Peedit Kaun H_Eng

शेरजी को नमस्ते!

आप के ईमेल का उत्तर मैं हिंदी में दो कारणों से दे रहा हूँ. पहला कारण यह है कि ईसाइयत और इस्लाम से पीड़ित हम ९९% से अधिक लोग अंग्रेजी नहीं जानते. अतएव मेरा संदेश अंग्रेजी में लिखने से हमारे पीड़ित वैदिक पंथियों तक नहीं पहुँचेगा.

दूसरा कारण है कि यद्यपि मैं अंग्रेजी, जिस भाषा में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ ही त्रुटियाँ हैं और जो आज भी विकास के लिये तरस रही है, जानता हूँ, तथापि मैं इसको लिखने और बोलने से परहेज़ करता हूँ, तथापि यह विषय इतना आवश्यक है कि मुझे पाठकों को बतलाना पड़ रहा है कि प्रत्येक मनुष्य, चाहे वह ईसाई, मुसलमान या जो भी हो, उसकी लिपि, भाषा और उसका संविधान उसके मष्तिस्क (ब्रह्मकमल) में परब्रह्म उसके जन्म के साथ ही दे देता है| किसी भी साधक से पूछिए वह आप को बताएगा कि विश्व की तमाम लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है और संस्कृत उसी लिपि में लिखी जाती है और विश्व का पहला और एकमात्र ज्ञान-विज्ञान का कोष देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा का ऋग्वेद है| पाणिनी के अष्टाध्यायी में आज तक एक अक्षर भी बदला जा सका| ठीक इसके विपरीत अंग्रेजी और उर्दू लिपियों में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ हैं और इनका व्याकरण रोज बदलता है.

यह निर्विवाद रूप से स्थापित है कि संसार के अब तक के पुस्तकालयों में ऋग्वेद से प्राचीन कोई साहित्य नहीं है, जो संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि में लिखी गई है| संगणक (कम्प्यूटर) विशेषज्ञ यह भी स्वीकार करते हैं कि संगणन के लिये संस्कृत सबसे उपयुक्त भाषा है| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/sanskrit

यदि प्रकृति का यह शास्वत सत्य नियम है कि सबसे बलवान और धर्म परायण ही बचेगा और यदि वैदिक सनातन धर्म का मूल मंत्र ‘सत्यमेव जयते’ है यानी असत्य पराजित होगा, तो यह गाँठ बाँध लीजिए कि संसार से या तो मानवता नष्ट होगी अथवा आसुरी अब्रह्मी संस्कृतियां| क्यों कि ईसाई व मुसलमान स्वयं एक दूसरे को कत्ल करेंगे.

परब्रह्म हिंदू, यहूदी, ईसाई और मुसलमान में भेद नहीं करता. वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| प्रत्येक व्यक्ति को परब्रह्म द्वारा, उसके जन्म के साथ ही दिया गया वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वीर्य ईश्वरीय उर्जा का अनंत स्रोत, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| वीर्यवान को पराजित या अधीन नहीं किया जा सकता है| मनुष्य की छोड़िये, वीर्यवान सांड़ को भी अधीन नहीं किया जा सकता और न बांधा ही जा सकता है|

मूसा और मुहम्मद खतना द्वारा मानवमात्र के ईश्वरीय शक्ति वीर्य' को छीन कर उसे दास बनाने के अपराधी हैं| मूसा (बाइबल, उत्पत्ति १७:११) और मुहम्मद ने वीर्य हीनता को मानवजाति के सर्वनाश के स्तर तक महिमामंडित कर दिया है. अनैतिक पुत्र ईसा को जन्म देने वाली मरियम पूजनीय है और ईसा यहोवा का घोषित एकलौता पुत्र है| मानवमात्र को पापी घोषित कर रखा है. स्वयं शूली पर चढ़ने से न बचा सका फिर भी सबका मुक्तिदाता है| अब्रह्मी संस्कृतियों के तथाकथित पैगम्बरों मूसा और मोहम्मद ने जेहोवा और अल्लाह के आड़ में मनुष्य के शक्ति पुंज वीर्य को खतना करा कर नष्ट करने का घृणित अपराध किया. ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो जेहोवा व अल्लाह को गढ़ने वाले पैगम्बर और उनके उत्तराधिकारी शासक और पुरोहित हैं. आप विचार कीजिए पैगम्बर लोग मानवमात्र की ईश्वरीय शक्ति को छीन कर दास बनाते हैं अथवा स्वर्ग देते हैं?

किसान को सांड़ को वीर्यहीन कर दास (बैल) बनाने के लिए उसका बन्ध्याकरण करना पड़ता है| मानवमात्र को अधीन करने के लिए पैगंबरों ने इंद्र के मेनका की भांति धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं. वीर्यहीन करने के लिए इंद्र ने मेनका को विश्वामित्र को सौंप दिया. अब्रह्मी संस्कृतियाँ खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं का प्रयोग कर दास बनाती हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी स्वेच्छा से गाजे बाजे के साथ खतना करा कर और यौनसुख के लोभ (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६), में दास बनते हैं. पैगम्बर मूसा, ईसा और मुहम्मद तो रहे नहीं, अपना उत्तराधिकार सुल्तानों, राजाओं और शासकों को दे गए हैं, जो पुरोहितों, ईमामों व मीडिया कर्मियों का शोषण कर रहे हैं, जिसके कारण सत्य पर पर्दा पड़ा है|

संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. [UDHR अनु०२५(२)].

मैं मूल रूप से UP यानी कि उल्टा प्रदेश का निवासी हूँ अतएव मैं आप के आलोचकों का उत्तर अंत से प्रारम्भ करूँगा. शेरजी! आप को ये विरोध पत्र शायद अटपटे लगे हैं, लेकिन मैं एक लम्बे समय से इस प्रकार के पत्रों का सामना कर रहा हूँ.

वैदिक सनातन संस्कृति पर वाशिंगटन पोस्ट में एक अमेरिकी ने अपमानजनक टिप्पणी की थी| तब मैंने उससे पूछा था कि जब हम इतने ही बुरे हैं तो अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी यहाँ इंडिया में किसलिए आये और क्यों रहते हैं?

तब तो मुझे आलोचक ने तत्काल उत्तर दिया था कि ईसाई हमें सभ्यता सिखाने के लिए इंडिया में आये और रहते हैं| क्यों कि हम असभ्य भगवा आतंकवादी समलैंगिक विवाह नहीं करते| हम सहजीवन से घृणा करते हैं| हम बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह नहीं करते और न पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करते हैं| हमारा ईश्वर धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग नहीं देता| (बाइबलयाशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). सभ्य मूसा और मुहम्मद द्वारा गढ़े हुए जेहोवा और अल्लाह ने अपने सभ्य अनुयायियों को ऐसे ही अधिकार दिये हैं|

हम कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देते| हमारा ईश्वर जारज(जार्ज) व पवित्र? प्रेत नहीं है| ईसाइयों का ईसा स्वयं जारज(जार्ज) है और उसने प्रत्येक ईसाई परिवार को वैश्यालय बना कर (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) छिन्न भिन्न कर दिया है|  हमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| जबकि कुमारी माताएं प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे यहाँ विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियाँ नहीं बांटी जाती| कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar 

यही सवाल मैं मीडिया और ईसाईयों से फिर पूछ रहा हूँ. कि जब हम उनको पसंद नहीं करते तो इंडिया में क्या रखा है? उनके पास धरती का बड़ा भूभाग है. अकूत पैसे हैं. अपने ईसाई बंधुओं को लाद कर अपने देशों में क्यों नहीं ले जाते?

(आशा है कि आपके आलोचक आप के साथ-साथ मुझे भी अपने सुझावों से अनुग्रहित करेंगे.)

अब मैं आप के अंतिम आलोचक थोमस मैथ्यू की टिप्पणी से प्रारम्भ करता हूँ:

हम वैदिक पंथी स्वीकार करते हैं कि हमारे यहाँ ‘नरबली’ की प्रथा रही है. समय के साथ हमने तो अपने इस प्रथा का बहिष्कार कर दिया है. क्या ईसाई मानवमात्र को दास बनाने की प्रथा का बहिष्कार करेंगे? यह स्वयं थोमस मैथ्यू के निज हित में भी है. क्यों कि वे भी एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहते हैं. अकेले उनको ही नहीं, एलिजाबेथ ने ५३ ईसाई व मुसलमान देशों के उपनिवेशवासियों को अपना दास बनाया हुआ है. हम वैदिक पंथियों का भला हो जायेगा, क्यों कि हमारा तो धरती पर कोई देश ही नहीं बचा. हम उपनिवेशवासियों को चिर प्रतीक्षित स्वतंत्रता मिल जायेगी.

इतना ही नहीं, करोड़ों वर्षों से हम वैदिक पंथी तो नरबली तक ही सीमित रह गए, लेकिन किसी भी हरे भरे वृक्ष को नष्ट करने के लिए एक गिद्ध का निवास ही पर्याप्त है| इसी प्रकार किसी भी संस्कृति को मिटाने के लिए एक मुसलमान या ईसाई का निवास पर्याप्त है| अकेला कोलम्बस अमेरिका के १० करोड़ लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया| अकेला मैकाले संस्कृत भाषा और गुरुकुलों को निगल गया| अकेला मुहम्मद अपने आश्रय दाता यहूदियों के तीन प्रजातियों बनू कैनुका, बनू नजीर और बनू कुरेज़ा को निगल गया| हम वैदिक पंथी तो ऐसी डायन जेसुइट एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहने को विवश हैं, जो अवसर पाते ही थोमस मैथ्यू को भी कत्ल करेगी, उनका मांस खायेगी और लहू पिएगी. उसके पास भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से और ["परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|"] (बाइबल, लूका १९:२७) से असीमित मौलिक मजहबी अधिकार प्राप्त है और इस बात की उसने शपथ भी ली हुई है:-

मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै उनकी आयु का विचार करूंगी, लिंग का, परिस्थिति का| मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|”

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

ऐसी डायन के उपनिवेश में रहने में थोमस मैथ्यू को इसलिए लज्जा नहीं आती कि उनका विवेक ईसा के बाप जेहोवा ने नष्ट कर दिया है (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) और थोमस मैथ्यू को वीर्यहीन कर दिया, (बाइबल, उत्पत्ति १७:११) है.

अब आता हूँ ‘सती’ के प्रश्न पर. पाठक वेदों को खोल कर पढ़ें. नारियों द्वारा अनुभव की गई तमाम ऋचाएँ वेदों में मिलेंगी. ऐसा इसलिए सम्भव हुआ कि उन्होंने अपने रज का संचय किया. चरित्रहीन वैश्या नहीं बनीं. अब पाठक ही निर्णय करें कि वे अपने बेटियों को संयुक्त राष्ट्रसंघ से प्राप्त अधिकार से कुमारी माएं बनाना चाहते हैं – अथवा शिवाजी की माँ जैसी.

अब आता हूँ शुचिता पर. जिसका नाम दिया गया है छुआछूत.

एक मिलीमीटर की सुई से संक्रमण का भय है| लेकिन २०० मिलीमीटर की थाली में खाने से मना करने पर जेल मिलती है! अमेरिका, आष्ट्रेलिया और इंडिया में ईसाईयों ने मूल निवासियों को नष्ट करने के लिए महामारियों का उपयोग किया था| अन्य देशो के विपरीत इंडिया में शुचिता के व्यवहार के कारण महामारियों से आर्य मिटे नहीं| इसीलिए अश्पृश्यता का कानून लाया गया| फिर भी आर्य आज भी जीवित हैं| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/un-touch-ability-hd

देवदासी के आलोचक बताएं कि ननें कौन हैं?

"Garudan Thooku" (Hanging on an iron hook pierced through the back muscle.). Iron needles are not pierced through the cheeks as in Kavadiyattam. The list is more

पर प्रसारित समाचार का उद्धरण नीचे है ही.

अपने प्रभावशाली लेख में George Abraham लिखते हैं कि हम वैदिक पंथी उनके साथ जातीय भेदभाव कर रहे हैं. हम इस आरोप को स्वीकार करते हैं. लेकिन अब्राहम जी जो कारण बता रहे हैं – वे नहीं हैं. सही कारण यह है कि अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(), ३९(), ६० १५९ और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ १९७ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ये आज तक विफल नहीं हुईं| इन्हीं अब्रह्मी संस्कृतियों को २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए इंडिया में रखा है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

 http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

घरवापसी विवाद पर...

ईसाई व मुसलमान को धर्मान्तरण करने वाले को कत्ल करने की आज्ञा है. २०१५ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे. (बाइबल, व्यवस्था विवरण १३:६-११) न ही १४३६ वर्ष पूर्व मुसलमान थे| (कुरान ४:८९). अतएव आर्यावर्त सरकार इनका स्वधर्म त्याग अथवा मृत्युदंड का प्रावधान चाहती है. ईसाई व मुसलमान बताएं कि उनको धरती पर रहने का अधिकार कैसे है?

Julio Ribeiro के पास देश है कहाँ? इंडिया तो एलिजाबेथ का उपनिवेश है. हम उपनिवेशवासी तभी तक जीवित हैं, जब तक एलिजाबेथ चाहे. उपनिवेशवासियों को कत्ल कराने का अधिकार एलिजाबेथ को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है.

देश में कोई आतंक नहीं हो रहा है| सारी घटनाएँ अब्रह्मी संस्कृतियों के मिशन और जेहाद हैं| जो एलिजाबेथ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा प्रायोजित हैं| उपनिवेशवासी पहले उपरोक्त सच्चाइयों को कहने का साहस जुटाएं| मानव जाति के अस्तित्व पर ही संकट है| जो सरकार चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान और खुत्बे नहीं बंद करा सकती, वह भारतीय संविधान प्रायोजित जिहाद और मिशन कैसे मिटा सकती है|

इसी प्रकार Tony Chacko हम वैदिक पंथियों को रेसिस्ट बताते हैं. लेकिन टोनी की टिप्पणी बहुत नरम है. क्यों कि बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान धरती पर रहेंगे तो मानवजाति ही समाप्त हो जायेगी. क्योंकि ईसाइयत और इस्लाम वैदिक सनातन संस्कृति को रहने नहीं देंगे. प्राइवेट प्रतिरक्षा भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन हमारा कानूनी व प्राकृतिक न्याय से प्राप्त अधिकार है. हम वैदिक पंथी ईसाइयत और इस्लाम को नहीं रहने देंगे.

 

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Fw: 'Strangers In Their Own Land': Dilemma Of The Christian Populace In India

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Pramod Agrawal

Apr 2 (2 days ago)

to

On Thursday, April 2, 2015 6:24 PM, Tony Chacko <tonychacko2000@gmail.com> wrote:

 

I DON'T KNOW WHAT THIS AGRAWAL HAS TO GAIN IN GOING ON SENDING LYING ARTICLES OF THE HINDUTVA WHICH ANY READER CAN UNDERSTAND BY SEEING THE 

FIRST LINE AS A RACIST ARTICLE.


THE ARTICLE OF JULIO RIBEIRO IS VERY VERY TRUE. THERE HAS BEEN UMPTEEN EFFORTS BY MANY HINDUTVA AND RSS ORGANISATIONS TO DISCREDIT THE WRITE-UP,

TO NO AVAIL. HOPE P.M. UNDERSTANDS THE SERIOUSITY OF THIS HINDUTVA AGGRESSION AGAINST ALL MINORITIES AS CERTAINLY MANY OF THE ECONOMIC PLANS OF

THE BJP ARE GREATLY AFFECTED WITH NO FLOW OF FDIs DESPITE THE MOTIVATIONAL BUSINESS TRENDS SET IN. IT IS NOT INDIANS ALONE BUT THE WORLD AT LARGE

THAT ARE AFRAID OF INVESTING IN INDIA.THESE SPORADIC VANDALISTIC ATTACKS BY HINDUTVA GANGS ARE ACTIVATING HOODLUMS AND SKINHEAD GANGS OF USA,                                               UK AND EUROPE TO VANDALISE INDIAN TEMPLES AND OPENLY INSULT INDIANS BY CALLING THEM GRASS-EATERS AND DOT-BUSTING CALLS AGAINST WOMEN WITH
TILAK ON FOREHEADS.

 

MODIJI HAS TO SERIOUSLY REIN IN THESE COMBATIVE HINDUTVA BRIGADES RATHER THAN OBSERVING SILENCE.

 

‘Strangers In Their Own Land’: Dilemma Of The Christian Populace In India

By George Abraham

01 April, 2015
Countercurrents.org

Mr. Julio Ribeiro, Retired IPS officer, former DGP of Mumbai and Gujarat recently said the following; ‘as a Christian, suddenly, I am a stranger in my own country’. He is merely reflecting on the recent dilemma of the Christian community in India since the ascendance of Mr. Narendra Modi as its Prime Minister. It is indeed a sad commentary from a distinguished public servant who has served the country with great zeal and dedication to protect and preserve its territorial integrity.

Today, scores of Indian Christians who have contributed in so many ways towards the development of India especially in the social and educational sectors are pained to feel the same way as Mr. Ribeiro does! As a Christian and a member of the Diaspora, I truly share the sentiment of Mr. Ribeiro and salute him for his fortitude in speaking out.

What exactly has happened to bring about such anxiety and insecurity to such a small community that poses no harm to its fellow citizens? The latest reports from India point to two more attacks targeting the Christian religious places of worship, one at St. George Church in Navi, Maharashtra and the other at St.Peter and Paul Church at Jabalpur, Madhya Pradesh, along with two schools that are managed by the churches.

These may have happened at the heel of another incident in Nadia district in West Bengal where a 72 year old Nun was gang raped by six individuals at the Jesus and Mary convent school. Reacting to the gang rape of the Nun, Surendra Jain, Joint Secretary of the Vishwa Hindu Parishad (VHP) blamed the ‘Christian Culture’ for the incident. He also justified the vandalizing of a Church in Haryana and stated that these attacks would continue if conversions do not stop.

Several Churches in Delhi were vandalized and desecrated by religious extremists in the past months including St. Sebastian Church in Dilshad Garden which was reduced to ashes with its altar charred and Bibles strewn all over the ground. Archbishop Anil Couto said that the arson in St. Sebastian Church was condemnable not just because it was act of sacrilege and hate against the community and its faith, but because it could happen in the national capital which is recovering from a series of communal incidents. Also distressing to him is the sense of police impunity that long hours were lost, and possible evidence destroyed, before police finally came. Most of the culprits still remain at large and the law enforcement officials seem to show very little urgency in bringing them to justice.

These incidents are not just limited to certain parts of India but happening across the country. The recent incident in a village in Chattisgarh reveals the fear and insecurity of those who have embraced Christianity as their faith. Sukhram Kashyap, a Christian from Chattisgarh, has not only seen his church vandalized but was denied food rations from the Hindu dominated village council and several of his friends were beaten up when they protested. Some of his fellow worshippers were reconverted in an aggressive campaign called ‘Ghar Wapasi’ by Hindu fundamentalists who have also banned any Christian clergy from entering the village.

Breaking a long silence on this continuing onslaught by the Hindutva brigade on Christians and their Institutions around the country Prime Minister Modi said the following; ‘the tradition of welcoming, respecting and honoring all faiths is as old as India itself’. One wonders whether his ardent followers in BJP and RSS are listening!

The President of Catholic Bishops Conference of India Cardinal Baselios Cleemis said that the recent attacks on churches and Christians in India have made many ‘feel that their Christian identity is being questioned and it gives a sense of sadness. It showed that not everybody had taken seriously the Prime Minister Narendra Modi’s assurance to minorities’. ‘Irrespective of their faiths, anybody being attacked was an Indian citizen and it was the government’s duty to protect them’ Cardinal added.

In an interview to Karan Thapar on Headlines Today, Cardianal Cleemis also described as “very painful and sad” the comments of RSS head Mohan Bhagwat that Mother Teresa’s humanitarian works were driven by her motive to convert those she served. “It was very painful and very sad to hear about Mother Teresa whom the nation honored with Bharat Ratna,” he said.

There is no doubt that that Cardinal Cleemis spoke on behalf of all Christians in India that may very well include many of the faithful in the Diaspora. Although he did not single out any organization over many of these incidents but went on to criticize the Modi government for observing Christmas as Good Governance Day, saying good governance should be done everyday and the Christian festival should be respected.

One of the most astounding observations that can be made about these attacks on minorities in India is that there is a deafening silence on the part of the Diaspora in the US. Hindu American Foundation, Vishwa Hindu Parishad of America, and GOPIO along with many other organizations have decided to look the other way. Though relatively new as immigrants to this great country, Indians continue to demand our rightful place, justifiably so, at the table in sharing the riches and defending our values and traditions while not tolerating any injustice that offends our sensibilities. A huge segment of the community has indeed made tremendous strides in this short period realizing the American dream and integrating itself into the mainstream.

However, Christians in India who have lived there for almost two centuries are made to feel as if they are strangers in their own land. How a personal choice of faith that is guaranteed under the article 25 and 26 of the Constitution of India could make or break the ‘Indian ness’ of its citizenry is beyond the comprehension of any rational mind!

Undoubtedly, the forces of polarization and divisions have come out of the woodwork and kept themselves busy transforming India at the expense of the values and principles of inclusiveness and tolerance that brought the nation together. The current Government’s dual-track policy of providing good optics for the consumption of the global community while unleashing the extremist forces to undo the social progress of the last 65 years, mostly under the Congress rule, is troublesome and disheartening to most of its citizens!

President Obama in his Siri Fort speech prodded the new Government ‘India will succeed so long as it is not splintered along the lines of religious faith, as long as it is not splintered along any lines and it is unified as a nation’. It sounds prophetic and to plainly put it, unless the Prime Minister reins in these extremist elements that run amok now, his dream of ‘modern India’ could be in increasing peril!

George Abraham, Chairman, INOC ,USA

 

Pramod Agrawal

10:03 AM (19 hours ago)

to Tony

                                          what is this,  How do you like it,???? 

 

Christians round the world take part in mesmerising celebrations
 


 

Millions of devout Christians around the world have been commemorating the final days of Jesus Christ by taking part in awe-inspiring and shocking Holy Week celebrations.

The festival, which marks the trial, crucifixion and resurrection of Jesus culminating in Easter Sunday, has been met with mesmerising religious parades across five continents.

In a diverse display of traditions, thousands of penitents have marched through streets in hooded cloaks while others have performed alarming religious self-flagellation in demonstrations of commitment to their faith.

In northern Philippines, bare-footed men with bloodied backs lie on roads being beaten with sticks and whips in a divisive tradition thought to stem from 13th century Roman Catholics.

Impressive effigies to Jesus Christ were erected in the Philippines, Belarus and in Venezuela - where crowds of penitents, some wearing crowns of thorns, gathered for mass at the Santa Teresa's Basilica in the capital city Caracas. 

In Spain, the week of celebration has seen thousands of haunting, hooded figures take part in entrancing marches through the streets of Seville in Andalucia and Zamora, in the north-west of the country.

 

In Zamora, in the region of Castile and Leon, penitents from 16 Christian brotherhoods were pictured during an enthralling nighttime procession through the town's streets.

Fraternities, wearing robes and conical hoods to maintain anonymity, were also seen beating drums in a spellbinding ceremony in Santander.

 

 

Alarming display: A man uses a stick to whip a penitent in front of a chapel during a ritual in Angeles city, northern Philippines today

Reenactment: Acting the part of Jesus in the final march of his life, a man carries a cross through Manila in the Philippines today
 

Penance: Among a crowd attending a mass at the Santa Teresa's Basilica in Caracas, Venezuela yesterday, a devotee dons a crown of thorns
 

Dramatic: A procession of haunting figures wearing cloaks and conical hats beat drums while marching through Santander in Spain this week
 

Beaten bloody: A flagellant prays by the San Fernando Cathedral in the town of San Fernando, Pampanga in the Philippines yesterday
 

Religious self-harm: A flagellant covered in blood kneels in front of the San Fernando Cathedral in the Philippines yesterday 
 

Red flares burn while penitents of the Cristo de Viga brotherhood carrying a float with a cross in Jerez de la Frontera, Spain this week
 

 

Penitents from 'Las Siete Palabras (Seven words)' brotherhood wait for their turn to leave a church in Zamora, Spain yesterday

Shocking display: Filipino flagellants whip their back along a street in Mabalacat city, Pampanga Province, in the Philippines today
 

Tradition: Flagellation is a form of religious discipline observed every lenten season by Catholic devotees in the Philippines
 

 

Divisive: The Catholic Church has previously expressed disapproval of the gory ritual which takes place in the Philippines every year

 

Contemplation: A group of penitents gather in front of a portrait of Jesus Christ prior to flagellating themselves in Manila today

Painful: A man with a hooded face swings a rope attached to chains while flagellating himself in a show of religious commitment in Manila
 

Central America: Children carry a platform holding a small statue of Jesus during a Holy Week procession in Antigua, Guatemala yesterday
 

Performance: Students perform the Stations of the Cross procession as part of the Holy Week celebrations in Luque, Paraguay yesterday
 

Global event: An actor wearing a crown of thorns portrays Jesus during a performance in Luque, Paraguay yesterday
 

Leading commemorations: Pope Francis blesses the Holy Chrism during the Chrism Mass at St. Peter's Basilica at The Vatican today
 


 

The Argentine pontiff was pictured during the traditional Chrism Mass in St. Peter's Basilica in the Vatican this morning
 

Dedication: Filipino nuns carry wooden crosses as they make the Stations of the Cross at the Philippine Center of Saint Pio of Pietrelcina
 

Mesmerising: Hundreds of hooded penitents march during the Holy Week procession in Santander, Spain, pictured on Tuesday
 

Holy Week: The ceremonial displays in Santander have also been seen across Spain with notable marches in Sevilla and Zamora
 

Penitents take part in a ceremonial Holy Week display inside a chapel in Arcos de la Frontera, Spain on Tuesday
 

Gathering: Catholic faithful attend a mass held at St. Teresa church during Holy Week celebrations in Caracas, Venezuela yesterday
 

Tribute: An effigy of Jesus on the cross is held up during the Cristo de la Fe parade during a Holy Week procession in Alicante, Spain
 

Members of the Catholic clergy at the Washing of the Feet ceremony at the Church of the Holy Sepulchre in Jerusalem today
 

Passion of Christ: Belarussian Catholics re-enact some of the final moments of Jesus Christ near a Catholic church in Minsk yesterday
 

 

Actors yell during a 'Via Crucis' in a free interpretation performance of the catholic tradition at the Carlos Antonio Lopez park in Paraguay

A number of male and female actors were pictured during the spectacular display in Carlos Antonio Lopez park in Asuncion, Paraguay
 

Penitents of the Via Crucis Brotherhood carry a sculpture of Jesus Christ during the Holy Monday procession in Cordoba, Andalucia
 

 

Focused: Filipino flagellants carry a wooden cross on their back along a street in Pampanga Province, north of Manila today

 

A penitent dressed as a Roman soldier takes part in celebrations in Arcos de la Frontera, Spain on Tuesday

Penitents take part in the 'Procesion del Silencio' in Zamora, Spain yesterday were thousands gathered to witness a nighttime procession
 

 

Penitents from 'Cristo de la Buena Muerte' or 'Good Dead Christ' brotherhood take part in a procession in Zamora on Tuesday night

A baby sucks a dummy while dressed in a ceremonial Holy Week cloak in in Zamora, Spain earlier this week
 

 

Members of a religious fraternity don cloaks and conical hats while marching through Zamora in northwest Spain on Tuesday night

Latin Patriarch of Jerusalem Fouad Twal washes the foot of a priest during the Catholic Washing of the Feet ceremony
 

 

A figure of Jesus is carried through the streets of Zamora in northwest Spain by penitents from Cristo de la Buena Muerte brotherhood

While the marches may appear sinister, they are a stunning celebration of emotion as brothers make their way to cathedrals in Zamora
 

 

Each confradia (or religious brotherhood) is represented by different coloured robes and masks, designed to protect anonymity 

 

Visitors and locals watch from balconies as the procession weaves its way through the cobblestone streets in Zamora

 

Pramod Agrawal

7:19 PM (10 hours ago)

to

On Friday, April 3, 2015 6:35 PM, Thomas Mathew <thomasmathew47@hotmail.com> wrote:

Christians never practiced "Nara Bali" or "Sati" or untouchability. Christians also did not have the practice of Devadasi. They also do not practice "Garudan Thooku" (Hanging on an iron hook pierced through the back muscle.). Iron needles are not pierced through the cheeks as in Kavadiyattam. The list is more

 

T. M

 


Date: Fri, 3 Apr 2015 04:33:38 +0000
From: 
pka_ur@yahoo.com
To: 
tonychacko2000@gmail.com
Subject: Re:
'Strangers In Their Own Land': Dilemma Of The Christian Populace In India

 

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AyodhyaP Tripathi,
Apr 4, 2015, 6:54 AM
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