Samprdayik Vedheyak


मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18 ISSUE 41, Oct 04-Oct 10, 2013. This issue is Muj13W41 sting aapresan

Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 18 Year 18. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com

 


                       स्टिंग ऑपरेशन|

चैनल आज तक के द्वारा कराये गए स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया गया कि उत्तर प्रदेश के मंत्री आज़म खान के आदेश पर पुलिस अफसरों ने कई मुस्लिम समुदाय के दोषी लोगो को छोड़ दिया। [16]लेकिन आज़म खान ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया।[17]

वस्तुतः स्टिंग ऑपरेशन की कोई आवश्यकता न थी और न है| स्टिंग ऑपरेशन सोनिया और उसके मातहत राज्यपाल बनवारी द्वारा समस्या की जड़ भारतीय संविधान से ध्यान हटाने के लिए आजतक को मोटी रकम दे कर कराया गया है| काफ़िरों को यह ज्ञात होना चाहिए कि इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में व धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९).

इस्लाम को अपनी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| राज्यपाल बनवारी के पुलिस के संरक्षण में मस्जिदों से ईमाम दिन में पांच समय अज़ान द्वारा स्पष्ट घोषणा करते हैं कि मात्र अल्लाह पूज्य है (यह ईशनिंदा है और इसके लिए इस्लाम में मृत्युदंड निर्धारित है) और मस्जिदों से ईमाम जुम्मे यानी शुक्रवार को मुसलमानों को शिक्षा/खुतबे देते हैं कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुष्मन हैं| (कुरान ४:१०१). काफिरों को कत्ल कर दो| अज़ान और मस्जिद से दिए जाने वाले खुतबों के विरुद्ध काफ़िर शिकायत नहीं कर सकते और न जज सुनवाई कर सकता है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). पुलिस किसी ईमाम के विरुद्ध आज तक अभियोग न चला सकी और न राष्ट्रपति और राज्यपाल संस्तुति दे सके| मुसलमानों को काफिर नारियों का बलात्कार करने का अधिकार इस्लाम (कुरान २३:६) और लोकतन्त्रीय भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| इस असीमित मौलिक मजहबी अधिकार को संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए सोनिया के मनोनीत राष्ट्रपति व राज्यपाल, विवश हो कर, शपथ लेते हैं| (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९). लव जिहाद को संरक्षणपोषण व संवर्धन देने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपालों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत एकाधिकार प्राप्त है| लोकसेवक या जज भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ और कुरान के आगे विवश हैं!

इस्लाम ने काफिरों की विवाहित या अविवाहित नारियां मुसलमानों को दी हैं| कुरान ४:२४ व २३:६. मुज़फ्फरनगर के कवाल गाँव के भगवा आतंकवादियों सचिन और गौरव ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त इस अधिकार को लेने से शाहनवाज को रोका| तब मजहब निष्ठ शाहनवाज ने छुरे से सचिन और गौरव पर आक्रमण कर दिया| चूंकि सचिन और गौरव का खतना नहीं हुआ था, अतएव दोनों ने शाहनवाज का छुरा छीन कर उसी छुरे से शाहनवाज को मार डाला| यद्यपि ऐसा दोनों (सचिन और गौरव) ने ही भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधीन किया था, लेकिन काफिरों के इसी अधिकार को छीनने की राज्यपाल बनवारी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के साथ पठनीय भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ली है| मुसलमानों ने अपने असीमित मौलिक मजहबी अधिकार के हनन से कुपित हो कर केवल सचिन और गौरव की हत्या नहीं की, अपितु महा पंचायत से लौट रहे काफिरों पर भी घात लगाकर हमला कर दिया और लाशों को नहर के हवाले कर दिया| राज्यपाल बनवारी के मातहत पुलिस ने किसी मुसलमान पर अभियोग न चलाकर उचित ही किया| इस प्रकार स्टिंग ऑपरेशन करने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी|

वस्तुतः मुज़फ्फरनगर दंगे के उत्तरदाई भारतीय संविधान, कुरान, सोनिया, राष्ट्रपति और राज्यपाल बनवारी हैं| जब तक ईसाइयत, इस्लाम, भारतीय संविधान और लोकतंत्र का अस्तित्व रहेगा, काफिरों का नरसंहार नहीं रोका जा सकता|

उपरोक्त सच्चाइयों को जो भी बताता या लिखता है वह भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का अपराधी बन जाता है| यही विधायक सोम के साथ हुआ है| यही मेरे साथ ५० बार हुआ| मेरे विरुद्ध ५ अभियोग आज भी चल रहे हैं|

मैं आर्यावर्त सरकार का संस्थापक हूँ और आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को इसलिए मिटाना चाहता हूँ कि संस्कृतियां मानव मात्र को वीर्यहीन यानी ईश्वर विहीन करके अपने अनुयायियों सहित दास बनाकर सबको उपासना की आजादी का परित्याग करने के लिए विवश करती हैं| इन संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| ईसाइयत इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल :३९).

जी हाँ हम मस्जिद और चर्च नहीं रहने देना चाहते क्यों कि यहाँ मानव मात्र को ईश्वर से अलग कर दिया जाता है| मनुष्य को कत्ल करने अथवा वीर्यहीन हो कर दास बनने के लिए विवश किया जाता है|

जिस प्रकार इस्लाम की विरोधी आसमा बिन्त मरवान को वीभत्स विधि से मुहम्मद के अनुयायियों ने उसके ५ अबोध बच्चो सहित कत्ल किया था, उसी प्रकार साध्वी प्रज्ञा को सोनिया के मातहतों ने जीवित ही मार डाला है| उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है और कर्नल पुरोहित का पैर तोड़ डाला गया है| हमारे जगतगुरु के मुहं में गोमांस ठूसा गया| शिकायत करने के बाद भी बंधुआ जज कुछ न कर पाए| हमारे अन्य ईसाइयत और इस्लाम विरोधियों को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम से बचाना चाहते हैं| साध्वी प्रज्ञा ईसाइयत और इस्लाम को मिटाने के लिए ही जेल में हैं| आज भी उनकी ललकार है, “सोनिया सत्ता में क्योंकाबा मूर्तिपूजकों की है। कुरआन लूट संहिता है। अजान ईशनिंदा है। अतएव साध्वी के सपनों को साकार कीजिये| चर्च, मस्जिद, अजान और संविधान मिटाने में आर्यावर्त सरकार की सहायता कीजिए|

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

दया के पात्र लोकसेवकों ने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ ३९(). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान :१९१, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:). इसके बदले में लोकसेवकों के पास बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस :३६) से विवाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार है| जहां ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार है, वहीँ लोकसेवकों को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है|

जाहिरा, बिलकिस और इशरत जहाँ मामले का संज्ञान लेने वाले जज क्या सचिन और गौरव का मामला लेने का साहस कर सकते हैं?

लोकसेवक और जज दोनों ही अल्लाह और ईसा के अपराधी हैं| ईसाई व मुसलमान दोनों को ईसा व अल्लाह के हाथों कत्ल करेंगे| ईसाई व मुसलमान दोनों को इंडिया में वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए रोका गया है| लोकसेवक मुसलमानों को पद, प्रभुता और जीविका के लोभ में बचा रहे हैं| दोनों यह लड़ाई नहीं लड़ सकते| यदि आप जीवित रहना चाहते हों तो हम आप के लिये यह युद्ध लड़ सकते हैं|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

Saturday, September 28, 2013y

Request/Grievance Registration Number is : PRSEC/E/2013/16190

http://helpline.rb.nic.in/

This is a public document. Anyone can view the status from the web site by typing the above Request/Grievance Registration Number. There is no pass-word.

 

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