Muj18w23y Bhumafia Rajypal




Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 24 Year 24 ISSUE 23y,  Jun 22-28, 2018. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 7017886116 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj18w23y Bhumafia Rajypal

||श्री गणेशायेनमः||



पुनर्स्मरण २१.०६.२०१८
विवरण हेतु नीचे की लिंक देखें,

http://www.aryavrt.com/muj18w23y-bhumafia-rajypal

महामहिम राज्यपाल, उप्र सरकार.
मैं अनुभव कर रहा हूँ कि राज्यपाल जनता द्वारा चुने प्रतिनिधि नहीं हैं. उनका मनोनयन सनातन संस्कृति को लुप्त करने हेतु किया जाता है.
मेरे टिप्पणी की पुष्टि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल और तब जंग व अब बैजल के बीच टकराव से होती है.
२ सितंबर, १९५३ को संविधान संकलन कर्ता अंबेडकर ने राज्य सभा मे कहा था, “हम ने उत्तराधिकार प्राप्त किया है कि राज्यपाल के पास कोई अधिकार कत्तई नहीं होने चाहिए, यह कि उसे (राज्यपाल को) रबर की मुहर मात्र होना चाहिए”| सदस्य (अम्बेडकर) ने समझाया, “यदि एक मंत्री, कितनी भी दुष्टता पूर्वक राज्यपाल के समक्ष कोई प्रस्ताव रखता है, तो उसे (राज्यपाल को) पूर्णतः स्वीकार करना पड़ेगा! हमने देश में प्रजातंत्र की इसी रूप-रेखा का विकास किया है|” .
७० मे से ६७ सीटों पर बहुमत से जीते मुख्यमंत्री केजरीवाल को जंग भी आंख दिखाते रहे और अब बैजल दिखा रहे हैं. यानी प्रजातंत्र के मूल धारणा का उल्लंघन हो रहा है.
फिर चुनाव के नौटंकी की क्या आवश्यकता?, परदे के पीछे वाला सामने आए और शासन करे, देश का धन और समय बचेगा.

मैं, अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी पुत्र स्व० बेनी माधव त्रिपाठी अन्य के अतिरिक्त निम्नलिखित याचना करता हूँ

१.      यह कि यद्यपि यह पोर्टल योगी जी का है, तथापि नियमानुसार उपनिवेश विरोधी को बिना आप के संस्तुति के फांसी नहीं हो सकती. नियमानुसार की आड़ मे आप मुझे भूखों मार रहे हैं। ताकि राजीव दीक्षित की भांति मैं मर जाऊं और  इंडिया उपनिवेश है, लोग जान न पाएं. आप एलिजाबेथ के मनोनीत विवश बलिपशु हैं. नियमानुसार भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत मुझे जज से फांसी दिलवाइए. मानवता का भला कीजिये.

२.      यह कि गांधी ने इंडिया को ब्रिटिश उपनिवेश बनवा दिया. मोदी उपनिवेश को लंदन मे पक्का कर आए. मैं ब्रिटिश स्वतंत्र उपनिवेश का विरोधी हूँ. भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत मैं फांसी का पात्र हूँ. मुझे अविलम्ब मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाएँ. क्या दम है?

३.      यह कि कृपया जनसुनवाई सं० 40018817015237 का अवलोकन करें. मेरे मूल फौजदारी मामले 7024 सन 2000 जिला गोरखपुर मे वादी और AHC Cr. MISC. APPL 1973 OF 2012 US 482 CrPC DISTT GORAKHPUR, IN THE MATTER OF VEER BAHADUR TIWARI VS STATE OF UP मे प्रतिवादी उत्तर प्रदेश सरकार है। इसका निस्तारण एलिज़ाबेथ के आदेश पर मुझे सुने बिना 17.1.2012 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर दिया है। इसे तहसील स्तर पर किस लिए भेजा गया? १९ वर्षों में अभियोग पत्र क्यों नहीं दिया गया?
योगी जी प्रदेश को भूमाफिया मुक्त करने की घोषणा करते हैं, जबकि स्वयं को सबसे बड़ा भूमाफिया सिद्ध कर चुके हैं.

४.       यह कि मेरे याचिका सं ९६७२ वर्ष १९८८ रिट सी की जांच में न्यायमूर्ति रवि स्वरूप धवन ने राजस्व अभिलेखों मे हेराफेरी मिलने पर मुझसे जलाशय निर्माण पर प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो मैनें कहा था कि पानी पिलाना पुण्य का कार्य है। मुझे पास ही भूमि दे दी जाए और ९अगस्त १९८९ को आदेश पारित हुआ था. १५ वर्ष काम रुका रहा. आदेश का किसी तरह का विरोध नहीं किया गया है. लेकिन आज तक मुझे भूमि नहीं दी गई।

http://www.aryavrt.com/nl-anne-1-3

५.       यह कि प्रमाणित है कि शासन उपनिवेश का संरक्षण करने हेतु विवश है

६.       यह कि मुहम्मद पर मामूली टिप्पणी पर कमलेश तिवारी, जिनके साथ मै चौकाघाट, बनारस जेल मे बंद था, पर रासुका लगा। जबकि जज ने स्वीकार किया है कि मैनें अल्लाह के विरुद्ध सन २००० मे ही अपमान जनक टिप्पणियां की थीं। तब से आज तक करता रहता हूँ। जज ने अपने निर्णय मे स्वीकार किया है कि मैनें अल्लाह को लुटेरा, बलात्कारी, हत्यारा और बहुत कुछ कहा। नियमानुसार मेरे विरुद्ध रासुका या फतवा जारी क्यों नहीं करते? उपनिवेश विरोधी हूँ. नियमानुसार सन 2000 से अब तक फांसी क्यों नहीं दिया. विवरणURL
http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng  पर।

७.       यह कि आप लोगों की तो कोई औकात ही नहीं, एलिजाबेथ नियमानुसार मुझे कानूनी अड़चन बताए? स्पष्ट है कि कानूनी अड़चन नहीं, अपितु इंडिया मे एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध अपहृत आंदोलन के पुनर्जीवित होने का एलिजाबेथ को भय सता रहा है।

८.       यह कि इसीलिए गोरखपुर मे महामहिम ने भूमाफिया खड़ा कर रखा है, दिल्ली के महामहिम ने दिल्ली मे और अब उखं के महामहिम ने ऋषिकेश मे तोप भूमाफिया काबीना मंत्री सतपाल महाराज को खड़ा कर दिया है, जो मुझे कत्ल कराने के लिए सरल उपाय ढूंढ़ रहे हैं.

९.       यह कि रणनीति यह है कि ज्यों ही एलिजाबेथ के उपनिवेश को संकट दिखाई दे, मेरा या किसी भूमाफिया का घात कर दिया जाए।

१०.   यह कि किसी को भी बलि का बकरा बना लिया जाए, जो कहे कि मैनें सुपारी दी थी और मुझे मृत्यु होने तक फांसी पर लटका दिया जाए। ताकि इंडिया और पाकिस्तान के उपनिवेश वासी यह न जाने कि वे ब्रिटिश दास थे, हैं और भविष्य में भी बने रहेंगे।

११.   यह कि मेरा निवेदन अनंतिम पेंशन हेतु है। जनसुनवाई स० 40018818012310 का अवलोकन करें. आप ने इस उत्तर में वह नियम नहीं बताया कि जब न मुझे नौकरी से निकाला गया और न मेरा बकाया कोई भुगतान किया गया तो मेरी तदर्थ नियुक्ति कब और कैसे समाप्त हुई? नियमानुसार यह तत्काल स्वीकृत होना चाहिये। १८ वर्ष पूरे हो गए। क्या है एलिजाबेथ का नियम? यही बता दीजिए।

१२.   यह कि कोई भी कानूनविद बताए कि बपतिस्मा व अजान सर्वधर्म समभाव और सेकुलर कैसे है? विश्व की सबसे बड़ी आबादी ईसाई व मुसलमान अल्पसंख्यक कैसे हैं? कश्मीर, नागालैंड व मिजोरम मे हिंदू अल्पसंख्यक क्यों नहीं हुआ? हर व्यक्ति अपराधी है. या तो ईसा को राजा नहीं मानता अथवा केवल अल्लाह की पूजा नहीं करता. वह कत्ल कर दिया जाएगा.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

इन खूनियों को अपनी संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार क्यों दिया गया है?

१३.   यह कि बपतिस्मा और अजान यानी ईशनिंदकों के विरुद्ध सन १८६० से आज तक नियमानुसार रासुका या फतवा क्यों नहीं लगा?

१४.   यह कि मैं जानना चाहता हूँ कि नियमानुसार ₹ यानी नोट की कीमत क्या है? १९१७ मे १₹=१३ अमेरिकी डालर था। १९४७ में १₹=१ अमेरिकी डालर हो गया। ८ नव. २०१६ तक १डालर=६७₹ रहा। अब ₹ रद्दी.

₹ की कीमत


THE RESERVE BANK OF INDIA (AMENDMENT) BILL, 1991


A BILL further to amend the Reserve Bank of India Act, 1934. Be it enacted by Parliament in the Forty-first Year of the Republic of India as follows:- Short title and commencement. 1. (1) This Act may be called the Reserve Bank of India (Amendment) Act, 1991. (2) It shall be deemed to have come into force on the 15th day of October, 1990. Amendment of section 33 of Act 2 of 1934. 2. In the Reserve Bank of India Act, 1934 (hereinafter referred to as the principal Act), in section 33, in sub-section (4), for the figures and words "0.118489 grammes of fine gold per rupee", the words "a price not exceeding the international market price for the time being obtaining" shall be substituted. Repeal and saving 3. (1) The Reserve Bank of India (Amendment) Ordinance, 1990, is hereby repeated. (2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the principal Act, as amended by the said Ordinance, shall be deemed to have been done or taken under the principal Act, as amended by this Act.


उपरोक्त अधिनियम का संशोधन किसके हित मे? नियम का उल्लंघन क्यों किया?

१५.   यह कि इंडियन उपनिवेशवासी जिसे ₹ कहते हैं, वह ₹ देने का प्रतिज्ञा पत्र (Promissory note) है. धारक का ₹ रिजर्वबैंक के आका बैंक आफ इंग्लैण्ड के पास रहता है, जिसे धारक को देने के लिए गवर्नर प्रतिज्ञा बद्ध है. इतना ही नहीं, केन्द्रीय सरकार द्वारा ₹ का प्रतिज्ञापत्र प्रत्याभूत भी है.रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की धारा ३३(४) के अनुसार १५ अक्टूबर, १९९० तक १ ₹ का मूल्य ०.११८४८९ ग्राम शुद्ध सोना था, किस नियम से १९९० के बाद से ₹ की कोई कीमत नहीं. नियमानुसार बिना सोना रखे नोट छापने वाली सरकार के विरुद्ध क्या किया जाना चाहिए?

१६.   यह कि यद्यपि इस ठगी से विश्व का हर व्यक्ति पीड़ित है, तथापि दिल्ली  उच्च न्यायालय  तक मेरी अपील निरस्त होती रही. अंत में कानून में १९९० के प्रभाव से संशोधन हो गया. संशोधन के फल स्वरूप सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार नहीं की. कौन से नियमानुसार एलिजाबेथ अपने ही वचन से मुकर गई. जब कि इस धोखाधड़ी से जज सहित हर उपनिवेश वासी भी पीड़ित था और आज भी है! जज हैं या जल्लाद और ठगों के कवच?

१७.   यह कि क्या महामहिम या कोई जज इस ठगी का विरोध कर सकता है?

१८.   यह कि राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! आप अपना पूजास्थल, भावी पीढी, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या आप को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?
मैकाले को इंडिया में सन १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी न मिला.  भारत मे सोना गिना नहीं, तौला जाता था। आज उसी देश मे नमो, विदेशियों के शर्तों पर, पूंजी आयात करने के लिए विवश हैं। उपनिवेश वासी विदेशियों की दासता करेँगे। सभी नमो की जयकार कर रहे हैं! कोई नहीं पूछता कि एलिजाबेथ ने देश को क्यों लूटा? अभी भी हमे विमुद्रीकरण करके लूटा और हम एलिजाबेथ के दास नमो की जयकार कर रहे हैं! १९४७ तक देश के खजाने में १५५ करोड़ रु० था. गरीब पर  कोई विदेशी कर्ज न था. आज हर गरीब ८२५६०/- रु० कर्जदार (मार्च २०१६ तक; ७० रु० प्रति डालर की दर से) है| और यह कर्ज तब है, जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने नागरिकों की जमीनें और जमींदारी लूटी|सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे| अब नमो गरीबी मिटा रहे हैं।

१९.   यह कि मैनें बाबरी विध्वंस कराया. ६ शपथपत्र दिया. मुझ पर अभियोग नहीं चला. गांधी की प्रतिमा तोड़वाई. जज से सजा देने का आग्रह किया. लेकिन अभियोग धमकी का चला. मेरे हस्ताक्षर का नमूना गायब कर सरकार ने गांधी की प्रतिष्ठा बचाई. मालेगांव मामले में, जिसमें मुख्य मंत्री योगी मेरे सह अभियुक्त हैं, भी सरकार ने मुझे जेल नहीं भेजा. स्वतंत्र उपनिवेश का मामला स्पष्ट है. मैं उपनिवेश विरोधी हूँ. नियमानुसार मुझे फांसी मिलनी चाहिये।
http://www.aryavrt.com/babri-affidavits

अतः मेरी माँग है कि महामहिम नाइक जी, नियमानुसार अपने दंप्रसं की धारा १९६ से प्राप्त एकाधिकार का प्रयोग करके, अविलम्ब मेरे विरुद्ध धारा १२१ के अंतर्गत अभियोग चलाने की संस्तुति प्रदान करेंः

भवदीय:-

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सूचना सचिव)
२१.०६.२०१८
आर्यावर्त सरकार,

७७ खेड़ा खुर्द, दिल्लीः ११० ०८२.

चल दूरभाष: (+९१) ९८६८३२४०२५/६३९७७३०६१०

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