NMO_PM KISLIYE Muj14W10A



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 10A, Feb. 28- Mar. 06, 2014. This issue is NMO_PM KISLIYE Muj14W10A 


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



NMO_PM KISLIYE Muj14W10A

आप नमो को प्रधानमंत्री क्यों बनाना चाहते हैं?

नमो वीर्यवान बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुल शिक्षा को पुनर्जीवित नहीं करेंगे, स्कूलों में यौनशिक्षा दिलवाएंगे|

नमो नागरिकों को उपनिवेश से मुक्ति नहीं दिलाएंगे|

नमो नागरिकों के जान-माल की रक्षा नहीं करेंगे|

नमो उन मस्जिदों की रक्षा करेंगे, जहाँ से अज़ान द्वारा ईमाम काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा करता है और काफिरों के नरसंहार की शिक्षा देता है व नमो हज अनुदान और ईमामों को सरकारी खजाने से वेतन देते रहेंगे|

नमो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और ३९(ग) रद्द नहीं कर सकते और न संविधान के अनु० ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के अधिकार को पुनर्जीवित|

इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश व नागरिक अधिकारहीन दास है| साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. हम मानवमात्र को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों से मुक्ति दिलाने के लिए लड़ रहे हैं और नमो अब्रह्मी संस्कृतियों को बनाये रखने का अधिकार देने वाले संविधान और एलिजाबेथ के उपनिवेश में आस्था और निष्ठा की शपथ ले चुके हैं| पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| यानी नमो प्रधानमंत्री बने तो वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों का विनाश सुनिश्चित करेंगे| निर्णय करें कि आप किसके साथ रहेंगे?

१९४७ से आज तक भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के एक भी विरोधी का किसी को ज्ञान नहीं है! जानते हैं क्यों? क्यों कि अब्रह्मी संस्कृतियों का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान या संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर अथवा साध्वी प्रज्ञा - सबके विरोध को दबा दिया गया|

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

अमेरिका आज भी है, लेकिन लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई| इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है| एलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति मिटाएगी, आप का मांस खाएगी और लहू पीयेगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३).  इंडिया तो रहेगा| लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति और भारत के मूल निवासी न रहेंगे| यदि रहेंगे भी तो एलिजाबेथ के दास बन कर| चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| बचना हो तो अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिये| यह युद्ध मात्र हम लड़ सकते हैं| चर्चों व मस्जिदों से ईसाई व मुसलमान को वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है| अतएव चर्च व मस्जिद नष्ट करना भारतीय दंड संहिता के धारा १०२ के अधीन सबका कानूनी अधिकार है| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट के अभियुक्त हैं| हमारे ९ अधिकारी २००८ से जेलों में बंद हैं| जिन लोगों को अपना जीवन, अपनी आजादी और अपनी नारियों का और अपना सम्मान चाहिए, वे हमे सहयोग दें तो हम अब्रह्मी संस्कृतियों को नहीं रहने देंगे|

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), ६० व १५९ और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ द्वारा जिन अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं| लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को भारतीय संविधान से मुक्ति दिलाने वाला कोई नहीं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/aryavrt-sarkar-kyon

'यद्यदाचरति श्रेष्ठ: तत्तदेवेतरो जन:'

'जन्मना जायते शूद्र:। संस्कारात द्विज उच्यते।'

श्रेष्ठ लोग जैसा आचरण करते हैं वैसा ही नागरिक करते हैं| जन्म से मनुष्य शूद्र होता है| संस्कारित हो कर द्विज बनता है| लेकिन ब्राह्मण तो मनुष्य ब्रह्म यानी वीर्य के अभिवाज्य चेतन परमाणु को जानने के बाद ही बनता है| वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| उसको जन्म के साथ ही प्राप्त, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वेद में मनुष्य को ईश्वर बनाने के लिए तप और संस्कार का विधान है| इसकी निःशुल्क शिक्षा के लिए हमारे ऋषियों ने गुरुकुल चलाये थे| वीर्यरक्षा की शिक्षा गुरुकुलों में ही मिलती थी| वीर्य का जितना अधिक संचय होगा मनुष्य उतना ही अधिक शक्तिशाली, निरोग व सुखी होगा|

वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है|

अहम् ब्रह्मास्मि का तात्पर्य यह निर्देशित करता है कि मानव यानी प्रत्येक व्यक्ति स्वयं संप्रभु है। उसका व्यक्तित्व अत्यन्त महिमावान है - इसलिए हे मानवों! आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्ति को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो, जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा। यही है अहम् ब्रह्मास्मि का अन्यतम तात्पर्य।

आतताई अब्रह्मी संस्कृतियां अपने अनुयायियों सहित मानवमात्र को वीर्यहीन करके, किसान द्वारा सांड़ को दास बनाने के लिए वीर्यहीन करने की भांति, दास बना चुकी हैं|

आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों ने खतना, कामुक सुख, समलैंगिक सम्बन्ध, सहजीवन, कौटुम्बिक व्यभिचार आदि द्वारा व्यक्ति के इसी वीर्य को नष्ट कर उसे दास बना लिया हैं| ईसाइयों ने कुमारी माओं को महिमामंडित कर और वैश्यावृति को सम्मानित कर मानवमात्र को वीर्यहीन कर दिया है| इन मजहबों ने संप्रभु मनुष्य को दास व रुग्ण बना दिया है| व्यभिचार से उत्पन्न ईसा गाड और यहोवा का घोषित एकलौता पुत्र है| स्वयं को शूली पर चढ़ने से न बचा सका - फिर भी सबका मुक्तिदाता है|

मूसा ने वीर्यक्ष्ररण को बाइबल में महिमामंडित किया, “और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगा, और यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.बाइबल, उत्पत्ति १७:११. अनैतिक पुत्र ईसा को जन्म देने वाली मरियम पूज्य और महान है और सती अपराधिनी! सती का महिमा मंडन दंडनीय अपराध| (सती प्रथा निवारण कानून, १९८७,)

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

खतना वीर्यहीन करने की विधि है| इस्लाम में, खतना एक सुन्नाह (रिवाज) है, जिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य विचार यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त भी नहीं है. अतः मुसलमानों को नेक सलाह है कि वे खतना का विरोध करें| अपने अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति के जनक वीर्य को नष्ट न करें| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है| वीर्यवान बन कर ही मुसलमान अपनी रक्षा कर पाएंगे| अन्यथा ईसाई मुसलमानों को नष्ट कर देंगे|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

०३/०३/१४

Registration Number is : DARPG/E/2014/01175

 

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