Rinky

रिंकी!

न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

छान्दोग्योपनिषद, पंचम प्रपाठक, एकादश खंड, पांचवां श्लोक

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?

वैदिक राज्य में चोर, भिखारी और व्यभिचारी नहीं होते थे. स्वयं मैकाले ने २ फरवरी १८३५ को इस बात की पुष्टि की है. लेकिन भारत का संविधान ही चोर है. भारतीय संविधान को चोर कहना सोनिया के रोम राज्य के विरद्ध भारतीय दंड संहिता के धारा १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध है| इनका नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत सोनिया के मनोनीत राज्यपालों के हाथ में है. ऐसा कहना संसद व विधानसभाओं के विशेषाधिकार का हनन भी है. जो भी इस सच्चाई को कहे या लिखेगा, उसे सोनिया दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ में जेल भेजवा देंगी. मुसलमान ईश निंदा में कत्ल करेगा. मै ४२ बार हवालात और जेल गया हूँ और हमारे १२ अधिकारी ईसाइयत और इस्लाम के विरोध के कारण बंद हैं. संविधान प्रमाण है,

मै डेनिअल वेबस्टर के कथन से पूरी तरह सहमत हूँहमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही.... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद(१) जाति हिंसक, बलात्कारी व दासता पोषक है और आप के जीवन व सम्पत्ति से आप को बेदखल कर चुका है.

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा." भारतीय संविधान भाग ३ मौलिक अधिकार.

और अनुच्छेद ३९(ग) भ्रष्टाचारी है. देखें:-

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग).

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभाके लोग नछीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों जजों ने मिलकर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है. इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८)

यदि ‘मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है’, जिसे अजान द्वारा मस्जिदों से ईमाम चिल्लाता है, तो सर्व धर्म समान, अनेकता में एकता, साम्प्रदायिक सद्भाव और पंथनिरपेक्षता (सेकुलरिजम) कहाँ है? यदि ईसा ही राजा हो सकता है, तो देश में लोकतंत्र कहाँ है? यदि स्वयं भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६(ब)(||) के अनुसार इंडिया आज भी उपनिवेश (डोमिनियन) और राष्ट्रकुल का सदस्य है, तो इडिया स्वतन्त्र कैसे है?

जज, प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत व उपकरण है. परभक्षी संविधान का अनुच्छेद २९(१) किसी नागरिक को जीने का अधिकार नहीं देता और ३९(ग) नागरिक को सम्पत्ति या पूँजी का अधिकार ही नहीं देता. भारतीय संविधान को कोई हत्यारों का संरक्षक, भ्रष्टाचारी व आतंकवादी नहीं मानता. जज व नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन, सोनिया के मनोनीत, राज्यपालों द्वारा शासित हैं. अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है. हमारे वैदिक सनातन धर्म व ईश्वर का अपमान करने वाले हर मुसलमान और ईसाई को दंप्रसं की धारा १९६ द्वारा संरक्षण प्राप्त है, लेकिन अपने प्राणों की रक्षा के लिए मांग करने से भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोग चलाए जाते हैं.

जज न्याय करने का अधिकार उसी क्षण खो देते हैं, जिस क्षण वे भारतीय संविधान व विधियों की मर्यादा बनाये रखने की शपथ लेते हैं. {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८}. क्यों कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर मुसलमान और ईसाई को जजों सहित जनसेवकों व मानव मात्र के नारियों के बलात्कार, लूट, हत्या और वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश का ईसाइयत और इस्लाम को असीमित मौलिक अधिकार देता है. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन जज, जनसेवक और जनता राज्यपालों के आज्ञाकारी नौकर हैं. जजों को डूब मरना चाहिए.

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं कीधारा १९७ केसंरक्षण में

केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने. (बाइबल, लूका १९:२७) और अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब भारत को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं.

वैदिक सनातन धर्म से ईसाइयत और इस्लाम दोनों ही आतंकित हैं. ईसाइयत और इस्लाम वैदिक पंथियों को मिटाना चाहते हैं.

यह संस्कृतियों का युद्ध है. ईसाइयत और इस्लाम आतताई संस्कृतियाँ हैं. मात्र वैदिक सनातन धर्म धोखे से हमले का विरोधी है. आत्मघाती मजहबों को मिटाना आप का वैदिक सनातन धर्म है. आइये ईसाइयत और इस्लाम मिटायें. 

ईश्वर उपासना की दासता नहीं थोपता. (गीता ७:२१) और न लूट के माल का स्वामी है. (मनुस्मृति ८:३०८). हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग वैदिक सनातन धर्म के अनुयायी हैं. मीडिया हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के पीछे इसलिए पड़ी है कि उनकी आका सोनिया को वैदिक सनातन धर्म से खतरा है. इसके अतिरिक्त पोप इंडिया में आकर सोनिया को आदेश दे गया है कि २१ वीं में सोनिया को पूरे एशिया को ईसा की भेंड़ बनाना है. आइये प्रण लें कि हम मनुष्यता को तज कर भेंड़ नहीं बनेंगे.

आप अकेले यह युद्ध नहीं लड़ सकते. धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शीयोद्धाचिन्तकसमाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुएलेकिनमालेगांव व अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्धजगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया. उनके आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं. क्या आप हम लोगों की सहायता करेंगेताकि आप की आँखों के सामने आप की सम्पत्ति और घर न लूट ले, आप के दुधमुंहे आप की आँखों के सामने पटक कर न मार डाले जाएँ, नारियों का सोनिया बलात्कार न करा पाए और आप कत्ल न हों? (बाइबलयाशयाह १३:१६). 

हम वेदों की आज्ञानुसार धर्म राज्य स्थापित करेंगे और आप धर्म निरपेक्ष हैं. बिना धर्म रक्षा के मानवता की रक्षा सम्भव नहीं है.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

 

Comments