Mukhya JJLodha Muj14W19



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 19, May 02- May 08, 2014. This issue is Mukhya JJLodha Muj14W19


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Mukhya JJLodha Muj14W19

प्रेषक:

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

मंगल आश्रम, मुनि कि रेती, टिहरी गढ़वाल, २४९१३७ उखं

सेवा में,

न्यायमूर्ति श्री लोढा जी!

सर्वोच्च न्यायालय, तिलक मार्ग, नई दिल्ली – ११०००१

महोदय,

साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया हैजिसे १५ अगस्त१९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम१९४७अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}.

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| यदि अब्रह्मी संस्कृतियाँ हैं तो आप को अपने और वैदिक सनातन धर्म के अस्तित्व की आशा नहीं करनी चाहिए| आज भी साध्वी प्रज्ञा की ललकार है, “भारत उपनिवेश क्योंकाबा मूर्तिपूजकों की है। कुरआन लूट संहिता है। अज़ान ईशनिंदा है। अतएव लोढा जी! अपनी खैर मनाइए| प्राकृतिक मानवीय न्याय के लिए निज हित में साध्वी के सपनों को साकार करने, अज़ान बंद कराने, मस्जिद पर प्रतिबंध लगाने, चर्च, मस्जिद, अज़ान और संविधान मिटाने में आर्यावर्त सरकार की सहायता कीजिए|

माउंटबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू जिन्ना को सौंप दिया| क्या आप अपने वैदिक सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए साध्वी प्रज्ञा, असीमानंद, जगतगुरु अमृतानंद सहित, गुप्त रूप से, मेरे ९ सहयोगियों को मुक्ति नहीं दिलवा सकते? ऐसा ही पूर्व प्रधानमंत्री राव जी ने किया था, तभी मैं ढांचा गिरवा पाया| प्रमाण में मीडिया की निम्न क्लिपिंग देखें,

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

मैं मालेगांव मस्जिद बम कांड का अभियुक्त हूँ| मेरा पासपोर्ट जब्त है| एलिजाबेथ सरकार ने मेरी सारी सम्पत्ति लूट ली है और किसी भी क्षण मेरी हत्या हो सकती है| मेरे अतिरिक्त अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोधी नहीं है| विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://timesofindia.indiatimes.com/india/malegaon-accused-pandey-congratulated-pragya-singh/articleshow/4023514.cms

विश्व की तमाम लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है| यह निर्विवाद रूप से स्थापित है कि संसार के अब तक के पुस्तकालयों में एकमात्र ज्ञान-विज्ञान के कोष ऋग्वेद से प्राचीन कोई साहित्य नहीं है, जो संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि में लिखा गया है| पाणिनी के अष्टाध्यायी में आज तक एक अक्षर भी बदला जा सका| ठीक इसके विपरीत अंग्रेजी और उर्दू लिपियों में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ हैं| संगणक (कम्प्यूटर) विशेषज्ञ स्वीकार करते हैं कि संगणन के लिये संस्कृत सर्वोत्तम भाषा है| लेकिन आप ने देवनागरी का त्याग कर दिया है| आप लोगों को जारज एलिजाबेथ की दूषित अंग्रेजी लिपि और भाषा में लिखने में लज्जा क्यों नहीं आती? क्या आप जानते हैं कि दूषित आंग्ल भाषा को इस देश की ९८% जनता नहीं जानती?

अब्रह्मी संस्कृतियों का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान या संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर, मैं अथवा साध्वी प्रज्ञा - सबके विरोध को दबा दिया गया|

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोध के कारण पीड़ित, मैं लगभग २ अरब रुपयों की सम्पत्ति का स्वामी हूँ| जिनकी न्यायपालिका संरक्षक है| इसके अतिरिक्त लोकसेवक हूँ| सभी भूमियों और मेरे पेंशन प्रकरण में मेरे पक्ष में निर्णय भी है| परन्तु मुझे पेंशन नहीं मिलती| मेरे पास इतना भी पैसा नहीं है कि आप के न्यायालय में वकील नियुक्त कर सकूं अथवा न शक्ति ही है कि चल कर किसी न्यायालय में खड़ा हो सकूं| मैं भिक्षा पर आश्रित हूँ| मेरे पुत्रों ने मेरे दिल्ली के अर्धनिर्मित भूखंड पर २०११ से कब्जा कर रखा है| मेरी निम्नलिखित वेबसाइट देखें;

http://www.aryavrt.com/ahc-rg-12806y

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(), ३९(), ६० १५९ और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ १९७ द्वारा जिन अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं|

यह कहना सरासर झूठ है कि न्यायपालिका स्वतंत्र है| दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ १९७ के अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि न्यायपालिका राष्ट्रपति और राज्यपाल के अधीन है और राष्ट्रपति और राज्यपाल एलिजाबेथ के अधीन| क्यों कि राष्ट्रपति और राज्यपाल अनुच्छेदों ६० और १५९ के अधीन परभक्षी और मौत के फंदे भारतीय संविधान का संरक्षण, पोषण और संवर्धन करने के लिए विवश कर दिए गए हैं|

ब्रिटिश नैशनैलीटी अधिनियम १९४८ के अंतर्गत हर भारतीय बर्तानियां की प्रजा है| भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ३६६,३७१,३७२,३९५ मे परिवर्तन की क्षमता संसद में नहीं है| जज साहिब! आप ने राष्ट्रपति प्रणब दा के सामने भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने (uphold) की शपथ ली है| आप देवनागरी जैसी लिपि और संस्कृत जैसी भाषा का अपमान करने के लिए विवश हैं| आप उपनिवेश इंडिया को स्वतंत्र इंडिया स्वीकार करने के लिए विवश हैं| अज़ान (ईशनिंदा) को पंथनिरपेक्ष पूजा की पुकार मानने के लिए विवश हैं| मस्जिद, जहां से काफिरों के नरसंहार की शिक्षा दी जाती है, को उपासना स्थल मानने के लिए विवश हैं| बिना प्रमाण आप कोई निर्णय नहीं करते - लेकिन आप यह स्वीकार करने के लिए विवश हैं कि विश्वास आधारित बाइबल और कुरान धर्मपुस्तक है और उस पर कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). आप ने संविधान के अनु० ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न लूट पाए, उसे सांसदों से मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है| इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (एआईआर, १९५१, एससी ४५८). आप ने अपने सम्पत्ति और पूँजी रखने के अधिकार को त्याग दिया है| भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग). आप ने अपनी नारियां और धरती अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों को सौंप रखी हैं| आप सरकारी खजाने से हज अनुदान और ईमामों को वेतन दिलवाने के लिए विवश हैं| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) और (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/).

धृतराष्ट्र के न्यायपालिका ने जुए में हारने के बाद पांडवों को निर्णय दिया था कि दास के अधिकार नहीं होते| इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश है और नागरिक अंग्रेजों का दास| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ अनुच्छेद ()(।।) भारतीय संविधान}. लेकिन आप लोगों को एलिजाबेथ की दासता में रहते १९४७ के बाद से आज तक लज्जा नहीं आती!

हम उनसे लड़ रहे हैं, जिन्होंने आप के गुरुकुलों को नष्ट किया| उनसे लड़ रहे हैं जो आप के देश को उपनिवेश बनाये बैठे हैं| उनसे लड़ रहे हैं जो आप को नियमित रूप से अजान नमाज़ द्वारा प्रतिदिन बार अपमानित करते हैं, आप के ईश्वर की निंदा करते हैं| उनसे लड़ रहे हैं, आप की हत्या और आप के वैदिक सनातन संस्कृति का समूल नाश जिनके मुक्ति का मार्ग है| न्यायमूर्ति जी! आप यह लड़ाई नहीं लड़ सकते| आप मात्र हम लोगों की गुप्त रूप से सहायता कर सकते हैं|

http://www.aryavrt.com/pragya-letter

नीचे की लिंक पर क्लिक करें और साध्वी प्रज्ञा को जेल से छुड़ाने में हमारी सहायता करें. 

http://chn.ge/1hQCDy1 

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

यह पत्र मात्र न्यायमूर्ति के लिए नहीं – हर मानवतावादी के लिए है और मेरा आग्रह है कि इसे ईसाई व मुसलमान सहित प्रत्येक व्यक्ति पढ़े| अच्छा लगे तो स्वयं छपवाए और बांटे| कोई बंधन नहीं है|

Registration Number is : DARPG/E/2014/02352

 

 

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AyodhyaP Tripathi,
May 1, 2014, 9:17 AM
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