Muj18W10Y ISLAMSEMUKTI




Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 24 Year 24 ISSUE 10Y,  Mar 02 - 08👌, 2018. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 7017886116 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj18W10Y  ISLAMSEMUKTI

 

||श्री गणेशायेनमः||


इस्लाम मिटना चाहिए, लेकिन कैसे?
उपनिवेश वासियों ने भ्रम पाल रखा है कि इंडिया उनका देश है और उन्हें अपने उपासना की स्वतंत्रता है।
सन १७५७ के प्लासी युद्ध में मीरजाफर ने मात्र एक बार १८००० सैनिकों से हथियार डलवाया था, गांधी ने आप, ईसाइयों और मुसलमानों सहित इंडिया और पाकिस्तान के सभी निवासियों का १९४७ से आज तक आत्मसमर्पण करा रखा है।
आप स्वयं बताएँ कि बड़ा महात्मा, सत्यवादी, अहिंसा का पुजारी और ब्रह्मचारी मीरजाफर था या गांधी?
५३ ईसाई व मुसलमान देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं। हिंदू का कोई देश नहीं। गांधी हिंदुओं की धन, धरती, जान व नारियां संयुक्त रूप से ईसाइयों व मुसलमानों को सौंप गया है। विकल्प हीन हिंदू हाथों मे जयमाल दे कर अपनी नारियां और दहेज में धरती और सम्पत्ति विजेता को देने के लिए विवश हैं।
ईसाइयों व मुसलमानों को चाहिए कि आपस मे लड़ कर फैसला कर लें कि उपनिवेश वासियों का स्वामी कौन बनेगा? दुख इस बात का है कि ईसाई व मुसलमान आज तक उपनिवेश से ही मुक्ति न ले सके।
१९४७ से आज तक मेरे संज्ञान में मात्र अंबेडकर ही एक मात्र व्यक्ति हैं, जिन्होंने संविधान का २ सितंबर, १९५३ मे राज्य सभा में विरोध किया था। फलस्वरूप उंहें भरतपुर नरेश बच्चू सिंह ने राज्य सभा के भीतर गोली मारी। तब से आज तक किसी उपनिवेश, संविधान, बाइबिल, कुरान और ब्रिटिश कानूनों के विरोधी का मुझे ज्ञान नहीं है।
यह धरती वीरों से कभी रिक्त नहीं रही। लेकिन जोभी विरोध करता है, गुप्त तरीक़े से नष्ट कर दिया जाता है।
एलिजाबेथ ने राज्यपालों का मनोनयन, जो भी उपनिवेश का विरोध करे उसे छद्म विधि से नष्ट करने के लिए किया है।
मैं सन २००० से उपनिवेश, संविधान, बाइबिल, कुरान और ब्रिटिश कानूनों का विरोधी हूँ, अपने विरुद्घ धारा १२१ के अंतर्गत फांसी की मांग कर रहा हूँ। जिसकी संस्तुति दंप्रसं की धारा १९६ के अंतर्गत केवल राष्ट्रपति या राज्यपाल दे सकते हैं।
मुझे कत्ल तो किया जाएगा, लेकिन इस तरह कि इंडिया, पाकिस्तान, कश्मीर, खालिस्तान, नागालैंड, मिजोरम आदि आज भी ब्रिटिश उपनिवेश हैं और उनकी तथाकथित स्वतंत्रता के बाद भी उपनिवेश ही रहेंगे, किसी के समझ में नहीं आएगा।
क्या इस भ्रम को मिटाने में कोई मेरी सहायता कर सकता है?
अप्रति


Comments