Muj17W28Y KANOON DIKHAIYE



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 28Y, Jul 14-20, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W28Y KANOON DIKHAIYE

 ||श्री गणेशायेनमः||

भारतीय संविधान का वह अनुच्छेद दिखाइए, जिसने उपनिवेशवासियों को उपनिवेश से मुक्ति दिलाई!

अपने निम्नलिखित अंक में लोगों से मैंने उस अधिनियम का उल्लेख करने का आग्रह किया था, जिसके द्वारा ‘उपनिवेश’ शब्द निरस्त हुआ?

http://www.aryavrt.com/muj17w23y-upnivesh-ajadikaise

लगभग सभी लोग निम्नलिखित उत्तर ही दे सके,

15th August was not a complete Independence, but the elected members of the parliaments and their Governments had full power. A formal approval of the British Crown was necessary for us (India and Paksitan). This was required till we frame our constitution and put the same in force. After 1950 we had complete independence when we enforced constitution. We became republic of India.

 सचमुच?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है।

३० जून, २०१७ तक भारतीय संविधान में १२२ संशोधन हो चुके हैं. २०वीं सदी के मीरजाफर सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने कोई आजादी नहीं दिलाई. हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द स्वतंत्र का जोड़ा जाना. इंडियन उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का गांधी ने देश के बैरिस्टरों से मिल कर अपहरण कर लिया.

२६ नवम्बर, १९४९ को उपनिवेशवासियों द्वारा चुना हुआ कोई सांसद नहीं था. क्योंकि पहला चुनाव १९५२ में हुआ. फिर उपनिवेशवासियों ने भारतीय संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? इसके संकलनकर्ताओं के अध्यक्ष अम्बेडकर स्वयं इस संविधान जलाना चाहते थे. आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

क्यों बना भारतीय संविधान?

उत्तर है, मानव मात्र को दास बनाने और वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए|

तथाकथित शांतिप्रिय ईसाइयत और इस्लाम के अनुयायी अल्पसंख्यक नहीं हैं. दोनों के ही अनुयायी खूनी, बलात्कारी और लुटेरे हैं. इन्हें धरती पर रहने का अधिकार नहीं है. इन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा नियंत्रित दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण के कारण उपनिवेशवासी बलात्कारियों, लुटेरों और हत्यारों के विरुद्ध शिकायत भी नहीं कर सकते|

इंडिया को बाँटने और अपने कानूनों को उपनिवेश वासियों पर लागू करने का ब्रिटेन को अधिकार कैसे है?

हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने  एलिजाबेथके रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम एलिजाबेथ द्वारा सताए जा रहे हैं. (बाइबल, लूका १९:२७). इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि जीविका, पद व प्रभुता के लिए वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं|

सन १९५० में भारतीय संविधान को थोपे जाने के बाद स्थिति और भयावह हो गई है| आज तक किसी ने भारतीय संविधान का विरोध भी नहीं किया है|जिनके पास वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के जान-माल की रक्षा का दायित्व है, उनको पद, प्रभुता और पेट के लोभ में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए विवश कर दिया गया है|

अप्रति

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