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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 24 Year 24 ISSUE 17y,  Apr 13-19, 2018. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 7017886116 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj18w17 nmomet Elizabeth

||श्री गणेशायेनमः||

सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली
जनहित याचिका                वर्ष २०१८
अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी ...... याचिकाकर्ता
बनाम
संघ सरकार द्वारा प्रमुख गृह सचिव नार्थ ब्लाक दिल्ली १
सेवा में, 
मुख्य न्यायाधीश एवं सहयोगी न्यायाधीश गण,
याचिकाकर्ता निम्नलिखित निवेदन करता है,
सन १९४७ तक इंडिया में स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले गली गली में मिलते थे. आज स्वतंत्र उपनिवेश का एक भी ज्ञात विरोधी नहीं! 
उल्टे जो भी उपनिवेश का विरोध कर रहा है, गुप्त रूप से नष्ट किया जा रहा है. सबसे बाद ज्ञात व्यक्ति राजीव दीक्षित हैं. गुमनामी मे मारे जाने वाला, लाखों लोगों मे मैं भी शामिल, अकेला हूँ.
मेरी हत्या गुमनामी मे करनेवाले मामूली लोग नहीं हैं.  सबके सब कानून के ऊपर, राष्ट्रपति और दो राज्यपाल व दिल्ली के उप राज्यपाल हैं. 
इन सभी को स्वतंत्र उपनिवेश विरोधी को भादंसं की धारा १२१ के अपराध मे दंप्रसं की धारा १९६ के अंतर्गत अभियोग चलाने की संस्तुति देने के लिए मनोनीत किया गया है.
अब पता चला है कि इन लोगों को उपनिवेश विरोधियों को गुमनामी मे मरवाने के आदेश हैं, ताकि इंडिया उपनिवेश है, लोग जान न पाएं.
राजीव दीक्षित की भांति मुझे भी सन २००१ मे जेल में जहर दिया गया था, परंतु मैं मरा नहीं. मेरी व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल की भूमि हड़प कर मुझे कत्ल कराने के लिए उप्र और उखं के राज्यपालों ने भूमाफिया बैठा रखे हैं. दिल्ली में उप राज्यपाल ने भूमाफिया बैठा रखा है. लिंकें नीचे हैं,
http://www.aryavrt.com/nl-anne-1-3
http://www.aryavrt.com/gnl-case
http://www.aryavrt.com/kl_gali-bdo_lg-16d08
http://www.aryavrt.com/muj18w08y-conspiracy
http://www.aryavrt.com/muj18w15-fansi-do
कानून स्पष्ट है. मैं स्वतंत्र उपनिवेश विरोधी हूँ. भादंसं की धारा १२१ के अनुसार यह राज्य द्रोह है, जिसके अनुसार न्याय हित में मुझे फांसी या आजंम कारावास मिलना चाहिए.
नीचे के समाचार कतरनों मे मेरी आपत्तियाँ हैं, जो मुझे फांसी दिलाने के लिए पर्याप्त हैं. 
महारानी एलिजाबेथ से मिले पीएम मोदी, इन मुद्दों पर हुई चर्चा http://dhunt.in/3Uj8x?ss=wsp&s=pa
लेकिन नमो की उपनिवेश से मुक्ति हेतु चर्चा नहीं हुई! यानी १२५ करोड़ की प्रजा मे आजादी की लालसा किसी को नहीं!
सवर्णों  को विप्रों से आजादी चाहिए. दलितों को सवर्णों से. किसी को इंडिया से आजाद हो कर खालिस्तान बनाना है, तो किसी को नागालैंड, तो किसी को पाकिस्तान. लिस्ट लंबी है, परन्तु एलिजाबेथ की दासता सबको प्यारी है. क्योंकि एलिजाबेथ को गैर कथोलिक का घात कर उसका मांस खाना और लहू पीना है. इन सबमें एक समानता है. रहेंगे सभी ब्रिटेन के दास ही.

हो सकता है कि किसी को ब्रिटिश दासता से भी मुक्ति की चाह हो, वे आर्यावर्त सरकार से संपर्क करें.

लंदन में पीएम मोदी के संबोधन के 10 अहम सवालों मे उपनिवेश का उल्लेख तक नहीं! https://khabar.ndtv.com/news/file-facts/pm-modi-says-in-uk-i-want-this-government-to-be-criticised-read-top-10-quotes-1839572
मुझे दुख इस बात का है कि हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वतंत्रता के युद्ध का सन १९४७ मे गांधी ने अपहरण कर लिया. नमो के सत्ता में आने के पूर्व से ही मैं उपनिवेश मुक्ति हेतु नमो से आग्रह कर रहा हूँ लेकिन नमो ने उपनिवेश से मुक्ति हेतु एलिजाबेथ से पूछा तक नहीं.

क्या स्वतंत्रता किसी को नहीं चाहिए?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से उनके बर्किंघम पैलेस में मुलाकात की और परस्पर हितों के मुद्दों पर चर्चा की. पीएम ने राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक ( चोगम ) से पहले महारानी से मुलाकात की. महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (91 साल ) राष्ट्रमंडल की प्रमुख हैं. लंदन में चोगम की बैठक में 53 शासनाध्यक्ष भाग लेंगे. इसके बाद महारानी बर्किंघम पैलेस में भव्य रात्रिभोज का आयोजन करेंगी.


भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत कई तरीकों से अभूतपूर्व रहा. यह ब्रिटेन के लिए दौरे के महत्व को दर्शाता है और भारत - ब्रिटेन के संबंधों की परिपक्वता की कहानी बंया करता है.
मुझे अब पता चला है कि दास और स्वामी के दासता के अतिरिक्त भी संबंध होते हैं. 
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री थेरेसा मे के साथ 10 डाउनिंग स्ट्रीट में द्विपक्षीय चर्चा की. दोनों देश के नेताओं ने अलगाववाद , सीमापार आतंकवाद , वीजा और आव्रजन सहित आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. 
यहां भी उपनिवेश से मुक्ति हेतु चर्चा नहीं हुई.      
भारत सरकार का कहना है कि चोगम शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की उपस्थिति यह संकेत देती है कि देश विभिन्न वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है.
ब्रिटेन में भारत के उप उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा कि बहुपक्षीय निकायों के साथ भारत का संपर्क लगातार बढ़ रहा है और राष्ट्रकुल अलग नहीं है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत अब स्पष्ट रूप से नेतृत्वकारी भूमिका निभाना चाहता है. पटनायक ने कहा कि भारत राष्ट्रकुल का सबसे बड़ा देश है और ब्रिटेन चाहता है कि वह इसमें अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाए. यानी अपनी स्वतंत्रता भूल जाए. दास बना रहे.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रकुल के अंदर गतिविधियां बढ़ाकर भारत इसमें अपना संपर्क बढ़ा सकता है. इसमें अधिक संसाधनों और श्रमबल के अलावा वित्तीय योगदान शामिल है. यानी सोने की चिडिय़ा भारत को दरिद्र इंडिया बना दिया, लेकिन वित्त की भूख मिटी नहीं है.
वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री के सम्मेलन में भाग लेने की एक वजह राष्ट्रकुल प्रमुख महारानी एलिजाबेथ दो द्वारा उन्हें व्यक्तिगत रूप से भेजा गया पत्र भी है. यह महारानी की मेजबानी वाला आखिरी चोगम सम्मेलन होगा.
क्या कहने? दास का इतना सम्मान! मल्लिका का नमो को प्रेम पत्र! वह भी ९१ वर्ष की आयु में. इतनी गिरी तो वैश्या एडविना भी नहीं थी.

91 वर्षीय महारानी एलिजाबेथ दो लंबी यात्रा नहीं कर सकतीं , तो ऐसे में वह अन्य चोगम सदस्यों द्वारा भविष्य में होने वाले सम्मेलनों में भाग नहीं ले सकतीं. चोगम सम्मेलन प्रत्येक दो साल में होता है. इससे इस तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी हैं कि क्या महारानी के पुत्र और उत्तराधिकारी प्रिंस चार्ल्स को इस संगठन (चोगम) का अगला प्रमुख नियुक्त किया जा सकता है.


आर्यावर्त सरकार जानना चाहती है कि उपनिवेश से मुक्ति हेतु चर्चा कब शुरू होगी?


उपनिवेश वासियों से आग्रह:
आर्यावर्त सरकार संस्कृतियों का युद्ध लड़ रही है. 
इंडिया १८ जुलाई, १९४७ को ब्रिटिश संसद में स्वतंत्र उपनिवेश बना. 
http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947
मैं उपनिवेश विरोधी हूँ. राजीव दीक्षित की भांति मुझे मारने के लिये दलित राष्ट्रपति, उप्र राज्यपाल, उखं राज्यपाल और दिल्ली उप राज्यपाल लिप्त हैं. इनमें एक समानता है. सभी कानून से ऊपर हैं. सबने उपनिवेश विरोधी को फांसी दिलाने की शपथ ली है. मेरे बारंबार आग्रह के बाद भी किसी के पास मुझे फांसी दिलाने का साहस नहीं है.
ए मिट्टी के माधव स्वयं अपनी ही रक्षा नहीं कर सकते.
प्रार्थना
न्यायमूर्ति गण से प्रार्थना है कि मुझे फांसी दिलाएं.
अप्रति
या ०७.०५.२०१८

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