Muj17W24 PENSION IDUK



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 24, Jun 09 - 15, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W24 PENSION IDUK

  

||श्री गणेशायेनमः||

पत्रांक: P ENSION-RL17614

विषय: नियमानुसार पेंशन के लिए उप्र को पत्र.

संदर्भ: सिचाई सचिव का पत्रांक १५०७ / II-2016-01(09) / 2015 दिनांक २०.०९.२०१६.

महामहिम श्री के. के. पॉउल जी!

आप एलिजाबेथ के बलिपशु हैं. आप का मनोनयन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने हेतु किया गया है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/ghatak-bhartiya-smvidhan

मेरी सेवा पुस्तिका विष्णु प्रयाग निर्माण खंड ३ के अधिकारियों ने गायब की है. उप्र से इस विवाद से कोई मतलब नहीं है.

आदरणीय सचिव श्री आनंद वर्धन जी को निर्देश आप से प्राप्त होते हैं. निर्णय आप के भी नहीं, एलिजाबेथ के हैं. मुझे सचिव महोदय से नहीं आप व एलिजाबेथ से शिकायत है.

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

गौ नर भक्षी एलिजाबेथ इंडियन उपनिवेश की मल्लिका है, जिसका लक्ष्य धरती के सभी धर्मों को नष्ट कर केवल ईसा की पूजा कराना है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

उपनिवेश के विरुद्ध कोई बोल न पाए, इसीलिए एलिजाबेथ ने अपने दासों राष्ट्रपति और राज्यपाल के अधीन कर, भारतीय संविधान व दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ का संरक्षण दिला कर लोकसेवकों, ईसाईयों और मुसलमानों की सेना बना रखी है. उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. इस धारा का नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है. जज सहित नमो भी उपनिवेश का विरोध नहीं कर सकते. क्योंकि सभी एलिजाबेथ के दास हैं.

मैं उपनिवेश विरोधी हूँ. आप मुझे पेंशन नहीं दे सकते, लेकिन एलिजाबेथ फांसी तो दिला ही सकती है. लेकिन मुझे आज तक एलिजाबेथ फांसी भी न दिला सकी!

क्या आप सम्प्रभु बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुलों को पुनर्स्थापित व उपनिवेश का उन्मूलन करने हेतु आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता कर सकते हैं?

http://www.aryavrt.com/muj16w39cy-pension-iduk

अब्रह्मी संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति और निवासियों को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| इनको इंडिया में रोककर एलिजाबेथ आप का उपयोग वैदिक संस्कृति को मिटाने के लिए कर रही है.

एलिजाबेथ, आप व पुलिस के संरक्षण में तथाकथित पूजास्थल मस्जिदों से सहिष्णु और सर्वधर्मसमभाव वादी मुअज्ज़िन/ईमाम लाउडस्पीकर पर हर शुक्रवार मस्जिदों से मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने के उपदेश (खुत्बे) देते हैं और प्रतिदिन ५ बार, नियमित रूप से और नियमित समय पर, अज़ान यानी ईशनिंदा का प्रसारण करते हैं. काफिरों को अज़ान और कलिमा द्वारा चेतावनी देते हैं, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|” क्या आप अज़ान और खुत्बे बंद करा सकते हैं?

हर उपनिवेशवासी के पास भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है, क्या ईशनिंदा व कत्ल से बचाव हेतु कोई राष्ट्रपति या राज्यपाल आर्यावर्त सरकार की सहायता कर सकता है?

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ६० व १५९ और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन व दया के पात्र जजों (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ३) ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है, उसके अनुच्छेद २९(१) ने अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दे रखा है.

वह राष्ट्रपति, राज्यपाल अथवा लोकसेवक मूर्ख ही होगा, जो उपनिवेश, बपतिस्मा, अज़ान के विरुद्ध कार्यवाही कर नौकरी गवांना चाहेगा... मीडिया सहित लोकसेवक का पेशा सत्य को नष्ट करना है. बिल्कुल झूठ कहना; समाज को दूषित करना और गालियां देना मीडिया, जज, राष्ट्रपति, राज्यपाल व लोकसेवकों की विवशता है. राज्यपाल पर्दे के पीछे शासकों (एलिजाबेथ) के लिए कार्य करने वाले मातहत और उपकरण हैं. ... बौद्धिक वेश्याएं हैं.

माउंटबेटन ने ईसाइयत के रक्षार्थ पत्नी एडविना का वैश्यालय खोल लिया. क्या आप वैदिक संस्कृति रक्षार्थ मुझे पेंशन दिला सकते हैं?        

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०)

दिनांक; १४/०६/१७

 

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