Muj17W36 Mission aur Jihad



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 36, Sept 08-14, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W36 Mission aur Jihad 

 ||श्री गणेशायेनमः||


‌मैं मालेगाँव का अभियुक्त हूँ। साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी के तुरंत बाद मैंने प्रेसविज्ञप्ति जारी की थी, जो एटीएस की चार्ज शीट मे उपलब्ध है और टाइम्स ऑफ इंडिया में भी छपी है।देखें लिंक, 

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

सोसल मीडिया से मेरा आग्रह है कि मुझे भादंसं की धारा १२१ के अंतर्गत फांसी दिलाने की मुहिम चलाए। इसके कुछ कारण निम्नलिखित हैं,

६ दिसंबर, १९९२ को मैनें बाबरी ढांचा गिरवा दिया। जिसके कारण सांप्रदायिक हिंसा हुई। हजारों लोगों की जानें गई। देश विदेश मे हजारों मंदिर तोड़ दिए गए।  देखें लिंक,

http://www.aryavrt.com/babri-affidavits

इसके कारण पंथनिरपेक्ष पूजा, "केवल अल्लाह पूज्य है" नामक अजान व खुत्बे मे बाधा उत्पन्न हुई। यानी ईशनिंदा करने में मुसलमानों को बाधा पड़ी यानी एलिजाबेथ के उपनिवेश सरकार का कार्य बाधित हुआ। यानी मैंने भादंसं की धाराओं१५३ व २९५ का अपराध किया।

कोर्ट ने निर्णय दिया, “साध्वी प्रज्ञा सिंह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि धमाकों के लिए इस्तेमाल बाइक से उनका संबन्ध है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।” 

यानी जिहाद सहिष्णुता, सामाजिक सुरक्षा और भाईचारा लाता है और जिहाद का विरोध करने के कारण मैं हिंदू आतंकी हूँ। अतः मुझे फांसी दी जानी चाहिए।ं

 इंडिया स्वतंत्र नहीं, एलिजाबेथ का स्वतंत्र उपनिवेश है। सनातन संस्कृति नष्ट करना एलिजाबेथ की संस्कृति है। उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है। 

बाइबिल की आज्ञा से १९:२७ व ६:५३ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से एलिजाबेथ जो भी वैदिक संस्कृति और उसके अनुयायियों को बचा सकता है, उसका वध करा कर उसका मांस खा रही और लहू पी रही है। जब तक उपनिवेश रहेगा, ऐसे नरसंहार होते रहेंगे।

कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. काफ़िर को कत्ल करने व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलने के लिए ईसाईयों व मुसलमानों को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, राष्ट्रपति, राज्यपाल व जज, असीमित मौलिक मजहबी अधिकार स्वीकार के लिए विवश हैं| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| मुसलमान काफिरों की हत्या करने से स्वर्ग पाएंगे| मैं मुसलमानों के जन्नत के राह में रुकावट हूँ और उपनिवेश का भी। अतः मुझे फांसी दी जानी चाहिए।

मैं चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अजान, नमाज़ और खुत्बे का १९९१ से ही विरोध करता हूँ। मेरे विरुद्ध ५० अभियोग चले। ३ आज भी लम्बित हैं। इस प्रकार मैं एलिजाबेथ ब्रांड साम्प्रदायिक सद्भाव का शत्रु हूँ। अतः मुझे फांसी मिलनी ही चाहिए।

‌ईसाई व मुसलमान को मंदिर नष्ट करने और मंदिर नष्ट कर चर्च और मस्जिद स्थापित करने का मौलिक अधिकार है। ऐसा करना सांप्रदायिक सौहार्द है। मैंने ढांचा तोड़वा दिया। ऐसा करना हिंदू आतंकवाद है। अतः मुझे फांसी मिलनी ही चाहिए।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) 

चर्च से घोषणा की जाती है, “केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने| (बाइबल, लूका १९:२७). स्वर्ग उन्हें ही मिलेगा, जो बपतिस्मा ले| मैं मानवमात्र से स्वराज्य का अधिकार छीनने वाले जारज और प्रेत ईसा को धरती पर रहने के अधिकार का विरोधी हूँ। अतः मुझे फांसी मिलनी चाहिये। "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का संवैधानिक अधिकार व घोषित कार्यक्रम है| दोनों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| मैं सनातन संस्कृति बचाना चाहता हूँ। अतः मुझे फांसी दी जानी चाहिए।

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng

विश्व में कोई आतंक नहीं हो रहा है| सारी घटनाएँ अब्रह्मी संस्कृतियों के मिशन और जेहाद हैं| जो इंडिया में एलिजाबेथ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा प्रायोजित हैं| उपनिवेशवासी पहले उपरोक्त सच्चाइयों को कहने का साहस जुटाएं| मानव जाति के अस्तित्व पर ही संकट है| जो सरकार चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान और खुत्बे नहीं बंद करा सकती, वह भारतीय संविधान प्रायोजित जिहाद और मिशन कैसे मिटा सकती है|

भारतीय संविधान दोनोँ का पोषण करता है. बचना हो तो मेरी सहायता कीजिए.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

२१/०९/२०१७

http://www.aryavrt.com/muj17w36-mission-aur-jihad

Registration Number is : PMOPG/E/2017/0519337 


+++


Comments