Muj17W23Y Upnivesh Ajadikaise



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 23Y, Jun 16-22, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W23Y Upnivesh Ajadikaise

  

||श्री गणेशायेनमः||

भारतीय संविधान

जो लोग इंडिया को स्वतंत्र बता रहे हैं, कृपया अभिलेख दिखाएँ.

मैं नीचे अभिलेख दे रहा हूँ, जो सिद्ध करता है कि इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है और यह उपनिवेश ब्रिटिश कानूनों द्वारा ही शासित है.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है।

कोई उपनिवेशवासी उपनिवेश का विरोध क्यों नहीं करता? उल्टे मेरे पास तमाम पत्र आ रहे हैं कि इंडिया, दैट इज भारत, स्वतंत्र है. मैं लोगों को दिग्भ्रमित करता हूँ. मेरा सुझाव है कि सत्ता हस्तान्तरण के मात्र २७ दिन पूर्व १८ जुलाई, १९४७ को ब्रिटिश संसद में पारित निम्नलिखित अधिनियम का पहला पैरा पढ़ें,

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

“An Act to make provision for the setting up in India of two independent Dominions, to substitute other provisions for certain provisions of the Government of India Act 1935, which apply outside those Dominions, and to provide for other matters consequential on or connected with the setting up of those Dominions…”

संकलनकर्ता भीमराव अम्बेडकर ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे!

अम्बेडकर ने यह दावा कभी नहीं किया कि उन्होंने यह संविधान बनाया। इसके विपरीत अम्बेडकर ने २ सितम्बर, १९५३ को राज्य सभा में कहा कि इस संविधान को आग लगाने की जिस दिन जरूरत पड़ेगी, मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इसे आग लगाउॅंगा। भारतीय संविधान किसी का भला नहीं करता| अम्बेडकर का उपरोक्त वक्तव्य राज्य सभा की कार्यवाही का हिस्सा है; जिसे कोई भी पढ़ सकता है| एक बात और समझने की है कि भीमराव अम्बेडकर संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमैटी के चेयरमैन थे| जब संकलनकर्ता ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे, तो आप भारतीय संविधान पर क्यों विश्वास करते हैं?

क्यों बना भारतीय संविधान?

उत्तर है, मानव मात्र को दास बनाने और वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए|

एलिजाबेथ को भी ईसा का आदेश है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७).

अर्मगेद्दन के पश्चात ईसा जेरूसलम को अपनी अंतर्राष्ट्रीय राजधानी बनाएगा| बाइबल के अनुसार ईसा यहूदियों के मंदिर में ईश्वर बन कर बैठेगा और मात्र अपनी पूजा कराएगा| विशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी व संवैधानिक अधिकार है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

मूसा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद (कुरान २३:६) ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| बाइबल और कुरान मूसा व मुहम्मद के तथाकथित ईश्वरीय आदेश हैं, जिनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

वीर्यहीन और चरित्रहीन बनाने वाली अब्रह्मी संस्कृतियाँ

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये| [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए| न बने तो कत्ल कर दीजिए| मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है| {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}| वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं कीधाराओं १९६ व १९७ केसंरक्षण में|

भारतीय संविधान से पोषित अब्रह्मी संस्कृतियां, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देती हैं। इन्होंने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है।

सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा। जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०/०६/१९७९ से लुप्त) व अनुच्छेद ३९ग].

वैदिक सनातन धर्म मिटाना एलिजाबेथ का एकसूत्रीय लक्ष्य है| पोप ने एलिजाबेथ को इंडिया की धरती पर आकर आदेश दिया है कि २१ सदी में पूरे एशिया को ईसा की भेंड़ बनाना है| बाइबल में भी एलिजाबेथ को यही आदेश है और भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भी एलिजाबेथ का समर्थन करता है| १९५० से आज तक किसी ने भारतीय संविधान का विरोध भी नहीं किया है|

धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

तस्माद्धर्मो न हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत|

अर्थ: रक्षा किया हुआ धर्म ही रक्षा करता है, और अरक्षित धर्म मार डालता है, अतएव अरक्षित धर्म कहीं हमे न मार डाले, इसलिए बल पूर्वक धर्म की रक्षा करनी चाहिए| (मनु स्मृति ८:१५).

जो भी पन्थनिरपेक्ष है-आत्मघाती और अपराधी है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से अपने मजहब का पालन करते हुए उसकी हत्या या तो ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) करेगा अथवा मुसलमान (कुरान २:१९१). उपरोक्त संस्कृतियों के मुकाबले में वैदिक सनातन संस्कृति का निम्नलिखित श्लोक है,

 “न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

छान्दोग्योपनिषद, पंचम प्रपाठक, एकादश खंड, पांचवां श्लोक

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, “मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?”

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षक है| देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भाग ३ मौलिक अधिकार|

भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) की शर्त है,

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग).

उपनिवेशवासी बलात्कारियों, लुटेरों और हत्यारों के विरुद्ध शिकायत भी नहीं कर सकते| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/dhara-196-crpc

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

Your Registration Number is : PMOPG/E/2017/0360040 

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jun 29, 2017, 1:57 PM
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