Rupya




Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 21 Year 21 ISSUE 47Y, Nov 18-24, 2016. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj16W47Y RUPYA 16N18 Dated:18/11/2016

 

||श्री गणेशायेनमः||

प्रेसनोट

नियमानुसार कार्यवाई करनेवाली एलिजाबेथ ने नियम क्यों बदल दिया?

THE RESERVE BANK OF INDIA (AMENDMENT) BILL, 1991
A BILL further to amend the Reserve Bank of India Act, 1934. Be it enacted by Parliament in the Forty-first Year of the Republic of India as follows:- Short title and commencement. 1. (1) This Act may be called the Reserve Bank of India (Amendment) Act, 1991. (2) It shall be deemed to have come into force on the 15th day of October, 1990. Amendment of section 33 of Act 2 of 1934. 2. In the Reserve Bank of India Act, 1934 (hereinafter referred to as the principal Act), in section 33, in sub-section (4), for the figures and words "0.118489 grammes of fine gold per rupee", the words "a price not exceeding the international market price for the time being obtaining" shall be substituted. Repeal and saving 3. (1) The Reserve Bank of India (Amendment) Ordinance, 1990, is hereby repeated. (2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the principal Act, as amended by the said Ordinance, shall be deemed to have been done or taken under the principal Act, as amended by this Act.
उपरोक्त अधिनियम का संशोधन किसके हित मे?

पत्रांक: MUJ16W47Y    दिनांक: १८/११/१६


रुपया

संदर्भ: ५०० व १००० के नोट निरस्त.

१.यह कि भारत सोने की चिड़िया था. यहाँ सोना गिना नहीं, तौला जाता था. ऊपर के चित्र से स्पष्ट है कि सन १९१७ तक एक ₹ =१३$ था. १९४७ में घट कर १$ हुआ. ८ नवम्बर २०१६ तक एक $ का मूल्य ६७ हुआ. नमो ने ८ नवम्बर, २०१७ को ₹ शून्य कर दिया।

२.यह कि इंडियन उपनिवेशवासी जिसे कहते हैं, वह देने का प्रतिज्ञा पत्र है. धारक का रिजर्वबैंक के पास रहता है, जिसे धारक को देने के लिए गवर्नर प्रतिज्ञा बद्ध है. इतना ही नहीं, केन्द्रीय सरकार द्वारा का प्रतिज्ञापत्र प्रत्याभूत भी है.रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की धारा ३३(४) के अनुसार १५ अक्टूबर, १९९० तक १ का मूल्य ०.११८४८९ ग्राम शुद्ध सोना था, १९९० के बाद से की कोई कीमत नहीं.

३.यह कि नमो एक कुशल शासक हैं. इसलिए एलिजाबेथ के आँख की किरकिरी बने हुए हैं. ५०० और हजार के नोट के वचनपत्र के प्रचलन को बंद करने का निर्णय एलिजाबेथ का है, ताकि नमो के विरुद्ध विद्रोह हो जाये और वे इंदिरा गांधी की भांति कत्ल हो जाएँ.

४.सन १९८८ में मैंने तीसहजारी कोर्ट में गवर्नर से नोट के बदले सोना देने की मांग करते हुए एक वाद प्रस्तुत किया था.

५.यह कि, यद्यपि  इस ठगी से विश्व का हर व्यक्ति  पीड़ित है, तथापि दिल्ली  उच्च न्यायालय  तक अपील निरस्त होती रही. अंत में कानून में १९९० के प्रभाव से संशोधन हो गया. संशोधन के फल स्वरूप सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार नहीं की. एलिजाबेथ अपने ही वचन से मुकर गई. जब कि इस धोखाधड़ी से जज सहित हर उपनिवेश वासी भी पीड़ित था और आज भी है! क्या यही जज की स्वतंत्रता है? 

६.यह कि सरकार जान माल की रक्षा के लिए है, जान लेने और लूटने के लिए नहीं|

७.यह कि अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर ईसाई व मुसलमान सहित सभी उपनिवेशवासियों से प्रथम संविधान संशोधन द्वारा लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही २०/०६/१९७९ से मिटा दिया गया है| (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८).

८.यह कि उपज के छठे भाग से अधिक कर लेना लूट है। उत्पादक शेष सम्पत्ति का स्वामी है। लुटेरे संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) उपनिवेशवासी को सम्पत्ति और उत्पादन का साधन रखने का अधिकार नहीं देता. यानी कि स्वयं काले धन की जड़ है.

९.यह कि राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! उपनिवेशवासी लुटेरी एलिजाबेथ से अपना पूजास्थल, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या उपनिवेशवासी को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?

१०.मैकाले को इंडिया में सन १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी न मिला.  भारत मे सोना गिना नहीं, तौला जाता था। आज उसी देश मे नमो, विदेशियों के शर्तों पर, पूंजी आयात करने के लिए विवश हैं। उपनिवेश वासी विदेशियों की दासता करेँगे। सभी नमो की जयकार कर रहे हैं! कोई नहीं पूछता कि एलिजाबेथ ने देश को क्यों लूटा? अभी भी हमे विमुद्रीकरण करके लूटा और हम एलिजाबेथ के दास नमो की जयकार कर रहे हैं! १९४७ तक देश के खजाने में १५५ करोड़ रु० था. गरीब पर  कोई विदेशी कर्ज न था. आज हर गरीब ८२५६०/- रु० कर्जदार (मार्च २०१६ तक; ७० रु० प्रति डालर की दर से) है| और यह कर्ज तब है, जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने नागरिकों की जमीनें और जमींदारी लूटी|सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे| अब नमो गरीबी मिटा रहे हैं।

११.यह कि सन १९४८ के पूर्व बिक्रीकर नहीं था और १९९१ के पूर्व जीएसटी नहीं था.

१२.यह कि वैदिक राज्य की नीति नीचे देता हूँ,

अरक्षितारम् राजानं बलिषड्भागहारिणम्|

तमाहुः सर्वलोकस्य समग्रमलहारकम्|| (मनुस्मृति ८:३०८)

यानी वैदिक सनातन धर्म में राज्य को १६.६७% से अधिक कर लेने का अधिकार नहीं है| आप को अपनी रक्षा करनी है तो हमें सहयोग दें. आर्यावर्त सरकार हत्यारों और लुटेरों की संहिता भारतीय संविधान को निरस्त करेगी|

१३.यह कि तबसे आज तक मेरी सारी सम्पत्तियां एलिजाबेथ ने जजों के माध्यम से लूट लीं.

१४.यह कि विकासहीनता में शासन यथास्थिति बनाए रखना चाहता है और रूढ़िवादिता एवं अनुदार परंपराओं का वह अभिभावक बन गया है। उपनिवेशवासियों को सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने उनसे वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है| मुझे हंसी आती है, जब उपदेशक संत और कथावाचक यह कहते हैं कि सनातन संस्कृति मिट नहीं सकती!

निवेदन

१५. यह कि जिसे जीवित रहना हो और अपनी सम्पत्ति व नारियां बचानी हो, वे ५० दिनों तक यथाशक्ति अपने वचनपत्र बदल लें. बचे वचनपत्र नष्ट न करें. उपनिवेश से मुक्ति हेतु अपने वचनपत्र आर्यावर्त सरकार को सौंप कर पावती प्राप्त करें. जिसे एलिजाबेथ काला धन बता रही है. वह काला धन नहीं, उपनिवेश सरकार का दिया वचनपत्र है. आर्यावर्त सरकार वचन देती है कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में वाद जीतने पर १५% काट कर शेष वचनपत्र दाताओं को वापस की जायेगी.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

http://pgportal.gov.in

PMOPG/E/2016/0477210

PassWord 919152579041

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Nov 18, 2016, 5:21 PM
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Nov 18, 2016, 5:51 PM
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