Muj17w46 Upnivesh Sanshodhan



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 46, Nov 17-23,  2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17w46 Upnivesh Sanshodhan

 ||श्री गणेशायेनमः||

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है।

भारतीय संविधान का वह अनुच्छेद, या किसी कानून की धारा का संशोधन ही सही, दिखाइए जिसने उपनिवेशवासियों को उपनिवेश से मुक्ति दिलाई!

अपने निम्नलिखित अंक में लोगों से मैंने उस अधिनियम का उल्लेख करने का आग्रह किया था, जिसके द्वारा ‘उपनिवेश’ शब्द निरस्त हुआ?

http://www.aryavrt.com/muj17w23y-upnivesh-ajadikaise

लगभग सभी लोग निम्नलिखित उत्तर ही दे सके,

There is a clear difference between a dominion and a sovereign state.... India was a dominion from 1947 to 1950, when our Constitution came into force. By the declaration in the Indian Constitution, India is a completely sovereign state and has no allegiance whatsoever with England and her Queen.”

किसी सज्जन ने नाम न छापने की शर्त पर मेरा अनुच्छेद ३९५ की ओर ध्यान आकर्षित किया है। अतः आइये देखें कि यह क्या कहता है। मूल अँग्रेजी में,

395. Repeals.—The Indian Independence Act, 1947, and the Government of India Act, 1935, together with all enactments amending or supplementing the latter Act, but not including the Abolition of Privy Council Jurisdiction Act, 1949, are hereby repealed.”

सचमुच?

३० जून, २०१७ तक भारतीय संविधान में १२२ संशोधन हो चुके हैं. २०वीं सदी के मीरजाफर सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने कोई आजादी नहीं दिलाई. हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द ‘स्वतंत्र’ का जोड़ा जाना. इंडियन उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का गांधी ने देश के बैरिस्टरों से मिल कर अपहरण कर लिया.

२६ नवम्बर, १९४९ को उपनिवेशवासियों द्वारा चुना हुआ कोई सांसद नहीं था. क्योंकि पहला चुनाव १९५२ में हुआ. फिर उपनिवेशवासियों ने भारतीय संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? इसके संकलनकर्ताओं के अध्यक्ष अम्बेडकर स्वयं इस संविधान को जलाना चाहते थे. आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और हर उपनिवेशवासी ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

उपरोक्त अनुच्छेद ३९५ के अनुसार भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ के साथ सभी कानून १९५० में ही निरस्त हो गए। लेकिन सच तो यह है कि इंडिया में आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही लागू हैं। यहां तक कि उपनिवेशवासी और भंड़ुए माउंटबेटन की पत्नी एडविना के वेश्यालय तथाकथित राष्ट्रपति भवन निवासी, ब्रिटिश उत्पादन कानूनविद दलित कोविंद भी आज भी ब्रिटिश प्रजा हैं। प्रमाण देखें,

 

 

 

 

क्यों बना भारतीय संविधान?

उत्तर है, मानव मात्र को दास बनाने और वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए| वह भी बाइबिल की आज्ञा से।

तथाकथित शांतिप्रिय ईसाइयत और इस्लाम के अनुयायी अल्पसंख्यक नहीं हैं. दोनों ही विश्व की सबसे बड़ी और दूसरी बड़ी आबादी हैं। दोनों के ही अनुयायी खूनी, बलात्कारी और लुटेरे हैं. मैं नहीं स्वयं बाइबिल और कुरान कहते हैं। जान जाने के भय से कोई नहीं कहता। मैं कह रहा हूँ। गलत है तो मुझे मरने तक फांसी पर लटकाओ। इन्हें धरती पर रहने का अधिकार नहीं है. इन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए|अतः सनातनियों को इन्हें मार डालने का भादंसं की धारा १०२ के अंतर्गत कानूनी अधिकार है।   जब कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने दोनों को अपनी संस्कृति बनाए रखने का अधिकार दिया है। आतताइयों को अपनी लूट, बलात्कार और हत्या की संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार? संविधान से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबिल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनिया में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबिल, व्यवस्था विवरण १२:१-३). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा नियंत्रित दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण के कारण उपनिवेशवासी बलात्कारियों, लुटेरों और हत्यारों के विरुद्ध शिकायत भी नहीं कर सकते|

इतना ही नहीं, संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर काफिरों के कर के खजाने से इनको हज अनुदान, मौलवियों व इमामों को वेतन, मुसलमान बच्चों को शिक्षा व्यय, हज भवन, वक्फ परिषद, अल्प संख्यक आयोग, लव जिहाद को संरक्षण, गोमांस खाने के लिए संरक्षण, पोषण और इनाम दिया जा रहा है।

काफिरों के ईष्टदेवों की पुलिस संरक्षण में ईशनिन्दा करवाई जा रही है। कत्ल करने की धमकी का प्रसारण करवाया जा रहा है।

अज़ान यानी कि ईशनिन्दा को खतरनाक स्तर तक सुरक्षा दी गई है। अज़ान का विरोध करने के कारण मेरे विरुद्ध ५० अभियोग चले। ४२ बार जेल या हवालात गया। पुलिस की लाठियाँ खाता रहा। सन २००१ में जेल में जहर दिया गया। साध्वी प्रज्ञा की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी। जगतगुरु अमृतानन्द के मुंह में गोमांस ठूसा गया। कमलेश तिवारी पर रासुका लगाई गई। मालदा, बंगाल में कानूनविद राज्यपाल केसरी के संरक्षण में दंगे हुए। थाना फूंका गया। कमलेश तिवारी को कत्ल करने के लिए ४० करोड़ का फतवा जारी हुआ।

  लेकिन मैं अज़ान नहीं बंद करा सका। मैंने राव साहब और कल्याण सिंह के सहयोग से एक बाबरी ढांचा गिरवा दिया, १९९२ से उसे बनवाने की मांग जारी है। हमें हमारी काबा चाहिए। मुसलमान क्यों नहीं देते?

इंडिया को बाँटने और अपने कानूनों को उपनिवेश वासियों पर लागू करने का ब्रिटेन को अधिकार कैसे है?

हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने  एलिजाबेथ के रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम एलिजाबेथ द्वारा सताए जा रहे हैं. (बाइबिल, लूका १९:२७). इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि जीविका, पद व प्रभुता के लिए वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं|

सन १९५० में भारतीय संविधान को थोपे जाने के बाद स्थिति और भयावह हो गई है| आज तक किसी ने भारतीय संविधान का विरोध भी नहीं किया है|जिनके पास वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के जान-माल की रक्षा का दायित्व है, उनको पद, प्रभुता और पेट के लोभ में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए विवश कर दिया गया है|

राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. उपनिवेशवासी अपना सोना न बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. उपनिवेशवासी बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. अब रतन टाटा और मुकेश अम्बानी आदि की बारी है. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! आप अपना पूजा स्थल, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या आप को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?

मैकाले को इंडिया में सन १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी न मिला. १९४७ तक देश के खजाने में १५५ करोड़ रु० था. कोई विदेशी कर्ज न था. आज प्रति व्यक्ति ८२५६०/- रु० कर्जदार (मार्च २०१६ तक; ७० रु० प्रति डालर की दर से) है| और यह कर्ज तब है, जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने नागरिकों की जमीनें और जमींदारी लूटी|सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे|

स्वर्ण नियन्त्रण कानून १९६८ में भी लागू हुआ था, जिसे ६ जून, १९९० को निरस्त कर दिया गया. अब २०१७ में एलिजाबेथ यह कानून पुनः ला रही है.

जिस गरीब के हित की आड़ में उपनिवेशवासी लूटे गए, वह गरीब और अधिक कर्जदार हो गया और एलिजाबेथ की ओर कोई उंगली भी नहीं उठा सकता.

आज के दलित ई सन १८२३ में इतने सम्पन्न थे कि ब्रह्मचारी, आचार्य, सन्यासी, अतिथि, पशु, पक्षी तक  का भरण पोषण करते थे। मुनरो के अनुसार वे साक्षर व विद्वान थे। क्योंकि साक्षरता शत% थी और उनको साक्षर बनाने वाले ब्राह्मण ही थे। एलिजाबेथ नहीं, जिसने उन्हें बलिपशु बनाया।

 अंग्रेजों का शासन शुरू होते ही वे अछूत और दलित हो गए। दलितं या ठाकुर, किसी का संहार नहीं करेंगे। अतः आपस में लड़ना छोड़कर उपनिवेश का विरोध करें क्योंकि एलिजाबेथ बिना भेदभाव के मानव मात्र का रक्त पिएगी, मांस खाएगी और केवल ईसा की पूजा करवाएगी।

एलिज़ाबेथ के उपनिवेश में कोई जीवित नहीं बचेगा। जज कर्णन जेल गए। राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी की गवर्नरी गई। लालू, मुलायम, जैसे मुख्यमंत्रियों का हाल पूछ लें। सहाराश्री सुब्रत राय जेल में हैं। जयेन्द्र सरस्वती दीवाली के रात जेल गए। आशाराम और रामरहिम जेल में हैं। आप का क्या होगा? अप्रति

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