NMO PM BANE Muj14W21



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 21A, May 16- May 22, 2014. This issue is NMO PM BANE Muj14W21


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



NMO PM BANE Muj14W21

यह हर्ष की बात है कि ३० वर्ष बाद इंडिया में पहली बार किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला है|

आइये नमो की सीमाओं का मूल्यांकन किया जाये| नमो के सामने पहली समस्या है कि इंडिया स्वतंत्र नहीं – एलिजाबेथ का उपनिवेश है| यानी कि स्वयं नमो एलिजाबेथ के दास हैं| दास के अधिकार नहीं होते|

धरातल की सच्चाई यह है कि नमो सहित किसी नागरिक को जीवित रहने [भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)] और सम्पत्ति व पूँजी रखने का [भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)] अधिकार नहीं है| यह न भूलें कि कुटरचित, परभक्षी और मौत के फंदे भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेने के लिए नमो विवश हैं, जो नमो सहित किसी को भी जीने और सम्पत्ति व पूँजी का अधिकार नहीं देता| मानवमात्र की स्थिति किसान के बैल से भी गई बीती हैकिसान अन्न पैदा करने वाले बैल को अन्न पर अधिकार नहीं देता है| फिर भी किसान निज हित में बैल की रक्षा करता हैलेकिन एलिजाबेथ हमें भारतीय संविधान से प्राप्त अधिकार और ईसा के आदेश से कत्ल करवा रही है| जो विरोध करता है, उसका उत्पीड़न करवा रही है|

केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने| (बाइबल, लूका १९:२७). बाइबल, यूहन्ना ६:५३ से प्राप्त आदेश और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधिकार से एलिजाबेथ हमारा मांस खाने और लहू पीने के लिए स्वतंत्र है| एलिजाबेथ के साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी ईसा को अर्मगेद्दन द्वारा धरती पर केवल अपनी पूजा करानी है| कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी खूनी इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है| इनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें परिवर्तन सम्भव नहीं|

अब्रह्मी संस्कृतियां अपने अनुयायियों सहित मानवमात्र को वीर्यहीन करके, किसान द्वारा सांड़ को दास बनाने के लिए वीर्यहीन करने की भांति, दास बना चुकी हैं|

हमने १९४७ से ही इस्लाम और ईसाइयत का विरोध नहीं किया| अज़ान और नमाज़ का विरोध नहीं किया| मस्जिद का विरोध नहीं किया| अपने संतानों को गुरुकुल में शिक्षा दिलाने के बारे में सोच भी नहीं सकते| मनुष्य के उर्जाचक्रों में अंकित एक मात्र देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा के उपयोग के बारे में सोच भी नहीं सकते| आज बैल से खेती करने वाला कोई नहीं|

जज व नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन, एलिजाबेथ के मनोनीत, राज्यपालों द्वारा शासित हैं| अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (अविश्वासियों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है|

वैदिक सनातन संस्कृति आधारित राज्य में मैकाले के स्वयं के कथनानुसार, सन १८३५ तक भारत में एक भी चोर या भिखारी नहीं था|

एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिस व्यवस्था में महाराज अश्वपतिने कहा था

न  मे  स्तेनो  जनपदे   न   कदर्यो  न  मद्यपः ।

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

जिन मस्जिदों से ईशनिंदा का प्रसारण होता हो और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती हो, उसे नष्ट करना अपराध कैसे है? मैं यह जानना चाहता हूँ कि सरकार को अपने नागरिकों के इष्टदेवों के ईशनिंदा और काफिरों को कत्ल करने के घोषणा स्थल मस्जिदों को बचाने का अधिकार कैसे मिला है?

मैं साध्वी प्रज्ञा सहित अपने ९ साथियों के दोषमुक्ति का और उनके उत्पीड़न की क्षतिपूर्ति की मांग करता हूँ|

जो भी मेरी मांग का समर्थन नहीं करते, वे मानवजाति का सर्वनाश निश्चित समझें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

Registration Number is : DARPG/E/2014/02668

 

 

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