Muj17W19Y RUPYA



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 22 Year 22 ISSUE 19Y, May 05-11, 2017. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj17W19Y RUPYA

नमो जी को नमोनारायण,

आप के कैशलेस योजना ने अपना जहरीला दन्त दिखाना प्रारम्भ कर दिया. अब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से किसी के बैंक में कैश नहीं बचेगा.

एलिजाबेथ के आदेश पर आप ने मुझे कैशलेस कराया है, क्योंकि मैं उपनिवेश विरोधी हूँ. आप भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मुझे फांसी भी दिला सकते हैं. लेकिन एलिजाबेथ की आज्ञा नहीं है.

02/05/2017 at 18:31

Your complaint 3071287045 has been attended to and closed after resolution as: MERCHANT CONFIRMED TRANSACTION AS SUCCESSFUL. RELEVANT DOCUMENTS SENT TO YOUR BANK.

25/04/2017 at 08:52

Thank you for using your SBI Debit Card 622XX0246 for a purchase worth Rs15000 on POS  000000000240754 at PayTM txn# 042515423927.

576767 FAILED SMS

25/04/2017

BLOCK 6220180681900020246

शाखा प्रबंधक उनियाल जी बहुत ही सहयोगी अधिकारी हैं. बैंक ने उनके लक्षमण झूला ऋषिकेश, को विवरण भेजा है, जो सम्भवतः, ऊपर, जो मुझे विवरण मिला है, उसके अतिरिक्त कुछ नहीं है.

इस १५००० की ठगी में नमो के नेतृत्व में एलिजाबेथ के लुटेरों की सेना की ५ ईकाइयां स्वयं बैंक, पुलिस, जिसने, FIR नहीं लिखी, पे टीएम, खरीददार और विक्रेता सम्मलित हैं. यह ठगी लोगों को कैशलेस करने का आधुनिक तरीका है.

ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि बैंक से पैसा निकलते ही सभी संचार बंद हो गये. अपने बैंक से पंजीकृत फोन ९८६८३२४०२५ से आज भी १८००४२५३८०० से बात नहीं कर सकता. मेरा डेबिट कार्ड बंद न हो सका. मेरे ३ शिकायत न०, जो ३ सेकंड में पहुँचने थे, मुझ तक ३ दिन स्वयं बैंक SMS न कर सका.

इस पत्र को मेरा कानूनी नोटीस मानिये. मेरे बैंक खाते ३०४४८४०८५८६ से कोई लेन देन बैंक न करे.

उपनिवेशवासियों से अनुरोध है कि बैंक ठग हैं. किसी प्रकार का लेन देन न करें. नमो ने का मूल्य शून्य कर दिया है. इन को कोई स्वीकार न करे.

इस कैशलेस अभियान में मेरे FDR भी निकल जायेंगे. स्वर्ण नियन्त्रण कानून को नमो ने दुबारा लागू कर दिया है.

मैं तो लुट ही चुका हूँ. अब उपनिवेशवासी अपने बैंक में जमा धन की खैर मनाएं.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

१०/०५/१७

Registration Number is : PMOPG/E/2017/0276285

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 पत्रांक: MUJ16W47Y        दिनांक: १८/११/१६

रुपया

संदर्भ: ५०० व १००० के नोट निरस्त.

१.यह कि भारत सोने की चिड़िया था. यहाँ सोना गिना नहीं, तौला जाता था. ऊपर के चित्र से स्पष्ट है कि सन १९१७ तक एक ₹ =१३$ था. १९४७ में घट कर १$ हुआ. ८ नवम्बर २०१६ तक एक $ का मूल्य ६७ हुआ.

२.यह कि इंडियन उपनिवेशवासी जिसे कहते हैं, वह देने का प्रतिज्ञा पत्र है. धारक का रिजर्वबैंक के पास रहता है, जिसे धारक को देने के लिए गवर्नर प्रतिज्ञा बद्ध है. इतना ही नहीं, केन्द्रीय सरकार द्वारा का प्रतिज्ञापत्र प्रत्याभूत भी है.रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की धारा ३३(२) के अनुसार १५ अक्टूबर, १९९० तक १ का मूल्य ०.११८४८९ ग्राम शुद्ध सोना था, १९९० के बाद से की कोई कीमत नहीं.

३.यह कि नमो एक कुशल शासक हैं. इसलिए एलिजाबेथ के आँख की किरकिरी बने हुए हैं. ५०० और हजार के नोट के वचनपत्र के प्रचलन को बंद करने का निर्णय एलिजाबेथ का है, ताकि नमो के विरुद्ध विद्रोह हो जाये और वे इंदिरा गांधी की भांति कत्ल हो जाएँ.

४. यह कि ३८० सन १९८९ द्वारा मैंने तीसहजारी कोर्ट में गवर्नर से नोट के बदले सोना देने की मांग करते हुए एक वाद प्रस्तुत किया था.

५.यह कि मेरी मांग दिल्ली उच्च न्यायालय तक निरस्त होती रही. अंत में कानून में १९९० के प्रभाव से संशोधन हो गया. सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार नहीं की. एलिजाबेथ अपने ही वचन से मुकर गई. जब कि इस धोखाधड़ी से जज सहित सभी पीड़ित हैं!

६.यह कि सरकार जान माल की रक्षा के लिए है, जान लेने और लूटने के लिए नहीं|

७.यह कि अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर ईसाई व मुसलमान सहित सभी उपनिवेशवासियों से प्रथम संविधान संशोधन द्वारा लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही २०/०६/१९७९ से मिटा दिया गया है| (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८).

८.यह कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) उपनिवेशवासी को सम्पत्ति और उत्पादन का साधन रखने का अधिकार नहीं देता. यानी कि स्वयं काले धन की जड़ है.

९.यह कि राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! उपनिवेशवासी लुटेरी एलिजाबेथ से अपना पूजास्थल, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या उपनिवेशवासी को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?

१०.मैकाले को इंडिया में सन १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी न मिला. १९४७ तक देश के खजाने में १५५ करोड़ रु० था. कोई विदेशी कर्ज न था. आज प्रति व्यक्ति ८२५६०/- रु० कर्जदार (मार्च २०१६ तक; ७० रु० प्रति डालर की दर से) है| और यह कर्ज तब है, जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने नागरिकों की जमीनें और जमींदारी लूटी|सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे|

११.यह कि सन १९४८ के पूर्व बिक्रीकर नहीं था और १९९१ के पूर्व जीएसटी नहीं था.

१२.यह कि वैदिक राज्य की नीति नीचे देता हूँ,

अरक्षितारम् राजानं बलिषड्भागहारिणम्|

तमाहुः सर्वलोकस्य समग्रमलहारकम्|| (मनुस्मृति ८:३०८)

यानी वैदिक सनातन धर्म में राज्य को १६.६७% से अधिक कर लेने का अधिकार नहीं है| आप को अपनी रक्षा करनी है तो हमें सहयोग दें. आर्यावर्त सरकार हत्यारों और लुटेरों की संहिता भारतीय संविधान को निरस्त करेगी|

१३.यह कि तबसे आज तक मेरी सारी सम्पत्तियां एलिजाबेथ ने जजों के माध्यम से लूट लीं.

१४.यह कि विकासहीनता में शासन यथास्थिति बनाए रखना चाहता है और रूढ़िवादिता एवं अनुदार परंपराओं का वह अभिभावक बन गया है। उपनिवेशवासियों को सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने उनसे वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है|

निवेदन

१५. यह कि जिसे जीवित रहना हो और अपनी सम्पत्ति व नारियां बचानी हो, वे ५० दिनों तक यथाशक्ति अपने वचनपत्र बदल लें. बचे वचनपत्र नष्ट न करें. उपनिवेश से मुक्ति हेतु अपने वचनपत्र आर्यावर्त सरकार को सौंप कर पावती प्राप्त करें. जिसे एलिजाबेथ काला धन बता रही है. वह काला धन नहीं, उपनिवेश सरकार का दिया वचनपत्र है. आर्यावर्त सरकार वचन देती है कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में वाद जीतने पर १५% काट कर शेष वचनपत्र दाताओं को वापस की जायेगी.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

http://pgportal.gov.in

PMOPG/E/2016/0477210

PassWord 919152579041

http://www.aryavrt.com/rupya

 

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