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प्रेषक; अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी पुत्र स्व० श्री बेनी माधव त्रिपाठी, फोन; ९१५२५७९०४१

मंगल आश्रम, मुनि की रेती, टिहरी गढ़वाल, ऋषिकेश,  – २४९१३७ उख

दिनांक; शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

सेवा में,

उप सचिव (यांत्रिक) सिचाई विभाग,

उत्तर प्रदेश सचिवालय, सिचाई, लखनऊ| २२६००१

विषय; सेवा पुस्तिका और बकाया भुगतान|

सन्दर्भ: सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय दिनांक: १४-०८-२०१३ व मेरा पिछला पत्र दिनांक सोमवार, २२ जुलाई २०१३य.

महोदय;

कृपया मेरे पिछले पत्र २२ जुलाई २०१३ का संदर्भ लें|

१.      मेरी सेवा पुस्तिका २९ सितम्बर, १९८३ को विष्णु प्रयाग परियोजना खंड ३ से, संलग्न छाया प्रति के अनुसार, मूसाखंड बांध प्रखंड को भेजी गई थी, जो जानबूझ कर गायब की गई है| संलग्न सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक १४-०८-२०१३ के अनुसार विभाग मेरी पेंशन नहीं रोक सकता| फिर भी किसी न किसी बहाने अगस्त १९८४ से आज तक विभाग मुझे तंग कर रहा है|

२.      नयी सेवा पुस्तिका बनाने के लिए अधिशासी अभियंता तैयार नहीं हैं| भले ही मेरे पेंशन का निस्तारण कहीं हो, लेकिन ४ अगस्त, १९६९ से ६ फरवरी, १९८३ तक का बकाया वेतन तो मूसाखंड बांध प्रखंड को ही देना है| भुगतान तब तक संभव नहीं, जब तक मूसाखंड बांध प्रखंड सेवा पुस्तिका उपलब्ध न कराए|

३.      मैं वर्षों से बीमार चल रहा हूँ और चलने फिरने में असमर्थ हूँ| कृपया न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए मेरा बकाया वेतन दिलाने की कृपा करें|

 

भवदीय,

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

दिनांक; शुक्रवार, ३० अगस्त २०१३

पहले अधिशासी अभियंता श्री राम सजीवन, मूसाखंड बांध प्रखंड वाराणसी (फोन ९४५१६२३६४७) मोबाइल का जवाब भी देते थे, अब मेरा फोन उठाते ही नहीं| किसी और मोबाइल से बात करता हूँ, तो मेरी आवाज सुनते ही मोबाइल काट देते हैं| मेरी उप सचिव से करबद्ध प्रार्थना है कि जो भी सुविधा शुल्क लेना हो मुझसे ले लीजिए और आपस में बाँट लीजिए, लेकिन मुझे तबाह न कीजिए|

भवदीय

 

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

दिनांक: सोमवार, ९ सितम्बर 2013

प्रतिलिपियाँ: मुख्यमंत्री उप्र, सिचाई मंत्री यांत्रिक उप्र, प्रमुख अभियंता यांत्रिक, अधिशासी अभियंता मूसाखंड बांध प्रखंड, सिचाई कालोनी, सिगरा, वाराणसी, २२१००१.वर्तमान अधिशासी अभियंता श्री राम सजीवन मोबाइल ९४५१६२३६४७. प्रशासनिक अधिकारी श्री वीएन फडके मोबाइल ९४५०५३५८३४.

 

संलग्नकों के विवरण:

 

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इस फाइल में दिनांक: १४-०८-२०१३ का सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है, जो बताता है कि पेंशन सम्पत्ति है| उसे कानूनी प्रक्रिया के अधीन ही रोका जा सकता है, अन्यथा नहीं|


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इस फाइल में स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिबुनल, उप्र, का ८ पन्ने का निर्णय है|

 

JM SB83929

इस फाइल में वह पत्र है, जिसके अनुसार मेरी सेवा पुस्तिका मूसाखंड बांध प्रखंड वाराणसी को भेजी गई, जिसे विभाग के चोरों ने चुरा लिया है| तभी से आज तक इसका पता नहीं है| नई सेवा पुस्तिका कोई भी अधिशासी अभियंता बनवा न सका| पेंशन व बकाया देना तो बहुत दूर की बात है|

 

JM LRNTR84728

इस पत्र के द्वारा मैंने अपने सहायक अभियंता प्रथम से अनुरोध किया था कि बिना सेवा पुस्तिका और बकायों के विवाद को निपटाए मुझे कार्य मुक्त न किया जाये| प्रार्थना पर ध्यान देने के स्थान पर तत्कालीन मुख्य अभियंता ने मुझे अपने लखनऊ कार्यालय में अपमानित किया| मैं निराश हो कर अपने घर चला गया| दुबारा ट्रिब्यूनल से फैसला होने के बाद ही दिसम्बर ९४ में मूसाखंड वाराणसी गया और मुख्य अभियंता कार्यालय लखनऊ भी| लेकिन मुझे बताया गया कि फैसले के विरुद्ध विभाग इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील करेगा| इसी बीच ३१ अक्टूबर, २००० को मेरी सेवा निवृत्ति भी हो गई| १२ वर्षों तक यह मामला प्रदेश बंटवारे के कारण लंबित रहा| अब अधिष्ठान ११ से उत्तराखंड को १८-०४-२०१३ को उत्तर गया है कि विवाद का निस्तारण उत्तराखंड को करना है| लेकिन बिना सेवा पुस्तिका के कुछ नहीं हो सकता|

क्या उप्र सरकार मेरी सेवा पुस्तिका बनवाएगी एवं मेरे बकाए का भुगतान कराएगी?

भवदीय:-

 

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

दिनांक: सोमवार, ९ सितम्बर 2013

 

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AyodhyaP Tripathi,
Sep 9, 2013, 9:23 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 9, 2013, 9:24 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 9, 2013, 9:18 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Sep 9, 2013, 9:21 AM
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