Snvidhan htayen

संविधान मिटाएं.
आप पर विश्व का सबसे बड़ा संविधान थोपने वाले ब्रिटेन का अपना कोई संविधान नहीं है.
भासंविधान की उद्देशिका
हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य[1] बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को:
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए, 
तथा उन सब में, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की
एकता और अखण्डता[2]सुनिश्चित कराने वाली, बन्धुता बढ़ाने के लिए, दृढ़ संकल्प होकर अपनी संविधानसभा
में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ईस्वी (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हजार छह विक्रमी) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित
करते हैं।

संकलनकर्ता भीमराव अम्बेडकर ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे!


अम्बेडकर ने यह दावा कभी नहीं किया कि उन्होंने यह संविधान बनाया। इसके विपरीत अम्बेडकर ने २ सितम्बर, १९५३ को राज्य सभा में कहा कि इस संविधान को आग लगाने की जिस दिन जरूरत पड़ेगी, मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इसे आग लगाउॅंगा। भारतीय संविधान किसी का भला नहीं करता| अम्बेडकर का उपरोक्त वक्तव्य राज्य सभा की कार्यवाही का हिस्सा है; जिसे कोई भी पढ़ सकता है| एक बात और समझने की है कि भीमराव अम्बेडकर संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमैटी के चेयरमैन थे| जब संकलनकर्ता ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे, तो आप भारतीय संविधान पर क्यों विश्वास करते हैं?

क्यों बना भारतीय संविधान?


उत्तर है, मानव मात्र को दास बनाने के लिए


छल जिसे कोई नहीं बताता|

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया| उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया| हम आज भी ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते| हमें इसी अपराध के लिए ई० सन १८५७ से ही दंडित किया जा रहा है| २६ नवम्बर १९४९ को हमारे साथछल हुआ था| संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ताहस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे क्योंकि पहला चुनाव ही 
१९५२ में हुआ संविधान कासंकलन कर उसे जनता के सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ. फिर हम इंडिया के लोगों नेसंविधान को आत्मार्पित 
कैसे किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोगों 
ने यही पूछने का दुस्साहस कियाहै. इससे बड़ा 
दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्तसरकार का 
गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने  एलिजाबेथ के रोम 
राज्य को चुनौती दी है. बंदाबैरागी, सिक्खों के दसो 
गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंहके पुत्रों,भाई सती और मती दास की भांति हम एलिजाबेथ द्वारा सताए जा रहे हैं. (बाइबल, लूका १९:२७). इससे भी भयानक बात
 यह है कि आज हमें तब की भांतिमुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि जीविका, पद व प्रभुता के लिए वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संपत्ति और संस्कृति की
रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं.
अनुच्छेद ३१ से प्राप्त संपत्ति का मौलिक अधिकार प्रथम संविधान संशोधन द्वारा निरस्त कर दिया गया.
संविधान का अनुच्छेद २९(१) अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण
अनुच्छेद २९ (१) भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा.
ईसाई, जो ईसा को राजा न माने, उसका घात करता है.ईसा के बाइबिल लूका नियम १९:२७ का हठधर्म है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|"
मुसलमान की पूजा ही  "ला इलाहा इलल्लाह" है. यानी सत्ता में कोई आए, संविधान सनातनी व सनातन धर्म को मिटाने का ईसाई व मुसलमान दोनों को मौलिक अधिकार देता है. यही है भासंविधान प्रदत्त धर्म और उपासना की स्वतंत्रता. अजान द्वारा इसका प्रतिदिन ५ बार राजकोष
से वेतन, तमाम अनुदान और पुलिस संरक्षण देकर सरकार करा रही है.
राज्य की स्थापना जान माल की रक्षा के लिए की जाती है. भासंविधान ने दोनों ही छीन लिए हैं.
मैं बाइबिल, कुरान व भारतीय संविधान विरोधी, बाबरी विध्वंसक, काफिर, साध्वी प्रज्ञा और मुख्यमंत्री योगी का सह अभियुक्त और उपनिवेश विरोधी अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी पुत्र स्व. बेनी माधव त्रिपाठी फोन +९१ ९८६८३२४०२५ हूँ.
देश ब्रिटिश उपनिवेश है. विवरण हेतु निम्नलिखित लिंक देखें,
http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947
अजान का अर्थ क्या है?
~लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पण्डित संजय बहादुर उस मंजर को याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं। वह कहते हैं कि "मस्जिदों के लाउडस्पीकर" से लगातार तीन दिन तक तथाकथित शांतिदूत मुसलमान यही आवाज दे रहे थे कि यहां क्या चलेगा, "निजाम-ए-मुस्तफा", 'आजादी का मतलब क्या
   "ला इलाहा इलल्लाह"
'कश्मीर में अगर रहना है, "अल्लाह-ओ-अकबर" कहना है। यही है संविधान प्रदत्त उद्देशिका की इस्लाम की बंधुता का विकास.
अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण
सनातनी अल्पसंख्यक कभी नहीं हो सकता.
अनुच्छेद २९ (१) भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा।
यानी संविधान किसी भी वर्ग को लूट, बलात्कार, धर्मांतरक और हत्यारी संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार देता है. केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार किया है कि जज मौलिक अधिकार मामले में सुनवाई नहीं कर सकते.
जो सरकार अपने संरक्षण में राजकोष से वेतन, तमाम अनुदान और पुलिस संरक्षण देकर काफिर हत्या की घोषणा कराती हो, वह इस्लाम पर प्रतिबंध कैसे लगा सकती है? इस्लाम में मुसलमानों को सहअस्तित्व की आज्ञा नहीं है. काफिर का कत्ल किया जाना मौलिक अधिकार है.
भासं का अनुच्छेद २९(१) ईसाइयों और मुसलमानों को सनातनियों के हत्या का मौलिक अधिकार देता है. क्योंकि सनातनी जारज (जिसके बाप का पता न हो) ईसा को राजा स्वीकार नहीं करते और लुटेरे, बलात्कारी, धर्मांतरक और हत्यारे अल्लाह की पूजा नहीं करते. संविधान के अनुच्छेद २९(१) को ध्यान से पढ़िए. ईसाइयत और इस्लाम क्रमशः विश्व की सबसे बड़ी और दूसरी बड़ी संख्या हैं. फिर अल्पसंख्यक कैसे? इंडिया के ८ राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गया. सरकार ने घोषणा क्यों नहीं की?
अजान भासंविधान के अनुच्छेद२९(१)से प्राप्त मुसलमानों का मौलिक अधिकार है. जिसके प्रसारण "ला इलाहा इलल्लाह", (यानी मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है) द्वारा चेतावनी दे दी गई है कि काफिर कत्ल होंगे.
इस्लाम मिटेगा अन्यथा काफिर.सहअस्तित्व असंभव है. यही है भासंविधान के प्रस्तावना मे घोषित उपासना और धर्म की स्वतंत्रता.
http://www.aryavrt.com/bantwara
मोदी काफिर कातिलों को वेतन और पुलिस संरक्षण दे रहे हैं. ब्रिटिश कांग्रेस ने उन्हें इंडिया में रोका है. मुसलमान काफिरों को बिना रोक टोक कत्ल कर रहे हैं. काफिरों की संपत्तियों पर सरकार उनको स्वामित्व दे रही है. उनका आयात, उनको नागरिकता, चार विवाह का अधिकार दे रही है. राजकोष से वेतन और पुलिस संरक्षण पा कर मुसलमान स्पष्ट कर चुके हैं कि केवल अल्लाह की पूजा होगी. काफिर कत्ल कर दिए जाएंगे और वे उखं के धनपुरा जैसी जगहों पर ऐसा कर भी रहे हैं.
वोट उसे दें, जो काफिरों को नष्ट होने से बचाए. चुनाव धोखा है, काफिरों का जीवन नहीं बच सकता. विकल्प भादंसं की धारा १०२ है. हमारी गीता, जिसकी शिक्षा पर भासंविधान मे रोक है, का कथन है,
यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति।
तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्।।७:२१।।
अभिप्राय यह कि जो पुरुष पहले स्वभावसे ही प्रवृत्त हुआ जिस श्रद्धा द्वारा जिस देवताके स्वरूप का पूजन करना चाहता है (उस पुरुषकी उसी श्रद्धाको मैं स्थिर कर देता हूँ )। यह काफिर की सांप्रदायिक पूजा है. मात्र अल्लाह पूज्य है. सेकुलर पूजा है.
इस्लाम से रक्षा की मांग करने के कारण मुझ पर ५० अभियोग चले. ४२ बार जेल गया. ३ आज भी लम्बित हैं. लेकिन अजान का प्रसारक भादंसं के १८६० मे प्रभावी होने के पश्चात कभी अभियुक्त नहीं बना.
http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng
इस्लाम के कुरान ८:३९ ने मानव जाति व धरती को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर व दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. अनुच्छेद २९(१). भासं का अनुच्छेद मुसलमानों को अपनी लूट, बलात्कार और हत्या की संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार देता है. हम सनातनी को नष्ट करने के लिए सभी संगठित हो चुके हैं. सन १८६० से कोई ईशनिंदक मुसलमान अभियुक्त नहीं बना. जब कि मुहम्मद पर टिप्पणी करने के कारण कमलेश तिवारी रासुका मे जेल गए और उन पर करोड़ों ₹ का मौत का फतवा जारी है.
चुनाव और वोट काफिर का जीवन नहीं बचा सकते. प्रधानमंत्री मोदी को मुसलमानों का साथ चाहिए, लेकिन मुसलमानों को काफिरों का नरसंहार. निर्णय करिए कि अस्तित्व चाहिए या अंत.
मेरी लड़ाई अजान से है. अजान रहेगा तो काफिर जीवित नहीं बचेंगे. मुझे बिजली चोर और आश्रम हड़पने वाले प्रणब चैतन्य अपने आश्रम मे बुला कर लाये हैं. मैंने कमरों के निर्माण हेतु साढ़े छह लाख रुपए खर्च किए हैं. मेरा पैसा दे दें. मैं चला जाऊँगा. प्रणब का कहना है कि मै अपना सामान ले जाऊँ, तोभी उखाड़ने और लगाने में उतने ही रूपये व्यय आएगा.
मंगल आश्रम का विवाद चल रहा है. प्रणब दो बार हार चुके हैं. हाईकोर्ट नैनीताल गए हैं. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 2454 of  2018 के अपने निर्णय मे बिजली आपूर्ति को मौलिक अधिकार माना है. परिसर स्वामित्व के आधार पर बिजली विभाग प्रणब को बिजली नहीं दे सकता क्योंकि बिजली ट्रष्ट के नाम से है. फिर भी विभाग चोर को बिजली मुफ्त दे रहा है और मुझे बिजली कनेक्शन देने से मना कर रहा है. स्पष्ट है कि मुझे अजान विरोध के लिए सरकार उत्पीड़ित कर रही है.
जिन्हें अपना अस्तित्व चाहिए, भासंविधान और इस्लाम को नष्ट करने में मेरा सहयोग करें. अपनी रक्षा तो स्वयं मोदी और योगी भी नहीं कर सकते.
अप्रति
या१७.०४.२०१९


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