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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 24 Year 24 ISSUE 15y,  Mar  30 - Apr 05, 2018. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 7017886116 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj18w15 Fansi do

 ||श्री गणेशायेनमः||

 जनसुनवाई 40018818012310

महामहिम राज्यपाल, उप्र सरकार.
आप के अधिकारों के बारे में संविधान के संकलन कर्ता अंबेडकर ने राज्य सभा में टिप्पणी की है.
आपकी सरकार नियमानुसार कार्रवाई के आदेश देती है. लेकिन नियमानुसार कार्य नहीं करती. लिंक निम्नलिखित है. आग्रह है कि उसे पढ़ें,
http://www.aryavrt.com/ghatak-bhartiya-smvidhan
यद्यपि यह पोर्टल योगी जी का है, तथापि नियमानुसार उपनिवेश विरोधी को बिना आप के संस्तुति के फांसी नहीं हो सकती. नियमानुसार की आड़ मे एलिजाबेथ मुझे भूखों मार रही है। ताकि राजीव दीक्षित की भांति मैं मर जाऊं और  इंडिया उपनिवेश है, लोग जान न पाएं. आप एलिजाबेथ के मनोनीत विवश बलिपशु हैं. नियमानुसार भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत, दंप्रसं की धारा १९६ के अंतर्गत संस्तुति देकर, मुझे जज से फांसी दिलवाइए. मानवता का भला कीजिये.
उपनिवेश का संरक्षण करने के लिए आप मुझे गुमनाम नष्ट  कर रहे हैं.
कृपया जनसुनवाई सं० 40018817015237 का अवलोकन करें.
मेरे मूल फौजदारी मामले 7024 सन 2000 जिला गोरखपुर मे वादी और AHC Cr. MISC. APPL 1973 OF 2012 US 482 CrPC DISTT GORAKHPUR, IN THE MATTER OF VEER BAHADUR TIWARI VS STATE OF UP मे प्रतिवादी आप यानी उत्तर प्रदेश की उपनिवेश सरकार है। इसका निस्तारण मुझे सुने बिना 17.1.2012 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर दिया है।
अब सर्वोच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश की सीमा ६ माह निर्धारित की है. उपरोक्त मामले मे स्थगनादेश हुए ६ वर्ष से अधिक हो गए. मैं लकवाग्रस्त हूँ. गरीबी का प्रमाण पत्र दे नहीं सकता.
गोरखपुर आयुक्त के यहां भी उपरोक्त भूमि के मेरे पक्ष में एक पक्षीय निर्णय के बाद भी १९९९ से ही निगरानी लंबित है. माननीय योगी जी त्वरित निस्तारण का आदेश जारी कर चुके हैं.
इसे तहसील स्तर पर किस लिए भेजा जा रहा है?
मेरे याचिका सं ९६७२ वर्ष१९८८ रिट सी की जांच में न्यायमूर्ति रवि स्वरूप धवन ने राजस्व अभिलेखों मे हेराफेरी मिलने पर मुझसे जलाशय निर्माण पर प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो मैनें कहा था कि पानी पिलाना पुण्य का कार्य है। मुझे पास ही भूमि दे दी जाए और ९अगस्त १९८९ को आदेश पारित हुआ था. आज तक मुझे भूमि नहीं दी गई। कौन से नियम का पालन हुआ?
http://www.aryavrt.com/nl-anne-1-3
मुहम्मद पर मामूली टिप्पणी पर कमलेश तिवारी, जिनके साथ मै चौकाघाट, बनारस जेल मे बंद था, पर रासुका लगा। जबकि जज ने स्वीकार किया है कि मैनें अल्लाह के विरुद्ध सन २००० मे ही अपमान जनक टिप्पणियां की थीं। तब से आज तक करता रहता हूँ। जज ने अपने निर्णय मे स्वीकार किया है कि मैनें अल्लाह को लुटेरा, बलात्कारी, हत्यारा और बहुत कुछ कहा। नियमानुसार मेरे विरुद्ध रासुका या फतवा जारी क्यों नहीं करते? विवरण URL
http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng पर.
आप लोगों की तो कोई औकात ही नहीं, एलिजाबेथ नियमानुसार मुझे कानूनी अड़चन बताए कि आज तक मुझे बदले में भूमि क्यों नहीं दी गई?
स्पष्ट है कि कानूनी अड़चन नहीं, अपितु इंडिया मे एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध अपहृत आंदोलन के पुनर्जीवित होने का एलिजाबेथ को भय सता रहा है।
इसीलिए  गोरखपुर मे महामहिम ने भूमाफिया खड़ा कर रखा है, दिल्ली के महामहिम ने दिल्ली मे और अब उखं के महामहिम ने ऋषिकेश मे तोप भूमाफिया काबीना सिचाई मंत्री सतपाल महाराज को खड़ा कर दिया है, जो मुझे अनंतिम पेंशन तो दे न पाए, अलबत्ता आज कल कत्ल कराने के लिए ढूंढ़ रहे हैं.
मेरा निवेदन अनंतिम पेंशन हेतु है। नियमानुसार यह तत्काल स्वीकृत होना चाहिये। मुझे नौकरी से निकाला नहीं गया. १८ वर्ष पूरे हो गए।
अपनी सरकार के संलग्न आख्या का अवलोकन कीजिए. मेरा नियुक्ति पत्र गायब है. पत्र सेवा नियमित करने हेतु लिखा गया है. त्याग पत्र स्वीकार नहीं किया गया है. अभिकरण के आदेश का पालन नहीं किया गया है. आप ने मुझे सेवा मुक्त नहीं किया है. मेरी १४ वर्ष की सेवा अभिकरण ने नियमित कर दी है. सर्वोच्च न्यायालय ने १० वर्ष से अधिक कार्यरत कर्मचारी को स्थायी स्वीकार किया है.
कौनसा अभिलेख है, जिसके आधार पर मेरी सेवा तदर्थ हैं और यदि होभी तब भी मेरे पास ऐसी सूचना नहीं है कि सरकार ने मेरा हिसाब कर मुझे सेवा मुक्त किया हो.
http://www.shasnadesh.com/2015/07/blog-post_5.html
क्या है एलिजाबेथ का नियम? यही बता दीजिए।
मेरे पैतृक गांव मुजहना तप्पा पड़खोरी परगना हवेली तहसील कप्तानगंज जिला कुशीनगर उत्तर प्रदेश में मेरे पास खेती की भूमि है गांव की कृषि भूमि और पैत्रिक निवास के बीच रेलवे का फाटक ८सी है इसे एलिजाबेथ ने बंद करवा दिया है. मैं ही नहीं कई गांवों के लोग मेरे उपनिवेश विरोधी होने का दंड भुगत रहे हैं.
रणनीति यह है कि उपनिवेश वासी यह न जान पाएं कि उनके पूर्वज ब्रिटिश दास थे, आजभी वे दास हैं और आगे उनके वंशज भी तब तक दास ही रहेंगे, जब तक गणतंत्र, संविधान और बाइबिल रहेगा.
रणनीति यह है कि ज्यों ही एलिजाबेथ के उपनिवेश को संकट दिखाई दे, मेरा या किसी भूमाफिया का घात कर दिया जाए।
किसी को भी बलि का बकरा बना लिया जाए, जो कहे कि मैनें सुपारी दी थी और मुझे मृत्यु होने तक फांसी पर लटका दिया जाए। ताकि इंडिया और पाकिस्तान के उपनिवेश वासी यह न जाने कि वे ब्रिटिश दास थे, हैं और भविष्य में भी बने रहेंगे।
कोईभी कानूनविद बताए,
कि हिंदू अल्पसंख्यक क्यों नहीं होता? न कश्मीर में हुआ, न नागालैंड मे और न ही मिजोरम मे.
१८ जुलाई, १९४७ को इंडिया ब्रिटिश संसद मे २ स्वतंत्र उपनिवेश बना। स्वतंत्र कब हुआ?
स्वतंत्र उपनिवेश का मतलब क्या है?
सभी ब्रिटिश कानून जस के तस क्यों लागू हैं?
बाइबिल का हठधर्म है
ईसा का आदेश है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७). यीशु ने उन से कहा; "`मैं तुम से सच सच कहता हूं जब तक मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लोहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।" बाइबिल, यूहन्ना ६:५३
गो-नर भक्षी ईसाई विश्व की सबसे बड़ी आबादी हैं। इन्हें लोकतंत्र समर्थक व अल्पसंख्यक स्वीकार करने का क्या आधार है?
पंथनिरपेक्ष, सहिष्णु और साम्प्रदायिक सद्भाववादी इस्लाम के कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. अनुच्छेद २९(१). काफ़िर को कत्ल करने व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलने के लिए ईसाईयों व मुसलमानों को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, राष्ट्रपति, राज्यपाल व जज, असीमित मौलिक मजहबी अधिकार स्वीकार के लिए विवश हैं।
(एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| मुसलमान काफिरों की हत्या करने से स्वर्ग पाएंगे|
यह कि बपतिस्मा व अजान सर्वधर्म समभाव और सेकुलर कैसे है?
यह कि बपतिस्मा और अजान यानी ईशनिंदकों के विरुद्ध सन १८६० से आजतक रासुका या फतवा क्यों नहीं लगता?
यह कि मैं जानना चाहता हूँ कि नियमानुसार
₹ यानी नोट की कीमत क्या है? १९१७ मे १₹=१३ अमेरिकी डालर था।  १९४७ में १₹=१ अमेरिकी डालर हो गया। ८ नव. २०१६ तक १डालर=६७₹ रहा। अब ₹ रद्दी.
₹ की कीमत
यह कि इंडियन उपनिवेशवासी जिसे ₹ कहते हैं, वह ₹ देने का प्रतिज्ञा पत्र (Promissory note) है. धारक का ₹ रिजर्वबैंक के आका बैंक आफ इंग्लैण्ड के पास रहता है, जिसे धारक को देने के लिए गवर्नर प्रतिज्ञा बद्ध है. इतना ही नहीं, केन्द्रीय सरकार द्वारा ₹ का प्रतिज्ञापत्र प्रत्याभूत भी है.रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की धारा ३३(४) के अनुसार १५ अक्टूबर, १९९० तक १ ₹ का मूल्य ०.११८४८९ ग्राम शुद्ध सोना था, किस नियम से १९९० के बाद से ₹ की कोई कीमत नहीं. नियमानुसार बिना सोना रखे नोट छापने वाली सरकार के विरुद्ध क्या किया जाना चाहिए?
‌यद्यपि  इस ठगी से विश्व का हर व्यक्ति  पीड़ित है, तथापि दिल्ली  उच्च न्यायालय  तक मेरी अपील निरस्त होती रही. अंत में कानून में १९९० के प्रभाव से संशोधन हो गया. संशोधन के फल स्वरूप सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार नहीं की. कौन से नियमानुसार एलिजाबेथ अपने ही वचन से मुकर गई. जब कि इस धोखाधड़ी से जज सहित हर उपनिवेश वासी भी पीड़ित था और आज भी है! जज हैं या जल्लाद और ठगों के कवच?
क्या महामहिम या कोई जज इस ठगी का विरोध कर सकता है?
राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! आप अपना पूजास्थल, भावी पीढी, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे?क्या आप को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?
मैनें बाबरी विध्वंस कराया. ६ शपथपत्र दिया. मुझ पर अभियोग नहीं चला. गांधी की प्रतिमा तोड़वाई. जज से सजा देने का आग्रह किया. लेकिन अभियोग धमकी का चला. मेरे हस्ताक्षर का नमूना गायब कर सरकार ने गांधी की प्रतिष्ठा बचाई. मालेगांव मामले में, जिसमें मुख्य मंत्री मेरे सह अभियुक्त हैं, भी मुझे जेल नहीं भेजा. स्वतंत्र उपनिवेश का मामला स्पष्ट है. मैं उपनिवेश विरोधी हूँ. नियमानुसार मुझे फांसी मिलनी चाहिये।
अतएव मेरी माँग है कि आप यानी महामहिम नाइक जी, अपने दंप्रसं की धारा १९६ से प्राप्त एकाधिकार का प्रयोग करके, अविलम्ब मेरे विरुद्ध धारा १२१ के अंतर्गत अभियोग चलाने की संस्तुति प्रदान करेंः
अप्रति
या २१.०४.२०१८


ą
AyodhyaP Tripathi,
Apr 21, 2018, 10:53 AM
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