Muj17W29Y NIBANDH 15AugKa



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 23 Year 23 ISSUE 29Y, Jul 21-27, 2017 . Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W29Y NIBANDH 15AugKa

||श्री गणेशायेनमः||

निबंध

दुधमुहों से नमो ने स्वतंत्रता दिवस पर निबंध लिखने के लिए कहा है. नीचे प्रारूप प्रस्तुत है.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

उपरोक्त URL भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ (Indian Independence Act1947) युनाइटेड किंगडम की पार्लियामेंट द्वारा पारित वह अधिनियम है जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित भारत का दो स्वतंत्र उपनिवेशों (भारत तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया। यह अधिनियम १८ जुलाई १९४७ को स्वीकृत हुआ और १५ अगस्त १९४७ को भारत बंट गया। मूल अधिनियम के प्रारम्भ की लाइनें मूल भाषा मे उद्धृत करता हूँ,

An Act to make provision for the setting up in India of two independent Dominions, to substitute other provisions for certain provisions of the Government of India Act1935, which apply outside those Dominions, and to provide for other matters consequential on or connected with the setting up of those Dominions

“[18th July1947]

३० जून, २०१७ तक भारतीय संविधान में १२२ संशोधन हो चुके हैं. वह अधिनियम दिखाइए, जिसने शब्द ‘उपनिवेश’ को निरस्त किया,

सत्ता के हस्तांतरण के संधि के पूर्व ही हमारे पूर्वजों के ९० वर्ष के बलिदानों के बदले मे १८ जुलाई, १९४७ को आक्रांता जारज षष्टम् ने शब्द उपनिवेश (Dominion) के पूर्व शब्द स्वतंत्र (independent) जोड़ कर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ बना दिया, और तब से आज तक लागू है. जिसके अनुसार इंडिया को स्वतंत्रता नहीं दी गई, अपितु इंडिया का दो स्वतंत्र? उपनिवेशों (इंडिया तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को इंडिया बंट गया। इतना ही नहीं उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा, राष्ट्रपति और राज्यपाल के स्वेच्छा से, मृत्युदंड का अपराध है.

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी, पाकिस्तान जिसकी लाश पर बन सकता था, ने इंडिया को ईसाइयत और इस्लाम को सौंप दिया और उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का अपहरण कर गया. १९४७ से आज तक उपनिवेशवासी स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने का साहस भी गवां बैठे हैं.

गाँधी उपनिवेशवासियों का देश उपनिवेशवासियों को ९० वर्षों के लिए अंग्रेजों द्वारा किरायेदारी पर दिलवा गया. मानवमात्र की हत्या करना, जिनकी संस्कृति है, उनको पंथनिरपेक्ष घोषित कर गांधी ने रोक लिया. उनको गोमांस खाने की पूरी छूट दी. उपनिवेशवासी आज भी इसी गांधी का महिमामंडन कर रहे हैं और उपनिवेश विरोधियों को नष्ट करने की मूर्खता कर रहे हैं.

उपनिवेशवासी गांधी के व्यभिचार को ब्रह्मचर्य का प्रयोग स्वीकार करने वाले पापी हैं.

आज़ादी धोखा है. हमारे यहाँ एक कहावत है, “रात भर सोहर भईल (पुत्र जन्म के उत्सव में गाए जाने वाले गीत)बिहाने (प्रातःकाल) देखलीं (देखा) त बाबू (शिशु) के छुन्निये (penis)नाहींइंडिया आज भी एलिजाबेथ का स्वतंत्र उपनिवेश है.. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

फिरभी सन १९४७ के सत्ता हस्तान्तरण के बाद से ही उपनिवेशवासी १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाने के लिए विवश हैं. उपनिवेशवासियों के स्वतंत्रता के युद्ध का ही एलिजाबेथ ने अपहरण कर लिया है. एलिजाबेथ धोखा देना छोड़े. १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस की नौटंकी के स्थान पर स्पष्ट घोषित करे कि उपनिवेशवासी उसके स्थायी बलिपशु हैं. उपनिवेशवासियों को कत्ल करना, उनका मांस खाना और लहू पीना उस का बाइबल और भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त असीमित मौलिक मजहबी अधिकार है

१८ जुलाई, १९४७ से आजतक मुझे एक भी उपनिवेश विरोधी का ज्ञान नहीं है. जब कि एक से बढ़ कर एक कानूनविद धरती पर पैदा हुए, जिनको भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम,१९४७,का पूरा ज्ञान रहा, लेकिन किसी ने उपनिवेश,कुरान, बाइबल और भारतीयसंविधान का विरोध कभी नहीं किया.

मुझे आज तक कोई यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि इंडिया को उपनिवेश बनाने और इंडिया और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र उपनिवेशों में बांटने का ब्रिटेन को अधिकार कैसे था?

अप्रति.

  Registration Number is : PMOPG/E/2017/0389131

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