Rajypal Kaun

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Dated; Monday, February 06, 2012y

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राज्यपाल किसलिए

भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेता है, मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|

जिस सम्पत्ति के लिए नेता व लोकसेवक नागरिक व मानवजाति को संकट में डाल रहे हैं, उसे लूटने के लिए ही लोकतंत्र, समाजवाद, ईसाइयत और इस्लाम की स्थापना की गई है| इन व्यवस्थाओं में नागरिक की स्थिति किसान के बैल से भी गई बीती है| सम्मान, सम्पत्ति और स्वतंत्रता चाहते हों तो वैदिक पंथी बनें, अन्यथा मिटने के लिए तैयार रहें|

मनुष्य निर्मित मजहबों को अपराधों के साथ घालमेल कर और स्वयं को शैतानों जेहोवा और अल्लाह का मध्यस्थ बताने वाले धूर्त पैगम्बरों को राज्यपालों ने पूज्य बना रखा है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). सदाबहार झूठे, देश हत्यारे पाकपिता गाँधी को बाप बना रखा है. हजारों निरपराध नागरिकों की प्रतिदिन हत्याएं, लूट व नारियों का बलात्कार ईमाम, पुरोहित व शासक से धन येंठ कर मीडिया के इस उद्घोषणा के साथ जारी है कि ईसाइयत और इस्लाम शांति और प्रेम के मजहब हैं. कुरान गैर-मुसलमान को अपराधी मानता है और बाइबल गैर-ईसाई को. किसी को इस बात की लज्जा नहीं है कि उसका शासक व पैगम्बर खूनी, शांति का शत्रु, लुटेरा व नारियों के बलात्कार का समर्थक है. आर्थिक ठगिनी प्रतिभा और जेसुइट सोनिया उर्फ एंटोनिया माइनो सत्ता के शिखर पर बैठी हैं. हद तो यहाँ तक आ पहुंची है कि किसी को भी कुरान व बाइबल के सम्बन्ध में प्रश्न पूछने का अधिकार न इस्लाम (कुरान ५:१०१-१०२) व ईसाइयत देते हैं, न लोकतंत्र (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६) और न न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५,  प१०४). जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) यानी अजान प्रायोजित व संरक्षित है. मै आप लोगों की आत्मघाती विवशता में मानव जाति का विनाश देख रहा हूँ.

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं कीधाराओं १९६ व १९७ केसंरक्षण में|

कौन है सोनिया

वैदिक पंथी ईसाइयत और इस्लाम के विरुद्ध हैं. देश की छाती पर सवार जेसुइट सोनिया ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै न उनकी आयु का विचार करूंगी, न लिंग का, न परिस्थिति का. मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव न हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|

इंडिया में लोकतंत्र नहीं सोनिया केलिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है. सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. क्या आप ने सोचा कि यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

राज्यपाल की विशेषता यह है कि वह जनता का चुना प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि सोनिया का मनोनीत प्रदेश का शासक होता है, जिसे सोनिया जब चाहे उसके पद से हटा सकती है| यद्यपि राज्यपाल जनता का प्रतिनिधि नहीं होता, फिर भी जनता द्वारा चुनी हुई किसी भी सरकार को हटा कर राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है| इस प्रकार तानाशाह सोनिया पर नियंत्रण ईसा व पोप का है|

इसके अतिरिक्त राज्यपालों को दंप्रसंकीधाराओं १९६ व १९७ के अधीन दो विशेष अधिकार दिए गए हैं| दंप्रसंकीधारा१९६ के अधीन राज्यपाल ईशनिंदा और धर्मान्तरण करने वाले मुसलमान और ईसाई को कानूनी संरक्षण देते हैं और साथ ही साथ जो भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करता है उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत जेल भेजवाने की संस्तुति करते हैं| इसी प्रकार राज्यपाल लोकसेवक से दंप्रसंकीधारा१९७ के अधीन भयादोहन द्वारा जनता की सम्पत्ति लुटवाते हैं| उनको संरक्षण देते हैं| जब लोकसेवक लूट एकत्र कर लेता है तो उसकी आय उसके ज्ञात आय स्रोतों से अधिक हो जाति है और जो भी लूट लोकसेवक के पास होती है, उसे अन्य लोकसेवकों द्वारा लुटवा कर राज्यपाल सोनिया तक पहुँचाने का प्रबंध करते हैं|

यह कैसा लोकतंत्र व चुनाव है, जिसमे सोनिया द्वारा मनोनीत राज्यपाल प्रदेश की जनता द्वारा चुने हुए सरकार को मिनटों में हटा देता है? चुनाव द्वारा मतदाता भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग) में कोई परिवर्तन नहीं कर सकते| ज्ञातव्य है कि अनुच्छेद २९(१) किसी को जीने का अधिकार नहीं देता और ३९(ग) किसी नागरिक को सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार नहीं देता| दोनों अनुच्छेदों को नीचे उद्धृत कर रहा हूँ:-

भारतीय संविधान का अनुच्छेद(१) जाति हिंसक, बलात्कारी व दासता पोषक है. देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा." भारतीय संविधान का अनुच्छेद(१) भाग ३ मौलिक अधिकार.

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है. (कुरान ८:१२)

नेताओं, सुधारकों, संतों, मीडिया, इस्लामी मौलवियों, मिशनरी और जजों सहित लोकसेवकों द्वारा जानबूझ कर मानवता को धोखा दिया जा रहा हैं. सच छुपा नहीं है, न ही इसे जानना मुश्किल है.  मानव उन्मूलन की कीमत पर  आतंकित और असहाय मीडिया जानबूझकर अनभिज्ञ  बनी हुई है. मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा तब तक जिहाद और मिशन जारी रहेगा, जब तक हम उनके साधन और प्रेरणा स्रोत को नष्ट न कर दें. उनके साधन पेट्रो डालर और मिशनरी फंड और प्रेरणा स्रोत कुरान (कुरान ८:३९) और बाइबल (बाइबल, लूका १९:२७) हैक्या अपने बचाव हेतु नवयुवक आर्यावर्त सरकार की सहायता करेंगे?

एक प्रमुख अंतर यह भी है कि जहां ईसाइयत और इस्लाम को अन्य संस्कृतियों को मिटाने में लंबा समय लगा वहीँ वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए २६ नवम्बर, १९४९ को संविधान बना कर ईसाइयत और इस्लाम के हाथों में सौँप दिया गया है| अजान को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध नहीं माना जाता| प्रेसिडेंट व हर राज्यपाल ने अजान व मस्जिद को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), पुलिस के संरक्षण और दंप्रसंकीधारा१९६ के कवच में रखा है| अजान देने के बदले सरकारें इमामों को सरकारी खजाने से वेतन दे रही हैं| वह भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से! (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). अजान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इसके विपरीत जो भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध कर रहा है, दंप्रसंकीधारा१९६ के अंतर्गत जेल में ठूस दिया जा रहा है|

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग).

उपरोक्त अनुच्छेद के संकलन का फलितार्थ समझिए. लोक सेवक को नागरिक की सम्पत्ति को छीनने के लिए ही नियुक्त किया जाता है. लोकसेवक के नौकरी की अघोषित शर्त यह है कि लोक सेवक को नागरिक को लूटना पड़ेगा. सम्पत्ति का संकेन्द्रण तो होगा लेकिन सोनिया के पास. इसके गणित को समझिए. इस अनुच्छेद के अधीन नागरिक की सारी सम्पत्ति सोनिया की है| खूंटे से बंधे किसान के पशु की भांति टाटा व अम्बानी के पास भी अकूत सम्पदा सोनिया की दया पर उनके पास है. जब लोकसेवक भ्रष्टाचार करता है तो उसे अपराधी नहीं माना जाता, माना यह जाता है कि लोकसेवक ने ऐसा सरकारी सेवा के अधीन किया है और उसे दंडित नहीं किया जा सकता|

चिदम्बरम सहित दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है. वर्तमान परिस्थितियों में सोनिया द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोक सेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें. इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. भारतीय संविधान ने इनकी पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक नागरिक ईसा की भेंड़ है. अगर हम जीवित रहना चाहते हैं, तो हमारे पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. 

मुसलमान और ईसाई लोग स्वेच्छा से दासता स्वीकार करते हैं, इसीलिए शासकों से संरक्षण और सहायता पा रहे हैं. इसके अतिरिक्त मुसलमान (कुरान ८:३९) और ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) दोनों ही स्वयं दास हैं और मानवमात्र को दास बनाने के लिए युद्धरत हैं, ताकि मानवमात्र को मूर्खों का स्वर्ग मिले. [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)]. {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)}

इन परिस्थितियों में मानवमात्र को उपासना और सम्पत्ति की स्वतंत्रता देने वाले वैदिक सनातन धर्म को मिटाना राजनीति का आवश्यक अंग बन गया है. अतएव यदि वैदिक सनातन धर्म बचाना हो तो ईसाइयत और इस्लाम के समूल नाश अतिरिक्त अन्य विकल्प नहीं है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने नागरिकों से जीवन और अनुच्छेद ३९(ग) ने सम्पत्ति रखने का अधिकार २६ जनवरी, १९५० से ही छीन लिया है.

वोट द्वारा भी नागरिक अ० २९(१) व ३९(ग) को नहीं बदल सकते. स्वयं लोकसभा व सर्वोच्च न्यायलय भी कुछ नहीं कर सकती.

मुहम्मद के कार्टून बनाने पर ईशनिंदा के लिए मौत का  फतवा देने वाले मूर्ख मुसलमान (कुरान २:३५), वैदिक सनातन धर्म का और ईश्वर का, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन सरकार द्वारा दिए गए संरक्षण में हमारे कर के वेतन से अजान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करें? पाकपिता गाँधी और भारतीय संविधान ने हमसे उपासना की स्वतंत्रता का वादा किया गया है, ईमाम मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैं? हम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें? ईश्वर का अपमान कराने वाली सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं.

मस्जिदों से ईमामों के खुतबों को ध्यानपूर्वक सुनिए. 

ईमामों को कुरान के आदेशों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की भी आवश्यकता नहीं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर आप के कर से प्राप्त १० अरब रुपयों में से वेतन लेकर ईमाम बदले में कुरान के सूरह अनफाल (८) की सभी मुसलमानों को सीधी शिक्षा देते हैं. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). अजान द्वारा ईमाम स्पष्ट रूप से गैर-मुसलमानों को चेतावनी देते हैं कि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. अल्लाह के आदेश से ईमाम कहता है कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुश्मन हैं. (कुरान ४:१०१). कुछ खुतबे कुरान के सूरह अनफाल (८) में स्पष्ट दिए गए हैं. अल्लाह निश्चय रूप से कहता हैं कि उसने मुसलमानों को जिहाद के लिए पैदा किया है, युद्ध (जिहाद) में लूटा हुआ माल, जिसमे नारियां भी शामिल हैं, अल्लाह और मुहम्मद का है. (कुरान ८:१, ४१ व ६९). जान लो जो भी माल लूट कर लाओ, उसका ८०% लूटने वाले का है. शेष २०% अल्लाह, मुहम्मद, ईमाम, खलीफा, मौलवी, राहगीर, यतीम, फकीर, जरूरतमंद आदि का है. (कुरआन ८:४१). लूट ही अल्लाह यानी सत्य है. लूट में विश्वास करने वाले विश्वासी हैं. गैर-मुसलमानों के गले काटो, उनके हर जोड़ पर वार करो और उनको असहाय कर दो. क्यों कि वे अल्लाह के विरोधी हैं, (कुरआन ८:१२). जो भी अल्लाह और मुहम्मद के आदेशों का उल्लंघन करता है, वह जान ले कि अल्लाह बदला लेने में अत्यंत कठोर है. (कुरआन ८:१३). काफ़िर के लिए आग का दंड है. (कुरआन ८:१४). जब काफिरों से लड़ो तो पीठ न दिखाओ. (कुरआन ८:१५). तुमने नहीं कत्ल किया, बल्कि अल्लाह ने कत्ल किया. (कुरआन ८:१७). मुसलमानों को लड़ाई पर उभारो. (कुरआन ८:६५). तब तक बंधक न बनाओ, जब तक कि धरती पर खून खराबा न कर लो. (कुरआन ८:६७). जो भी लूट का माल तुमने (मुसलमानों ने) प्राप्त किया है, उसे परम पवित्र मान कर खाओ. (कुरआन ८:६९). सत्य स्पष्ट है. काफिरों को आतंकित करने व समाप्त करने के लिए मुसलमानों में जोश पैदा करते हुए अल्लाह कहता है, जब तुम काफिरों से लड़ो, तो उनको इस तरह परास्त करो कि आने वाले समय में उन्हें चेतावनी मिले. काफ़िर यह जान लें कि वे बच नहीं सकते. (कुरआन ८:६०). जो मुसलमान नहीं वह काफ़िर है| कत्ल से कुफ्र बुरा है (कुरान २:१९१). इस्लाम है तो काफ़िर कि मौत पक्की|

मानव जाति जीवित नहीं बच सकती. मीडिया यह सवाल नहीं उठाती. 

जब मानव के विश्वास को ठेस लगती है तो वह प्रतिवाद पर उतर आता है| मुसलमान और ईसाई प्रतिवाद की आड़ में जीते हैं. बाइबल के अनुसार ईसाईयत व कुरान के अनुसार इस्लाम हत्यारे, लुटेरे व बलात्कारी इस्लाम व मुसलमान दासों का अंधकार पूर्ण स्वर्ग है| लेकिन वे ऐसा मानने को तैयार नहीं| एक बार इनको प्रकाश मिल जाये तो ये लोग दुबारा उस अंधकार के स्वर्ग में नहीं जा सकते| मीडिया, पुरोहित, ईमाम, शिक्षक और शासक यही स्थिति आने नहीं दे रहे हैं|

व्यभिचार से उत्पन्न ईसा अपने अनुयायियों को स्वयं पापी व व्यभिचारी बनाता है. बाप की कुदृष्टि पुत्रवधुओं और बेटियों पर रहती है, जो माँ-बेटी, सास-बहुओं और बाप-बेटों में कलह व कुंवारी माताओं के उत्पत्ति का कारण बनती है.

आर्य अपनी बेटी या पुत्रवधू से विवाह नहीं करते| जब कि हर ईसाई को सोनिया के ईसा ने अपनी बेटियों से विवाह का अधिकार दिया है. (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) और अल्लाह ने पुत्रवधू से निकाह का अधिकार. (कुरान, ३३:३७-३८). मुसलमान व ईसाई के पास किसी भी नारी के बलात्कार का भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त है. [(कुरान २३:६) (बाइबल, याशयाह १३:१६)]. आर्य ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते| (बाइबल, लूका १९:२७). आर्य संसार को पापस्थल और सबको पापी स्वीकार नहीं करते. आर्य यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा नहीं लेते तो उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा और वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे| आर्य यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा ले लेंगे तो स्वर्ग जायेंगे और ईसा के साथ सदा रहेंगे|

उनके सारे अपराध क्षमा कर दिए जायेंगे, चाहे उन्होंने कितने भी कत्ल, बलात्कार और लूट-मार किये हों! आर्य विवेक में विश्वास करते हैं, जिसे ईसाइयों से जेहोवा छीन लेता है| (बाइबल, उत्पत्ति २:१७). ईसाई अकाट्य प्रमाणों के बाद भी विश्वास कर रहे हैं कि जारज व प्रेत ईसा जेहोवा का इकलौता पुत्र है, जो तलवार चलवाने (बाइबल, मत्ती १०:३४) व मानवता को कत्ल कराने नहीं (बाइबल, लूका १९:२७) आया, बल्कि मूर्ख (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) ईसाइयों को मुक्ति दिलाने आया है| परिवार में शत्रुता पैदा कराने नहीं, अपितु प्रेम, सदाचार, सम्मान व मर्यादा स्थापित कराने आया है| (बाइबल, मत्ती १०:३५-३६) व (बाइबल, लूका १२:५१-५३).

ईसाई इसी ईसा की पापी भेंड़े बनने के लिए अपने ज्ञान (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) को तिलांजलि दे, स्वेच्छा से शासकों व पुरोहितों के दास बन चुके हैं| यही हाल लोकसेवकों का है| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व संविधानकाअनुच्छेद ३९(ग). अतएव गो-नरभक्षी सोनिया आर्यों का मांस खायेगी और लहू पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). ऐसे ईसाइयत और इस्लाम के संरक्षक भारतीय संविधान की शपथ लेने वालों को सत्ता से निकल दिया जाना चाहिए.

मीडिया कर्मियों! सोनिया आप लोगों का मांस खायेगी और रक्त पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). आप के नारियों का आप की आँखों के सामने बलात्कार कराएगी (बाइबल, याशयाह १३:१६) और आप लोग कुछ न कर पाओगे! आप लोगों के पास सोनिया को मार डालने का कानूनी अधिकार है| (भारतीय दंड संहिता की धाराएँ १०२ व १०५). लेकिन हिंसा का एकाधिकार राज्य के पास होता है| इसीलिए आर्यावर्त सरकार की स्थापना की गई है| क्या आप लोग मानव जाति की रक्षा के लिए आर्यावर्त सरकार की सहायता करेंगे?

काबा आप का शिव मंदिर है. उसके परिसर में स्थित ३५९ मूर्तियां अली ने तोड़ डाली थी. मूर्तियों को स्थापित करा कर हम अपने काबा और सउदी अरब को वापस लेंगे|

अजान हमारे आस्था और ईश्वर का अपमान है. हम अजान के विरुद्ध मुकदमा जीत चुके हैं. हम इस्लाम और मस्जिद नहीं रहने देंगे.

बाइबल और कुरान अपराध संहिताएं हैं व भारतीय संविधान इनकी संरक्षक. हम इनको जब्त करेंगे.

लोकपाल अन्ना लायेंगे व विदेशों में जमा धन योगगुरू. आर्यावर्त सरकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व अनुच्छेद ३९(ग) मिटाएगी. किसके साथ हैं आप?

मुसलमान विश्वास करते हैं कि जो जघन्य अपराधी अल्लाह पर विश्वास नहीं करता, उसको कत्ल कर देन ही उस पर रहम करना है. जिहाद यानी लूट, हत्या व बलात्कार स्वर्ग प्राप्ति का एक मात्र उपाय है. जब तक विश्वासी झूठ से घिरे रहेंगे, वे सत्य का सूर्य न देख सकेंगे. आज तक पादरियों, पुरोहितों, मौलवियों और इमामों ने उन्हें यही झूठ बताया है कि मात्र ईसा मुक्तिदाता है और अल्लाह ही जन्नत दे सकता है. वे या तो प्रभु इशु की भेंड़े बन जाएँ अथवा मुजाहिद. मुसलमान और ईसाई बुरे नहीं हैं, उनको बुरा ईसाइयत और इस्लाम बना रहे हैं. जो जितना ही अधिक कट्टर मुसलमान और ईसाई है, वह उतना ही मानवद्रोही, खून का प्यासा, बलात्कारी और दास है. उनके धर्मों के विकास का आधार ही घृणा, हत्या, बलात्कार और लूट है.

मुसलमान इनसे भी आगे हैं. (कुरान २:३५) वे हत्यारे, लूट के स्वामी व प्रोत्साहक, नारियों का बलात्कार कराने वाले अल्लाह को ईश्वर मानते हैं. बिना प्रमाण विश्वास करते हैं कि मुहम्मद अपने घोड़े बुरॉक पर सवार हो सातो (?) आसमान चीर कर अल्लाह से स्वर्ग में मिल आया. अल्लाह की दासता के लिए वे मानव बम बन रहे हैं.

जहां हम ब्रह्म की संतति हैं, वहीं ईसाइयत और इस्लाम के अनुयायी अब्रहमिक (Abraham's) संततियां हैं. जहां हम अपने ईश्वर से स्वतंत्रता और बुद्धि के प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं. (गायत्री मंत्र) वहीं यह मूर्ख लोग [(बाइबलउत्पत्ति २:१७) व  (कुरान २:३५)]  दास बनने और बनाने के लिए गोलबंद हो कर मस्जिदों से चिल्लाते हैं. हमारा ईश्वर हमें उपासना  की स्वतंत्रता देता है, (गीता ७:२१). जब कि अल्लाह का हठधर्म यह है कि जो भी अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा करे,  उसे कत्ल करो. स्वयम अल्लाह के दास बनो और औरों को बनाओ! हमको आजादी का वचन दिया गया है. हम सोनिया के दास नहीं बनेंगे.

http://www.aryavrt.com/fatwa

वस्तुतः हम ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है. (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५). हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है. हमें ज्ञात हो गया है कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने और मानव जाति को दास बनाने के लिए संकलित किया गया है. इंडिया में मुसलमानों और ईसाइयों को इसलिए रोका गया है कि दोनों ने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है. हमारा कथन है कि यदि आप अपनी, अपने देश व अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ ईसाइयत और इस्लाम के पोषक भारतीय संविधान कोनिजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए.

सोनिया के रोम राज्य में मंदिर तोड़ना अपराध नहीं माना जाता!

हम ईसाइयत और इस्लाम के विरोधी अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोग, यदि आप के समझ में आये व सहयोग दें तो, हम चर्च व मस्जिदें नहीं रहने देंगे. क्यों कि यदि  ईसाइयत और इस्लाम धरती पर रहेंगे तो मानव जाति व कोई मंदिर नहीं बच सकता.

हमने बाबरी ढांचा गिराया है. क्यों कि विवाद का मूल बिंदु है कि अपराध स्थल मस्जिद धरती पर क्यों रहें? मस्जिद बचाने वाले अपराधी हैं. स्वयं मैकाले के कथनानुसार १८३५ ई० तक मैकाले को पूरे इंडिया में एक भी भिखारी या चोर नहीं मिला क्यों कि तब वैदिक सनातन धर्म आधारित राजतंत्र था. पढ़ें मेरी पुस्तक अजान’. हमारे १२ अधिकारी मक्कामालेगांव आदि के विष्फोट में बंद हैं. मनुष्य के पुत्र का मांस खाने वाली और लहू पीने वाली सोनिया (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) द्वारा हम इसलिए सताए जा रहे हैं कि हम जानना चाहते हैं कि नारियों की लूट व उनके बलात्कार को निंदनीय न मानने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान ४:२४; २३:६; ३३:५० व ७०:३०). मुहम्मद की अपनी ही पुत्रवधू जैनब के साथ मुहम्मद का निकाह कराने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान, ३३:३७-३८). लुटेरा व हत्यारा अल्लाह ईश्वर कैसे है? मूर्ति भंजन कराने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). हत्या, लूट, बलात्कार, धर्मान्तरण और राष्ट्रांतरण की संहिता कुरान धर्मपुस्तक कैसे है?

सबको अपने अधीन कराने वाला, (बाइबल, लूका १९:२७), मनुष्य के पुत्र का मांस खाने व लहू पीने की शिक्षा देने वाला (बाइबल, यूहन्ना ६:५३), तलवार चलवाने वाला (बाइबल, मत्ती १०:३४), धरती पर आग लगवाने वाला (बाइबल, लूका १२:४९), परिवार में शत्रुता पैदा कराने वाला (बाइबल, मत्ती १०:३५-३६) व (बाइबल, लूका १२:५१-५३) और मनुष्य को भेंड़ बनाने वाला ईशा ईश्वर का पुत्र कैसे है?

इसी प्रकार पूजा स्थल भंजन कराने वाला, (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३), लूट व दूसरे के नारी के अपहरण की शिक्षा देने वाला (बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), दुधमुहों की हत्या कराने वाला और नारियों का उनके पुरूषों के आँखों के सामने बलात्कार कराने वाला जेहोवा ईश्वर कैसे है? (बाइबल, याशयाह १३:१६)

क्यों कि ईसाइयत और इस्लाम का लक्ष्य क्रमशः अर्मगेद्दन (armageddon) द्वारा ईसा के द्वितीय आगमन पर संसार को दास बना कर ईसा का राज्य स्थापित करना है और जिहाद द्वारा धरती पर इस्लामी शरियत का राज्य स्थापित करना है. यदि  ईसाइयत रहेगी तो सबको ईसा की बुद्धिहीन भेंड़ बन कर ईसा की दासता स्वीकार करनी पड़ेगी (बाइबल, लूका १९:२७) और इस्लाम धरती पर रहेगा तो सबका खतना होगा| (कुरान ८:३९). ईसाइयत और इस्लाम रहेगा तो कोई मंदिर नहीं बच सकता. किसी नारी की मर्यादा नहीं बच सकती है. इस्लाम सदा सदा के लिए काफिरों के गले पर रखी हुई तलवार है. अजान गैर-मुसलमान मानव जाति के आराध्य देवों का अपमान और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर-जमानती अपराध है-जिसके बदले दण्डित करने के स्थान पर ईमामों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर १० अरब रुपयों वार्षिक से अधिक ईमामों को वेतन दिया जा रहा है. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६).

जब हमने बाबरी ढांचा गिराया था तो मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड़े गए, जिनमे से ३८ की विधिवत प्राथमिकियां पंजीकृत हैं. जिसका विवरण हमारी पुस्तक 'अजान' के १० वें संलग्नक में उपलब्ध है. इन्हें आप हमारी वेब साईट http://www.aryavrt.com/azaan पर निः शुल्क पढ़ सकते हैं.

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

बाबरी विध्वंस के ४९ अभियुक्त बने और १७ वर्षों तक लिब्रहान आयोग जाँच की नौटंकी करता रहा. हमने १५ जनवरी २००१ को शपथपत्र दिया कि ढांचा हमने गिराया है, उसे चुरा लिया. जनता का ८ करोड़ रुपया डकार गया. लेकिन हमारे मंदिरों को तोड़ने वाला कोई अभियुक्त नहीं और न कोई जाँच आयोग. ४ मस्जिदों के विष्फोट के लिए हम भगवा आतंकवादी हैं! हम जानना चाहते हैं कि १०८ मंदिर तोड्वाने वाली सोनिया सरकार कौन है?

आतंकवादी भगवा धारी हैं या सरकार? हमारे मंदिरों पर सोनिया सरकार का कब्जा है, क्या किसी मस्जिद या चर्च पर भी सोनिया सरकार का कब्जा है?

हम ईसाई व मुसलमान, जो मजहब के नाम पर एक दूसरे का गला काटने पर उतारू हैं, सहित मानव जाति के लिए लड़ रहे हैं और आप के पास अपने शत्रु व मित्र की पहचान तक नहीं है. एक ओर सोनिया का रोम राज्य है और दूसरी ओर आर्यावर्त सरकार| निर्णय आप के हाथों में है. आप दासता और मृत्यु चाहेंगे या आजादी और सम्मान?

ईसाइयत और इस्लाम

यहूदीवाद, ईसाइयत और इस्लाम की मौलिक कमजोरी उनके चारित्रिक दोष में है. ईसाइयत और इस्लाम व्यक्ति के व्यक्तिगत विवेक का उन्मूलन कर उसे बिना सोचे समझे हठी मजहबी सिद्धांतों की अधीनता को स्वीकार करने के लिए विवश करते हैं. ईसा व मुहम्मद ने मानव की पीढ़ियों से संचित व हृदय से सेवित सच्चरित्रता, सम्पत्ति व उपासना की स्वतंत्रता और नारियों की गरिमा व कौमार्य को लूट व यौनाचार के लोभ में इनके अनुयायियों से छीन लिया है. कुरान व बाइबल हर विवेक, तर्क या प्राकृतिक सिद्धांतों के ऊपर हैं| वह बात भी और वह निंदनीय कार्य भी सही है, जिसे स्वाभाविक नैतिकता की कसौटी पर स्वयं इन पैगम्बरों के गढे ईश्वर भी सही नहीं मानते, क्यों कि पैगम्बरों ने ऐसा कहा व किया था| उदाहरण के लिए चोरी, लूट व नारी बलात्कार ईसाइयत और इस्लाम दोनों में निषिद्ध है| लेकिन इतर धर्मावलंबियों की लूट (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व नारी बलात्कार स्वर्ग प्राप्ति का एकमात्र उपाय है| ईसाइयत और इस्लाम के ईश्वरों ने विवेक व सहज अंतरात्मा के उद्गार को निषिद्ध कर दिया है| (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५) ईसाइयत और इस्लाम के अनुयायियों के बाइबल व कुरान के आज्ञाओं व मुहम्मद व ईसा के कार्यकलापों पर कोई प्रश्न नहीं कर सकता| (कुरान ५:१०१ व १०२). (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). मानव अपनी तर्क-बुद्धि से कुछ भी कह या कर नहीं सकता. स्वाध्याय व आत्मचिंतन के लिए ईसाइयत और इस्लाम में कोई स्थान नहीं| अशांति, हत्या, लूट व बलात्कार के विरुद्ध भी, जिनका ईसाइयत और इस्लाम समर्थन करते हैं, अनंत काल से प्रतिपादित वेदों व स्मृतियों का प्रयोग सर्वथा वर्जित है|

इस्लाम सदा सदा के लिए काफिरों के गले पर रखी हुई तलवार है. अजान गैर-मुसलमान मानव जाति के आराध्य देवों का अपमान और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर-जमानती अपराध है-जिसके बदले दण्डित करने के स्थान पर ईमामों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर १० अरब रुपयों वार्षिक से अधिक वेतन दिया जा रहा है. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). आप अजान, नमाज, ईमाम या कुरान को ईशनिंदा का दोषी नहीं ठहरा सकते| लेकिन यदि आप कुरान की असलियत को प्रकाशित कर दें तो ईश-निंदक हैं| सारी विषमताओं के होते हुए भी कुरान व बाइबल पर उंगली नहीं उठाई जा सकती. ऐसा करना ईश-निंदा है. जिसके लिए ईसाइयत और इस्लाम में मृत्युदंड है और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर-जमानती अपराध है, जो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा राज्यपालों से नियंत्रित है और मात्र हिंदुओं पर लागू है.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

 

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