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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 24 Year 24 ISSUE 14,  Mar  23 - 29, 2018. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 7017886116 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj18w14 UPGov

 ||श्री गणेशायेनमः||

 

महामहिम राज्यपाल, उप्र सरकार.

मैं, अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी पुत्र स्व० बेनी माधव त्रिपाठी अन्य के अतिरिक्त निम्नलिखित याचना करता हूँ

१.       यह कि यद्यपि यह पोर्टल योगी जी का है, तथापि नियमानुसार उपनिवेश विरोधी को बिना आप के संस्तुति के फांसी नहीं हो सकती. नियमानुसार की आड़ मे आप मुझे भूखों मार रहे हैं। ताकि राजीव दीक्षित की भांति मैं मर जाऊं और  इंडिया उपनिवेश है, लोग जान न पाएं. आप एलिजाबेथ के मनोनीत विवश बलिपशु हैं. नियमानुसार भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत मुझे जज से फांसी दिलवाइए. मानवता का भला कीजिये.

२.       कृपया जनसुनवाई सं० 40018817015237 का अवलोकन करें.

३.       यह कि मेरे मूल फौजदारी मामले 7024 सन 2000 जिला गोरखपुर मे वादी और AHC Cr. MISC. APPL 1973 OF 2012 US 482 CrPC DISTT GORAKHPUR, IN THE MATTER OF VEER BAHADUR TIWARI VS STATE OF UP मे प्रतिवादी उत्तर प्रदेश सरकार है। इसका निस्तारण एलिज़ाबेथ के आदेश पर मुझे सुने बिना 17.1.2012 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर दिया है। इसे तहसील स्तर पर किस लिए भेजा गया?

४.       यह कि मेरे याचिका सं ९६७२ वर्ष १९८८ रिट सी की जांच में न्यायमूर्ति रवि स्वरूप धवन ने राजस्व अभिलेखों मे हेराफेरी मिलने पर मुझसे जलाशय निर्माण पर प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो मैनें कहा था कि पानी पिलाना पुण्य का कार्य है। मुझे पास ही भूमि दे दी जाए और ९अगस्त १९८९ को आदेश पारित हुआ था. आज तक मुझे भूमि नहीं दी गई।

http://www.aryavrt.com/nl-anne-1-3

५.       यह कि मुझे शंका है कि शासन उपनिवेश का संरक्षण कर रहा है

६.       यह कि मुहम्मद पर मामूली टिप्पणी पर कमलेश तिवारी, जिनके साथ मै चौकाघाट, बनारस जेल मे बंद था, पर रासुका लगा। जबकि जज ने स्वीकार किया है कि मैनें अल्लाह के विरुद्ध सन २००० मे ही अपमान जनक टिप्पणियां की थीं। तब से आज तक करता रहता हूँ। जज ने अपने निर्णय मे स्वीकार किया है कि मैनें अल्लाह को लुटेरा, बलात्कारी, हत्यारा और बहुत कुछ कहा। नियमानुसार मेरे विरुद्ध रासुका या फतवा जारी क्यों नहीं करते? उपनिवेश विरोधी हूँ. नियमानुसार सन 2000 से अब तक फांसी क्यों नहीं दिया. विवरण URL

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng  पर।

७.       यह कि आप लोगों की तो कोई औकात ही नहीं, एलिजाबेथ नियमानुसार मुझे कानूनी अड़चन बताए? स्पष्ट है कि कानूनी अड़चन नहीं, अपितु इंडिया मे एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध अपहृत आंदोलन के पुनर्जीवित होने का एलिजाबेथ को भय सता रहा है।

८.       यह कि इसीलिए गोरखपुर मे महामहिम ने भूमाफिया खड़ा कर रखा है, दिल्ली के महामहिम ने दिल्ली मे और अब उखं के महामहिम ने ऋषिकेश मे तोप भूमाफिया काबीना मंत्री सतपाल महाराज को खड़ा कर दिया है, जो मुझे कत्ल कराने के लिए ढूंढ़ रहे हैं.

९.       यह कि रणनीति यह है कि ज्यों ही एलिजाबेथ के उपनिवेश को संकट दिखाई दे, मेरा या किसी भूमाफिया का घात कर दिया जाए।

१०.   यह कि किसी को भी बलि का बकरा बना लिया जाए, जो कहे कि मैनें सुपारी दी थी और मुझे मृत्यु होने तक फांसी पर लटका दिया जाए। ताकि इंडिया और पाकिस्तान के उपनिवेश वासी यह न जाने कि वे ब्रिटिश दास थे, हैं और भविष्य में भी बने रहेंगे।

११.   यह कि मेरा निवेदन अनंतिम पेंशन हेतु है। नियमानुसार यह तत्काल स्वीकृत होना चाहिये। १७ वर्ष पूरे हो गए। क्या है एलिजाबेथ का नियम? यही बता दीजिए।

१२.   यह कि कोई भी कानूनविद बताए कि बपतिस्मा व अजान सर्वधर्म समभाव और सेकुलर कैसे है?

१३.   यह कि बपतिस्मा और अजान यानी ईशनिंदकों के विरुद्ध सन १८६० से आज तक नियमानुसार रासुका या फतवा क्यों नहीं लगा?

१४.   यह कि मैं जानना चाहता हूँ कि नियमानुसार ₹ यानी नोट की कीमत क्या है? १९१७ मे १₹=१३ अमेरिकी डालर था। १९४७ में १₹=१ अमेरिकी डालर हो गया। ८ नव. २०१६ तक १डालर=६७₹ रहा। अब ₹ रद्दी.

₹ की कीमत

१५.   यह कि इंडियन उपनिवेशवासी जिसे ₹ कहते हैं, वह ₹ देने का प्रतिज्ञा पत्र (Promissory note) है. धारक का ₹ रिजर्वबैंक के आका बैंक आफ इंग्लैण्ड के पास रहता है, जिसे धारक को देने के लिए गवर्नर प्रतिज्ञा बद्ध है. इतना ही नहीं, केन्द्रीय सरकार द्वारा ₹ का प्रतिज्ञापत्र प्रत्याभूत भी है.रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की धारा ३३(४) के अनुसार १५ अक्टूबर, १९९० तक १ ₹ का मूल्य ०.११८४८९ ग्राम शुद्ध सोना था, किस नियम से १९९० के बाद से ₹ की कोई कीमत नहीं. नियमानुसार बिना सोना रखे नोट छापने वाली सरकार के विरुद्ध क्या किया जाना चाहिए?

१६.   यह कि यद्यपि इस ठगी से विश्व का हर व्यक्ति पीड़ित है, तथापि दिल्ली  उच्च न्यायालय  तक मेरी अपील निरस्त होती रही. अंत में कानून में १९९० के प्रभाव से संशोधन हो गया. संशोधन के फल स्वरूप सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार नहीं की. कौन से नियमानुसार एलिजाबेथ अपने ही वचन से मुकर गई. जब कि इस धोखाधड़ी से जज सहित हर उपनिवेश वासी भी पीड़ित था और आज भी है! जज हैं या जल्लाद और ठगों के कवच?

१७.   यह कि क्या महामहिम या कोई जज इस ठगी का विरोध कर सकता है?

१८.   यह कि राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! आप अपना पूजास्थल, भावी पीढी, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या आप को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?

१९.   यह कि मैनें बाबरी विध्वंस कराया. ६ शपथपत्र दिया. मुझ पर अभियोग नहीं चला. गांधी की प्रतिमा तोड़वाई. जज से सजा देने का आग्रह किया. लेकिन अभियोग धमकी का चला. मेरे हस्ताक्षर का नमूना गायब कर सरकार ने गांधी की प्रतिष्ठा बचाई. मालेगांव मामले में, जिसमें मुख्य मंत्री योगी मेरे सह अभियुक्त हैं, भी मुझे जेल नहीं भेजा. स्वतंत्र उपनिवेश का मामला स्पष्ट है. मैं उपनिवेश विरोधी हूँ. नियमानुसार मुझे फांसी मिलनी चाहिये।

अतः मेरी माँग है कि महामहिम नाइक जी, नियमानुसार अपने दंप्रसं की धारा १९६ से प्राप्त एकाधिकार का प्रयोग करके, अविलम्ब मेरे विरुद्ध धारा १२१ के अंतर्गत अभियोग चलाने की संस्तुति प्रदान करेंः

अप्रति

२३.०३.२०१८

  


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