Muj17W21 KortKi Avmanna



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 21,  May 26- Jun 01, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W21 KortKi Avmanna  

||श्री गणेशायेनमः||

Registration Number:PMOPG/E/2017/0360067
Name Of Complainant:Ayodhya Prasad Tripathi
Date of Receipt:30 Jun 2017
Received by:Prime Ministers Office
Forwarded to:Prime Ministers Office
Contact Address:Public Wing
5th Floor, Rail Bhawan
New Delhi110011
Contact Number:011-23386447
Grievance Description:न्यायालय की अवमानना? न्यायमूर्ति श्री जगदीश सिंह खेहर जी मैं मालेगांव बम कांड में साध्वी प्रज्ञा का सह अभियुक्त हूँ. ”साध्वी की ज़मानत ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा सिंह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि धमाकों के लिए इस्तेमाल बाइक से उनका संबन्ध है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यंहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।” मैं नीचे अभिलेख दे रहा हूँ, जो सिद्ध करता है कि इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है और यह उपनिवेश ब्रिटिश कानूनों द्वारा ही शासित है. http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947 और उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है। कोई उपनिवेशवासी उपनिवेश का विरोध क्यों नहीं करता? उल्टे मेरे पास तमाम पत्र आ रहे हैं कि इंडिया, दैट इज भारत, स्वतंत्र है. मैं लोगों को दिग्भ्रमित करता हूँ. मेरा सुझाव है कि सत्ता हस्तान्तरण के मात्र २७ दिन पूर्व १८ जुलाई, १९४७ को ब्रिटिश संसद में पारित निम्नलिखित अधिनियम का पहला पैरा पढ़ें, http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30 “An Act to make provision for the setting up in India of two independent Dominions, to substitute other provisions for certain provisions of the Government of India Act 1935, which apply outside those Dominions, and to provide for other matters consequential on or connected with the setting up of those Dominions…” मुझे प्रसन्नता है कि उपनिवेश की दासता करने में न्यायालय की अवमानना नहीं होती. मैं उपनिवेश विरोधी हूँ. क्या आप मुझे फांसी दे सकते हैं? राज्यपाल और जज इस बात से अत्यधिक आतंकित हैं कि मैंने बाबरी ढांचा गिरवा दिया. हम मस्जिद, अज़ान और खुत्बे का विरोध कर रहे हैं. हम इस्लाम ब्रांड साम्प्रदायिक सद्भाव, “मात्र अल्लाह पूज्य है” को बिगाड़ रहे हैं. हम एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहने के लिए तैयार नहीं हैं. हमने स्वतंत्र आर्यावर्त सरकार बना ली. क्या आप मुझे रासुका में निरुद्ध करेंगे? संकलनकर्ता भीमराव अम्बेडकर ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे अम्बेडकर ने यह दावा कभी नहीं किया कि उन्होंने यह संविधान बनाया। इसके विपरीत अम्बेडकर ने २ सितम्बर, १९५३ को राज्य सभा में कहा कि इस संविधान को आग लगाने की जिस दिन जरूरत पड़ेगी, मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इसे आग लगाउॅंगा। भारतीय संविधान किसी का भला नहीं करता अम्बेडकर का उपरोक्त वक्तव्य राज्य सभा की कार्यवाही का हिस्सा है; जिसे कोई भी पढ़ सकता है एक बात और समझने की है कि भीमराव अम्बेडकर संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमैटी के चेयरमैन थे जब संकलनकर्ता ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे, तो आप भारतीय संविधान पर क्यों विश्वास करते हैं? मस्जिदों से, नियम से प्रतिदिन ५ बार ईमाम/मुअज्जिन अज़ान (ईशनिंदा) द्वारा प्रसारित करता है कि गैर मुसलमान काफ़िर हैं काफ़िर अपने ईष्टदेवों की उपासना नहीं कर सकते लेकिन आप अज़ान व खुत्बे को न्यायालय की अवमानना नहीं मानते. न्यायपालिका विकास कर रही है, पहले जज को जेल भेजने से पूर्व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ का आदर करते हुए त्यागपत्र लिया जाता था, आपने उस परम्परा को तोड़ दिया है. बधाई. मेरे दो मामले इलाहाबाद उच्च न्यायालय में बिना निर्णय के ३० व १८ वर्षों से लम्बित हैं. कारण यह है कि मैं लिस्टिंग अधिकारी को १००० ₹ नहीं दे पा रहा हूँ. क्या घूस लेने में न्यायालय की अवमानना नहीं होती? http://www.aryavrt.com/dhara-196-crpc अतः आप जेल कब जायेंगे? अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी
Current Status:CASE CLOSED
Date of Action:01 Aug 2017
Details:general comments


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