Muj18w16 Fansi Dilaiye




Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 24 Year 24 ISSUE 16y,  Apr 06-12, 2018. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 7017886116 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj18w16y Fansi Dilaiye

||श्री गणेशायेनमः||

 न्यायमूर्ति श्री दीपक मिश्र, CJI, को प्रणाम!

मुस्लिम निजी कानून के अनुसार अजान यानी ईशनिंदक को कत्ल करने का मुसलमान को अनुच्छेद २९ से प्राप्त संवैधानिक अधिकार है.
मै दूध का धुला नहीं, सदाबहार चोर, कुटिल, कामी, बाबरी विध्वंसक, बपतिस्मा, अजान, बाइबिल, कुरान, भारतीय संविधान, चर्च व मस्जिद विरोधी व विध्वंसक, जिहाद, संविधान विरोधी हूँ। मैं भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत फांसी का पात्र हूँ। मुझे नियमानुसार पेंशन नहीं दे सकते और न  नियमानुसार फांसी दिलवा पा रहे हैं.
न्याय प्रिय एलिजाबेथ सन २००० से मुझे फांसी क्यों नहीं दिलवा सकी? कोई ईमाम फतवा जारी क्यों नहीं कर सका? नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng
विप्रवर! दोष हमारा है. हम उपनिवेश का विरोध नहीं करते. बाइबिल, कुरान और संविधान का विरोध नहीं करते. बपतिस्मा, अजान और खुत्बे का विरोध नहीं करते.
पंथनिरपेक्ष, सहिष्णु और साम्प्रदायिक सद्भाववादी इस्लाम के कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमान का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. अनुच्छेद २९(१). काफ़िर को कत्ल करने व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलने के लिए मुसलमान को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, राष्ट्रपति, राज्यपाल व जज, असीमित मौलिक मजहबी अधिकार स्वीकार करने के लिए विवश हैं| आप बाइबिल और कुरान के हठधर्मी आदेशों के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकते. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|
मुसलमान काफिरों की हत्या करने से स्वर्ग पाएंगे| 
क्या आपको नहीं लगता कि आप अपने सर्वनाश के लिए विवश हैं?
काफिरों को इस्लाम के बारे में चार सीधी सच्चाईयाँ 
जाननी चाहियें| अज्ञान वश काफ़िरों ने घातक धारणा 
बना रखी है कि उनके अपने धर्म की भांति इस्लाम भी 
एक धर्म है| मै अपने प्रतिवाद में चार सच्चाईयाँ उद्धृत कर रहा हूँ:-
१.काफिरों को धोखा देने के लिए मुसलमान तकिय्या (कुरान३:२८ व १६:१०६) का प्रयोग कर यह विश्वास दिलाते हैं कि कुछ दिग्भ्रमित मुसलमानों ने उनके मजहब
का अपहरण कर लिया है और इस्लाम को बदनाम
 कर रहे हैं| लेकिन इस्लाम का अपहरण नहीं होता है| यद्यपि काफ़िर ऐसा ही मानते हैं क्यों कि उनकी गलत 
धारणा है कि सभी धर्म समान हैं|काफ़िरों की यह त्रुटिपूर्ण धारणा इसलिए है कि वे समझते हैं कि कोई धर्म शांतिप्रिय नागरिकों की हत्या और
लूटमार कोबढ़ावा कैसे दे सकता है? अतः सचमुच ही कुछ सिरफिरे मुसलमानों ने इस्लाम का अपहरण 
कर रखा है| यदि एक बार काफिरों को इस्लाम की 
असलियत समझ में आ जाये तो वे  इस्लाम से बचने का सही मार्ग ढूँढना प्रारम्भ कर देंगे|
२.इस्लाम की उन्नति के लिए अल्लाह मुसलमानों को  धोखा देने की अनुमति देता है| इसे अल्लाह तकिय्या 
कहता है|लेकिन काफिरों को तकिय्या के इस्लामी 
सिद्धांत का ज्ञान नहींहै| तकिय्या के सिद्धांत का 
ज्ञान काफिरों को अल्लाह कीधोखाधड़ी से बचायेगा| वे मौलवियों व ईमामों की हर बात परविश्वास करना बंद कर देंगे|
३| धरती पर शरिया कानून लगाने के लिए प्रयत्नशील 
रहना हर मुसलमान का मजहबी दायित्व है| इसे जिहाद 
कहा जाताहै| हर व्यक्ति को मुसलमान बनाना और धरती को शरिया आधारित इस्लामी राज्य बना लेना ही जिहाद है| यदि काफ़िरइस सच्चाई को जान लें तो वे इस्लाम को 
धरती पर टिकने नहींदेंगे|
४ चूंकि मूर्ख मुसलमानों ने (कुरान २:३५) स्वेच्छा से 
शासकोंकी दासता स्वीकार कर ली है| अतः शासक 
निज हित मे इस्लाम को संरक्षा, सुरक्षा और 
बढ़ावा दे रहे हैंऔर सच्चाई को छिपाने के हर 
प्रयास कर रहे हैं|
मेरे मामले में आपको नियमानुसार कार्रवाई करनी है. वैसे भी एलिजाबेथ आप के पीछे पड़ी है. आप का एलिजाबेथ पर आक्रमण मानव जाति के लिए वरदान होगा. यद्यपि आपको आर्थिक हानि उठानी पड़ेगी.
आप चाहें तो स्वयं को सुरक्षित कर के भी मेरी सहायता कर सकते हैं.
अप्रति

या २३.४.१८

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