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मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 47, Nov 24-30,  2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust 3No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17w47 ApexCourt Ramlla

 ||श्री गणेशायेनमः||

‌अति आवश्यकः
पहचानें असली शत्रु को।
सोसल मीडिया से मेरा आग्रह है कि मुझे भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत फांसी दिलाने की मुहिम चलाए। इसके कुछ कारण निम्नलिखित हैं,
६ दिसंबर, १९९२ को मैनें बाबरी ढांचा गिरवा दिया। इस कारण रामलला तबसे आज तक टेंट मे कैद हैं और
जिसके कारण सांप्रदायिक हिंसा हुई। हजारों लोगों की जानें गई। देश विदेश मे हजारों मंदिर तोड़ दिए गए।  देखें लिंक,
http://www.aryavrt.com/babri-affidavits
OFFENCES RELATING TO RELIGION IN PAKISTAN
 108[295-C.Use of derogatory remarks, etc., in respect of the Holy Prophet:
‌Whoever by words, either spoken or written, or by visible representation or by any imputation, innuendo, or insinuation, directly or indirectly, defiles the sacred name of the Holy Prophet Muhammad (peace be upon him) shall be punished with death, or imprisonment for life, and shall also be liable to fine.
http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng
इसके कारण पंथनिरपेक्ष पूजा, "केवल अल्लाह पूज्य है" नामक अजान व खुत्बे मे बाधा उत्पन्न हुई। यानी ईशनिंदा करने में मुसलमानों को बाधा पड़ी यानी एलिजाबेथ के उपनिवेश सरकार का कार्य बाधित हुआ। यानी मैंने भादंसं की धाराओं१५३ व २९५ का अपराध किया।

कोर्ट ने निर्णय दिया, “ कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।”
यानी जिहाद सहिष्णुता, सामाजिक सुरक्षा और भाईचारा लाता है और जिहाद का विरोध करने के कारण मैं हिंदू आतंकी हूँ। अतः मुझे फांसी दी जानी चाहिए।
इंडिया स्वतंत्र नहीं, एलिजाबेथ का स्वतंत्र उपनिवेश है। सनातन संस्कृति नष्ट करना एलिजाबेथ की संस्कृति है। उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है।
बाइबिल की आज्ञा से १९:२७ व ६:५३ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से एलिजाबेथ जो भी वैदिक संस्कृति और उसके अनुयायियों को बचा सकता है, उसका वध करा कर उसका मांस खा रही और लहू पी रही है। जब तक उपनिवेश रहेगा, ऐसे नरसंहार होते रहेंगे।
पंथनिरपेक्ष, सहिष्णु और साम्प्रदायिक सद्भाववादी इस्लाम के कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. काफ़िर को कत्ल करने व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलने के लिए ईसाईयों व मुसलमानों को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, राष्ट्रपति, राज्यपाल व जज, असीमित मौलिक मजहबी अधिकार स्वीकार के लिए विवश हैं| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| मुसलमान काफिरों की हत्या करने से स्वर्ग पाएंगे| मैं मुसलमानों के जन्नत के राह में रुकावट हूँ और उपनिवेश का भी। अतः मुझे फांसी दी जानी चाहिए।
मैं चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अजान, नमाज़ और खुत्बे का १९९१ से ही विरोध करता हूँ। मेरे विरुद्ध ५० अभियोग चले। ३ आज भी लम्बित हैं। इस प्रकार मैं एलिजाबेथ ब्रांड साम्प्रदायिक सद्भाव का शत्रु हूँ। अतः मुझे फांसी मिलनी ही चाहिए।
‌ईसाई व मुसलमान को मंदिर नष्ट कर चर्च और मस्जिद स्थापित करने का मौलिक अधिकार है। ऐसा करना सांप्रदायिक सौहार्द है। मैंने ढांचा तोड़वा दिया। ऐसा करना हिंदू आतंकवाद है। अतः मुझे फांसी मिलनी ही चाहिए।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) 
चर्च से घोषणा की जाती है, “केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने| (बाइबल, लूका १९:२७). स्वर्ग उन्हें ही मिलेगा, जो बपतिस्मा ले| मैं मानवमात्र से स्वराज्य का अधिकार छीनने वाले जारज और प्रेत ईसा को धरती पर रहने के अधिकार का विरोधी हूँ। अतः मुझे फांसी मिलनी चाहिये। "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का संवैधानिक अधिकार व घोषित कार्यक्रम है| दोनों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| मैं सनातन संस्कृति बचाना चाहता हूँ। अतः मुझे फांसी दी जानी चाहिए।
http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng
विश्व में कोई आतंक नहीं हो रहा है| सारी घटनाएँ अब्रह्मी संस्कृतियों के मिशन और जेहाद हैं| जो इंडिया में एलिजाबेथ के कानूनों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग) द्वारा प्रायोजित हैं| उपनिवेशवासी पहले उपरोक्त सच्चाइयों को कहने का साहस जुटाएं| मानव जाति के अस्तित्व पर ही संकट है| जो सरकार चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान और खुत्बे नहीं बंद करा सकतीवह भारतीय संविधान प्रायोजित जिहाद और मिशन कैसे मिटा सकती है|
१८५८ के पूर्व भारत में निरक्षर, भिखारी और चोर नहीं थे। ये आततायी ब्रिटिश शासन की उपज हैं। उपनिवेश इंडिया के बड़े भूभाग पर मुसलमानों का सरिया शासन था।
आश्चर्य होता है कि मानवमात्र को वीर्यहीन कर अपना बलिपशु बनाने वाले ब्रिटिश साम्राज्य का आज तक मुसलमान सहित एक भी विरोधी नहीं है। ईसाई मुसलमान के विरुद्ध खड़ा है। दलित सवर्ण के विरुद्ध खड़ा है और यहाँ तक कि कैथोलिक प्रोटेस्टेंट और सिया सुन्नी के विरुद्ध खड़ा है।लेकिन उपनिवेशवासियों को बलिपशु बनाने वाली एलिजाबेथ का एक भी विरोधी नहीं है।
जबकि यदि दलित, सवर्ण, मुसलमान सभी नष्ट हो जाएं, तब भी एलिजाबेथ अपने ही ईसाइयों के अन्य वर्गों को जीवित नहीं छोड़ेगी। फिर भी एलिजाबेथ का कोई विरोधी नहीं है!
इस्लाम में एकता के लिए कोई स्थान नहीं है। मुसलमान अपनी जड़ें स्वयं काट रहा है।
‌शासन मुसलमान का नहीं, फिरंगी डायन एलिजाबेथ का है। यानी समस्या की जड़ उपनिवेश है। एलिजाबेथ का उपनिवेश तब तक खतरे में रहेगा, जब तक सनातन धर्म रहेगा। क्या आप उपनिवेश से मुक्ति के लिए मेरी सहायता करेंगे?
‌मैं मालेगाँव का अभियुक्त हूँ। साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी के तुरंत बाद मैंने प्रेसविज्ञप्ति जारी की थी, जो एटीएस की चार्ज शीट मे उपलब्ध है और टाइम्स ऑफ इंडिया में भी छपी है। देखें लिंक,
http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news
‌अतः संविधान और ब्रिटिश कानून समाप्त करने में मेरी सहायता कीजिए।
५३ ईसाई व मुसलमान देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं। हिंदू का कोई देश नहीं। गांधी हिंदुओं की धन, धरती, जान व नारियां संयुक्त रूप से ईसाइयों व मुसलमानों को सौंप गया है। हिंदू हाथों मे जयमाल दे कर अपनी नारियां और दहेज में धरती और सम्पत्ति विजेता को देने के लिए विवश हैं।
ईसाइयों व मुसलमानों को चाहिए कि आपस मे लड़ कर फैसला कर लें कि हमारा स्वामी कौन बनेगा? दुख इस बात का है कि ईसाई व मुसलमान आज तक उपनिवेश से ही मुक्ति न ले सके। और बात करते हैं बद्रीनाथ को मजार बनाने का!
अभी तो उपनिवेशवासी बपतिस्मा और अजान नहीं बंद करा सकते, अपने कवच सनातनियों को मिटा कर, स्वयं कैसे बचेंगे?
‌मद्रास रेजीडेंसी मे १८२३ मे मुनरो ने सर्वे कराया था। साक्षरता सत प्रतिशत थी। कोई दलित नहीँ था। सभी विद्वान और सम्पन्न थे। देश सोने की चिड़िया था। अपने आज के शत्रु ब्राह्मणों के अन्नदाता थे। दलितों के संतानों को शिक्षित करने का दायित्व ब्राह्मणों का था। दलित और अछूत बनाने वाले ब्राह्मणों ने दलितों को शिक्षित कैसे किया? सत प्रतिशत साक्षरता कैसे थी?
शासन ब्रिटिश का तब भी था और आज भी है। तब प्रत्यक्ष था और अब अप्रत्यक्ष है।
राजतंत्र मे कर की अधिकतम सीमा १७% से कम थी। बाकी उपज का दलित स्वामी था। एलिजाबेथ के उपनिवेश मे किसी उपनिवेश वासी को जीने का अधिकार नहीं है और न सम्पति व उत्पादन के साधन रखने का।
निर्णय आप करें कि आप को राजतन्त्र चाहिए कि लोकतंत्र?
राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! पाठक अपना पूजास्थल, भावी पीढी, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे?क्या पाठक को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं? मैं ८४+ वर्ष का हो चुका हूँ। जीवित बचा तो देखूंगा कि योगी जी अपना गोरक्षपीठ कैसे बचाते हैं।
अंत में मुसलमानों से आग्रह है कि वे स्वयं विचार करें कि अब भी समय है। इस्लाम को तौबा कर ईसाइयत को नष्ट करें, अन्यथा मानवजाति ही नष्ट हो जाएगी। निःशुल्क सलाह आर्यावर्त सरकार से लें।
अप्रति
०६.१२.२०१७

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