Snatan bachayen 19117y

माननीय मुख्यमंत्री योगी जी, उप्र सरकार,
आप ने भासं मे आस्था और निष्ठा की शपथ ली है. इंडिया कभी स्वतंत्र नहीं हुआ. हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के आंदोलन के बाद हमारा भारत देश ब्रिटिश संसद मे आक्रांता जार्ज षष्ठम द्वारा Indian Independence Act, 1947 बनाकर १८ जुलाई, १९४७ को दो स्वतंत्र उपनिवेशों इंडिया और पाकिस्तान में विभाजित किया गया. जब कि स्वतंत्र उपनिवेश नहीं हो सकता. क्योंकि स्वतंत्र का अर्थ स्वयं का (मेरा अपना) तंत्र है और उपनिवेश स्वतंत्र नहीं हो सकता क्योंकि उपनिवेश का अर्थ ही किसी और की बस्ती है.तो स्वतंत्र उपनिवेश कोई शब्द ही नहीं है, धोखा है। इसी धोखाधड़ी के आधार पर हम आज भी ब्रिटिश प्रजा, राष्ट्र कुल के सदस्य और ब्रिटिश  कानूनों से ब्रिटेन द्वारा शासित हैं. राज्यपाल उसके प्रतिनिधि हैं. २६ जनवरी, १९५० को हम पर भासं थोपा गया. इसका अनुच्छेद २९(१) तथाकथित अल्पसंख्यक ईसाइयों और मुसलमानों को अपनी लूट, बलात्कार और हत्या की संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार देता है. हमें अपने सनातन धर्म को बचाने का अधिकार नहीं है. भासं, कुरान और बाइबल पर किसी का जोर नहीं है. इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश है. जो ईसा को राजा न माने, उसे कत्ल कर देना ईसाई संस्कृति है और जो अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा करे, उसे कत्ल कर देना इस्लाम संस्कृति है. हम ब्रिटिश उपनिवेश मे ब्रिटिश कानूनों से शासित हो कर तिल तिल कर मिट रहे हैँ. जो विरोध करता है, उसे नष्ट किया जाता है. हमारी मुक्ति बिना उपनिवेश और इस्लाम से मुक्ति लिए संभव नहीं.
योगी जी, उपनिवेश का विरोध फांसी का अपराध है और अजान के विरोध पर मुसलमान को भासं ने कत्ल करने का अधिकार दिया है. मैं विरोधी हूँ. क्या मुझे फांसी दिलाएंगे? ईसाई धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले  को कत्ल करने की बाइबल की आज्ञा है| (व्यवस्थाविवरण, १३:६-११) (बाइबल, लूका २४:४४) के साथ पठनीय. अतः ईसाइयों पर उनका नियम लागू कर धर्मांतरण करना कराना फांसी का अपराध घोषित करें.


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