Rapist Brahmins

डाक्टर रिबिरो महोदय,

आप का मेल बहुत पहले मिल गया था, लेकिन बीमारी के कारण उत्तर देने में विलम्ब हुआ| यह बिलकुल सच है कि मैं एक मूर्ख ब्राह्मण हूँ और अपने पूर्वजों की गलतियों का परिणाम भुगत रहा हूँ| आप ने ही नहीं कई लोगों ने मेरा विरोध किया है| मुझे अपने विचार लिखने का अधिकार नहीं है| क्यों कि मैं महारानी एलिजाबेथ के उपनिवेश इंडिया का दास हूँ और दास के पास अधिकार नहीं होता|

आप लोगों को मैं यह पत्र इस क्षमायाचना याचना के साथ लिख रहा हूँ कि यद्यपि मैं विकास की मुंहताज, लिपि और उच्चारण की त्रुटियों से दूषित, अंग्रेजी जानता हूँ, तथापि मैं इसको लिखने और बोलने से परहेज़ करता हूँ| क्योंकि मानवमात्र की लिपि, भाषा व ज्ञान-विज्ञान उसके चक्रों व ब्रह्मकमल (सहस्रार) में परब्रह्म जन्म के साथ ही दे देता है| वेद परब्रह्म का संविधान है| बिना ब्रह्मज्ञान के इसे समझा नहीं जा सकता| बिना ब्रह्मचर्य (वीर्य रक्षा) के ब्रह्मज्ञान नहीं मिल सकता और बिना गाय के दूध सेवन और गुरुकुल में योग्य आचार्य से शिक्षा ग्रहण के कोई ब्रह्मचारी नहीं बन सकता|

विश्व की तमाम लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है| यह निर्विवाद रूप से स्थापित है कि संसार के अब तक के पुस्तकालयों में एकमात्र ज्ञान-विज्ञान के कोष ऋग्वेद से प्राचीन कोई साहित्य नहीं है, जो संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि में लिखी गई है| पाणिनी के अष्टाध्यायी में आज तक एक अक्षर भी बदला न जा सका| ठीक इसके विपरीत अंग्रेजी और उर्दू लिपियों में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ हैं| संगणक (कम्प्यूटर) विशेषज्ञ स्वीकार करते हैं कि संगणन के लिये संस्कृत सर्वोत्तम भाषा है|

Thanks Mr. Tripathi,

I do not agree with you. (May not be your real identity).

मुझे आप के सहमति की बिलकुल आवश्यकता नहीं है| मुझे जानने से न्यायालय भी घबडाती है| आप कैसे जान पाएंगे? वैसे भी मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है और मालेगांव बम कांड का अभियुक्त हूँ| मेरे विरुद्ध ५० अभियोग चले| ५ आज भी लम्बित हैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें,

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

This is exactly the mod us operand- i of our enemies to create disinformation and disunity among Indians. This is part of ISI manual which you so clearly have espoused and reproduced.

मैं शेर हूँ और शेर एकता और सन्गठन में विश्वास नहीं करता| सच्चाई को छिपाना नपुंसकों का काम है| मुझे आइएसआई से भय नहीं है – लेकिन आप जैसों से है|

You should not criticise or condemn any religion or sect. This is contrary to teachings of Gita and Sanatan Dharma. I am convinced you have definitely not read the works of Sage Ved Vyas, Gemini, Agastaya, the Upanishads, the medieval saints and least about the teachings of Buddha or New testament.

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| यूँ तो वेदों और उपनिषदों पर तमाम पुस्तकें लिख सकता हूँ, लेकिन कृपया गीता का निम्नलिखित श्लोक पढ़ें और जानें कि गीता सनातन धर्म का ही एक ग्रन्थ है:-

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्‌ ।

स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥ (गीता ३:३५)

भावार्थ :  अच्छी प्रकार आचरण में लाए हुए दूसरे के धर्म से गुण रहित भी अपना धर्म अति उत्तम है। अपने धर्म में तो मरना भी कल्याणकारक है और दूसरे का धर्म भय को देने वाला है| (गीता ३:३५)

यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रध्यार्चितुमिच्छति|

तस्य तस्याचलां श्रधां तामेव विदधाम्यहम|| (गीता ७:२१)

जो जो भक्त जिस जिस देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करना चाहता है, उस-उस देवता के प्रति मै उसकी श्रद्धा को दृढ़ कर देता हूँ| (गीता ७:२१)

मैं बुद्ध भगवान की बात नहीं करता| अपने त्रिकाल संध्या में उनको सम्मान देता हूँ| लेकिन जारज और प्रेत ईसा के नए नियम को भलीभांति जानता हूँ, मैं ही नहीं हम सभी जानना चाहते हैं कि सबको अपने अधीन कराने वाला, (बाइबल, लूका १९:२७), मनुष्य के पुत्र का मांस खाने व लहू पीने की शिक्षा देने वाला (बाइबल, यूहन्ना ६:५३), तलवार चलवाने वाला (बाइबल, मत्ती १०:३४), धरती पर आग लगवाने वाला (बाइबल, लूका १२:४९), परिवार में शत्रुता पैदा कराने वाला {(बाइबल, मत्ती १०:३५-३६) व (बाइबल, लूका १२:५१-५३)}, बेटी से विवाह कराने वाला (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) व मनुष्य को भेंड़ बनाने वाला ईशा ईश्वर का पुत्र कैसे है? ईसा के अनुसार मुझे जीने का अधिकार ही नहीं है| (बाइबल, लूका १९:२७). समस्या इससे भी बड़ी है| ईसा अब अर्मागेददन द्वारा सभी मजहब मिटा देगा और केवल अपनी पूजा करवाएगा| उसके अनुयायियों ने अमेरिकी दस करोड़ से अधिक लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल लिया और अब काले भारतीयों और वैदिक सनातन संस्कृति को निगल रहे हैं| हमारी निःशुल्क वीर्यरक्षा और ब्रह्मज्ञान देने वाली गुरुकुल व्यवस्था को मिटा कर महँगी मैकाले की यौनशिक्षा देने वाली व्यवस्था थोप रखा है| वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का है| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है|

The vedic religion and Santan Dharma is at its nadir now and probably will become extinct in future like Jivikas of past centuries  due to foolishness and ignorance of our people and their criminal behaviour and intolerance. 

वैदिक सनातन धर्म किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"|

ठीक इसके विपरीत जहां आर्यों ने सभी देशों और मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम के लोगों को अल्पसंख्यक घोषित कर वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति और मूल निवासियों को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं|

The greatest harm to this country has been done due to absurd irrational conduct of illiterate politicians, false religious preachers and due to religious goondaism. No wonder post Ayodhya demolition thousands of our youth are turning to other religion in search of peace and tranquility and to escape from mythology and foolish bakwas of distortions. The vedic philosophy and spiritual heritage has already been deliberately kept behind curtains for petty financial gains and greed. The words like truth, honesty, kindness, compassion, love and gentleness are history in our practical life. You do not know how much damage you inflict on our nation and religion. In early eighties the world was turning to Gita and Vedic religion but then came Ayodhya demolition which was instigated and encouraged by a neighbouring country and with it came the demolition of Hinduism and temples. All over the world Hinduism got linked to disruption. The western and even Arabian youth who had got interested in Gita and Vedic philosophy took a turn never to look around. In the bargain to neutralize such events in future, our enemies engineered massive influx of their people to several millions WHO ARE VOTERS NOW. This event of Ayodhya was most happily celebrated in the high commission of a neighboring country and subsequently the top leadership of a political party which was in forefront of demolition were seen partying in this High Commission in Delhi.

Many write ups appear to be ISI sponsored under false assumed names to create bad blood between India and Western countries and to destroy Hinduism, like political conspirators tried to do by promising a temple which was meant never to be constructed. The aim was to gain power and strengthen ISI hold in India. I am sure these write ups will finish Vedic and Sanatan Dharma in next couple of decades unless Satya Maiv Jayta. MAY GOD BLESS INDIA WITH LOVE, PEACE, TRANQUILTY, KINDNESS, COMPASSION, CLENALINESS, LITERACY, PROSPERITY AND GET RID OF THUGS AND CHARLTANS AND DHONGI AND FAKE BABA'S

SM

हम असभ्य लोग हैं| ईसाईयों व मुसलमानों को तो इंडिया में रहना ही नहीं चाहिए| वे तमाम समृद्ध ईसाई व मुसलमान देश में सहजता से शरण ले सकते हैं|

हम असभ्य लोग कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देते| हमारा ईश्वर जारज(जार्ज) और प्रेत नहीं है| ईसाइयों का ईसा स्वयं जारज(जार्ज) है और उस ने प्रत्येक ईसाई परिवार को वैश्यालय बना दिया है| कुमारी माताएं प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| जारज(जार्ज) हमारे लिए अपमानजनक सम्बोधन हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों का शासक परिवार सम्मानित जारज(जार्ज) है| इतना ही नहीं ईसाइयों का मुक्तिदाता ईसा ही जारज(जार्ज) व पवित्र? प्रेत है| हमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे यहाँ विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियाँ नहीं बांटी जाती| इससे वीर्यहीनता के प्रसार और भेंड़ बनाने में एलिजाबेथ को कठिनाई हो रही है|

मानवमात्र को ज्ञात होना चाहिए कि ईसाइयों व मुसलमानों सहित हमारे पूर्वज इंजीलवादी ईसाई व लुटेरे मुसलमान द्वारा कत्ल किये गए और नारियों का बलात्कार किया गया| अब मानवमात्र अपने अपमान कर्ता उन्हीं असभ्य विश्वासी मजहबों के बचाव का अपराध कर रहा है| हम वैदिक पंथी अथवा मानवमात्र अपने पूर्वजों के हत्यारे मजहबों के प्रति निष्ठावान या आभारी नहीं हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) की शर्त और संरक्षण में वे चर्चों व मस्जिदों से हमारी हत्या व धर्मांतरण की खुल्लमखुल्ला घोषणा करते हैं|

मानवमात्र सावधान हो| अपने लोगों, अपनी नारियों, अपने पूर्वजों और अपने मूल वैदिक सनातन संस्कृति के साथ विश्वासघात न करे| क्या मानवमात्र को उन सम्प्रदायों का बचाव करने में लज्जा नहीं आती, जिन्होंने उसके पूर्वजों को दारुण दुःख दिए और मानवमात्र को मिटाने का कोई अवसर नहीं गवाने वाले? इन दैत्य गंदे मजहबों का बचाव करने के स्थान पर मानवमात्र को वैदिक सनातन संस्कृति का बचाव करना चाहिए| मानवमात्र आज चाहे मुसलमान या ईसाई जो हो, पूर्व में वह वैदिक सनातन संस्कृति का अनुयायी ही था| मानवमात्र को अपने पूर्वजों के वैदिक सनातन संस्कृति के वरासत पर गर्व होना चाहिए, जिसने मानव जाति को इतना कुछ दिया है|

मानवमात्र यह देख पाने में असमर्थ है कि दास जेसुइट और जिहादियों ने उसको ईसा और अल्लाह की आड़ में अपना मातहत और उपकरण बना रखा है और जिहाद और मिशन के बल पर अपना साम्राज्य थोप रखा है| मानवमात्र के पूर्वज दास जेसुइट और जिहादियों द्वारा कत्ल किये गये, धर्मान्तरित किये गये और नारियों का बलात्कार किया गया| अब्रह्मी संस्कृतियों को धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

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Dear Shri Surendra Mohan -- What you have written below is a good reminder to the Hindu fanatics of the kind, who do naked dance of Communalism,

Casteism, Criminal activities, threats on the otherwise decent Cyber Highway. 

डाक्टर रिबिरो महोदय,

यह विद्वान् सुरेन्द्र मोहन जी कौन हैं| आर्य असली साम्प्रदायिक हैं| क्योंकि आर्य जारज और प्रेत ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते| (बाइबल, लूका १९:२७). आर्य संसार को पापस्थल और सबको पापी स्वीकार नहीं करते| आर्य यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा नहीं लेते तो उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा और वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे| आर्य यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा ले लेंगे तो स्वर्ग जायेंगे और ईसा के साथ सदा रहेंगे|

अधीन रखने के लिए अधिनियम

अब्रह्मी संस्कृतियों द्वारा अपमानित होकर भी कोई विरोध न कर सके और मुसलमानों को अविश्वासियों को कत्ल करने की और विश्व में सरियत लागू करने यानी वैदिक सनातन संस्कृति को निर्मूल करने की शिक्षा मिलती रहे यह सुनिश्चित करने के लिए इंडिया में ई०स० १८६० में भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ को लागू किया गया था| गहन अध्ययन से पता चलता है कि इन धाराओं का संकलन बलबा रोकने के लिए या किसी की धार्मिक भावना को आहत होने से रोकने के लिए नहीं, जैसा कि बनावटी तौर पर धाराओं में बताया गया है, बल्कि वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को लगातार अपमानित कराने, नारियों का बलात्कार कराने, दास बनवाने अन्यथा नरसंहार कराने के लिए किया गया है| नागरिक की भावनाओं से इन धाराओं का कोई सरोकार नहीं है| क्यों कि इन धाराओं के अंतर्गत किये गये अपराध राज्य के विरुद्ध अपराध हैं और इन धाराओं के अपराध में अभियोग चलाने का अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश में से किसी एक को दिया गया है| नागरिक क्या राष्ट्रपति, राज्यपाल, पुलिस और जज भी असहाय हैं| मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा अविश्वासियों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ उपरोक्त धाराओं के अंतर्गत अपराध ही है, जो मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं किया गया| ( भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है व राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है) क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है| उपरोक्त धाराओं का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी नागरिक का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ और जेल में सन २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों ने किया है, तो उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये| यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है| सन १९५० में भारतीय संविधान को थोपे जाने के बाद स्थिति और भयावह हो गई है| जिनके पास वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के जान-माल की रक्षा का दायित्व है, उनको पद, प्रभुता और पेट के लोभ में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए विवश कर दिया गया है| संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| ईमाम मुसलमानों को काफिरों के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है| बदले में सर्वोच्च न्यायालय, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर, काफिरों के कर के पैसे से मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/ ) और ईमामों को वेतन दिलवाने के लिए विवश है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६).

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To Shri Ayodhya Prasad Tripathi, Self-Appointed Press Secretary of so-called Aryavrt Government. Not only I know Hindi well, but I also know Sanskrit and Ardhamagadhi, since I learnt through Marathi medium and you should not be surprised if I speak better Hindi than you.  Attached below the two photos is  my poem, a Jugal Bandi with Shri Atal Behari Vajpayee (reproduced from my 42nd book Dr. Leo's Lens - The Blueprint for a Holistic Development of India.

You say Christianity and Islam are criminal religions. I agree in parts. But Brahmins and Jews are the worst.  Brahmins are rapists, thieves, plunderers, murderers, extortionists and idiots -- the second Bombay riots were engineered by your types and the reason why your Sadhvi and others are rotting in jail.

डाक्टर साहब! मुझे यह जान कर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि आप मुझसे अच्छी हिंदी बोल सकते हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों को अपराधी मैं नहीं कहता – यह तो उनकी व्यवहार संस्कृति से स्पष्ट है| आप अपना ही उदाहरण ले लीजिये| आप हम ब्राह्मणों को बलात्कारी, चोर, लुटेरे, खूनी, शोषक और मूर्ख मानते हैं| मैं आप द्वारा दिए गये सभी विशेषणों को सिरोधार्य करता हूँ, लेकिन आप हम अपराधियों के बीच रह कर अपमानित क्यों हो रहे हैं, जब कि हम आर्यों का एक भी देश नहीं है और तमाम ईसाई देशों में आप भाषण भी देचुके हैं| आप किसी मनपसन्द देश में क्यों नहीं चले जाते? कारण यही है कि आप इंडिया पर हमारा अधिकार स्वीकार ही नहीं करते! और एलिजाबेथ ने तो इंडिया को अपना उपनिवेश बना ही रखा है| इस सोने की चिड़िया भारत को ईसाइयों ने, जहाँ मैकाले को १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी नहीं मिला – जहाँ आज भी आप के ईसाई परिवारों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं – बलात्कारी, चोर लुटेरा इत्यादि बना रखा है|

Let me tell you something -- no matter how much noise you and your NaMo makes, you are NOT going to win.  No one trusts him. Hence, LK Advani is standing from Jaipur. And NaMo himself is not sure and hence he is thinking of standing from two places. If you challenge me -- a truly secular, vegetarian, Sanatani, working more than you for ban on cow slaughter, Ayurveda, Yoga (I started teaching Yoga when your Baba Ramdev was 3 years old baby), Nature Cure etc. For your information, I have lectured in 65 countries, written 45 books, trained and treated over a million people, and if you have read my article Chikni Chameli, you should know me by now that I am not afraid of anyone.

I suggest you view my following two videos of 18 minutes each. and then talk to me:

http://www.youtube.com/watch?v=G7dVnYa2FjQ  (Hindi).

http://www.youtube.com/watch?v=hO79hONqmn4  (English).

Do not take panga with me. Otherwise, I bet I will stand against Narendra Modi from Gandhi Nagar, Gujarat and will defeat him with a sizeable margin.  I am ready to give that to you in writing on a hundred rupee stamp paper.

मुझे यह जान कर पुनः प्रसन्नता हुई कि आप शाकाहारी, योगशिक्षक, गौ रक्षक और सनातनी हैं| मैं पूर्णतः आश्वस्त हूँ कि आप, ईवीएम की हेराफेरी से, नमो को पराजित करेंगे, लेकिन मेरी समस्या यह है कि आप या नमो की अपनी सीमाएं हैं; क्यों कि जब तक इंडिया उपनिवेश रहेगा और जब तक भारतीय संविधान लागू रहेगा न आप कुछ कर पाएंगे और न नमो|

मैं अस्सी वर्ष का बीमार बूढ़ा व्यक्ति हूँ| लगभग २ अरब की सम्पत्ति का स्वामी था – मेरी सारी सम्पत्ति एलिजाबेथ ने लूट ली है| मैं सरकारी नौकर भी हूँ| लेकिन मुझे पेंशन नहीं मिलती| २००१ में तिहाड़ जेल में मुझे जहर दिया गया था| भिक्षाटन पर जीवित हूँ| अतः मैं पंगा तो ले ही नहीं सकता| मेरे लिए तो यही बहुत है कि ईसाई होते हुए भी आप योग में विश्वास करते हैं| यानी वैदिक सनातन संस्कृति की महत्ता को स्वीकार करते हैं| ब्रह्मचर्य व निःशुल्क गुरुकुल शिक्षा को पुनर्स्थापित करने में अपनी शक्ति लगाइए और मानवमात्र का कल्याण कीजिये|

आप का ही परभक्षी, मूर्ख और बलात्कारी ब्राह्मण:-

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

०५ मार्च. २०१४

 

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