Muj18w25 Klpna



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 24 Year 24 ISSUE 25, Jul 06-12, 2018. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj18w25 Klpna 


सम्प्रभु बनेंगे या दास?

कल्पना जी का तथाकथित भड़काऊ भाषण और लक्ष्मी शंकराचार्य का खंडन.

शंकराचार्य जी ने कुरान के रुहानी यानी आध्यात्मिक ज्ञान पर प्रकाश डाला है. इससे उनके विद्वता का ज्ञान तो होता है, लेकिन हिंदुओं को नष्ट होने से बचाने का समाधान नहीं निकलता. जबकि कल्पना की आज के परिप्रेक्ष्य मे चेतावनी बिल्कुल सटीक बैठती है. कैराना उनके पड़ोस में ही है.

लक्ष्मी शंकराचार्य जी की मुस्लिम समाज में पैठ है और मुस्लिम विद्वान उनके सुझावों पर गम्भीरता से कार्य करेगा, ऐसा मेरा विश्वास है.

मेरा अनुरोध है कि आध्यात्म का प्रयोग लक्ष्मी शंकराचार्य जी इस्लाम के मूल मंत्र कलिमा पर करें. जब अल्लाह परमात्मा का ही नाम है, जो सर्वव्यापी है तो अजान का प्रसारण बंद करा दें.

और सुझाव भी है, पहले मूल मंत्र से शुरू करें.

किसान दास बनाने हेतु सांड का वन्ध्याकरण करता है और पैगम्बरों द्वारा ठगे गए मनुष्य स्व स्फूर्त गाजे बाजे के साथ खतना कराते हैं. इंद्र ने विश्वामित्र को वीर्यहीन करने हेतु एक मेनका दिया. पैगम्बरों ने धरती की सभी नारियां अपने अनुयाईयों को सौंप दी हैं.

मनुष्य को बिना दबाव के दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, उसको वीर्यहीन करना| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक, कौटुम्बिक व्यभिचार, यौनशिक्षा, सहजीवन, वेश्यावृत्ति और समलैंगिक सम्बन्ध को संरक्षण देना है| अब्रह्मी संस्कृतियों ने कुमारी माओं को महिमामंडित कर और वैश्यावृति को सम्मानित कर मानवमात्र को वीर्यहीन कर दिया है| इन मजहबों ने संप्रभु मनुष्य को दास व रुग्ण बना दिया है| वीर्यहीन कर मूसा से लेकर एलिजाबेथ तक सभी मानवमात्र को दास बना रहे हैं| संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. [UDHR अनु०२५(२)].

परब्रह्म यहूदी, ईसाई और मुसलमान में भेद नहीं करता. वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य पापी नहीं, ब्रह्म है| प्रत्येक व्यक्ति को परब्रह्म द्वारा, उसके जन्म के साथ ही दिया गया, ईश्वरीय उर्जा का अनंत स्रोत, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वीर्यवान को पराजित या अधीन नहीं किया जा सकता है| मनुष्य की छोड़िये, वीर्यवान सांड़ को भी अधीन नहीं किया जा सकता और न बांधा ही जा सकता है|

अ)ब्राह्मी संस्कृतियां खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं के प्रयोग द्वारा मानवमात्र को वीर्यहीन कर दास बनाती हैंसैतानों मूसा और मुहम्मद नेकिसान के सांड़ की भांतियहूदियों को दास बनाने लिए खतना को मजहब से जोड़ दिया हैकिसान को सांड़ को दास बना कर खेती के योग्य बैल बनाने के लिए सांड़ का बंध्याकरण करना पड़ता है,लेकिन लूट और यौनाचार के लोभ में यहूदी और मुसलमान मजहब की आड़ में स्वेच्छा से गाजे बाजे के साथ वीर्यहीन बनने के लिए खतना कराते हैं और स्वेच्छा से अपने ब्रह्मतेज को गवां देते हैंजीवन भर रोगीअशक्त और दास बन कर जीते हैंफिर भी वीर्यहीन कर दास बनाने वाले और कयामत तक कब्र में सड़ाने वाले मूसा या मुहम्मद को यहूदी या मुसलमान अपना शत्रु नहीं मानतेक्यों कि मूसा और मुहम्मद ने लूटहत्या और नारी बलात्कार को जन्नत प्राप्ति का सुगम उपाय घोषित कर रखा है
यद्यपि बाइबल में खतना करने की स्पष्ट आज्ञा है, जिसको नीचे उद्धृत किया जा रहा है,

और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगाऔर यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.” बाइबलउत्पत्ति १७:११

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

तथापि इस्लाम में खतना वीर्यहीन करने की विधि हैइस्लाम मेंखतना एक सुन्नाह (रिवाज) हैजिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य बात यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त भी नहीं है. अतः मुसलमानों सहित मानवमात्र को मेरी नेक सलाह है कि वे खतना का विरोध करें| खतना करा कर अपने अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दातास्वतंत्रतापरमानंदआरोग्यओजतेज और स्मृति के जनक वीर्य को नष्ट न करें| क्योंकि जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता हैस्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है|

सिंह का कोई संगठन नहीं होता और न ही सिंह किसी दूसरे सिंह को रहने देता है, तथापि, वीर्यवान होने के कारण, पूरे जंगल पर राज्य करता है. बीती को भूलिए. आगे की सोचिये.

निर्णय आप स्वयं करें| आप १९४७ से अपहृत अपने स्वतंत्रता का युद्ध लड़ेंगे या एलिज़ाबेथ के उपनिवेश में अपने जीवन और सम्पत्ति के अधिकार से वंचित रहेंगे? ( भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग))

अहम् ब्रह्मास्मि का सरल हिन्दी अनुवाद है कि मैं ब्रह्म हूँ| साधारण व्यक्ति दिग्भ्रमित हैं। इसका कारण यह है कि लोग - जड़ बुद्धि व्याख्याकारों के कहे को अपनाते है। किसी भी अभिकथन के अभिप्राय को जानने के लिए आवश्यक है कि उसके पूर्वपक्ष को समझा जाय। हम वैदिक पंथी उपनिषदों के एक मात्र प्रमाणिक भाष्यकार आदिशंकराचार्य के कथन को प्रमाण मानते हैं, जो किसी व्यक्ति के मन में किसी भी तरह का अंध-विश्वास अथवा विभ्रम नहीं उत्पन्न करना चाहते थे।

इस अभिकथन के दो स्पष्ट पूर्व-पक्ष हैं-

वह विश्वास पर आधारित धारणा, जो व्यक्ति को अधीन करने के लिए, धर्म का आश्रित (दास) बनाती है। अब्रह्मी संस्कृतियांयही कर रही हैं| जैसे, एक मनुष्य क्या कर सकता है, करने वाला तो कोई और ही है। मीमांसा दर्शन का कर्मकांड-वादी समझ या अन्धविश्वास, जिसके अनुसार फल देवता देते हैं, कर्मकांड की प्राविधि ही सब कुछ है। वह दर्शन या अन्धविश्वास, व्यक्ति सत्ता को तुच्छ और गौण करता है- देवता, मन्त्र और धर्म को श्रेष्ठ बताता है। एक व्यक्ति के पास पराश्रित और हताश होने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचता। धर्म में पैगंबर/पौरोहित्य के वर्चस्व तथा कर्मकांड की 'अर्थ-हीन' दुरुहता को (अहम् ब्रह्मास्मि) का अभिकथन चुनौती देता है। हमारे निःशुल्क गुरुकुल बचपन में स्वावलम्बी बनाने के लिए अहम् ब्रह्मास्मि पर बल देते हैं|

सांख्य-दर्शन की धारणा है कि व्यक्ति (जीव) स्वयं कुछ भी नहीं करता, जो कुछ भी करती है - प्रकृति करती है। बंधन में भी पुरूष को प्रकृति डालती है तो मुक्त भी पुरूष को प्रकृति करती है। यानी पुरूष सिर्फ़ प्रकृति के इशारे पर नाचता है। इस विचारधारा के अनुसार तो व्यक्ति में कोई व्यक्तित्व है ही नहीं। अतः स्वीकार्य नहीं|

इन दो मानव-सत्ता विरोधी धारणाओं का खंडन और निषेध करते हुए आदि शंकराचार्य मानव-व्यक्तित्व की गरिमा की स्थापना करते हैं। आइये, समझे कि अहम् ब्रह्मास्मि का वास्तविक तात्पर्य क्या है?

अहम् यानी मैं स्वयं ब्रह्मअस्मि यानी हूँ और यही सच है और यह उतना ही सच है जितना कि दो और दो का चार होना|

अहम् ब्रह्मास्मि का तात्पर्य यह निर्देशित करता है कि मानव यानी प्रत्येक व्यक्ति स्वयं संप्रभु है। उसका व्यक्तित्व अत्यन्त महिमावान है - इसलिए हे मानवों!

आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्ति को महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो, जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा। यही है अहम् ब्रह्मास्मि का अन्यतम तात्पर्य। मेरा यही सुझाव मानवमात्र के लिए है|

हमें एकता की आवश्यकता ही नहीं है. आवश्यकता है गुरुकुलों की. कपिल मुनि ने तिनका भी नहीं उठाया और सगर की सारी सेना भष्म कर दी. परशुराम की कोई सेना नहीं थी, अकेले २१ बार आतताई क्षत्रियों का विनाश किया. हनुमान निहत्थे लंका में घुसे और लंका में आग लगा दिया. चाणक्य ने मगध के राजा घनानंद का विनाश कर पूरे भारत पर साम्राज्य स्थापित किया. आदि शंकराचार्य ने कुल ३२ वर्ष जीवन पाकर भी, अकेले बौद्ध धर्म का अंत कर, ४ पीठ बनाये और सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया.

क्या आप वीर्यहीन कारक आप के ही शत्रु आतताई  ईसाइयत और इस्लाम से मुक्ति लेने में स्वयं अपनी सहायता कर सकते हैं?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/६३९७७३०६१०



 

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AyodhyaP Tripathi,
Aug 5, 2018, 5:25 AM
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