Navvarsh mangalmaya ho

 

वैदिक पंथियों के नव वर्ष

और आर्यावर्त सरकार के सशक्त आर्यावर्त राष्ट्र के 

राष्ट्रीय पर्व पर

वैदिक धर्म की जय हो|

विक्रमी सम्वत २०७० तदनुसार कलि गते ५११४

(११ अप्रैल, २०१३)

प्राणीमात्र के लिए मंगलमय हो|

ईसाइयत और इस्लाम मानवमात्र को अपना दास बनाते हैं| अपनी बेटी और पुत्रवधू से विवाह करना धर्म मानते हैं| इनके रहते धरती की कोई नारी सुरक्षित नहीं है| जीवन और सम्पत्ति का अधिकार किसी के पास नहीं है| भारतीय संविधान इनका संरक्षणपोषण व संवर्धन करता है| जो लोग ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हों – वैदिक पंथी बनें|

भवदीय,

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी फोन ९१५२५७९०४१

७७ खेड़ा खुर्द, दिल्ली – ११ अप्रैल, २०१३.


Comments