Muj17W35 Balipashu Rashtrapati



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 35, Sept 01-07, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W35 Balipashu Rashtrapati

 ||श्री गणेशायेनमः||


महामहिम बलिपशु राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद महोदय!

उपरोक्त पत्र, यदि ब्रिटिश नागरिकता मे संशोधन नहीं हुआ हो तो, आप के पद का अपमान है।  

वैदिक सनातन धर्म किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित दुश्मनी के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है|"

ठीक इसके विपरीत ईसाइयत और इस्लाम संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| ईसाइयत इस्लाम मिशन जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, :३९). महामहिम जी! निर्णय कीजिये किसके हाथों मरेंगे?

उपरोक्त तथ्य बताना या प्रकाशित करना भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध है| लेकिन अज़ान द्वारा मस्जिद से ईशनिंदा और कत्ल करने के खुत्बे (शिक्षाएं) अपराध नहीं माने जाते| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() ने बलात्कारी मुसलमानों को अपनी संस्कृति को बनाये रखने का और राष्ट्रपति और राज्यपाल ने क्रमशः अनुच्छेदों ६० १५९ के अधीन मुसलमानों की बलात्कारी संस्कृति के संरक्षणपोषण संवर्धन की शपथ ले रखी है| इसके अतिरिक्त मुसलमानों की बलात्कारी संस्कृति को कार्यान्वित करने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन उत्तरदायित्व भी सौप रखा है| ईसाई व मुसलमान वर्चस्व का युद्ध लड़ने के लिये विवश हैं, जिसके कारण डायनासोर की भांति मानवजाति का अस्तित्व संकट में है|

उपरोक्त आलोचनाएं ईसाइयत और इस्लाम में ईशनिंदा हैं, कोई ईशनिन्दक सुरक्षित अथवा जीवित नहीं है| चाहे वह आसमा बिन्त मरवान हों, या अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी हों, या तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैं| मैं मालेगांव व अन्य अभियोगों का अभियुक्त हूँ| ईश्वर की कृपा से आज तक मुझे सजा नहीं दी गई| लेकिन मैं दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ से पीड़ित तथ्यों को प्रचारित नहीं कर पाता|

मैं भिक्षुक ब्राह्मण हूँ और आप ब्रिटिश उपनिवेश के भाड़े के दास| आप की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ा गया है| ईसाइयत और इस्लाम का संसार में वर्चस्व है| अतः आप इनसे नहीं लड़ सकते| आप चाहें तो इस युद्ध के लिये मुझे गुप्त सहयोग दे सकते हैं| ताकि गुरुकुल पुनर्जीवित हो सके

अपने पिछले संस्करण मे मैंने आप को आप के सर्वनाश कर्ता ब्रिटिश साम्राज्य के बारे में लिखा था। आज भी आप उसी साम्राज्य के हितों के रक्षार्थ, संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन, शपथ लेकर सत्तारूढ़ हैं। आप कानून विद हैं, सोचिये!,

क्या आप उपनिवेश का विरोध कर सकते हैं? http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

क्या आप गो हत्या बंद कर सकते हैं?

क्या आप मस्जिद व अजान बंद करा सकते हैं?

क्या आप गुरुकुल पुनर्जीवित करा सकते हैं?

क्या आप संविधान के अनुच्छेद २९(१) और / या ३९(ग) बदलवा सकते हैं?

मैं उपनिवेश विरोधी हूँ और ब्रिटिश का बलिपशु नहीं रहना चाहता, जो भादंसं की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है। लेकिन इस अपराध का संज्ञान, दंप्रसं की धारा १९६ के अधीन, केवल आप या राज्यपाल ले सकते हैं।

एलिजाबेथ ने भारतीय संविधान के अनु३९(ग) का आदर करते हुए अनु३१ मिटाया. जमीदारीसोना, ₹, सहारा लूटा. टाटा व रिलायंस आदि लुटेंगे. थोमस मुनरो (Thomas Munro) ने मद्रास रेजीडेंसी में साक्षरता जानने के लिए १८२३ में सर्वे किया थाउसने लिखा, "यहाँ १००% साक्षरता है."

जो दलित और पिछड़ा समाज शिक्षक ब्राह्मणों का भिक्षा देकर भरण पोषण करता था और बदले में जो ब्राह्मण तथाकथित दलित समाज की संतति को सम्प्रभु बनाता थाआज वही दलित और पिछड़ा समाज ब्राह्मणों का शत्रु बन गया है. लेकिन जिन लोगों ने उनके सम्प्रभु बनाने वाले गुरुकुलों को नष्ट करउनकी सकल सम्पदा लूट कर और प्रताड़ित कर उन्हें दास बना लिया हैउस एलीज़ाबेथ के विरुद्ध वे कुछ नहीं बोल सकते! सीधे जेल चले जायेंगे.

अम्बेडकर भारतीय संविधान जलाना चाहते थे। 

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/ghatak-bhartiya-smvidhan

भारतीय संविधान के संकलन सभा के अध्यक्ष अम्बेडकर ने २ सितम्बर१९५३ को राज्य सभा में कहा, "भारतीय संविधान मेरी इच्छा के विरुद्धमुझसे लिखवाया गया| ... अतएव इस संविधान को आग लगाने की जिस दिन जरूरत पड़ेगीमैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इसे आग लगाउॅंगा। ... भारतीय संविधान किसी का भला नहीं करता|" अम्बेडकर का उपरोक्त वक्तव्य राज्य सभा की कार्यवाही का हिस्सा हैजिसे कोई भी पढ़ सकता है|

दलित अपने असली शत्रु को पहचानें. सवर्ण उनकी नारियों का बलात्कार नहीं करेंगे. उनके घर नहीं लूटेंगे. न उनका नरसंहार करेंगे.

ठीक इनके विपरीत भारतीय संविधान ईसाईयों व मुसलमानों को दलितों को मिटाने का अधिकार देता है.

जब तक बाइबलकुरान और भारतीय संविधान का महिमामंडन होगा, मनुष्य तिल तिल कर मिटते रहेंगे.

एलिजाबेथ मानवमात्र को धोखा दे रही है। मानवजाति का अस्तित्व संकट में है।
३० जून, २०१७ तक भारतीय संविधान में १२२ संशोधन हो चुके हैं. २०वीं सदी के मीरजाफर सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने कोई आजादी नहीं दिलाई. हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द ‘स्वतंत्र’ का जोड़ा जाना. इंडियन उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का गांधी ने देश के बैरिस्टरों से मिल कर अपहरण कर लिया.
सन २००० से कोई राज्यपाल या राष्ट्रपति मुझे फांसी न दिला सका। न ही किसी मुअज्जिन/ईमाम पर अभियोग चलवा सका।
अपने शत्रु से बदला लीजिये। आप चारो ओर से गुप्तचरों से घिरे हैं। ।प्रत्यक्ष कुछ नहीं कर सकते। सनातन धर्म को बचा लीजिये.
क्या आप दलित अम्बेडकर के सपनों को साकार करने हेतु आर्यावर्त सरकार की सहायता करेंगे?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

०६/०९/२०१७

http://www.aryavrt.com/muj17w35-balipashu-rashtrapati

Your Registration Number is : MINHA/E/2017/08834 

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