Muj18w05y Dharmantaran




Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 24 Year 24 ISSUE 05y,  Feb 01-07, 2018. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 7017886116 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj18w05y Dharmantaran

||श्री गणेशायेनमः||

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उपनिवेशवासियों!

ऊपर एक चर्च की छाया प्रति की लिंक है. इसे बाइबिल, कुरान और संविधान, जिन पर किसी का वश नहीं, के परिपेक्ष्य में पढ़िए,

ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, 

किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए|

 (कुरान ८:३९). चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]. बेटी से विवाह कीजिए. (बाइबल, १ कोरिंथियन ७:३६). पुत्र वधू से निकाह कीजिए. (कुरान ३३:३७-३८). बिना विवाह बच्चे पैदा कीजिए. [UDHR अनु०२५(२)]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)] और जिसे भी चाहें अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त असीमित मौलिक मजहबी अधिकार से.

हर मुसलमान व ईसाई खूनी है। दोनों ही धर्मान्तरण करने वाले को कत्ल करते हैं.

एलिजाबेथ कैथोलिकईसाई है| धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले को कत्लकरने की बाइबल की आज्ञा है| (व्यवस्थाविवरण, १३:६-११) (बाइबल, लूका २४:४४) के साथपठनीय व धर्मपरिवर्तन करने वाले को कत्ल करने की कुरान की आज्ञा है| (कुरान ४:८९). २०१९ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे| न १४४० वर्ष पूर्व मुसलमान ही थे| अतएव धर्मत्यागी एलिजाबेथ व मुसलमान को 

 उनके ही मजहब के अनुसार कत्ल करने का हमे भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार है| क्यों कि बाइबल, लूका १९:२७ के ईसा केआदेश से एलिजाबेथ हमे कत्ल करेगी और कुरान २१:९८के आदेश से मुसलमान कत्ल करेगा इनसे अपनी रक्षाका हमारे पास और कोई मार्ग नहीं है।इनको सत्ता में बैठा कर सरकार राजनीति के अपराधीकरण को कैसे मिटायेगी? जो हत्या के योग्य  हैं, उन्हें सत्ता सौंप कर संघ सरकार जनता को क्या सन्देश दे रही है?

ईसाई और मुसलमान अल्पसंख्यक कैसे हैं? हिंदू कश्मीर, नागालैंड और मिजोरम मे अल्पसंख्यक क्यों नहीं घोषित किया गया?

बाइबल व कुरान के उपरोक्त उद्धरणों से स्पष्ट हैं कि ईसाईयत और इस्लाम धर्मान्तरण करने व कराने वालों को मृत्यु दंड देते है| अतएव भारतीय संविधान के अनुच्छेद २५ में दिया गया आस्था की आजादी के अधिकार का उन्मूलन करें या सत्ता छोड़ें|

सनातन संस्कृति को मिटाने की रणनीति पढ़ें:

व्यवस्थाविवरण 12:1

जो देश तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें अधिकार में लेने को दिया है, उस में जब तक तुम भूमि पर जीवित रहो तब तक इन विधियों और नियमों के मानने में चौकसी करना।

व्यवस्थाविवरण 12:2

जिन जातियों के तुम अधिकारी होगे उनके लोग ऊंचे ऊंचे पहाड़ों वा टीलों पर, वा किसी भांति के हरे वृक्ष के तले, जितने स्थानों में अपने देवताओं की उपासना करते हैं, उन सभों को तुम पूरी रीति से नष्ट कर डालना;

व्यवस्थाविवरण 12:3

उनकी वेदियों को ढा देना, उनकी लाठों को तोड़ डालना, उनकी अशेरा नाम मूत्तिर्यों को आग में जला देना, और उनके देवताओं की खुदी हुई मूत्तिर्यों को काटकर गिरा देना, कि उस देश में से उनके नाम तक मिट जाएं।

व्यवस्थाविवरण 13:6

यदि तेरा सगा भाई, वा बेटा, वा बेटी, वा तेरी अर्द्धांगिन, वा प्राण प्रिय तेरा कोई मित्र निराले में तुझ को यह कहकर फुसलाने लगे, कि आओ हम दूसरे देवताओं की उपासना वा पूजा करें, जिन्हें न तो तू न तेरे पुरखा जानते थे,

व्यवस्थाविवरण 13:7

चाहे वे तुम्हारे निकट रहने वाले आस पास के लोगों के, चाहे पृथ्वी के एक छोर से लेके दूसरे छोर तक दूर दूर के रहने वालों के देवता हों,

व्यवस्थाविवरण 13:8

तो तू उसकी न मानना, और न तो उसकी बात सुनना, और न उस पर तरस खाना, और न कोमलता दिखाना, और न उसको छिपा रखना;

व्यवस्थाविवरण 13:9

उसको अवश्य घात करना; उसके घात करने में पहिले तेरा हाथ उठे, पीछे सब लोगों के हाथ उठे।

व्यवस्थाविवरण 13:10

उस पर ऐसा पत्थरवाह करना कि वह मर जाए, क्योंकि उसने तुझ को तेरे उस परमेश्वर यहोवा से, जो तुझ को दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है, बहकाने का यत्न किया है।

उपरोक्त नियम पुराने बाइबिल के हैं और पूरी तरह प्रभावी हैं

लूका 24:44

फिर उस ने उन से कहा, ये मेरी वे बातें हैं, जो मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्य है, कि जितनी बातें मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पुस्तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों।

यानी बाइबिल सनातन धर्म को नष्ट करने के लिए बनाया गया है. 

 ईसा की संस्कृति

इंडिया दैट वाज़ भारत, एलिजाबेथ का उपनिवेश है। आप लोगों सहित मैं भी उसी डायन का बलिपशु हूँ, जिसके जारज (जारज उसे कहते हैं, जिसके बाप का पता नहीं होता, यानी जो वैश्या की संतान होता है) ईसा के बाइबिल लूका नियम १९:२७ का हठधर्म है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" 

‌व 

‌बाइबिल, यूहन्ना ६:५३ के अनुसार यीशु ने उन से कहा; "`मैं तुम से सच सच कहता हूं जब तक मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लोहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।"

बाइबिल के नियम पर जज सुनवाई नहीं कर सकते. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). 

राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| 

‌और भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसा के चेलों को अपनी संस्कृति को बनाए रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. यानी नमो १० करोड़ अमेरिकी रेड इंडियन और माया संस्कृति की भांति १२५ करोड़ काले इंडियन और सनातन संस्कृति को मिटाने के लिये बकिंघम पैलेस जा कर एलिजाबेथ के चरणों मे डाल आए हैं. विकास पुरुष नमो का यही सबका साथ सबका विकास है. अमेरिकी रेड इंडियन और माया संस्कृति की भांति आप भी मिट जाएंगे. 

भादंसं की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार से एलिजाबेथ, जो भी वैदिक संस्कृति और उसके अनुयायियों को बचा सकता है, उसका वध करा कर उसका मांस खा रही और लहू पी रही है। जब तक उपनिवेश रहेगा, ऐसे नरसंहार होते रहेंगे।

संविधान का अनुच्छेद २९(१) इंहें अपनी संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार देता है. सनातन संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार नहीं है.

हिंदू को ईसाई या मुसलमान बनाने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन ईसाई या मुसलमान को हिंदू बनने का अधिकार नहीं है.

  ५३ ईसाई व मुसलमान देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं। हिंदू का कोई देश नहीं। इंडिया को उपनिवेश बनाकर गांधी हिंदुओं की धन, धरती, जान व नारियां संयुक्त रूप से ईसाइयों व मुसलमानों को सौंप गया है। भंड़ुए माउंटबेटन ने संविधान बना कर हिदुओं के जीवन व संपत्ति का अधिकार छीन लिया है. हिंदू हाथों मे जयमाल दे कर अपनी नारियां और दहेज में धरती और सम्पत्ति विजेता को देने के लिए विवश हैं।

  मुसलमान हिंदुओं के पीछे नाहक पड़े हैं.

ईसाइयों व मुसलमानों को चाहिए कि आपस मे लड़ कर फैसला कर लें कि हिंदुओं का स्वामी कौन बनेगा? दुख इस बात का है कि ईसाई व मुसलमान आज तक उपनिवेश से ही मुक्ति न ले सके। और बात करते हैं अरमागेद्दन और दुनिया को दार उल इस्लाम बनाने की!

अभी तो उपनिवेशवासी बपतिस्मा और अजान नहीं बंद करा सकते, अपने कवच सनातनियों को मिटा कर, स्वयं कैसे बचेंगे?

 एलिजाबेथ उपनिवेशवासियों को कत्ल करने में व्यस्त है. मैं सनातन संस्कृति बचाना चाहता हूँ. जिसे अपना अस्तित्व चाहिए, धर्म रक्षार्थ मेरी लूटी हुई संपत्ति दिलाने में मेरा सहयोग करें.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/६३९७७३०६१०

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