Muj18w08y Conspiracy



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 24 Year 24 ISSUE 08Y, Feb 16 - 22, 2018. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 7017886116 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj18W08Y Conspiracy Dated:22.02.2018

 

||श्री गणेशायेनमः||

 आर्यावर्त सरकार

मुख्यालय ७७ खेड़ाखुर्द दिल्ली ११००८२:

||श्री गणेशायेनमः||

जनसुनवाई:40018818002934

प्रेषकः अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी,  (सूचना सचिव) ,

मंगल आश्रम, मुनि की रेती, टिहरी गढ़वाल, ऋषिकेश, 249137, उखं

  फोनः 9868324025 - 7017886116

Email aryavrt39@gmail.com

पत्रांकः PP18222  दिनांक, 22.2.2018

इंडिया के उपनिवेश वासियों की सेवा में,

विषय - विवश महामहिम राज्यपाल श्री नाइक जी के संरक्षण मे गुप्त विधि से मेरी हत्या का षड़यंत्र।

 संदर्भ- जनसुनवाई:40018818002934         

उपनिवेशवासियों से आग्रह।

१९४७ से आज तक मेरे संज्ञान में मात्र अंबेडकर ही एक मात्र ज्ञात व्यक्ति हैं, जिन्होंने संविधान का २ सितंबर, १९५३ मे राज्य सभा में विरोध किया था। मात्र संविधान का विरोध करने के फलस्वरूप उंहें भरतपुर नरेश बच्चू सिंह ने राज्य सभा के भीतर गोली मारी। तब से आज तक किसी उपनिवेश, संविधान, बाइबिल, कुरान और ब्रिटिश कानूनों के विरोधी का मुझे ज्ञान नहीं है। जबकि बपतिस्मा, अजान और खुत्बे का प्रसारण आत्मघाती लोकसेवकों के सहयोग से जारी है।

यह धरती वीरों से कभी रिक्त नहीं रही। लेकिन जोभी विरोध करता है, गुप्त तरीक़े से नष्ट कर दिया जाता है।

मुझे नष्ट करने की पृष्ठभूमि तैयार कर ली गई है। जेल में जहर २००१ मे दिया गया। गौमाता के दूध की कृपा से आज तक जीवित हूँ। अब कोई बंधुआ जज मेरी जांच करवायेगा। डॉक्टर के पास विकल्प नहीं बचेगा। जहर का इंजेक्शन देकर मुझे सचमुच पागल कर दिया जाएगा।  फलस्वरूप इंडिया उपनिवेश है और सनातन धर्म को एलिजाबेथ मिटा रही है, कोई जान नहीं पाएगा।

 

अतः सनातन धर्म प्रेमी अपनी रक्षा करें। उपनिवेश विरोधी विक्षिप्तों की संख्या बढ़ाने में आर्यावर्त सरकार की सहायता करें। मै लकवा ग्रस्त हूँ। इस आंदोलन को आर्यावर्त सरकार की सचिव श्री मती अनु उर्फ मीनाक्षी कश्यप चलाएंगी।

भवदीय,

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, संस्थापक आर्यावर्त सरकार

ऋऋऋ

गौरक्षपीठाधीश्वर योगी को भेजी गई शिकायत और उप्र सरकार का उत्तर नीचे अवलोकनार्थ प्रस्तुत है:

जनसुनवाई 40018818002934 दि 28.1.18

माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी जी!

५ अरब की संपत्ति का स्वामी और बहुराष्ट्रीय कंपनी के स्वामी पुत्र का पिता होकर भी भीख मांगता हूं। 

तथाकथित न्यायप्रिय एलिजाबेथ सरकार किसी कानून को नहीं मानती।

सिचाई प्रमुख अभियंता यांत्रिक श्री बीके मिश्र नियमानुसार कार्रवाई करते हैं। आप के जेब मे कोई नोट अवश्य पड़ा होगा। उस पर लिखा है। "केंद्रीय सरकार द्वारा प्रत्याभूत। मैं धारक को़ ?? ₹ देने का वचन देता हूँ" गवर्नर। यह प्रतिज्ञा पत्र है। सन १९९० के पूर्व रिजर्व बैंक कानून, १९३४ की धारा ३३(४) के अंतर्गत १००₹ के नोट के बदले गवर्नर को धारक को एक तोला सोना देना था। १९८८ मे मैने तीसहजारी मे ₹ की मांग की। लेकिन सरकार मुकर गई। कानून में संशोधन कर दिया।

क्या आप दिलवा सकते हैं?

वस्तुतः संविधान का संकलन कर मानव जाति के विलुप्ति का मार्ग बना दिया गया है। एलिजाबेथ, जिसके उपनिवेश मे उपनिवेशवासी रह रहे हैं, को तो बाइबिल की आज्ञा (लूका १९:२७ व यूहन्ना ६:५३) और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त असीमित मौलिक मजहबी अधिकार से, उपनिवेश वासियों को कत्ल कर उनका मांस खाना व लहू पीना है। अनुच्छेद३९(ग) के अधिकार से उपनिवेश वासियों को संपत्ति व उत्पादन के साधन रखने से वंचित करना है।

क्या आप ब्रिटिश उपनिवेश से मुक्ति हेतु मुझे सहायता दे सकते हैं?

आप गोरक्षपीठाधीश्वर हैं। गौहत्यारे और गोमांस भक्षी अखलाक के आश्रितों को आप की सरकार ने ₹१ करोड़ और सरकारी नौकरी दी है। १८ गौरक्षक रासुका मे जेल में बंद हैं।

क्या आप गौरक्षकों की गुप्त सहायता कर सकते हैं?

आप के प्रदेश का कैराना आप के शासन काल मे हिंदू विहीन करा दिया गया।

क्या आप पीड़ित हिंदुओं की गुप्त सहायता कर सकते हैं?

मस्जिदों से अजान और खुत्बे का प्रसारण किया जाता है, जो भादंसं की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध है। आप अपने शपथ से बँधे हैं, क्या मेरी सहायता कर सकते हैं?

ईसाइयत और इस्लाम का कोई विरोधी जीवित नहीं छोड़ा जाता। गैलीलियो, अबू अफाक, आस्मां बिंत मरवान, अंबेडकर और राजीव दीक्षित जैसे निरपराधों की हत्याएँ हुईं। जबकि मै, अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, दूध का धुला नहीं, उपनिवेश विरोधी, सदाबहार चोर, कुटिल, कामी, बाबरी विध्वंसक, बपतिस्मा, अजान, बाइबिल, कुरान, भारतीय संविधान, चर्च व मस्जिद विरोधी व विध्वंसक, और जिहाद विरोधी हूँ। मैं भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत फांसी का पात्र हूँ।

जानते हैं क्यों न्याय प्रिय एलिजाबेथ सन २००० से मुझे फांसी नहीं दिलवा सकी? कोई ईमाम फतवा जारी क्यों नहीं कर सका? नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है? आप गंभीरता को समझें।

कारण यह है कि कोई यह तब तक न जान पाए कि इंडिया स्वतंत्र नहीं, स्वतंत्र उपनिवेश है, जब तक हिंदू बहुसंख्यक है। जिस दिन अल्पसंख्यक हो जाएगा, मिटा दिया जाएगा।

मैं मालेगाँव बम कांड मामले में आप का सह अभियुक्त, आपके अपने विधानसभा क्षेत्र का निवासी उपनिवेश द्रोही भादंसं की धारा १२१ का अभियुक्त हूँ।

क्या आप मेरे विरुद्ध अभियोग चलवाने का साहस कर पाएंगे?

भवदीय,

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी पुत्र स्व बेनी माधव त्रिपाठी

फोन ९८६८३२४०२५/ ७०१७८८६११६

ऋऋऋ

माननीय मुख्यमंत्री योगी जी का जवाब आया है

"प्रभारी निरीक्षक राजघाट के जांच आख्या के अ्वलोकन से पाया गया कि आवेदक श्री ए०पी० त्रिपाठी उपरोक्त मानसिक तनावग्रस्त एवं विक्षीत व्यक्ति है। उक्त शिकायती प्रकरण में पुलिस स्तर से किसी कार्यवाही की आवश्यकता नहीं प्रतीत हो रही है।

"आख्या सादर अवलोकनार्थ प्रेषित है।"

--

मेरा विरोध पत्रः

जनसुनवाई सं०: 40018818002934

प्रेषकः अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी,  (सूचना सचिव) ,

मंगल आश्रम, मुनि की रेती, टिहरी गढ़वाल, ऋषिकेश, 249137, उखं

  फोनः 9868324025 - 7017886116

Email aryavrt39@gmail.com

पत्रांकः NODEL18215   दिनांक, 15.2.2018

मुख्यमंत्री महोदय!

मैनें आप से अपने मानसिक जांच कराने हेतु शिकायत नहीं की है और न ही पुलिस विभाग चिकित्सा विभाग है।

मेरी शिकायत नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध है।

कृपया उपनिवेशवासियों को स्वतंत्र उपनिवेश का अर्थ बताइए। मैं स्वतंत्र उपनिवेश विरोधी हूँ। अतः भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत मृत्युदंड का अपराधी हूँ। पुलिस अपनी मर्यादा मे रहे। मेरा चालान कर मुझे न्यायालय में प्रस्तुत करे।

मेरे मानसिक स्वास्थ्य की जांच न्यायालय चिकित्सा विभाग से करा सकती है।

भवदीय,

अप्रति

१८.०२.२०१८

अतिरिक्त कथन,

उपरोक्त विरोध पत्र के बाद मैं भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत अपने गिरफ्तारी की २४ घंटे के भीतर आशा करता हूँ। लेकिन एलिजाबेथ की नीयत ठीक नहीं है। एलिजाबेथ को ईसा की मुझे धोखे से घात की आज्ञा है।

आश्चर्य है कि नियमानुसार की दुहाई देने वाले लोकसेवक मेरे द्वारा दिए गए तमाम नियमविरुद्ध कार्यों को सूचित करने पर निजहित में भी संज्ञान न ले सके!

ईशनिंदा यानी बपतिस्मा व अजान

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की   हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|"(बाइबल, लूका १९:२७)

चर्च से घोषणा की जाती है, “केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने| (बाइबल, लूका १९:२७). स्वर्ग उन्हें ही मिलेगा, जो बपतिस्मा ले| मैं मानवमात्र से स्वराज्य का अधिकार छीनने वाले जारज और प्रेत ईसा के धरती पर रहने के अधिकार का विरोधी हूँ। अतः मुझे फांसी मिलनी चाहिये।

"और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|"(कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का संवैधानिक अधिकार व घोषित कार्यक्रम है| दोनों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया।

क्या सभ्य न्याय प्रिय एलिजाबेथ अपनी न्याय प्रियता का परिचय देते हुए सनातनी उपनिवेशवासियों के जान माल की नियमानुसार रक्षा कर पाएगी?

विशेष विवरण हेतु निम्नलिखित URL देखें,

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng

http://www.aryavrt.com/azaan-uoi

ईशनिंदा के अपराध में कमलेश तिवारी पर रासुका भी लगी है और अब तक उनका सर कलम कर लाने वाले को ४१ करोड़ रु० देने का फतवा जारी हो चुका है. लेकिन काफिरों के ईष्टदेवों के निंदक मुसलमान और बपतिस्मा दिलाने वाले ईसाई आज तक नियमानुसार अभियुक्त नहीं बने!

ईशनिन्दक के लिए ईसाइयत और इस्लाम में मृत्यु दंड निर्धारित है. मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा काफिरों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इन कानूनों के अस्तित्व में आने के बाद से आज तक मस्जिदों या ईमामों पर नियमानुसार कभी भी लागू नहीं किया गया. षड्यंत्र स्पष्ट है वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करना है.

जहां अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा ईशनिंदा का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया है, वहीँ ईशनिंदा के विरोधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत प्रताड़ित किया जा रहा है. कमलेश तिवारी तो रासुका में बंद हो गए. क्योंकि एलिजाबेथ को उपनिवेशवासियों को धरती से समाप्त करना है. उनको फांसी देने की मांग के लिए पुलिस की पिटाई हो चुकी है. थाना फूंका जा चुका है. राष्ट्रपति और राज्यपाल लाचार हैं. एलिजाबेथ नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं करती?

विश्व में कोई आतंक नहीं हो रहा है| सारी घटनाएँ अब्रह्मी संस्कृतियों के मिशन और जेहाद हैं| जो इंडिया में एलिजाबेथ के कानूनों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग) द्वारा प्रायोजित हैं| उपनिवेशवासी पहले उपरोक्त सच्चाइयों को कहने का साहस जुटाएं| मानव जाति के अस्तित्व पर ही संकट है| जो सरकार चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान और खुत्बे नहीं बंद करा सकती, वह भारतीय संविधान प्रायोजित जिहाद और मिशन कैसे मिटा सकती है|

१८५८ के पूर्व भारत में निरक्षर, भिखारी और चोर नहीं थे। ये आततायी ब्रिटिश शासन की उपज हैं। उपनिवेश इंडिया के बड़े भूभाग पर मुसलमानों का सरिया शासन था। ईसा ने मीरजाफर को रिश्वत देकर दार उल इस्लाम छीन लिया।।

आश्चर्य होता है कि मानवमात्र को वीर्यहीन कर अपना बलिपशु बनाने वाले ब्रिटिश साम्राज्य का आज तक मुसलमान सहित एक भी विरोधी नहीं है। ईसाई मुसलमान के विरुद्ध खड़ा है। दलित सवर्ण के विरुद्ध खड़ा है और यहाँ तक कि कैथोलिक प्रोटेस्टेंट और सिया सुन्नी के विरुद्ध खड़ा है। लेकिन उपनिवेशवासियों को बलिपशु बनाने वाली एलिजाबेथ का एक भी विरोधी नहीं है।

जबकि यदि दलित, सवर्ण, मुसलमान सभी नष्ट हो जाएं, तब भी एलिजाबेथ अपने ही ईसाइयों के अन्य वर्गों को जीवित नहीं छोड़ेगी। फिर भी एलिजाबेथ का कोई विरोधी नहीं है!

इस्लाम में एकता के लिए कोई स्थान नहीं है। मुसलमान अपनी जड़ें स्वयं काट रहा है।

‌शासन मुसलमान का नहीं, फिरंगी डायन एलिजाबेथ का है। यानी समस्या की जड़ उपनिवेश है। एलिजाबेथ का उपनिवेश तब तक खतरे में रहेगा, जब तक सनातन धर्म रहेगा। क्या आप उपनिवेश से मुक्ति के लिए मेरी सहायता करेंगे?

राजतंत्र मे कर की अधिकतम सीमा १७% से कम थी। बाकी उपज का दलित स्वामी था। एलिजाबेथ के उपनिवेश मे किसी उपनिवेश वासी को जीने का अधिकार नहीं है और न सम्पति व उत्पादन के साधन रखने का।

निर्णय आप करें कि आप को राजतन्त्र चाहिए कि लोकतंत्र?

 राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! पाठक अपना पूजास्थल, भावी पीढी, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या पाठक को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं? मैं ८४+ वर्ष का हो चुका हूँ। जीवित बचा तो देखूंगा कि योगी जी अपना गोरक्षपीठ कैसे बचाते हैं।

षड़यंत्र

मस्जिदों से अजान और खुत्बे का प्रसारण राज्यपाल द्वारा उपनिवेश, ईसाइयत, इस्लाम और संविधान विरोधियों का पता लगाने हेतु कराया जाता है। जो भी विरोध करता है, उसे किसी बहाने से नष्ट अथवा तबाह कर दिया जाता है।

भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी उपनिवेशवासी का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, जेल में सन २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों ने किया है और अब कमलेश तिवारी ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये. यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ने, ई०स० १८६० से आज तक नियमानुसार कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया – जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय, जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है.

एलिजाबेथ को उपनिवेश के वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को कत्ल करना है क्यों कि उपनिवेशवासियों के पूर्वजों ने ईशा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया (बाइबल, लूका १९:२७ के साथ पठनीय) भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१). राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन किये जाने वाले अपराधों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए विवश हैं.

मस्जिदों, जहां से मुसलमान काफिरों के ईष्ट देवों और वैदिक सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं. अज़ान लगा रहे व नमाज़ पढ़ रहे हैं, के लाउडस्पीकर नहीं उतारे जाते. क्यों कि अज़ान, नमाज़ और खुत्बे पंथनिरपेक्ष माने जाते हैं और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी लूट, हत्या और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार प्राप्त है.

इनके विपरीत मंदिरों, जहां से घोषणा की जाती है, “धर्म की जय हो| अधर्म का नाश हो|| प्राणियों में सद्भावना हो... विश्व का कल्याण हो...|” के लाउडस्पीकर पुलिस नियमानुसार उतरवा देती है. क्योंकि ऐसा कहना साम्प्रदायिक है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से अपने मजहब का पालन करते हुए ईसाई न्यायिक जांच (Inquisition) और बपतिस्मा में लिप्त है और मुसलमान अज़ान और खुत्बों में. नियमानुसार विरोधी कत्ल हो रहे हैं और रासुका में जेल जा रहे हैं. पद, प्रभुता व पेट के लोभ में राष्ट्रपति व राज्यपाल, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन, ईसाई व मुसलमान को, भारतीय संविधान और कानूनों द्वारा संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

लेकिन वेदों के अनुसार आत्मा अजर अमर है. संभाजी, बंदा वैरागी आदि की भांति मैं मरूंगा नहीं.

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय. नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि.

तथा शरीराणि विहाय जीर्णा- न्यन्यानि संयाति नवानि देही ।।गीता २:२२।।

जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नये वस्त्रोंको ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर दूसरे नये शरीरों को प्राप्त होता है । ।।गीता २:२२।।

भवदीय,

अप्रति

२२.२.२०१८य

 

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