Muj17W27 Upnivesh Ajadikaise



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 27, Jul 07-13, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W27 Upnivesh Ajadikaise

 

 

||श्री गणेशायेनमः||

भारतीय संविधान

अपने निम्नलिखित अंक में लोगों से मैंने उस अधिनियम का उल्लेख करने का आग्रह किया था, जिसके द्वारा ‘उपनिवेश’ शब्द निरस्त हुआ?

http://www.aryavrt.com/muj17w23y-upnivesh-ajadikaise

लगभग सभी लोग निम्नलिखित उत्तर ही दे सके,

15th August was not a complete Independence, but the elected members of the parliaments and their Governments had full power. A formal approval of the British Crown was necessary for us (India and Paksitan). This was required till we frame our constitution and put the same in force. After 1950 we had complete independence when we enforced constitution. We became republic of India.

 सचमुच?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है।

जो लोग इंडिया को स्वतंत्र बता रहे हैं, कृपया अभिलेख दिखाएँ.

३० जून, २०१७ तक भारतीय संविधान में १२२ संशोधन हो चुके हैं. २०वीं सदी के मीरजाफर सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने कोई आजादी नहीं दिलाई. हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द स्वतंत्र का जोड़ा जाना. इंडियन उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का गांधी ने देश के बैरिस्टरों से मिल कर अपहरण कर लिया.

चुनाव द्वारा स्थितियों में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

उपनिवेशवासी स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने का साहस भी गवां बैठे हैं. क्योंकि उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

इंडिया को बाँटने और अपने कानूनों को उपनिवेश वासियों पर लागू करने का ब्रिटेन को अधिकार कैसे है? दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास सुरक्षित है, वैदिक सनातन संस्कृति के रक्षार्थ किये गये किसी भी विरोध को बड़ी चतुराई से निष्क्रिय कर देती है| इस प्रकार एलिजाबेथ राष्ट्रपति और राज्यपालों के कंधे पर रायफल रख कर अपने शत्रुओं को मार रही है और कोई एलिजाबेथ के विरुद्ध ऊँगली भी नहीं उठा सकता!

क्यों बना भारतीय संविधान?

उत्तर है, मानव मात्र को दास बनाने और वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए|

संविधान को आत्मार्पित कैसे किया?

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया| उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया| हम आज भी ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते| इंडिया को अपना देश मानते हैं. हमें इसी अपराध के लिए ई० सन १८५७ से ही दंडित किया जा रहा है| २६ नवम्बर १९४९ को हमारे साथ छल हुआ था| संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ता हस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे| क्यों कि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ| संविधान का संकलन करके जनमत संग्रह नहीं कराया गया. फिर इंडिया के उपनिवेशवासियों ने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम लोगों ने यही पूछने का दुस्साहस किया है. इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने  एलिजाबेथके रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम एलिजाबेथ द्वारा सताए जा रहे हैं. (बाइबल, लूका १९:२७). इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि जीविका, पद व प्रभुता के लिए वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं|

सन १९५० में भारतीय संविधान को थोपे जाने के बाद स्थिति और भयावह हो गई है| आज तक किसी ने भारतीय संविधान का विरोध भी नहीं किया है|जिनके पास वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के जान-माल की रक्षा का दायित्व है, उनको पद, प्रभुता और पेट के लोभ में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए विवश कर दिया गया है|

वह राष्ट्रपति, राज्यपाल, जज अथवा लोकसेवक मूर्ख ही होगा, जो उपनिवेश, बपतिस्मा, अज़ान के विरुद्ध कार्यवाही कर, शमित मुखर्जी, गांगुली, स्वतंत्रकुमार, राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी आदि की भांति नौकरी गवांना चाहेगा... मीडिया सहित लोकसेवक का पेशा सत्य को नष्ट करना है. बिल्कुल झूठ कहना; समाज को दूषित करना और गालियां देना मीडिया, जज, राष्ट्रपति, राज्यपाल व लोकसेवकों की विवशता है. राज्यपाल पर्दे के पीछे शासकों (एलिजाबेथ) के लिए कार्य करने वाले मातहत और उपकरण हैं. ... बौद्धिक वेश्याएं हैं.

Registration Number is : PMOPG/E/2017/0372551 

http://www.aryavrt.com/muj17w27-upnivesh-ajadikaise

अप्रति

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