्होंने देश के टुकड़े किये और कराए| वैदिक पंथियों के पूर्वजों का नरसंहार किया, नंगा कर माँ, बहन व बेटियों का जुलूस निकाला, उनको बाजारों में बेचा और बलात्कार किया; उन्हें इंडिया में मात्र रखा ही नहीं गया है, बल्कि उन्हें वे विशेष सुविधाएँ दी गई हैं, जो स्वयं वैदिक पंथियों को प्राप्त नहीं हैं| वे आगे भी यही करेंगे| क्यों कि जाति हिंसा, लूट और बलात्कार के बदले में वे पुरष्कृत हुए व हो रहे हैं|

जहां हिंदुओं ने सभी देशों ओर मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम के लोगों को अल्पसंख्यक घोषित कर वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति और मूल निवासियों को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| अमेरिका आज भी है, लेकिन लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई| सोनिया वैदिक सनातन संस्कृति मिटाएगी, जजों और लोकसेवकों का मांस खाएगी और लहू पीयेगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३).  इंडिया तो रहेगा| लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति और भारत के मूल निवासी न रहेंगे|

मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँ, “हमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है| हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा| वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही| ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है|

ईसाइयत और इस्लाम के आगमन के साथ से ही बुद्धिजीवी और कलाकार इन (ईसाइयत और इस्लाम) के दुर्व्यवहार से पीड़ित हो रहे हैं| दरअसल, हमारे बुद्धिजीवियों का मनोविज्ञान बिल्कुल दुर्व्यवहारित पत्नी, यौन दुर्व्यवहारित बच्चे या बलात्कार की शिकार नारी के मनोविज्ञान की तरह है| इनमे सच कहने और लिखने का साहस नहीं है| ईसाइयत और इस्लाम के दुर्व्यवहार से पीड़ितों की प्रतिक्रिया और हमारे बुद्धिजीवियों के बीच समानताएं देखें| हिंसा ईसाइयत और इस्लाम के आगमन के बादसे झूठ का कारण है? क्या कवयित्री आसमा बिन्त मरवान से बेहतर प्रमाण हो सकता है? विस्तृत विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करे:-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

मनगढंत जेहोवा और अल्लाह खूनी, लुटेरे और बलात्कारी हैं| भारतीय संविधान इनका संरक्षक एवं पोषक है| राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों का क्रमशः अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने के लिए विवश हैं| जजों ने भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है| भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ व १०५ हमें हर मुसलमान और ईसाई को कत्ल करने का अधिकार देती है| इसीलिए आर्यावर्त सरकार ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय  संविधान को मिटाना चाहती है|

सोनिया कौन है?

मुसलमानों के तकिय्या, "हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं|"(?) के विभिन्नता में अज्ञानी लोग भी सुर से सुर मिला कर कहते सुने जा सकते हैं, “सभी धर्म सृष्टि रचयिता ईश्वर तक पहुँचने के अलग अलग मार्ग हैं|” लेकिन देश की सत्ता के शिखर पर कैथोलिक ईसाई सोनिया भी है और मुसलमान हामिद भी!

क्या सचमुच?

इंडिया में लोकतंत्र - नहीं सोनिया के लिए, सोनिया द्वारा चुना गया सोनियातंत्र है| सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रणब दा का मनोनयन सोनिया ने किया| प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं| क्या आप ने सोचा कि यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

राज्यपाल की विशेषता यह है कि वह जनता का चुना प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि सोनिया का मनोनीत प्रदेश का शासक होता है, जिसे सोनिया जब चाहे उसके पद से हटा सकती है| यद्यपि राज्यपाल जनता का प्रतिनिधि नहीं होता, फिर भी जनता द्वारा चुनी हुई किसी भी सरकार को हटा कर राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है| चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| यह नौटंकी नहीं तो क्या है?

दोनों के भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से रक्षित, पोषित और प्रोत्साहित हठधर्मी सिद्धांत हैं| इन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो अर्मगेद्दन के लिए ईसा इस्लाम को भी मिटा देगा|

राज्यपालों को इस बात के लिए लज्जा नहीं है कि उनके शासक सोनिया व हामिद अंसारी का मजहबी दायित्व ही स्वयं राज्यपालों की नारियों का बलात्कार, सम्पत्ति की लूट और हत्या राज्यपालों की आँखों के सामने कराना है|

देश द्रोही भारतीय संविधान को संरक्षण स्वयं मीडिया दे रही है| हम चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम धरती पर एक भी मस्जिद नहीं रहने देंगे| असीमानंद जी के इकबालिया बयान पर मीडिया के लोग शक करके क्या संदेश देना चाहते हैं? यही न कि आप को अपने ईश्वर व नारियों के अपमान की, अपने के सम्मान की, अपने वैदिक संस्कृति के विनाश की, अपने जीवन आदि की तनिक भी परवाह नहीं है| आप को ईसा की भेंड़ बनने में लज्जा नहीं|

सोनिया जनता को लोकसेवकों के माध्यम से लूट रही है| लेकिन इससे भी सम्पत्ति के संकेन्द्रण का संकट बना हुआ है| इस संकट पर नियंत्रण के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ का संकलन किया गया है| प्रेसिडेंट व राज्यपालों के माध्यम से उपरोक्त धारा १९७ का नियंत्रण सोनिया के पास है| सोनिया के लिए यह भी अपर्याप्त है| ईसा ने दस करोड से अधिक अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल लिया और अब सोनिया की अर्मगेद्दन द्वारा गैर ईसाई को मिटा कर, धरती पर केवल ईसा की पूजा कराने की योजना है|

Http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

कितने लोगों को पता है कि मुलायम ने सोनिया को प्रधानमंत्री बनने से रोका था? मुलायम का मतलब समाजवादी दल है और मायावती का मतलब बहुजन समाजवादी दल| दोनों ही सच्चरित्र व्यक्ति हैं| भारतीय संविधान ने दोनों को डाकू बनने के लिए विवश किया है| संवैधानिक विवशता के कारण दोनों ने सोनिया के दबाव में उत्तर प्रदेश को लूटा है और सोनिया को हिस्सा दिया है| दोनों को ही अपने मातहत राज्यपाल बनवारी के माध्यम से सोनिया ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण देकर अपने अधीन किया हुआ है| असली अपराधी तो सोनिया है, लेकिन सोनिया को बंदी बनाने का देश में कोई कानून नहीं है| यह शतरंज के शह और मात का खेल है| सोनिया के मनोनीत मातहत बनवारी ने मायावती और मुलायम को धमकाया कि अगर सोनिया सरकार पर आंच आई तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन दिया गया संरक्षण वापस ले लूँगा| जेल चले जाओगे| अतएव भयादोहन के कारण दोनों संकट मोचक दल सोनिया की सेवा में हाजिर हो गए हैं| लेकिन दोनों यह अच्छी तरह जान लें कि  एफडीआई लागू होने के बाद सोनिया, नेताओं मुलायम व मायावती के साथ-साथ उद्योगपतियों और व्यापारियों की सम्पत्तियां छीन लेगी| जो विरोध करेगा सोनिया, भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व एफडीआई से प्राप्त कानूनी अधिकार से, उसको उसी प्रकार जेल भेजवा देगी, जैसे आत्मरक्षा में लड़ने वाले हमारे ९ अधिकारी जेल में हैं| याद रखिये! मस्जिद, जिनको नष्ट करना हर काफ़िर का मानवाधिकार है, जहां से गैर-मुसलमान के इष्ट देवों की निंदा की जाती है और गैर-मुसलमान को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना हर नागरिक का भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत कानूनी अधिकार है| आप के इस कानून को कोई नहीं छीन सकता| लेकिन हमारे ऊपर अपराध स्थल मस्जिदों को नष्ट करने का ही आरोप है!

मनुष्य निर्मित मजहबों को अपराधों के साथ घालमेल कर और स्वयं को शैतानों जेहोवा और अल्लाह का मध्यस्थ बताने वाले धूर्त पैगम्बरों को जजों {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८} व राज्यपालों (भारतीय संविधान का अनुच्छेद १५९) ने पूज्य बना रखा है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). सदाबहार झूठे, देश हत्यारे पाकपिता गाँधी को बाप बना रखा है| हजारों निरपराध नागरिकों की प्रतिदिन हत्याएं, लूट व नारियों का बलात्कार ईमाम, पुरोहित व शासक से धन येंठ कर मीडिया के इस उद्घोषणा के साथ जारी है कि ईसाइयत और इस्लाम शांति और प्रेम के मजहब हैं| कुरान गैर-मुसलमान को अपराधी मानता है और बाइबल गैर-ईसाई को| किसी को इस बात की लज्जा नहीं है कि उसका शासक व पैगम्बर खूनी, शांति का शत्रु, लुटेरा व नारियों के बलात्कार का समर्थक है| हामिद अंसारी और जेसुइट सोनिया उर्फ एंटोनिया माइनो सत्ता के शिखर पर बैठे हैं| हद तो यहाँ तक आ पहुंची है कि किसी को भी कुरान व बाइबल के सम्बन्ध में प्रश्न पूछने का अधिकार न इस्लाम (कुरान ५:१०१-१०२) व ईसाइयत देते हैं, न लोकतंत्र (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६) और न न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५,  प१०४). जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, दंडित करने के स्थान पर, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) यानी मानवता को मिटाने के लिए अजान प्रायोजित व संरक्षित है| ईमाम के लिए आप काफ़िर हैं| इस्लाम है तो काफ़िर नहीं| हम आप के लिए लड़ रहें हैं और आप लोग अपने सर्वनाश की जड़ मस्जिदों और ईमामों को बचाने के लिए हमें प्रताडित कर रहे हैं| आप को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं| भारतीय दंड संहिता की धारायें १०२ व १०५ आप को प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार देती हैं| आप के पास हर ईसाई व मुसलमान को कत्ल करने का अधिकार है|

क्या ईसाई व मुसलमान सहित नागरिक चुनाव द्वारा संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग) को बदल सकते हैं? मुसलमानों सहित सभी नागरिक सोनिया के ईसा के शत्रु हैं| क्यों कि वे ईसा को राजा नहीं मानते| सोनिया उन को कत्ल करा देगी और उन की सारी सम्पत्ति और पूँजी उनसे छीन लेगी|

http://www.aryavrt.com/Home/chunav-dhokha-hai

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- “(१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...”


याद रखिये! करों को अंततः सर्वहारा ही देता है| लेकिन ईर्ष्यावश सर्वहारा इस पेंच को नहीं जानते| वैदिक सनातन संस्कृति उपज के छठे भाग से अधिक कर को पाप कहती है|


क्या आप को इस बात के लिए लज्जा नहीं आती कि आप सोनिया के दास हैं| आप के पास सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं है| आप द्वारा अर्जित आय का ९५% हिस्सा सोनिया और उसके मातहतों का है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ से प्राप्त आप का सम्पत्ति का मौलिक अधिकार सांसदों और जजों ने मिलकर आप से लूट लिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) ने लोकसेवकों को आप को लूटने की पूरी छूट दी हुई है| जब आप लूट कर सम्पत्ति एकत्र कर लेंगे तो सोनिया के लिए सीबीआई आप से आप की लूट कर एकत्र की हुई सम्पत्ति को लूटेगी| यदि स्वयं बचना व मानव जाति को बचाना चाहें तो अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिए|

आप के शत्रु ईसाइयत और इस्लाम आप से अधिक चतुर हैं| वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग) से प्राप्त अधिकार से वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारत पर शासन कर रहे हैं| आप के पास इस बात के लिए लज्जा नहीं है कि जिस धर्म का पूरे विश्व पर साम्राज्य था, आज उसका कहीं भी शासन नहीं!

कौन है उप राज्यपाल नजीब?

इंडियन ब्रिटिश उपनिवेश के उप राज्यपाल नजीब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के प्रथम नागरिक हैं| सोनिया ने इनका मनोनयन काफिरों का नरसंहार करने के लिए किया है|

http://dialogue.hubpages.com/hub/The-Indian-Independence-Act-of-1947

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) नजीब को अपनी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| नजीब के पूर्ववर्ती उप राज्यपाल खन्ना सुभाष पार्क में मस्जिदे अकबराबादी बनवाने में विफल रहे| नजीब सोनिया का सहयोग करेंगे|

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ले कर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है?

जनता को लूटना जजों और लोकसेवकों का संवैधानिक कर्तव्य है| जज तारीख पर १० रूपये भेंट लेते हैं, इलाहाबाद उच्च न्यायलय का रजिस्ट्रार तारीख देने के लिए १००० रूपये वसूलता है, चौराहे पर ट्राफिक पुलिस वसूली करता है, जज व लोकसेवक जनता को लूटने के लिए लोकसेवकों को सहयोग देते हैं, ऐसे कार्यों को, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाता जब तक लोकसेवक लूट में सोनिया व उसके मातहतों को हिस्सा देते हैं, उनको दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन सोनिया अपने द्वारा मनोनीत राज्यपालों से संरक्षण दिलवाती है| हिस्सा न मिले तो सोनिया संरक्षण वापस करवा लेती है| अतएव भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहें तो संविधान के उपरोक्त अनुच्छेद ३९(ग) को संविधान से हटाने, अनुच्छेद ३१ को पुनर्जीवित करने और धारा १९७ को भी हटाने में हमारी मदद करें|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) भी है और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ भी| लेकिन दोनों ही अधूरे हैं| अभी भी अम्बानी, बजाज, बिरला, जैसे तमाम हिन्दुओं के पास सम्पत्ति और पूँजी है| लूटने के लिए आज भी सोनिया मुलायमों, उद्योगपतियों और व्यापारियों पर आश्रित है| जिन ग़रीबों की आड़ में सोनिया नागरिकों को लूटती है, उन गरीबों को उद्योगपति और व्यापारी विवश होकर लूट रहे हैं| फिर भी वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने में सोनिया को कठिनाई हो रही है|

स्वतंत्रता

जब तक वैदिक सनातन धर्म का राज्य रहा-भारत सोने की चिड़िया रहा| जब से ईसा के चेलों का साम्राज्य विस्तारवादी राज्य आया आज तक दुनियां की दासता नहीं मिटी| कारण नागरिक के सम्पत्ति के अधिकार (मनुस्मृति ८:३०८) और उपासना की स्वतंत्रता (गीता ७:२१) का छिनना है|

आप को ईश्वर ने ज्ञान दिया है| (गायत्री मंत्र). जब कि ज्ञान का फल खा लेने के कारण जेहोवा (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व अल्लाह (कुरान २:३५) दोनों ने आदम को स्वर्ग से भगा दिया| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हमें अपराधी घोषित कर रखा है|

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकता? ईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उसका खतना करा कर दास बनाता है? ईश्वर को, जो उस को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उस के उपासना की स्वतंत्रता छीनता है?

अमेरिकी, संयुक्त राष्ट्र और भारतीय संविधान ने आप को उपासना की स्वतंत्रता दी है| ईमाम मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं| इस्लाम का शाब्दिक अर्थ समर्पण है| जहां हम वैदिक पंथी आजादी के लिए लड़ते हैं, वहीं मुसलमान धरती पर मानव मात्र की दासता के स्थापना के लिए निरीहों की जान लेते हैं| स्वयं अल्लाह के दास हैं| आप को दास बनाने के लिए ललकारते हैं| अपने इष्ट देवता व संस्कृति का अपमान सहन करते आप को लज्जा क्यों नहीं आती?


अपनी खैर मनाये मीडिया! आप से स्वतंत्रता और रामराज्य का वादा किया गया था| आप को सोनिया के रोम राज्य में रह कर चाकरी करते लज्जा क्यों नहीं आती? भारतीय संविधान ने आप को उपासना की स्वतंत्रता दी है| ईमाम मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं|


ईमाम आप को गाली देता है| स्वयं दास है और आप की स्वतंत्रता छीनता है| क्या आप को नहीं मालूम कि संविधान ने आप को स्वतंत्रता का वचन दिया है? ईमामों को दंडित करने के स्थान पर सोनिया ईमामों को वेतन दिलवा रही है| वह भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से! (एआईआर, एस सी १९९३, २०८६). जज शीघ्र ही कुमारी माताओं को इनाम देने का आदेश पारित करेंगे| संयुक्त राष्ट्र संघ इसका कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. 


जजों ने मानवता के हत्यारों जेहोवा व अल्लाह को ईश्वर घोषित कर रखा है| कुरान व बाइबल को धर्मपुस्तक घोषित कर रखा है| ईमाम के लिए आप काफ़िर हैं| इस्लाम है तो काफ़िर 


नही| 


हम आप के लिए लड़ रहें हैं और आप लोग अपने सर्वनाश की जड़ चर्चों, मस्जिदों और ईमामों को बचाने के लिए हमें प्रताडित कर रहे हैं| ईश्वर से डरिये|

पाकपिता गाँधी और कांग्रेस ने आप लोगों से राम राज्य का वादा किया गया था, सोनिया के रोम राज्य में रहते आप लोगों को लज्जा क्यों नहीं आती?


अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१


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