MUJ18W07 SECTION121 IPC



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 24 Year 24 ISSUE 07, Feb 09 -15, 2018. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 7017886116 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj18W07  SECTION121 IPC Dated:12.02.2018

 

||श्री गणेशायेनमः||

 आर्यावर्त सरकार

मुख्यालय ७७ खेड़ाखुर्द दिल्ली ११००८२:
Http://pgportal.gov.in शिकायत संख्या
DARPG/E/2016/16860
न समझ में आए, तो सूचित करें।
एलिजाबेथ के पास मुझे तुरंत फांसी देने हेतु धारा १२१ भादंसं है, लेकिन सन २००० से मुझे फांसी नहीं हुई। अब इस गली के अतिक्रमण के द्वारा चाहे मेरा घात हो या गली क्रेता मान का। मेरी फांसी पक्की और देश उपनिवेश है, कोई नहीं जानेगा।
प्रेषकः अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी,  (सूचना सचिव) ,
मंगल आश्रम, मुनि की रेती, टिहरी गढ़वाल, ऋषिकेश, 249137, उखं
  फोनः 9868324025 - 7017886116
Email aryavrt39@gmail.com
पत्रांकः PP18212   दिनांक, 12.2.2018
सेवा में,
महामहिम उप राज्यपाल श्री बैजल,

विषय - सड़क एवं गलियों पर आप के संरक्षण मे अतिक्रमण

संदर्भ- शिकायत संख्या DARPG/E/2016/16860
माननीय महामहिम महोदय जी!
एलिजाबेथ ने राज्यपालों और जजों का मनोनयन, जो भी उपनिवेश का विरोध करे उसे छद्म विधि से नष्ट करने के लिए किया है। इसके लिए संविधान व कानूनों में प्रावधान है। उदाहरण के लिए पढ़ें
मस्जिद, अजान और खुत्बे
मस्जिदों से अजान और खुत्बे का प्रसारण राज्यपाल द्वारा उपनिवेश, ईसाइयत, इस्लाम और संविधान विरोधियों का पता लगाने हेतु कराया जाता है। जो भी विरोध करता है, उसे किसी बहाने से नष्ट अथवा तबाह कर दिया जाता है।
भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी उपनिवेशवासी का स्वाभिमान जग जाए और वह इस्लाम का विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, जेल में सन १९९९ से बंद दारा सिंह ने, २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों और अब कमलेश तिवारी ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये. यही कारण है कि यद्यपि अजान व खुत्बे भादंसं की धाराओं १५३ और २९५ के अंतर्गत अपराध हैं तथापि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया – जब कि अजान का विरोध रासुका का अपराध है। यह अपमान अजान द्वारा स्वयं तब के वाइसराय, जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है.
इतना और बता दूं कि इसलाम के स्थापना के बाद से ही आप व एलिजाबेथ सहित हर काफिर प्रसन्नता पूर्वक कत्ल होने की धमकी  सुनता है। लेकिन विरोध कोई नहीं करता और जो विरोध करता है, उसकी जड़ स्वयं काफिर काटते हैं।
ईसाइयत और इस्लाम का कोई विरोधी जीवित नहीं छोड़ा जाता। गैलीलियो, अबू अफाक, आस्मां बिंत मरवान, अंबेडकर और राजीव दीक्षित जैसे निरपराधों की हत्याएँ हुईं। जबकि मै, अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, मालेगांव कांडमे मुख्यमंत्री योगी जी का सह अभियुक्त, उपनिवेश विरोधी, सदाबहार चोर, कुटिल, कामी, बाबरी विध्वंसक, बपतिस्मा, अजान, बाइबिल, कुरान, भारतीय संविधान, चर्च व मस्जिद विरोधी व विध्वंसक, भगवा आतंकी और जिहाद विरोधी अपराधी हूँ। मैं भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत फांसी का पात्र हूँ। इस धारा के नियंत्रण का अधिकार दंप्रसं की धारा १९६ के अंतर्गत राज्यपाल
या तथाकथित दलित राष्ट्रपति कोविंद के पास है। ये लोग मुझे दंप्रसं की धारा १९६ के अंतर्गत अभियुक्त बनाने की संस्तुति इसलिए नहीं दे रहे हैं कि उपनिवेशवासी यह न जान पाएं कि वे बलिपशु हैं और एलिजाबेथ का लक्ष्य, अमेरिकी लाल भारतीयों की भांति, सनातनियों का समूल नाश कर ईसा का राज्य स्थापित करना है।
मस्जिदों से अजान और खुत्बे का प्रसारण राज्यपाल द्वारा उपनिवेश, ईसाइयत, इस्लाम और संविधान विरोधियों का पता लगाने हेतु कराया जाता है। जो भी विरोध करता है, उसे किसी बहाने से नष्ट अथवा तबाह कर दिया जाता है, ताकि उपनिवेशवासी यह न जान पाएं कि एलिजाबेथ का लक्ष्य उपनिवेशवासियों को कत्ल कर, उनका मांस खाना, लहू पीना और ईसा का राज्य स्थापित करना है, वह भी बाइबिल और संविधान से प्राप्त अधिकार से।
मैं भलीभाँति जानता हूँ कि मुझे जो भी सहयोग देगा, नष्ट कर दिया जाएगा क्योंकि मैनें स्वतंत्रता के उस संग्राम को पुनर्जीवित कर दिया है, जिसका २०वीं सदी के मीरजाफर, सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने सन १९४७ मे अपहरण कर लिया था।
भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत मेरी फांसी भयवश सन २०००, यानी आर्यावर्त सरकार की स्थापना वर्ष, से लंबित है।
मुझे मात्र आप पर ही नहीं, ईसाई व मुसलमान सहित सभी लोकसेवकों पर तरस आता है। आप लोगों को मनुष्य के पुत्र को कत्ल कर उसका मांस खाने व लहू पीने वाली एलिजाबेथ के उपनिवेश मे रहने मे लज्जा नहीं आती। बपतिस्मा और अजान यानी ईशनिंदा सुनने में लज्जा नहीं आती।
पंथनिरपेक्ष, सहिष्णु और साम्प्रदायिक सद्भाववादी इस्लाम के कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. अनुच्छेद २९(१). काफ़िर को कत्ल करने व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलने के लिए ईसाईयों व मुसलमानों को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, राष्ट्रपति, राज्यपाल व जज, असीमित मौलिक मजहबी अधिकार स्वीकार के लिए विवश हैं| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| मुसलमान काफिरों की हत्या करने से स्वर्ग पाएंगे|
संविधान इनको अपनी लुटेरी, बलात्कारी और खूनी संस्कृतियों को बनाए रखने का अधिकार देता है।
मैं नहीं चाहता कि कश्मीर और कैराना की भांति आप को तथाकथित धर्म निरपेक्ष संस्कृतियां कत्ल करें.आप की नारियों का बलात्कार करें। आप के घर व संपत्ति लूट लेंं।
एलिजाबेथ ने १९४७ से, इंडिया उपनिवेश है, इस तथ्य को सफलता पूर्वक छिपाए रखा है। मै सच्चाई सामने लाना चाहता हूँ। अतः एलिजाबेथ मुझे गुपचुप तरीके से मारना चाहती है।
अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान,
जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों के पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), ६० व १५९ और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ द्वारा अब्रह्मीसंस्कृतियों को उनकी  हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार देकर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ये संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं| इन्हीं अब्रह्मी संस्कृतियों को २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए इंडिया में रखा है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-
http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt
यदि ये संस्कृतियां रहेंगी तो अमेरिकी लाल भारतीयों और माया संस्कृति की भांति सनातन मिटा दिया जाएगा।
आप लोग उपनिवेश से मुक्ति लेकर ही मानव जाति को बचा सकते हैं। छल को छल से मारा जा सकता है।
मेरी मृत्यु अपरिहार्य है। लेकिन इस मृत्यु को लोक कल्याण हेतु फांसी मे बदल कर पुण्य के भागी बनें।
मैं प्रत्येक उपनिवेश वासी से आग्रह करता हूँ कि मुझे गुप्त रूप से तन, मन और धन से सहयोग दें, क्योंकि जो भी मुझे प्रत्यक्ष सहयोग देगा, सबसे पहले नष्ट किया जाएगा।
भवदीय,
अप्रति
१२.२.२०१८

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