Scrap Malegaon Trial



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 25, Jun. 13 - 19, 2014. This issue is Scrap Malegaon Trial


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Scrap Malegaon Trial

अज़ान

मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट


अज़ान ईशनिंदा है| ईशनिन्दक के लिए इस्लाम में मृत्यु दंड निर्धारित है|

इंडिया में ईशनिंदा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दण्डनीय अपराध है|

उपरोक्त दोनों धाराएँ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा इंडियन उपनिवेश {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम१९४७अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}.की स्वामिनी एलिजाबेथ के दासों राष्ट्रपति, राज्यपाल या जिलाधीश द्वारा नियंत्रित है| बिना दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति या राज्यपाल की संस्तुति के जज भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोगों की सुनवाई नहीं कर सकता|

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(), ६० १५९ और भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं|

मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा अविश्वासियों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इनके अस्तित्व में आने के बाद से आज तक, मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं की गईं| षड्यंत्र स्पष्ट है| वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करना है|

जहां अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा ईशनिंदा का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया है, वहीँ ईशनिंदा के विरोधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत प्रताड़ित किया जा रहा है| क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है|

भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी नागरिक का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ और जेल में सन २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये| यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है|

एलिजाबेथ को हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को कत्ल करना है| क्यों कि हमारे पूर्वजों ने ईशा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया| (बाइबल, लूका १९:२७ के साथ पठनीय) भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१). राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन किये जाने वाले अपराधों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए विवश हैं|

हमारा अपराध यह है कि हम एलिजाबेथ के उपनिवेश को चुनौती देते हैंहम जानना चाहते हैं कि मस्जिदजहां से काफिरों के आराध्य देवों की ईशनिंदा की जाती है और जहां से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती हैको नष्ट करना अपराध कैसे है?

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

मैं स्वयं इस्लाम और ईसाइयत का विरोध करने के कारण ४२ बार जेल गया हूँमुझे जेल में जहर दिया गया है५० अभियोग चलेजिनमे से ५ आज भी लम्बित हैंमैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है|

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

हम माननीय प्रधानमंत्री नमो से आग्रह करते हैं कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर हमारे मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट के लिए लगे अभियोग वापस लें| सबको जेल से मुक्त करें|

भवदीय,

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

दि०; रविवार, 1५ जून 201४य

Registration Number is : DARPG/E/2014/03381

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jun 15, 2014, 11:12 AM
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