Mumbai hamla july13-11

Registration Number is : PRSEC/E/2011/11469

Dated: Monday, July 18, 2011y

Web site: http://helpline.rb.nic.in/

This is a public document. Any one can view the status from the web site by typing the above Registration Number. There is no pass-word.

श्री संजय गुप्त जी,

जागरण में प्रकाशित आप का स्तम्भ नरम और लापरवाह राष्ट्र Jul 16, 10:56 pm पढ़ा.

http://in.jagran.yahoo.com/news/opinion/general/6_3_8024762.html

प्रेस की स्वतंत्रता पर न्यूयार्क टाइम्स के पूर्व समाचार कर्मचारी समूह के प्रमुख श्री जान स्वीन्टन ने अपने भाषण में १९५३ में ही निम्नलिखित कटु तथ्यों को स्वीकार किया था:-

कुछ शताब्दियों पूर्व प्रेस राज्य का चौथा स्तम्भ माना जाता था; अन्य तीन स्तम्भ विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका थे| अंततः प्रेस की सच्चाई व सम्पूर्णता अधोगति की ओर जा रही है. स्वतंत्र प्रेस नाम की कोई चीज नहीं है. इसे आप जानते हैं और मै भी जानता हूँ| आप लोगों में से ऐसा कोई नहीं जो सच्चाई के साथ अपने विचार लिख सके| मुझे अपने सच्चे विचार अपने समाचार पत्र से बाहर रखने के लिए मूल्य दिया जाता है. आप में से कोई महामूर्ख होगा, जो अपने सच्चे विचार लिख कर सड़क पर आ कर दूसरी नौकरी ढूँढने लगे| पत्रकार का पेशा सत्य को नष्ट करना है; स्पष्टतः झूठ लिखना; विकृत कर देना; बदनाम करना है हम परदे के पीछे से धनिकों के लिए काम करने वाले उपकरण व मातहत हैं| हम बौद्धिक वेश्याएं हैं,

अतः आप सत्य तो छाप ही नहीं सकते, जो नीचे है:-

आतंकी या जेहादी

कायरता आप कर रहे हैं, मुसलमान तो अल्लाह के आदेश का पालन कर रहे हैं.

भारत में कोई लोकतंत्र नहीं है. भारत में सोनिया के लिए, सोनिया द्वारा चुना गया सोनिया तंत्र है. सर्व विदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री का मनोनयन सोनिया ने ही किया है. सभी राज्यपालों का मनोनयन सोनिया ही करती है और सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. सभी जज दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के द्वारा शासित हैं व सोनिया के कठपुतली हैं.

अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत इस्लाम मिशन जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (सूरह  अल अनफाल :३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है.

हमारी ऐतिहासिक उपलब्धियां हैं, हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम के विरोधी हैं. हम आप से सहयोग चाहते हैं. हमारे १२ अधिकारी मक्कामालेगांव आदि के विष्फोट में बंद हैं. आप सहयोग दें तो हम इस्लाम व उसकी मस्जिदें नहीं रहने देंगे. हम अजान देने व नमाज़ पढ़ने वाले को धरती पर क्यों रहने दें? हम से पाकपिता गाँधी ने राम राज्य का वादा किया था, भारतीय संविधान ने हमे उपासना की स्वतंत्रतादी है. हम मनुष्य के पुत्र का मांस खाने और लहू पीने (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) वाली सोनिया को सत्ता में क्यों रहने दें?

मुहम्मद के कार्टून बनाने पर ईशनिंदा के लिए मौत का फतवा देने वाले सरकारी संरक्षण में हमारे कर के वेतन से अजान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करें? हमसे उपासना की स्वतंत्रता का वादा किया गया है, ईमाम मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैं? हम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें?

संघ परिवार ईसाइयत और इस्लाम का विरोध ही नहीं कर सकता. आप लोग भी यह युद्ध नहीं लड़ सकते. धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन, मालेगांव व अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्ध, जगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया. उनके आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं. ईसाइयत और इस्लाम ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, उन्होंने वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए. भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को मिटाने के लिए किया गया है. ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है.

आप का सामना किसी ऐसे समूह से हो जाए, जिसके देवता का पेशा चोरी का कार्य (कुरआन ८:१, ४१ व ६९) हो. जिसने अपने अनुयायी मुसलमानों पर युद्ध अनिवार्य कर दिया हो| (कुरआन  २:२१६) आतंक (कुरआन ८:१२) और नारियों के बलात्कार (कुरआन  ४:२४ व २३:६) की छूट दे रखी हो | जिस समूह का पूज्य देवता सगर्व कहता हो की वह हत्यारा है| (कुरआन ८:१७). लूट के माल का स्वामी हो, (कुरआन ८:१) लूट के माल को पवित्र बताता हो, (कुरआन ८:६९), मुसलमान समाज में लूट का बंटवारा करता हो, (कुरआन ८:४१) प्रतिज्ञाऐ तोड़ता हो, (कुरआन  ६६:२) जिसने मुहम्मद का निकाह मुहम्मद की ही पुत्रवधू से कराया था| (कुरआन,३३:३७-३८). जो मुसलमानों द्वारा गैर-मुसलमान नारियों का बलात्कार निंदनीय नहीं मानता हो (कुरआन  २३:६) अपितु इन कुकर्मो को करने वाले मुसलमानों को स्वर्ग भेजता हो, जहाँ ऐसे अपराधी मुसलमानों को हूरे व गिलमे मिलेंगे, (यानी अल्लाह और उसके अनुयायी असामाजिक तत्व हैं. जिन्हें धरती पर रहने का अधिकार नहीं है) तो क्या आप चुप बैठे रहेंगे? मुझे दुःख है कि आप मात्र चुप ही नहीं बैठे हैं, बल्कि लूट व यौन सुख के लोभ में और मुजाहिदों के हाथों मौत के भय से सच्चाई को सामने नहीं आने दे रहे हैं| आप मानवदोही क्यों नहीं हैं? भारतीय संविधान मुसलमान और ईसाई को समर्थन व संरक्षण दे रहा हैं| अपराध करने वाले से अपराध सहन करने वाला अधिक अपराधी होता है. हम अपराधियों को सहन नहीं करेंगे. अतः अपराधी संरक्षक भारतीय संविधान का बहिष्कार करने में हमारा सहयोग करें|

ईसाइयत और इस्लाम मिटाइए. फिर गाय कौन काटेगा? अजान द्वारा ईश्वर का अपमान कौन करेगा? कश्मीर कौन मांगेगा? धर्मान्तरण कौन करेगा? बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) और पुत्रवधू से विवाह कौन करेगा? समलैंगिक मैथुन कौन करेगा? कुमारी माताएं कहाँ मिलेंगी?

काबा हमारी है, अजान गाली है, मस्जिद सेनावास हैं और कुरान सारी दुनिया में फुंक रही है. धरती पर क्यों रहे इस्लाम? हम ने यही पूछने का दुस्साहस किया है. इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने सोनिया के रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम सोनिया द्वारा सताए जा रहे हैं. इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं|

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ ने हमे प्राण रक्षा का अधिकार दिया है. हम इसलिए लड़ रहे हैं कि आप धूर्त पुरोहितों और शासकों के दास न बनें. मुसलमान और ईसाई आप की आँखों के सामने आप की नारियों का बलात्कार न करने पायें. आप के घर न लूट लिए जाएँ और आप कत्ल न कर दिए जाएँ. हम आतताई अल्लाह व जेहोवा को भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हैं. और न कुरान व बाइबल को धर्म पुस्तक स्वीकार करते हैं. हम भारतीय संविधान, कुरान व बाइबल को मानवता का शत्रु मानते हैं. जो नहीं मानता, वह दया का पात्र है.

जब हमने बाबरी ढांचा गिराया था तो मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड़े गए, जिनमे से ३८ की विधिवत प्राथमिकियां पंजीकृत हैं. जिसका विवरण हमारी पुस्तक 'अजान' के १० वें संलग्नक में उपलब्ध है. इन्हें आप हमारी वेब साईट http://www.aryavrt.com/azaan पर निः शुल्क पढ़ सकते हैं. लेकिन सोनिया के रोम राज्य में मंदिर तोड़ना अपराध नहीं माना जाता! बाबरी विध्वंस के ४९ अभियुक्त बने और १७ वर्षों तक लिब्रहान आयोग जाँच की नौटंकी करता रहा. हमने १५ जनवरी २००१ को शपथपत्र दिया कि ढांचा हमने गिराया है, उसे चुरा लिया. जनता का करोड़ रुपया डकार गया. लेकिन हमारे मंदिरों को तोड़ने वाला कोई अभियुक्त नहीं और कोई जाँच आयोग. ४ मस्जिदों के विष्फोट के लिए हम भगवा आतंकवादी हैं! मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड्वाने वाली सोनिया सरकार कौन है? क्या सोनिया बताएगी?

हमने कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५|१९९३ प्रस्तुत की थी, जो निरस्त कर दी गई. मैंने पत्रक मुसलमानों भारत छोड़ोऔर ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था. जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया. बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ. अभी मेरे विरुद्ध रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ चल रहे हैं. मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी. वह अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, दिल्ली से चल रहा है. इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है. मैं अजान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ.

मानवता को मिटाने की व्यवस्था तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करके २६ नवम्बर, १९४९ को ही पूरी कर ली गई है. आप लोगों की समझ में आये तो ईसाइयत और इस्लाम मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी. सूचना सचिव. आर्यावर्त सरकार| भारत

 


ĉ
ap tripathi,
Jul 17, 2011, 11:08 PM
Comments