Prgya Abhiyog MHA

साध्वी प्रज्ञा ...

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साध्वी प्रज्ञा को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम से बचाना चाहती हैं| साध्वी प्रज्ञा ईसाइयत और इस्लाम को मिटाने के लिए ही जेल में हैं| आज भी उनकी ललकार है, “सोनिया सत्ता में क्योंकाबा मूर्तिपूजकों की है। कुरआन लूट संहिता है। अजान ईशनिंदा है। अतएव साध्वी के सपनों को साकार कीजिये| चर्च, मस्जिद, अजान और संविधान मिटाइए|

 

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पांचजन्य साप्ताहिक से ...

न्यायाधीश महोदय! सुनिए एक साध्वी की करुण पुकार

तारीख: 2/2/2013 2:36:27 PM

 

सोनिया कांग्रेस के दरबारी महासचिव दिग्विजय सिंह ने एक जुमला उछाला 'भगवा आतंकवाद', तो सोनियाकी अध्यक्षता वाली संप्रग सरकार ने उसे सिद्ध करने के लिए कुछ षड्यंत्र रचे। आतंकवाद विरोधी दस्ते (एंटीटेरेरिस्ट स्क्वाड-एटीएस) ने सरकार के इशारे पर समझौता एक्सप्रेस विस्फोट, मालेगांव विस्फोट, मक्कामस्जिद में धमाका आदि मामले दोबारा खंगाले और झूठी कहानी, झूठे सुबूत गढ़कर कुछ हिन्दुओं को पकड़ा,उनमें स्वामी असीमानंद और साध्वी प्रज्ञा सिंह प्रमुख हैं। हालांकि 5 साल बाद भी इनमें से किसी के भीखिलाफ पुख्ता जानकारी नहीं दी गई है, पर विचाराधीन कैदी बनाकर प्रताड़ित किया जा रहा है, ताकि 'भगवाआतंकवाद' के नाम पर कुछ भगवा वेशधारी चेहरों को प्रस्तुत किया जा सके। मालेगांव विस्फोट के संदर्भ में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह इन दिनों बहुत बीमार हैं और उन्होंने जेल से ही न्यायाधीश महोदय को जो मार्मिक पत्र लिखा, उसे यहां हम प्रस्तुत कर रहे हैं, पूरी सच्चाई आपके समक्ष स्वत: ही आ जाएगी। -सं.

ईसाइयत और इस्लाम को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से संरक्षण देना स्वयं में एक षड्यंत्र है| मिडिया भारतीय संविधान का विरोध कब करेगी?

टिप्पणी: एक सुबूत है| वह है विशेष गृह सचिव सुश्री चितकला जुत्शी का दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्यपाल से दिलाया गया अभियोग चलाने का संस्तुति पत्र| मोटरसाइकिल का इंजिन न० चैसिस न० मिटा हुआ है| यानी अभियोग का सुबूत ही नहीं है|

Extract of Sanction order No. TER-0109/CR NO- 34/SPL-1-B, Home Department (Special) Mantralaya, Mumbai-400 032, Dated the 17th January, 2009, By order and in the name of the Governor of Maharashtra, signed by Ms. Chitkala Zutshi, Addl. Chief Secretary (Home), Maharashtra Government, Mumbai, Web site http://www.aryavrt.com/Home/chargesheet-download Vol-1a page 88 "In furtherance of the criminal conspiracy hatched by arrested and wanted accused persons, the arrested accused at Sr. No. 1 knew that her LML Freedom Motor cycle vide No. GL-05-BR-1920 was being used by the wanted accused person at Sr. No. 1. The wanted accused at Sr. No. 1 had knowingly not only erased the chassis and engine number but also used bogus registration number vide MH-15 P-4572 of LML Freedom Motor cycle. This fact is emerged in a statement of one of the witnesses."

 

भारतीय संविधान का संकलन मानव मात्र के मौत का फंदा है| इसका संकलन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है| आप को कोई स्व(अपना)राज नहीं मिला| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| देखें, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(ii). आप ने अपनी धरती, [(कुरान २:२५५) व (बाइबल, लूका १९:२७)], सम्पत्ति [(बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९), नारियां [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)], जीने का अधिकार [(बाइबललूका १९:२७) व (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९)] और अपने पूजा स्थल [(कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३)] गवां दिए हैं| भारतीय संविधान, अनुच्छेद ३९(ग)] और उपासना की आजादी (अजान, कुरान ३:१९) गवां दी है| 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() का संकलन कर वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों की आर्थिक धार्मिक स्वतंत्रता, धरती, देश, सम्पत्ति नारियां उनसे चुरा कर संयुक्त रूप से ईसाइयों व मुसलमानों को सौँप दिया गया है| दास मुसलमान और ईसाई लोगों को लड़ कर यह निर्णय कर लेना चाहिए कि विश्व पर अधिकार मुसलमानों का रहेगा या ईसाइयों का| यहाँ भी एक समस्या है| जीते चाहे कोई, रहेगा वह शासक (सोनिया) का दास ही!

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६

धारा १९६- राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – () कोई न्यायालय, - 

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय के अधीन या धारा १५३(), धारा २९५() या धारा ५०५ की उपधारा () के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; अथवा          

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८() में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं| ...|

यानी उपरोक्त धारा आप को उत्पीड़न के विरुद्ध शिकायत करने के अधिकार से भी वंचित करती है! वस्तुतः हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार से जुड़े बागियों ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है| हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है| {(बाइबलउत्पत्ति :१७) (कुरान :३५)}| हमें ज्ञात हो गया है कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म सहित मानव जाति को मिटाने मानव मात्र को दास बनाने के लिए संकलित किया गया है| इंडिया में मुसलमानों और ईसाइयों को इसलिए रोका गया है कि दोनों ने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है| वैदिक सनातन संस्कृति मिटाना दोनों के लिए ईश्वरीय आदेश है| यदि आप अपनी, अपने देश अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ ईसाइयत और इस्लाम के पोषक भारतीय संविधान कोनिजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए|

उपरोक्त कानून अफजलों, कसाबों, बुखारियों आदि को कवच प्रदान करता है| नीचे लोकसेवकों को कवच प्रदान करने वाले कानून को उद्धृत करता हूँ,

संघ परिवार हमारे राम राज्य को अतिवादी और आतंकवादी मानता है और मुस्लिम परस्त है| संघ परिवार ने हमारे असीमानंद का खून पीकर, उनको सोनिया के जल्लादों के हाथों सौँप दिया है| अतएव मानव जाति का शत्रु है| सोनिया को ईसा का राज्य स्थापित करना है| हमसे पाकपिता गाँधी ने स्व(अपना)तन्त्रता और रामराज्य का वादा किया है| अमेरिकीभारतीय और संयुक्त राष्ट्र संघ का सार्वभौमिक मानवाधिकार का घोषणापत्र हमे उपासना की आजादी का वचन देते है| हमें आतंक के बल पर अल्लाह के उपासना की दासता/अधीनता और ईसा का रोम राज्य स्वीकार करने के लिए विवश किया जा रहा है| लेकिन हमें ईसा के रोम राज्य में रहने और अल्लाह की उपासना करने के लिए विवश नहीं किया जा सकता| मस्जिद गिराना गैर-मुसलमान का कानूनी अधिकार है| जो भी ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षक है, मानव जाति का शत्रु है|

दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी करें| इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| ऐसे -भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| जिन संतों को अपने मठ, मंदिर, गीता, गौ, गायत्री, गंगा और वैदिक सनातन धर्म का अस्तित्व चाहिए, वे हमसे फोन (०)९१५२५७९०४१/९८६८३२४०२५ पर सम्पर्क करें|

राम और रहीम – कृष्ण और करीम का एका पाकिस्तान में सम्भव न हुआ| जिन्होंने पाकिस्तान से हिंदुओं को ठोकरें मार कर भगा दिया| उनकी नारियों को नंगा करके जुलूस निकाला| नारियों को पशुओं की भांति बाजारों में बेचा| नारियों का बलात्कार किया| हिंदुओं के खेत, घर व पैत्रिक सम्पत्तियां लूट लीं| हिंदुओं को जान बचा कर भागने को विवश किया| आप उनका गुणगान करते हैं

क्या आप बताएंगे कि,

हम ने कब कहा कि या तो वेदिकपंथ स्वीकार करो, अथवा जजिया दो अन्यथा हम तुम्हें कत्ल करेंगे? हमने गैर हिंदुओं के साथ नहीं रह पाने की घोषणा कर के देश का बंटवारा कब कराया? कत्ल करने, लूटने और नारी बलात्कार केबदले ईश्वर ने हमें स्वर्ग कब दिया?

क्या हम ईमामों की भांति बांग लगाते हैं या नमाज पढ़ते हैं कि मात्र ईश्वर ही पूज्य है? हमारे किस धर्म ग्रन्थ में लिखा है कि जो आर्य नहीं है, उसे कत्ल कर दो| हमारे मंदिरों में तो घोषणा की जाती है, धर्म की जय हो| अधर्म का नाश हो|| प्राणियों में सद्भावना हो... विश्व का कल्याण हो...|

अपनी खैर मनाइये भट्ट जी! आप लोगों से राम राज्य का वादा किया गया था, सोनिया के रोम राज्य में रहते हुए आप लोगों को लज्जा क्यों नहीं आती? ईमाम आप को गाली देता है| आप की आजादी छीनता है| क्या आप को नहीं मालूम कि संविधान ने आप को आजादी का वचन दिया है? भारतीय दंड संहिता की धारायें १०२ व १०५ आप को प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार देती हैं| आप के पास हर ईसाई व मुसलमान को कत्ल करने का अधिकार है| ईमामों को दंडित करने के स्थान पर सोनिया ईमामों को वेतन दिलवा रही है| वह भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से! एआईआर, एस सी १९९३, २०८६| ईमाम के लिए आप काफ़िर हैं| इस्लाम है तो काफ़िर नही| हम आप के लिए लड़ रहें हैं और आप लोग अपने सर्वनाश की जड़ मस्जिदों और ईमामों को बचाने के लिए हमें प्रताडित कर रहे हैं| आप को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं|

मुसलमान और ईसाई अल्पसंख्यक नहीं हैं

मुसलमान और ईसाई अल्पसंख्यक नहीं, बल्कि क्रमशः विश्व की द्वितीय प्रथम आबादी हैं| अल्पसंख्यक तो हम वैदिक सनातन धर्म के अनुयायी हैं| भारतीय संविधान के अधिकार से सोनिया हमे मिटा रही है| जिन मुसलमानों ईसाइयों को पाकपिता गाँधी ने रोका है वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() से मिले असीमित मौलिक अधिकार और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन सरकार से प्रायोजित संरक्षण मे भारत को दार उल इस्लाम ईसा का राज्य बनाना चाहते हैं| रोकना चाहते हों तो आर्यावर्त सरकार को छिप कर सहयोग दें| क्योंकि हमें खुलकर मदद नहीं कर सकते|

ईसाइयत और इस्लाम के फलने-फूलने का कारण अज्ञान वश लूट और नारी शोषण के लिए शासकों और पुरोहितों के समक्ष समर्पण है| ईसाइयत और इस्लाम को बनाये रखने का भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() असीमित मौलिक अधिकार देता है| अल्लाह पुत्र वधू से निकाह कराता  है (कुरान ३३:३७-३८) और ईसा बेटी से विवाह कराता है| (बाइबल कोरिंथियन :३६). संवैधानिक अधिकार से {भारतीय संविधान अनुच्छेद २९()नारी का बलात्कार या तो ईसाई करेगा (बाइबलयाशयाह १३:१६) या मुसलमान| (कुरान२३:}| यदि आप ने ऐसा कहा तो मुसलमान ईसाई आप को ईश निंदा के लिए कत्ल कर देंगे| सोनिया सरकार आप पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत अभियोग चलवाएगी| सोनिया और हामिद अंसारी सदा सुरक्षित रहेंगे| जजों ने इसकी पुष्टि की है| (एआईआरकलकत्ता१९८५प१०४). क्या जज कुछ कर पायेगेआप को इसका उत्तर देना है!

गैर मुसलमानों के विरुद्ध मुसलमानों का जिहाद और जाति हिंसा तो कश्मीर में आज भी जारी है|आतंकवादी सोनिया सरकार है या भगवा धारी?

अमेरिका आज भी है, लेकिन लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई| सोनिया वैदिक सनातन संस्कृति मिटाएगी, आप का मांस खाएगी और लहू पीयेगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३).  इंडिया तो रहेगा| लेकिन सुशीलकुमार शिंदे, पृथ्वीराज शंकरनारायणन और उनकी वैदिक सनातन संस्कृति  बचेगीबचना हो तो अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिये| यह युद्ध मात्र हम लड़ सकते हैं| ईसाइयत और इस्लाम को धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है| चर्चों व मस्जिदों से ईसाई व मुसलमान को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है| अतएव चर्च व मस्जिद नष्ट करना भारतीय दंड संहिता के धारा १०२ के अधीन हमारा कानूनी अधिकार है| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट के अभियुक्त हैं| हमारे ९ अधिकारी २००८ से जेलों में बंद हैं| जिन लोगों को अपना जीवन, अपनी आजादी और अपनी नारियों का और अपना सम्मान चाहिए हमे सहयोग दें| हम ईसाइयत और इस्लाम को नहीं रहने देंगे|

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वो (यहूदी)  एक कमजोर कौम थी

हिन्दू और यहूदी धर्म में वैसे तो कोइ समानता नहीं, लेकिन फिर भी आज दोनों धर्म समान धरातल पर खड़े दिखते हैं. यहूदी धर्म से जहां इस्लाम और इसाइयत दोनों का ही उद्भव हुआ, वहां हिन्दू धर्म तो खुद ही बहुत सारे धर्मों का समागम है, और भी कई दूसरे धर्मों का जन्म उससे हुआ.

 

दोनों ही धर्म पुराने हैं लेकिन जहां यहूदी धर्म अब धरातल से लगभग मिट चुका है (इसके सिर्फ 1 करोड़ बीस लाख मानने वाले ही दुनिया में हैं) वहां हिन्दू धर्म अब भी प्रबल रूप से जीवित है (लगभग 85 करोड़ मानने वाले). दोनों ही धर्म अब मुख्य रूप से एक राष्ट्र में सिमट चुके हैं और दोनों पर ही अब्राहमिक धर्म (इस्लाम और इसाइयत) की टेढ़ी नजर है|

 

दोनों ही धर्मों का जोर प्रसार और लोगों को अपने धर्म में शामिल करने पर नहीं है.

 

किसी जमाने में यहूदी बेहद कमजोर कौम हुआ करती थी. यह कौम पूरे युरोप में बिखरी हुई थी और अमेरिका में अपना प्रभाव बनाना शुरु ही किया था. संख्या में कम, लेकिन आर्थिक रूप से संपन्न और पढ़े-लिखे लोगों की यह कौम बहुत से इसाइयों की आंखों में खटकती थी. पूर्वाग्रह की हद क्या होगी यह इससे ही समझ सकते हैं कि शेक्सपीयर तक ने अपने नाटक मर्चेन्ट आफ वेनिस में यहूदी व्यापारीयों को खुल कर कोसा था. याद है आपको शाइलॉक? ये भी याद करिये कि जोर उसके उस खास वर्ग के होने पर बहुत था.

 

असल में इसाइयत का यहूदियों से पुराना बैर था, उनके नबी (जीसस) को भी आखिर यहूदियों के कहने पर ही कत्ल किया गया था. बहुत दिनों तक इसाई यहूदियों द्वारा दमित भी रहे, लेकिन रोमन राजा के इसाई धर्म अपनाने के बाद इसाईयत का जोर युरोप में जो हुआ वह अब तक चालू है. धीरे-धीरे यहूदी और युरोप के बाकी धर्म हाशिये पर चले गये. यहूदी भी इस नई व्यवस्था में मिल गये. अब वह न शासक रहे न शोषक, वर्ण व्यवस्था में भी उनका स्थान दोयम था, लेकिन अपनी मेहनत लगन और अक्ल से वह समाज में आगे रहे. (स्वयं ईसाई ही कहते हैं कि ईसा कभी धरती पर पैदा ही नहीं हुआ)

 

लेकिन उनके पास न सामरिक शक्ति थी, ना राजनैतिक, और यह बात उन्हें बहुत महंगी पड़ी. द्वितीय विश्वयुद्ध में 30 लाख यहूदियों को हिटलर और दूसरे यहूदी विरोधियों ने मार दिया और यहूदी कुछ नहीं कर पाये. वह एक कमजोर कौम थी जिसपर जो चाहे, जैसा चाहे अत्याचार कर सकता था. हिटलर ने यह्युदियों को शहर से दूर अलग इलाकों में रहने पर मजबूर किया, और हर यहूदी को अपनी पहचान के लिये खास मार्क पहनना होता था (स्टार) जिस तरह आज तालिबानी पाकिस्तानी में इस्लाम को न मानने वालों को पहनना होता है.

 

यहूदियों ने बुरे दिन पहले भी देखे थे, लेकिन हर बार वो आगे बढ़ गये और पुराने दुख भूलते गये. लेकिन जिन्हें यह यहूदियों कि कमजोरी लगी, उन्होंने इसे कायरता समझा. उस समाज में यह बात प्रचलित थी कि यहूदी में हिम्मत नहीं होती. वह डरपोक होता है. जबर मुस्लिम और ईसाई दोनों ही इस कमजोर कौम को दबा-कुचल कर खुश थे.

 

यहूदियों ने एक भी युद्ध नहीं लड़ा.

उनकी कोई सेना नहीं थी.

वो सब के सब गैर सैनिक नागरिक थे जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध में पकड़-पकड़ कर मारा गया, उनके साथ कैम्पों में अमानवीय व्यवहार किया गया और गैस चैम्बरों में भर दिया गया.

 

बिना युद्ध लड़े एक कौम के 30 लाख लोगों की हत्या?

जो उस समय कुल यहूदी जनसंख्या की आधी थी!

मतलब एक कौम को आधा साफ कर दिया गया!

 

जिन कमजोर और बेबस यहूदियों को इतनी आसानी से मौत दी गई आज वह कहा हैं?

 

    उनका प्रभुत्व अमेरिका की राजनीति पर है.

    दुनिया का हर रैडिकल यहूदियों के नाम से कांप उठता है.

    यहूदी लड़ाके दुनिया में सबसे ज्यादा खतरनाक हैं.

    यहूदियों के अस्त्र-शस्त्र बहुत उन्नत हैं.

 

आज यहूदी ऐसी जगह रहते हैं जहां वो हर तरफ से दुश्मनों से घिरे हैं. फिर भी उनका वजूद प्रबल है. उनका हर दुश्मन उनसे घबराता है और उनके आगे पानी मांगता है.

 

क्यों?

क्योंकि 30 लाख लोगों को खोने के बाद यहूदियों ने फैसला किया

 

Never again!

दोबारा कभी नहीं.

 

यही उनकी जीवनशैली है दोबारा कभी नहीं!

 

    आज के यहूदियों में मुझे कल के हिन्दुओं का चेहरा दिखाई देता है.

 

क्योंकि दुनिया में यह भी इतने ही अकेले हैं जितने की यहूदी. रैडिकल ईसाइयत और इस्लाम का जितना दबाव हिन्दुओं पर बढ़ रहा है उसकी वजह से हिन्दू धर्म ने जो राह पकड़ी है वह शायद उसी मोड़ पर रुकेगी जिस पर आज यहूदी हैं|

 

भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है|

केवल वे ही संस्कृतियां जीवित बचीं, जिन्होंने भारत में शरण लिया| इसीलिए परभक्षी संस्कृतियां ईसाइयत और इस्लाम वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाना चाहती हैं, ताकि सबको अपना दास बना कर निर्ममता पूर्वक लूटा जा सके|

जहां हिंदुओं ने सभी देशों ओर मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| मन्दिरों के चढ़ावों को लूट रहे हैं|

वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबललूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३)]. 

नेताओं, सुधारकों, संतों, मीडिया, इस्लामी मौलवियों, मिशनरी और लोकसेवकों द्वारा जानबूझ कर मानवता को धोखा दिया जा रहा हैंसच छुपा नहीं है, न ही इसे जानना मुश्किल है| मानव उन्मूलन की कीमत पर आतंकित और असहाय मीडिया जानबूझकर अनभिज्ञ  बनी हुई है| मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा तब तक जिहाद और मिशन जारी रहेगा, जब तक हम उनके साधन और प्रेरणास्रोत को नष्ट न कर दें| उनके साधन पेट्रो डालर और मिशनरी फंड और प्रेरणास्रोत कुरान (कुरान ८:३९) और बाइबल (बाइबल, लूका १९:२७) है

स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो अर्मगेद्दन के लिए ईसा इस्लाम को भी मिटा देगा|

Http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

लोकसेवक दया के पात्र हैं| उन्होंने अपने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ ३९(). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान :१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:). इसके बदले में सोनिया का ईसा उनको बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस :३६) से विवाह का व अल्लाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार दे चुका है| जहां भारतीय संविधान ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है, वहीँ उनको वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है|

लोकसेवक के पास कोई विकल्प भी नहीं है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ|

लोकसेवक के अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही आप ही नहीं, सारी मानव जाति ईसा की भेंड़ हैं||

क्या आप हमे सहयोग देंगे?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

 

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मा. न्यायाधीश महोदय,

उच्च न्यायालय, मुम्बई (महाराष्ट्र)

द्वारा- श्रीमान अधीक्षक, केन्द्रीय कारागृह भोपाल (म.प्र.)

विषय- स्वास्थ्य विषय से सम्बन्धित।

महोदय,

मैं, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मालेगांव विस्फोट प्रकरण (2008) में विचाराधीन कैदी हूं और अभी एक अन्य प्रकरण में मध्य प्रदेश की भोपाल स्थित केन्द्रीय जेल में हूं। आज दिनांक 16 जनवरी, 2013 को जो सज्जन मुझसे जेल में भेंट करने आये उन्होंने आपके द्वारा आदेशित पत्र मुझे दिखाया, जिसमें आपने मेरी अस्वस्थता के उपचार हेतु उचित स्थान के चयन का निर्णय करने को कहा है। महोदय, मैं यह जानकर कि आपने मेरे स्वास्थ्य की संवेदनापूर्वक चिंता कर आदेश दिया, मैं आपकी बहुत-बहुत आभारी हूं। आपके आदेश से ही मुझे यह हौसला मिला है कि मैं आपसे अपनी मन:स्थिति व्यक्त करूं। मुझे लगता है कि आप मेरी सारी शारीरिक स्थिति, मानसिक स्थिति और विवशता को भली-भांति समझ सकेंगे। अत: मैं आपसे अपनी बात संक्षेप में कहती हूं, जो इस प्रकार है-

0 मैं बचपन से ही सत्यनिष्ठ, कर्तव्यनिष्ठ, सिद्वान्तवादी व राष्ट्रभक्त हूं। मेरे पिता ने मेरा निर्माण इन्हीं संस्कारों में गढ़कर किया है। मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता व देश की संभ्रांत नागरिक हूं।

0 मैं जनवरी, 2007 से संन्यासी हूं।

0 अक्टूबर, 2008 में मुझे सूरत से एटीएस इंस्पेक्टर सावंत का फोन आया कि आप कानून की मदद करिए, सूरत आ जाइये, मुझे आपसे एक 'बाइक' के बारे में जानकारी चाहिए। मैं कानून को मदद पहुंचाने व अपने कर्तव्य को निभाने हेतु 10 अक्टूबर सुबह सूरत पहुंची।

0 इं. सावंत ने अपने साथियों सहित अपने बड़े साहब के समक्ष पेश कर देने को कहकर 16 अक्टूबर की रात्रि को मुझे मुम्बई लाये। मुम्बई की काला चौकी में मुझे 13 दिनों तक गैरकानूनी रुप से रखा और भयानक शारीरिक, मानसिक व अश्लील प्रताड़नाएं दीं।

0 एक स्त्री होने पर भी मुझे बड़े-बड़े पुलिस अधिकारियों ने सामूहिक रुप से गोल घेरे में घेर कर बेल्टों से पीटा, पटका, गालियां दीं तथा अश्लील सी.डी. सुनवाई। उनका (एटीएस का) यह क्रम दिन-रात चलता रहा।

0 फिर पता नहीं क्यों मुझे राजपूत होटल ले गये और अत्यधिक प्रताड़ित किया जिससे मेरे पेट के पास फेफड़े की झिल्ली फट गयी। मेरे बेहोश हो जाने व सांस न आने पर मुझे एक प्राइवेट हास्पिटल  'सुश्रुशा' में आक्सीजन पर रखा गया। इसी हास्पिटल में झिल्ली फटने की रपट है। आपके आदेश पर वह रपट आपके समक्ष उपस्थित की जायेगी। दो दिन सुश्रुशा हास्पिटल में रखकर गुप्त रूप से फिर हास्पिटल बदल दिया और एक अन्य प्राइवेट हास्पिटल में आक्सीजन पर ही रखा गया। इस प्रकार 5 दिनों तक मुझे आक्सीजन पर रखा गया।

0 थोड़ा आराम मिलने पर पुन: काला चौकी के मि. सावंत के आफिस रूम में रखा गया तथा पुन: अश्लील गालियां, प्रताड़नाएं दी जाती रहीं।

0 फिर मुझे यहीं से रात्रि को लेकर नासिक गये, फिर 13 दिन बाद गिरफ्तार दिखाया गया। इतने दिनों मैंने कुछ खाया नहीं तथा प्रताड़नाओं और मुंह बांधकर रखे जाने से मैं बहुत ही विक्षिप्त अवस्था में आ गई थी।

0 इस बीच बेहोशी की अवस्था में मेरा भगवा वस्त्र उतार कर मुझे सलवार-सूट पहनाया गया।

0 बिना न्यायालय की अनुमति के, गैरकानूनी तरीके से मेरा नाकर्ो पौलिग्राफी व ब्रेन मैपिंग किया गया। फिर गिरफ्तारी के पश्चात पुन: ये सभी टेस्ट दोबारा किये गये।

0 जज साहब, इतनी अमानुषिक प्रताड़नाएं दिए जाने के कारण मुझे गम्भीर रूप से रीढ़ की हड्डी की तकलीफ व अन्य तकलीफें होने से मैं चलने, उठने, बैठने में असमर्थ हूं। इनकी (एटीएस की) प्रताड़नाओं से मानसिक रुप से भी बहुत ही परेशान हूंं। अब सहनशीलता की भी कमी हो रही है।

0 कारागृह में मुझे यह पांचवा वर्ष चल रहा है। इस कारागृही जीवन में भी मेरी सात्विकता नष्ट करने के लिये मुम्बई जेल में मेरे भोजन में अण्डा दिया गया। इस विपरीत वातावरण से मुझे अब और भी कोई गम्भीर बीमारियां हो गई हैं। अब मैं कैंसर (ब्रेस्ट) के रोग से भी ग्रस्त हो गयी हूं। परिणामस्वरुप मैं अब डाक्टरों के द्वारा बताया गया भोजन करने में भी असमर्थ हूं।

0 इन्ही तकलीफों के चलते मुझे इलाज के लिए, टेस्ट के लिये न्यायालय के आदेश पर मुम्बई व नासिक के अस्पताल भेजा जाता था, किन्तु वहां के पुलिसकर्मी जे.जे. हास्पिटल अथवा किसी सरकारी हास्पिटल अथवा आयुर्वेदिक हास्पिटल ले जाते, जहां न्यायालय का आदेश देखकर मुझे 'एडमिट' तो किया जाता था, कागजी कार्रवाई की जाती, किन्तु मेरा उपचार नहीं किया जाता था।

0 2009 में एक बार मेरा ब्रेस्ट का आपरेशन किया गया, 2010 में पुन: वहां तकलीफ हुई। मैं मकोका हटने पर नासिक के कारागृह में थी। वहां मुझे जिला अस्पताल भेजा गया। न्यायालय के आदेश पर एक टीम बनाई गई जिसने अपनी रपट में पुन:. आपरेशन की सलाह दी। किन्तु मकोका लगने पर मुझे पुन: मुम्बई ले जाया गया।

0  अभी मैं मार्च, 2012 से म.प्र. की भोपाल जेल में हूं। यहां मेरा स्वास्थ्य बिगड़ने पर जब अस्पताल भेजा गया तो वहां भी पुलिस वालों ने जबरन पेरशान किया। जेल प्रशासन इलाज करवाना चाहता था, किन्तु जो सुरक्षा अधिकारी मेरे साथ थे, वे अमानवीय गैरकानूनी व्यवहार करते रहे। अत: मुझे अस्पताल से बिना उपचार के वापस आना पड़ा। ऐसा कई बार हुआ।

0 ऐसा अभी तक निरन्तर होता आ रहा है। मैं इलाज लेना चाहती थी, टेस्ट भी करवाने अस्पताल गयी, किन्तु सरकारी रवैया, कोर्ट, कानून, पुलिस के झंझटों से डरकर कोई उपचार ही नहीं करना चाहता। अब मैं पांच वर्षों से इन सभी परेशानियों को झेलते-झेलते थक गई हूं।

0 महोदय मैंने अब यही तय किया कि संन्यासी जीवन के इस शरीर को तमाम बीमारियों से अब योग-प्राणायाम से जितने दिन चल जाये, उतना ठीक है, किन्तु अब जेल अभिरक्षा में रहते हुए कोई इलाज नहीं करवाऊंगी। महोदय, मैंने यह निर्णय स्वेच्छा से नहीं लिया है। कारागृही जीवन, तमाम प्रतिबन्धों के परिणामस्वरुप तनाव से शरीर पर विपरीत असर होने के चलते विवश होकर ही मैंने यह निर्णय लिया है। आप इसे अन्यथा न लें और मेरी भावना व परिस्थिति को समझें।

0 महोदय मैं एक संन्यासी हूं। हमारा त्यागपूर्ण संयमी जीवन होता है। स्वतंत्र प्रकृति से स्वतंत्र वातावरण में ही यह संभव होता है। 5 वर्षों से मेरी प्रकृति, दिनचर्या, मर्यादा, मेरे जीवन मूल्यों के विपरीत मुझे अकारण कारागृह में रखा गया है। अत: इन प्रताड़नाओं व अमानवीयता से एक संन्यासी का संवेदनशील जीवन असम्भव है।

0  मैंने सभी विपरीत परिस्थितियों से अपने को अलग करने का प्रयास कर इन शारीरिक कष्टों को सहते हुए अपने ठाकुर (ईश्वर) के स्मरण में ही अपने को सीमित कर दिया है। जितने दिन जिऊंगी, ठीक है, किन्तु उचित उपचार व जांच से दूर रहूंगी। यदि स्वतंत्र हुई तो अपनी पंसद का उपचार, बिना किसी बंधन के करवा कर इस शरीर को स्वस्थ करने तथा संन्यासी जीवन पद्धति से मन को ठीक कर कुछ समय जी सकूंगी।

0 महोदय आपसे अनुरोध है कि आप मेरे तथा भारतीय संस्कृति में एक संन्यासी जीवन की पद्धति व इसके विपरीत दुष्परिणामों को अनुभूत करेंगे। मेरे निर्णय को उचित समझकर मेरे निवेदन पर ध्यान देंगे। यदि मेरे लिये कानून के अन्तर्गत स्वतंत्रता (जमानत) का प्रावधान है, क्योंकि में अभी संशयित (विचारधीन) हूं, तो आप अपने विवेकीय मापदण्डों पर मुझे जमानत देने की कृपा करें।

0 मेरे द्वारा लिखे गये प्रत्येक कारण के लिखित सबूत हैं, यदि आपका आदेश हुआ तो वह सभी सबूत आपके समक्ष (मेरी रपट सहित) प्रस्तुत की जा सकती है। मैं कानून की धाराएं नहीं जानती हूं। बस इतना है कि मैंने कोई अपराध नहीं किया है। मैंने हमेशा एक राष्ट्रभक्तिपूर्ण, संवैधानिक, नियमानुसार जीवन जिया है, अभी भी जी रही हूं। आज तक मेरा कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। मुझे मुम्बई एटीएस ने जबरन इस प्रकरण में फंसाया है।

निवेदक: प्रज्ञा सिंह

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ANNEXURE-4

प्रज्ञा ठाकुर की एम्बुलेंस में पेशी, इलाज इंदौर में

www.patrika.com | discovered: 4/26/2011 6:45:00 AM | published: 4/26/2011 6:45:00 AM

 

देवास। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को मुम्बई पुलिस सोमवार को पेशी के लिए न्यायालय लेकर पहुंची, मगर स्वास्थ्य ठीक होने के कारण उनकी पेशी एम्बुलेंस में हुई और बाद में उनको उपचार के लिए इंदौ ...

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Home ministry gives nod to NIA to prosecute Pragya Singh Thakur

Amarjeet Singh, TNN | Aug 13, 2014, 04.11PM IST

 

BHOPAL: Six years after Rajnath Singh publicly claimed Sadhvi Pragya Singh Thakur, an accused in RSS pracharak Sunil Joshi murder case, was innocent and harassed, the ministry of home affairs headed by him has given the go-ahead to National Investigation Agency (NIA) to prosecute her.

 

UPA had sat on the same request by NIA since January this year till it lost the elections. But it took the new home minister just two months of coming to power to give the green signal to prosecute the sadhvi.

 

On Friday, NIA informed a special court in Bhopal that it has got the MHA's nod to file a charge-sheet in the Sunil Joshi murder case and requested the court to grant time to prepare the charge-sheet, which was granted. Court has fixed the next date of hearing on August 19.

सुनील हत्याकांड : प्रज्ञा सहित 8 के खिलाफ चालान पेश

कीर्ति गुप्ता|Aug 19, 2014, 14:05PM IST

 

भोपाल। आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में लंबे समय से जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) ने मंगलवार को भोपाल में स्पेशल जज विजय कुमार पांडे की अदालत में प्रज्ञा ठाकुर सहित 8 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर दिया।

एनआईए ने किया था नया खुलासा...

एनआईए ने इस मामले में एक सनसनीखेज खुलासा किया था। एनआईए का कहना है कि जोशी की हत्या् की एक वजह साध्वीन प्रज्ञा सिंह ठाकुर के प्रति उनका यौन आकर्षण हो सकता है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्साप्रेस ने इस बारे में रिपोर्ट छापी है। मध्यप्रदेश की देवास पुलिस जोशी हत्याकांड में बतौर आरोपी साध्वीग का नाम पहले ही दर्ज कर चुकी है। प्रज्ञा ठाकुर 2008 के मालेगांव बम धमाकों की भी आरोपी हैं।

जोशी को लेकर चिंतित थीं प्रज्ञा

एनआईए का दावा है कि जोशी का प्रज्ञा ठाकुर के प्रति यौन आकर्षण था और यह उनकी हत्या  का एक वजह बना। उधर, प्रज्ञा को इस बात की चिंता थी कि आतंकवादी वारदात को अंजाम देने की लिए जो योजनाएं बनाई गई थीं, कहीं जोशी उनका खुलासा कर सकते थे। एनआईए के सूत्रों के मुताबिक, अजमेर ब्लास्ट के बारे में जोशी द्वारा जानकारियों को सार्वजनिक करने से रोकने के लिए प्रज्ञा ने आनंदराज कटारिया को करीब 10 दिनों तक अपने घर में रखा था। गौरतलब है कि देवास पुलिस ने कटारिया को आरोपी बनाया था, लेकिन जोशी मर्डर मामले में एनआईए की अंतिम लिस्टर में उनका नाम शामिल नहीं किया गया था।

8 लोगों को आरोपी बनाया

जोशी मर्डर केस की जांच में 2011 के बाद तब बदलाव आया, जब मालेगांव ब्लास्ट मामले में मध्य  प्रदेश के महू में कुछ गिरफ्तारियां हुईं और देवास पुलिस ने पहली चार्जशीट दाखिल की। एनआईए गिरफ्तार किए गए चार लोगों- राजेंद्र चौधरी, लोकेश शर्मा, जीतेंद्र शर्मा (भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता) और बलबीर सिंह को अब प्रज्ञा ठाकुर के साथ जोशी हत्याेकांड मामले में आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि राजेंद्र और लोकेश ने ही 29 दिसंबर 2007 की रात जोशी का कत्लत किया था। जीतेंद्र शर्मा ने इसके लिए पिस्तौल मुहैया कराई थी और बलबीर सिंह ने इसे छिपाया था।

रची जा रही थी हमले की साजिश

एनआई का यह भी दावा है कि लोकेश, राजेंद्र और जोशी एक बड़ी साजिश रच रहे थे और मुसलमानों को निशाना बनाकर ज्यातदा से ज्यादा हमले करने की फिराक में थे।

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विचारणीय बातें...

सत्ता में आते ही जो राजनाथ साध्वी प्रज्ञा को निर्दोष बता रहे थे, उन्होंने एकाएक साध्वी पर अभियोग चलाने की अनुमति कैसे दे दी? वह भी तक जब NIA ने जजों को सूचित कर दिया था कि साध्वी के विरुद्ध कोई प्रमाण नहीं है?

अब NIA दावा कर रही है, “लोकेश, राजेंद्र और जोशी एक बड़ी साजिश रच रहे थे और मुसलमानों को निशाना बनाकर ज्यातदा से ज्यादा हमले करने की फिराक में थे।

षडयंत्र स्पष्ट है. इंडिया पर आज भी शासन एलिजाबेथ का ही है| चुनाव धोखा है. माननीय प्रधानमंत्री नमो सहित सभी लोग भयाक्रांत हैं. पता नहीं कब एलिजाबेथ की नज़र फिर जाये और वे लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, संजय गांधी और राजीव गांधी की भांति कत्ल हो जाएँ?

मैं स्वयं इन आतताई कठपुतलियों को झेल रहा हूँ.

मैं यह भी जानना चाहता हूँ कि जब कुरान के अनुसार अल्लाह उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान :३९). काफ़िर को कत्ल करना दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद और असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार है| तब NIA मुसलमानों को - यानी अपने ही हत्यारों को क्यों बचाना चाहती है?

उपरोक्त समस्याओं का मैंने अपनी जानकारी के अनुसार नीचे की लिंकों में विश्लेषण किया है,

 

http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

http://www.aryavrt.com/muj14w33-smjhauta

http://www.aryavrt.com/muj14w11-upniveshke-viruddhyuddh

http://www.aryavrt.com/muj14w30-196crpc-upnivesh

http://www.aryavrt.com/muj14w30ay-pragyaki-abhiyogvapsi

http://www.aryavrt.com/muj14w32-15agst_ka-bahishkar_karen

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

http://www.aryavrt.com/muj14w33by-upnivesh-kajshn

 

जिस मस्जिदों से (अज़ान) ईशनिंदा की जाती है और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, उसे नष्ट करना अपराध कैसे है?

 

कृपया एलिजाबेथ के इंडियन उपनिवेश के झाडूं लगाने वाले दास सफाई कर्मचारी इन विडियों को देखें.

साध्वी प्रज्ञा...

https://www.youtube.com/watch?v=ltfjMTUESvs

http://www.aryavrt.com/muj14w41a-sadhvi-pragya

https://www.youtube.com/watch?v=wgcuILTGnwY

Aseemanand, Sadhvi Pragya Singh Thakur likely to be charged for 2006 Malegaon blasts

https://www.youtube.com/watch?v=tCBfJgV6NEs

Malegaon blasts accused Sadhvi Pragya refuses treatment

https://www.youtube.com/watch?v=qpD3iRSG2FI

Sadhvi Pragya Singh denied of bail

https://www.youtube.com/watch?v=Dvv3_4nAOjw

Sadhvi Pragya Thakur arrested in jOSHI MURDER

https://www.youtube.com/watch?v=dzJdH8G3t_w

@narendramodi

Sadhvi pragya ko ab tk kyon nhin chhoda?

साध्वी प्रज्ञा को अब तक क्यों नहीं छोड़ा?

https://www.youtube.com/watch?v=TUWvGrJcmFc

स्वामी साध्वी प्रज्ञा के लिए...

https://www.youtube.com/watch?v=DQaHkPx_nLc

Dr Swamy asking Justice Katju to Plead for Sadhvi Pragya Singh Thakur

साध्वी राजनाथ और मुख्य मंत्री शिवराज के कार्यक्रम में...

https://www.youtube.com/watch?v=rri0Noktjuw

साध्वी प्रज्ञा योगी आदित्य नाथ

https://www.youtube.com/watch?v=_tk3ZFQ-SrE

Yogi Adityanath Speaks On Sadhvi Pragya & Swami Aseemanand - India TV

साध्वी प्रज्ञा ने जोशी मामले में अपने को निर्दोष बताया.

https://www.youtube.com/watch?v=r-QfE1kpxVU

I am innocent: Sadhvi Pragya

साध्वी के विरुद्ध NIA की चार्जशीट...

https://www.youtube.com/watch?v=6AMFs3APXfY

NIA files chargesheet against Sadhvi Pragya Thakur. 27 DEC, 2013 NIA told inocence

 

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http://aajtak.intoday.in/story/nia-set-to-drop-case-against-sadhvi-pragya-others-arrested-by-mp-police-1-750617.html

जोशी हत्या.कांड: साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ केस वापस लेने की तैयारी में एनआईए.    

आज तक वेब ब्यूरो [Edited by: बबिता पंत] | नई दिल्ली, 27 दिसम्बर 2013 | अपडेटेड: 15:56 IST

टैग्स: साध्वी प्रज्ञा| एनआईए| सुनील जोशी| मालेगांव ब्लास्

 

आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी की हत्या के करीब छह साल बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने माना है कि मध्य प्रदेश पुलिस ने इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी कर गलती की है. साध्वी मालेगांव बम धमाके में भी आरोपी हैं. जोशी भी मालेगांव धमाके में आरोपी थे. इसके अलावा जोशी दिल्ली से लाहौर के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी, 2007 को हुए धमाके में संदिग्ध थे. जोशी की देवास में 29 दिसंबर, 2007 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

महाराष्ट्र में नासिक जिले के मालेगांव में सितंबर, 2008 में हुए बम धमाके में करीब 37 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सवा सौ से अधिक लोग जख्मी हुए थे. यह धमाका शुक्रवार के दिन एक मस्जिद के पास हुआ था.

 

एनआईए की जांच के मुताबिक जोशी की हत्या लोकेश शर्मा और राजेंद्र पहलवान ने की थी, जो समझौता ब्लास्ट में आरोपी हैं. इन दोनों ने प्रज्ञा ठाकुर से दुर्व्यवहार के चलते जोशी की हत्या कर दी थी. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस हत्याकांड में इन दोनों की मदद दिलीप जगताप और जीतेंद्र शर्मा नाम के दो लोगों ने की थी. ये चारों गिरफ्तार कर लिए गए हैं. यूथ बीजेपी के नेता जीतेंद्र को हाल में मध्य प्रदेश के महू से गिरफ्तार किया गया है. इसकी गिरफ्तारी के बाद एनआईए ने दावा किया कि इस मामले में जांच पूरी हो गई है.

 

एनआईए सूत्रों के मुताबिक इन लोगों को इस बात का डर था कि जोशी समझौता बम धमाके में इनकी मिलीभगत का भंडाफोड़ कर देंगे. बताया जाता है कि लोकेश और राजेंद्र का जोशी से पैसों के लेन-देन का भी विवाद था. एनआईए ने इन चारों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी मांगी है. मंजूरी मिलने के बाद ही इस मामले में चार्जशीट फाइल की जाएगी. जांच एजेंसी मर्डर में इस्तेीमाल किए गए हथियार की फॉरेंसिक रिपोर्ट पर भी गौर कर रही है.

 

जांच एजेंसी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, हर्षद सोलंकी, वासुदेव परमार, आनंद राज कटारिया और बीजेपी पार्षद रामचरण पटेल के खिलाफ लगे आरोपों को हटाने के लिए मध् प्रदेश स्थित स्पेडशल कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी. मध्य प्रदेश की पुलिस ने इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (मर्डर), 120-बी (आपराधिक साजिश) और 201 (सबूत मिटाने) के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था. ठाकुर इस वक्त जेल में हैं, जबकि परमार, कटारिया और पटेल जमानत पर रिहा हो चुके हैं.

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साध्वी प्रज्ञा की इस हालत का जिम्मेदार कौन है…?

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मालेगांव बम विस्फोट मामले में सरकार ने तब गिरफ्तार किया था जब सरकार ने नीति के आधार पर यह निर्णय कर लिया था कि आतंकवादी गतिविधियों में कुछ हिन्दुओं की संलिप्तता दिखाना भी जरुरी है। अभी तक आतंकवादी गतिविधियों में जितने लोग पकड़े जा रहे थे वे सब मुस्लिम ही थे। सोनिया कांग्रेस की सरकार को उस वक्त लगता था कि यदि आतंकवादी गतिविधियों से किसी तरह कुछ हिन्दुओं को भी पकड़ लिया जाये तो सरकार मुसलमानों के तुष्टीकरण के माध्यम से उनके वोट बैंक का लाभ उठा सकती है। इस नीति के पीछे ऐसा माना जाता है कि मोटे तौर पर दिग्विजय सिंह का दिमाग काम करता था। वे उन दिनों एक साथ दो मोर्चों पर काम कर रहे थे। व्यक्तिगत मोर्चा अमृता का था और संगठन के लिहाजा से मोर्चा आतंकवाद को भगवा बताने का था।

भगवा आतंकवादकी कहानी

इस एक पात्र से ही सोनिया कांग्रेस की भगवा आतंकवाद की कहानी बखूबी लिखी जा सकती थी। विद्यार्थी परिषद से प्रज्ञा ठाकुर के संबंधों को भगवा बताने में दिग्विजय सिंह जैसे लोगों को कितनी देर लगती। अब प्रश्न केवल इतना ही था कि प्रज्ञा ठाकुर को किस अपराध के अन्तर्गत गिरफ्तार किया जाये? जब सरकार पुलिस को कोई काम सौंप देती है और पुलिस के अधिकारी वे हों जो वकील लालकृष्ण आडवाणी उन्हें झुकने के लिये कहा गया था तो उन्होंने रेंगना शुरू कर दिया तो कैसे तैयार करने में क्या दिक्कत हो सकती है? 2006 और 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में बम विस्फोट हुए थे। उनमें शामिल लोग गिरफ्तार भी हो चुके थे। लेकिन जांच एजेंसियों को तो अब सरकार द्वारा कल्पित भगवा आतंकवाद के सिध्दांत को स्थापित करना था, इसलिये कुछ अति उत्साही पुलिस वालों ने प्रज्ञा ठाकुर को भी मालेगांव के बम विस्फोट में ही लपेट दिया और अक्तूबर 2008 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। प्रज्ञा को सामान्य कानूनी सहायता भी मिल सके इसके लिये उस पर मकोका अधिनियम की विभिन्न धाराएं आरोपित कर दी गई।

शारीरिक व मानसिक यातनाएं

लेकिन एक दिक्कत अभी भी बाकी थी। एक ही अपराध और एक ही घटना। उसके लिये पुलिस ने दो अलग-अलग केस तैयार कर लिये। एक साथ ही दो अलग-अलग समूहों को दोषी ठहरा दिया। पुलिस की इस हरकत से विस्फोट में संलिप्तता का आरोप भुगत रहे तथाकथित आतंकवादियों को बचाव का एक ठेस रास्ता उपलब्ध हो गया। इन विस्फोटों के लिये पकड़े गये मुस्लिम युवकों ने अदालत में जमानत की अर्जी लगा दी। यि पुलिस की जांच यह कहती है कि इन विस्फोटों के लिये मुसलमान दोषी हैं तो प्रज्ञा ठाकुर को क्यों पकड़ा हुआ है? लेकिन जेल में बन्द मुसलमानों ने तो यही तर्क दिया कि पुलिस ने स्वयं स्वीकार कर लिया है कि मालेगांव विस्फोट के लिये प्रज्ञा और उनके साथी जिम्मेदार हैं, इसलिये उन्हें कम जमानत पर छोड़ दिया जाय।

लेकिन पुलिस तो जानती थी कि प्रज्ञा ठाकुर की गिरफ्तारी तो मात्र सोनिया कांग्रेस के दिग्यविजय सिंह बिग्रेड की राजनीतिक पहल रंग भरने के मात्र के लिए उसका माले गांव के विस्फोट से लेना देना नहीं है। इसलिए पुलिस ने इन मुस्लिम आतंकवादियों की जमानत की अर्जी का डट कर विरोध किया। विधि के जानकार लोगों को तभी ज्ञात हो गया था कि सोनिया कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टीकरण के अभियान को पूरा करने के लिये साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की बलि चढ़ाई जा रही है।उसका बम विस्फोट से कुछ लेना देना नहीं है।

आज साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जेल में पड़े हुये छह साल पूरे हो गये हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी उस पर कोई केस नहीं बना सकी। उसके खिलाफ तमाम हथकंडे इस्तेमाल करने के बावजूद कोई प्रमाण नहीं जुटा सकी। एक स्टेज पर तो राष्ट्रीय जांच एजेंसी को कहना ही पड़ा कि साध्वी के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण इन पर लगे आरोप निरस्त कर देने चाहिये। यदि सही प्रकार से कहा जाये तो प्रज्ञा ठाकुर का केस अभी प्रारंभ ही नहीं हुआ है। सरकार उसकी जमानत की अर्जी का डट कर विरोध करती है। जेल में साध्वी को शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी गई। उनकी केवल पिटाई ही नहीं कि गई बल्कि उन पर फब्तियां कसी गई। डराने धमकाने का जो सिलसिला चला, उसको तो भला क्या कहा जाये? जेल में ही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को कैंसर के रोग ने घेर लिया। जेल में भला कैंसर जैसे प्राणघातक रोग के इलाज की क्या व्यवस्था हो सकती है? प्रज्ञा ठाकुर ने जमानत के लिये एक बार फिर आवेदन दिया। वे बाहर अपना कैंसर का इलाज करवाया चाहती थीं। लेकिन सरकार ने इस बार भी उनकी जमानत का जी जान से विरोध किया। उनकी जमानत नहीं हो सकी। इसे ताज्जुब ही कहना होगा कि जिन राजनैतिक दलों ने जाने-माने आतंकवादी मौलाना मदनी को जेल से छुड़ाने के लिये केरल विधानसभा में बाकायदा एक प्रस्ताव पारित कर अपने पंथ निरपेक्ष होने का राजनैतिक लाभ उठाने का घटिया प्रयास किया वही राजनैतिक दल साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को फांसी पर लटका देने के लिये दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करते हैं।

सोनिया कांग्रेस का षडयंत्र

आज प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बिना किसी अपराध के भी जेल में पड़े हुये लगभग छह साल हो गए हैं। प्रश्न है कि बिना मुकदमा चलाये हुये किसी हिन्दू स्त्री को, केवल इसलिये कि मुसलमान खुश हो जायेंगे, भला कितनी देर जेल में बंद रखा जा सकता है? पुलिस अपनी तोता-बिल्ली की कहानी को और कितना लम्बा खींच सकती है? लेकिन ताज्जुब है अब पुलिस ने जब देखा कि प्रज्ञा सिंह के खिलाफ और किसी भी अपराध में कोई सबूत नहीं मिला तो उसने सुनील जोशी की हत्या के मामले में प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जोड़ना शुरू कर दिया। पुलिस का कहना है कि सुनील जोशी ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर का यौन शोषण करने का प्रयास किया, इससे क्रुध्द होकर प्रज्ञा के साथियों ने सुनील का वध कर दिया। पहले यही पुलिस सुनील को आतंकवाद के साथ जोड़ रही थी, अब जब वहां कुछ नहीं मिला तो उसे यौन शोषण के साथ जोड़ कर उसकी हत्या को प्रज्ञा के माथे मढ़ने का प्रयास कर रही है।

किस्सा कोताह यह कि जांच एजेंसियों ने उस वक्त सोनिया कांग्रेस को खुश करने के लिये और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बदनाम करने के लिए प्रज्ञा सिंह ठाकुर को पकड़ लिया और अपनी कारगुजारी दिखाने के लिये उसके इर्द-गिर्द कपोल कल्पित कथाओं का ताना-बाना भी बुन लिया। इटली के मैकियावली से और लोग चाहे परिचित न हों लेकिन सोनिया गांधी का नाम सुनते-सुनते भारत के पुलिसवालों ने तो उसे अच्छी तरह जान ही लिया है। इसलिए निर्दोष को झूठे केस में कैसे फंसाना है, उसकी मैकियावली महारत तो पुलिस ने प्राप्त कर ही ली है। उसी का शिकार प्रज्ञा सिंह ठाकुर हो गई। दुर्भाग्य से मैकियावली ने यह नहीं बताया कि किसी निर्दोष को एक बार फंसा कर, फिर उसे बाहर कैसे निकालना है। यही कारण है कि पुलिस अपने आप को निर्दोष सिध्द करने के लिये अभी भी प्रज्ञा सिंह के इर्द गिर्द झूठ का ताना-बाना बुनती ही जा रही है। कैंसर की मरीज प्रज्ञा ठाकुर क्या दिग्विजय सिंह के बुने हुये फरेब के इस जाल से निकल पायेगी या उसी में उलझी रह कर दम तोड़ देगी? इस प्रश्न का उत्तर तो भविष्य ही देगा, लेकिन एक साध्वी के साथ किये इस दर्ुव्यवहार की जिम्मेदारी तो आखिर किसी न किसी को लेनी ही होगी।

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prgya.pdf
(238k)
AyodhyaP Tripathi,
Oct 29, 2014, 7:15 AM
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